एक ही बाग़ के फूल-4

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मैं और छाया का भाई गन्दी गन्दी बातें करने लगे कभी गीता के बारे में तो कभी छाया के बारे में।

हम दोनों का लंड खड़ा हो गया। मोनू ने कहा- भइया, अपना लंड निकाल के दिखाओ न? मुझे देखना है।
मैंने अपना लंड निकाल लिया और थोड़ा हिलाया।
वो बड़े ध्यान से देखने लगा।

कुछ देर बाद उसने हाथ आगे बढ़ाया और मेरे लंड को पकड़ लिया और दबा के हिला के देखने लगा।
मैंने कहा- देख, यही लंड तेरी मम्मी के और तेरी बहन के चूत में जायेगा और दोनों सिसकारियां ले ले कर मेरे लंड से चुदेंगी।
ऐसी ही गन्दी गन्दी बातें करते करते मेरा लंड और सख्त हो गया।

वो मेरे लंड को हिलाने लगा और ऊपर नीचे करने लगा।
मैंने कहा- चूसने का मन कर रहा है तो चूस ले।
इतना सुनते ही मोनू मेरे लंड के टोपे को मुँह में लेकर चूसने लगा। वो भी अपनी बहन की तरह चिकना था।

10 मिनट चूसने के बाद मैंने कहा- सिर्फ चूसेगा ही या अपनी गांड में लंड भी लेगा?
उसने मेरा लंड अपने मुँह से निकाल लिया और पूछा- दर्द तो नहीं होगा न?
मैंने कहा- नहीं, तेल लगा लूंगा।
वो तुरन्त राज़ी हो गया।

वो पलंग पे हाथ रख के पैर फैला के खड़ा हो गया। मैंने उसकी पैन्ट नीचे सरका दी। उसने नीचे कुछ भी नहीं पहना हुआ था।

मैंने थोड़ा तेल अपने लंड पे लगाया और थोड़ा सा उसकी गांड के छेद पे। अब मैं अपने लंड को उसकी गांड के छेद पे रगड़ने लगा था। फिर मैंने हल्का धक्का दिया और मेरे लंड का सुपारा उसकी गांड में चला गया।
उसे बहुत दर्द हो रहा था पर कुछ कह नहीं रहा था।

फिर लगातार धक्का देते रहने से मेरा पूरा लंड उसकी गांड में चला गया। इस बार वो थोड़ा सा चिल्ला दिया ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ पर उसकी आवाज़ कमरे में ही रह गयी। कुछ देर ऐसे ही रहने पर मैंने उसे चोदना शुरू किया।
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छ देर उसे दर्द हुआ फिर उसे भी मज़ा आने लगा। बीच बीच में मैं उसे उसकी माँ और बहन के बारे में गन्दी गन्दी बातें करता तो उसे और मज़ा आने लगा था। आधे घंटे चोदने के बाद मैंने अपना माल उसकी गांड में ही डाल दिया। कुछ देर बाद वो अपने घर चला गया।

अगले दिन छाया भी वापस आ गयी। घर आने के बाद वो सीधे मेरे घर मिलने आयी। मुझे बैठा हुआ देख धीरे धीरे से भागते हुए मेरे पास आयी। मैं भी उसे देख खड़ा हो गया और वो सीधे आकर उछल के एक छोटे बच्चे की तरह मेरे गोद में चढ़ गयी।
मैंने भी उसे पकड़ लिया और उसकी पीठ और गांड पे हाथ फेरने लगा। कुछ देर बाद मैंने उसे बेड पे बिठाया और बिना कुछ बोले उसे चूमने लगा। गालों से शुरू करते हुए गले पर और फिर उसके होंठों पर।

उसकी आँखें बंद हो गयी और चेहरा एकदम लाल हो गया। वो हल्का हल्का काँपने लगी थी।

फिर कुछ देर बाद मैंने उसे अलग किया और पूछा- कैसी हो तुम?
उसने हल्की सी आवाज़ में कहा- ठ ठ ठीक हूँ।
मैंने उसे उठा के अपनी गोद में बिठा लिया।

