पड़ोसन लौंडिया की कुंवारी चुत का मजा- 2

देसी कॉलेज गर्ल सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि मेरे मकानमालिक की बेटी से सेटिंग के बाद वो मेरे कमरे में थी। मेरा मूड उसको चोदने का था। क्या वह भी यही चाहती थी?

दोस्तो, मैं लकी सिंह आपको अपनी पड़ोस की जवान लौंडिया की चुदाई की कहानी बता रहा था जिसका पहला भाग
पड़ोस की कुंवारी लौंडिया से सेटिंग हुई
आप पढ़ चुके होंगे।
जिन्होंने नहीं पढ़ा है उनके लिए संक्षिप्त में बता दूं कि मैं भोपाल में जॉब करने गया था और कमरा लेकर रह रहा था।

उस मकान में एक और परिवार पहले से था और उनकी बेटी रीना (काल्पनिक नाम) मुझसे गणित के सवाल हल करवाने आती थी। इसी दौरान हमारी सेटिंग हो गई और एक दिन मैंने उसको रात में अपने रूम पर बुला लिया।

हम दोनों ने एक दूसरे के होंठों को चूमा और मैंने उसका हाथ अपने खड़े लंड पर रखवा दिया। मैंने उसको चूत में लंड लेने की बात कही तो उसने मना कर दिया। फिर वो बोली कि मुझे थोड़ा टाइम दो और ये कहकर वो मेरे सीने पर लेट गई।

अब आगे देसी कॉलेज गर्ल सेक्स स्टोरी:

मेरा लंड तनाव में था और बार बार मेरे शॉर्ट्स में उछाल खा रहा था। बहुत मन कर रहा था कि रीना की चूत की गर्मी अपने लौड़े को चखा दूं लेकिन मैं उसके साथ किसी तरह की जबरदस्ती नहीं करना चाह रहा था।

वो मेरे सीने पर हाथ फिरा रही थी और मैं उसकी पीठ को सहला रहा था।
मेरे हाथ अब धीरे धीरे उसकी चूचियों को सहलाने लगे थे।

मैं जानता था कि वो अभी चुदने के लिए इतनी जल्दी तैयार नहीं होगी इसलिए उसको मैं खुद ही चुदने पर मजबूर करना चाहता था।
रीना कुछ नहीं बोल रही थी।

मैंने उसकी दोनों नंगी चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया।
फिर मैं धीरे धीरे चूचों पर दबाव बढ़ाने लगा, उसके दोनों मम्मों को प्यार से भींच रहा था, दबा रहा था।

वो भी इस हरकत का मजा ले रही थी।
उससे मैंने बोला- रानी … तुम और कुछ नहीं तो मेरे हथियार पर हाथ तो रख ही सकती हो?
उसने कुछ जवाब नहीं दिया लेकिन अगले ही पल उसका हाथ मेरे कड़क लंड को सहला रहा था।

अब हम दोनों में वासना की मस्ती में भरने लगे थे। जब यौन अंगों को एक दूसरे के हाथों का स्पर्श मिलने लगे तो ज्यादा देर तक फिर किसी से रुका नहीं जाता है।

हम दोनों की हालत भी यही हो रही थी। मैं तो पहले से ही उसकी चूत को चोदने के लिए मरा जा रहा था।
मन उसका भी था लेकिन वो खुल नहीं रही थी।

मैंने कहा- रानी … अगर तुम ये सोच रही हो कि मैं तुम्हारा कुछ गलत फायदा उठाऊंगा तो ये सोचना बेकार है, मैं ऐसा इन्सान नहीं हूं। और अगर तुम ये सोच रही हो कि कहीं कुछ गड़बड़ हो जाएगी तो ऐसा भी मत सोचो, मुझ पर विश्वास करो, मैं कुछ गलत नहीं होने दूंगा।

वो मेरे लंड को सहलाती रही मगर उसने कुछ जवाब नहीं दिया।

फिर मैंने अपने शॉर्ट्स को नीचे कर दिया और लंड को बाहर निकाल लिया।
मैंने अपने गर्म लंड पर उसका हाथ रखवा दिया और उसने मेरे सीने में सिर को छुपा लिया मगर लंड पर से हाथ भी नहीं हटाया।

मैंने सोच लिया था कि ये अपने से नहीं बोलेगी, मुझे ही आगे बढ़कर इसकी शर्म को खोलना होगा।

