एक ही बाग़ के फूल-3
This story is part of a series: keyboard_arrow_left एक ही बाग़ के फूल-2 keyboard_arrow_right एक ही बाग़ के फूल-4 View all stories in series मैंने भी उसको देख के हाथ हिलाया और फ़ोन में सन्देश के माध्यम से पूछा- कैसा लग रहा है? उसने कहा- पता नहीं … अजीब सा लग रहा है. पर मज़ा …