कुछ देर बाद उसने ही मेरे से पूछा- भइया, आप मुझे कुछ बताने वाले थे।
मैंने कहा- हाँ … पर ऐसे नहीं उसके लिए तुझे और मुझे दोनों को कपड़े उतार के नंगे होना पड़ेगा।
यह सुन के वो और भी ज्यादा शर्मा के लाल हो गयी।

उसने जीन्स और टॉप पहना हुआ था। जैसे वहां से आयी थी वैसी ही मेरे पास आ गयी थी।

कुछ देर बाद मैंने चुप्पी तोड़ते हुए उसकी चूचियों को पकड़ लिया और पूछा- इनका नाम पता है?
उसने पहले मना किया और फिर ज्यादा पूछने पर उसने कहा- हाँ, चूची कहते हैं.
उसने बहुत ही धीरे आवाज में कहा।

फिर मैंने अपना हाथ उसके पेट से ले जाते हुए उसकी दोनों जाँघों के बीच रख दिया और पूछा- इसका नाम पता है?
उसने कहा- नहीं, इसका नाम तो सच में नहीं पता।
मैंने कहा- ठीक है। चार दिन बाद कुछ बहाना मार के स्कूल की छुट्टी ले लेना। मेरे घर पर भी उस दिन सिर्फ मैं ही रहूँगा।

यह सुन कर वो खुश हो गयी। अब वो खड़ी हो गयी और मैं भी खड़ा हो गया। इतना सब कुछ हो जाने पर लंड कहाँ पीछे रहने वाला था, वो तो पहले ही खड़ा हो गया था।
छाया की नज़र उस पर पड़ी तो पूछने लगी- ये क्या है भइया?
मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पे रख दिया।
उनसे झट से हाथ खींच लिया और शर्मा के भाग गयी।

अगले दिन मैं उसके घर गया तो छाया और मोनू की मम्मी गीता अकेली बेड पर लेटी हुई थी। मुझे देख वो थोड़ा मुस्कुरा दी और उठ के बैठ गयी और अंगड़ाई लेने लगी जिससे उसके छोटे छोटे उभार बाहर आने को व्याकुल होने लगे। निप्पल उसके खड़े थे जिससे मालूम चल रहा था कि उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी और जरूर कुछ सेक्सी सोच रही होगी।

मैं उसके पास गया तो उसने मुझे पकड़ के लिटा दिया और बेहिसाब चूमने और चाटने लगी। चूमते चूमते उसने मेरी टी शर्ट ऊपर कर दी और छाती को चूमने और चाटने लगी। उसने अपना हाथ मेरे निक्कर के ऊपर रख दिया।

आज मैंने अंदर कुछ नहीं पहना था। कभी मेरे निप्पल चूसने लगी और कभी बदन सहलाने लगी। ऐसा लग रहा था आज वो पहले से ही मेरे बारे में सोच कर गर्म हुई पड़ी थी।

देर न करते हुए कुछ देर बाद उसने मेरी निक्कर उतार दी और मेरे लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगी। फिर कुछ देर बाद उसने मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। उसकी आँखें बंद थी।
मैंने सोचा कि क्यों न थोड़ी वीडियो बना लूं उसके बेटे मोनू को दिखाने के लिए। मेरी निक्कर पास में ही पड़ी थी तो मैंने उसमें से अपना मोबाइल निकाला और थोड़ा वीडियो रिकॉर्डिंग करके रोक दिया।

अब मैंने उसकी नाइटी उतार दी। अब वो पूरी तरह से नंगी मेरे सामने थी। मैं उसकी चूचियाँ दबाने लगा और उसके निप्पल चूसने लगा। वो आँखें बंद करके बस मज़े ले रही थी।

कुछ देर बाद मैं अपना हाथ नीचे ले गया और उसकी चूत जो गीली हो गयी थी उसको सहलाने लगा और एक एक करके दो उंगलियां उसमें डाल दी। वो बिना जल के मछली की तरह तड़प रही थी और धीरे धीरे सिसकारियां ले रही थी।

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जब उससे रहा नहीं गया तब उसने बोल ही दिया- अब बस डाल दो अपना लंड मेरी चूत में! रहा नहीं जा रहा … चोद दो मुझे।
मैंने उसकी चूत को कपड़े से साफ़ किया। उसकी चूत एकदम साफ़ थी चमक रही थी. उसने अपनी चूत के बाल आज ही साफ़ किये थे।