उसकी मस्त गोरी गोरी चूचियों को हल्के हल्के दबाते हुए मैं उसके मटर के दाने जैसे निप्पलों पर जीभ फिराने लगा।

अब उसके बदन में कुछ हलचल होने लगी।

मैंने उसकी निप्पल को मुंह में भर लिया और उसको ऐसे पीने लगा जैसे छोटा बच्चा दूध पीता है।
बारी बारी से मैंने दोनों निप्पलों को चूसना शुरू कर दिया।

उसके बदन से जो परफ्यूम की खुशबू आ रही थी वो मुझे और ज्यादा उसको चूसने-काटने पर मजबूर किए जा रही थी।
इसलिए उसकी हल्की कसमसाहट के साथ उसकी चूचियों को जोर जोर से पीने के लिए मैं बाध्य होता जा रहा था।

अब उसकी सांसें तेज होने लगीं।
चूसते चूसते उसकी चूचियां अब धीरे धीरे लाल होने लगी थीं।
अब रीना के मुंह से आह्ह … आईई … स्स्स … धीरे … आह्ह … धीरे … जैसे कामुक और हल्के दर्द भरे शब्द बाहर आने लगे थे।

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वो धीरे धीरे अब गर्म होती जा रही थी।
मैंने लगभग पांच-सात मिनट तक लगातार उसके बोबों को पीया और फिर मैं उसके पेट पर चूमने लगा।

उसके गोरे, कोमल, मखमली पेट पर जब भी मेरे होंठों को चुम्बन पड़ता तो वो सिहर जाती और उस सिहरने का साथ उसके पेट में नाभि के पास जोर की कंपकंपी हो उठती।

चूमते हुए मैं उसकी जीन्स के हुक पास जा पहुंचा। मैंने उसकी जीन्स को खोलना चाहा तो उसने मेरे हाथ को रोक लिया।
मैंने कहा- क्या हुआ?
वो बोली- नीचे नहीं।

मैं बोला- मगर मैं कुछ करूंगा नहीं … तुम्हें भरोसा नहीं है क्या मुझ पर? बोलो रानी? तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हारे साथ कुछ गलत करूंगा? मैं तो बस देखना चाहता हूं कि जिस लड़की से मैं प्यार करता हूं उसकी (चूत) दिखती कैसी है।

उसने दो पल के लिए मेरी तरसती आंखों में देखा और फिर अपना हाथ अपनी जीन्स की चेन पर से हटा लिया।
मैंने उसकी जीन्स के हुक को खोला और चेन नीचे खींच दी।

फिर उसकी पैंट को हल्का सा खोलकर देखा नीचे से उसने हल्की गुलाबी पैंटी पहनी थी और उसकी चूत पर वो पैंटी बिल्कुल टाइट फिट थी।
मैंने धीरे से उसकी पैंट को घुटनों से नीचे तक कर दिया।

अब उसकी गोरी गोरी जांघों के बीच में वो हल्की गुलाबी पैंटी उसकी कमसिन चूत पर पर्दा डाले हुए थी जिसको देखने के विचार से ही मेरे मुंह में पानी आ रहा था।

इतनी कमसिन लड़की की कमसिन सी चूत देखने और चाटने के ख्याल से ही मेरा मुंह लार से भर आया था।
मैंने टपकती लार के साथ उसकी पैंटी को धीरे से नीचे किया और उसकी हल्के बालों वाली कमसिन सी चूत मेरे सामने बेपर्दा होती चली गयी।

उसकी पैंटी को मैंने नीचे तक कर दिया और रीना अपने चेहरे को अपने हाथों से छिपाने लगी।
अब मैंने उसकी जीन्स को पूरा निकाल दिया और उसकी पैंटी को भी पूरा नीचे तक खींच दिया।

उसने अपने चेहरे को दोनों हाथों से ढका हुआ था।
मेरी जान … रीना … मेरे सामने नंगी हो चुकी थी।

मैं उसकी टांगों के बीच में आकर बैठ गया। फिर उनको मोड़कर अपनी जांघों पर रखा और खोलकर उसकी चूत को ध्यान से देखने लगा।

उसकी चूत की छत पर हल्के हल्के काले झांट थे और चूत बिल्कुल चिपकी हुई थी जैसे कि चीरा लगाया गया हो।
ऐसी प्यारी चूत देखकर मुझसे रुका न गया और मैंने उसकी चूत को सूंघने के लिए अपनी नाक उस पर अड़ा दी।