मैं अपना लंड पकड़ के उसकी चूत पर रगड़ने लगा था। मैंने एक धक्का दिया तो मेरा आधा लंड उसकी चूत में चला गया और उसने अपनी गांड दबा ली। फिर थोड़ी देर में उतना ही अंदर बाहर कर रहा था। उसकी आँखें अब भी बंद थी तो मैंने रिकॉर्डिंग दुबारा शुरू कर दी और थोड़ी देर में बंद कर दी।

दस मिनट बाद उसने अपनी टांगें भी अच्छे से खोल ली। मैंने इतना देखते ही बचा हुआ लंड एक ही झटके में उसकी चूत में डाल दिया।
वो हल्की से चिल्लाई- उम्म्ह… अहह… हय… याह…

बस फिर क्या … मैंने उसकी दोनों चूचिया पकड़ ली और 15 मिनट लगातार तेज़ धक्कों के साथ चोदता रहा। वो झड़ चुकी थी और उसकी चूत दर्द कर रही थी।

मैं थोड़ी देर वैसे ही रुक गया। फिर मैंने उसे डॉगी स्टाइल में आने को कहा. पर उसने मना कर दिया क्योंकि उसके पैर कांप रहे थे। ऐसा लग रहा था उसकी चूत में जाकर लंड और मोटा हो गया है।
मैंने उसकी दोनों टाँगें कंधों पर रखी और चोदना शुरू कर दिया।

5 मिनट आराम से चोदा उसे मैंने … फिर उसके बाद तेज़ रफ़्तार में उसे चोदना शुरू किया कि शायद आजतक उसके पति या किसी और ने उसे ऐसे नहीं चोदा होगा। हर धक्के पर वो ‘अब बस और नहीं’ कहने लगी और फिर दस मिनट बाद वो दुबारा झड़ गयी.

और उसके कुछ देर बाद ही मैं भी उसकी चूत में झड़ गया और उसके ऊपर ही लेट गया।
कुछ देर बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाला। उसकी चूत से मेरा वीर्य बह रहा था। मैं लेट कर हांफ रहा था पर वो मेरे से ज्यादा हांफ रही थी। कुछ देर बाद वो उठी और अपनी चूत और मेरा लंड साफ़ किया।

फिर वो मेरा लिए दूध और बर्फी लायी। मुझे बर्फी खिलायी और एक गिलास दूध पिलाया और कहा- किसी से कहना मत इस बारे में … और जब मर्ज़ी हो तब आ जाना।
मैंने कहा- ठीक है, किसी से नहीं कहूंगा।

बस फिर मैं अपने घर आ गया।

शाम को मैंने देखा कि मोनू और गीता दोनों सही से नहीं चल पा रहे थे।

अब बस बारी छाया की थी।

शाम को छाया मेरे पास आयी। कुछ देर यहाँ वहाँ की बातें करने के बाद मैंने उससे पूछ ही लिया- जिस तरह मैं तुमको हाथ लगाता हूँ, क्या कभी मोनू ने हाथ लगाया है?
पहले उसने मना किया, फिर कुछ देर चुप रहने के बाद कहा- ठीक है, बताती हूँ. पर किसी से बताना मत।
मैंने कहा- ठीक है किसी से नहीं कहूंगा।

उसने कहा- जब कभी कभी मैं सोई रहती हूँ तब ऐसा लगता है वो मुझे हाथ लगा रहा है।
मैंने पूछा- तो कैसा लगता है?
उसने थोड़ा शर्मा के कहा- अच्छा लगता है. पर थोड़ा अजीब भी लगता है क्योंकि भाई है न इसलिए।
मैंने कहा- उससे कोई नहीं … बस मौज ले. जैसा मैं कहूंगा वैसा करना।
उसने हां में सर हिलाया।

तो दोस्तो, कैसी लग रही है आपको मेरी कहानी? अभी कहानी बाकी है।
उसके बाद कैसे मैंने छाया को अपने लंड के दर्शन करवाए और कैसे उसकी चूत फिर से गीली की।
तो पढ़ते रहिये और इंतज़ार कीजिये अगले भाग का।
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