मैं अपनी नाक को उसकी चूत पर फिराने लगा।
उसके बदन की खुशबू और उसकी चूत की महक ने मुझे पागल कर दिया।
मैं तो उसके नशे में खोने लगे।

कब मेरी जीभ उसकी चूत पर चलने लगी मुझे तो खुद ही पता न लगा।
मैं उसकी चूत को चाटने लगा और रीना आह … आह्ह … अम्म … अह … अम्म … करके हल्की सिसकारियां लेने लगी।

मैंने उसकी टांगों को थोड़ा और खोला और अब उसकी चूत में जीभ से भेदन करने लगा।
काफी टाइट चूत थी और जीभ को अंदर बाहर होने में अच्छी खासी दिक्कत हो रही थी।

फिर भी जहां तक हो सका मैं उसकी नमकीन चूत में अंदर तक जीभ को चलाने की कोशिश करता रहा।
अब तक रीना की चूत से पानी रिसना शुरू हो गया था।

इतना स्वादिष्ट चूत रस था कि अगर उसको दिन रात भी चाटो तो मन न भरे।
मैं तो चाटता ही रहा उसकी चूत को, और उधर उसके बदन में वासना की आग भड़कने लगी।

उसकी चूचियां तनकर एकदम से नुकीली पहाड़ी चोटियों के जैसे खड़ी हो गई थीं।
मैंने दोनों उभारों को अपने दोनों हाथों में भरा और उनका मर्दन करने लगा।

अब नीचे से मेरी जीभ उसकी चूत में चल रही थी और ऊपर से मेरे हाथ उसके मम्मों को दबा रहे थे, कस-कसकर भींच रहे थे।

रीना की हालत अब खराब होने लगी।
मैंने सोचा कि ये सही मौका है गर्म लोहे पर वार करने लगा।

मैंने हाथ चूचियों से हटाकर अपने बचे हुए कपड़े उतार दिये मगर चूत में जीभ देना जारी रखा।

अब मैं उसके ऊपर आ गया और उसके होंठों को पीने लगा।
मेरा लंड उसकी चूत पर बार बार रगड़ मारने लगा।

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मैं भी जानबूझकर इस तरह से उसके बदन पर अपने बदन को रगड़ रहा था जिससे कि मेरा लंड उसकी चूत की मालिश करता रहे।

मैंने देखा कि रीना बहुत गर्म हो चुकी थी।
मैं अब जो भी उसके साथ हरकत कर रहा था वो उसमें भरपूर मेरा साथ दे रही थी।

मैंने कहा- जान … डाल दूं क्या?
उसने कुछ जवाब नहीं दिया।

मैंने फिर पूछा- जान … प्लीज … बताओ ना … डाल दूं क्या अंदर … बहुत मन कर रहा है … मैं रह नहीं पाऊंगा तुम्हारे बिना … तुम्हारे प्यार में पागल हो चुका हूं … प्लीज मेरे प्यार को अपना लो … जान।

उसने मेरी आंखों में देखा और मेरे होंठों को चूमने लगी, फिर नीचे से खुद उसने हाथ ले जाकर मेरे लंड को अपनी चूत पर सेट करवा दिया और मुझे कसकर अपनी बांहों में जकड़ लिया।

मैं उसका इशारा समझ गया था, मैं बोला- रुको एक सेकेण्ड!
मैंने जल्दी से अपनी अलमारी से कॉन्डम निकाला और फटाक से पहन कर दोबारा उसके ऊपर आ लेटा।

अब मैंने उसकी चूत पर लंड को सेट किया और धीरे से धक्का लगाया।
वो उचकी और मुझे हटाने लगी।
मैं बोला- बस दो ही मिनट का दर्द है, एक बार तुम सह ले गई तो फिर मजा ही मजा है।

उसके बाद वो थोड़ी सहज हुई और मैंने फिर से लंड को सेट करके एक जोर का धक्का मारा तो लंड उसकी चूत में घुस गया।
वो छटपटाने लगी लेकिन मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया।

मैं तब तक उसके होंठों को पीता रहा जब तक कि खुद उसने दोबारा से मेरी पीठ को सहलाना न शुरू कर दिया।

अब धीरे धीरे मैंने नजाकत को भांपते हुए उसकी चूत में लंड को आधे से ज्यादा उतार दिया।

लंड डालकर मैं कुछ देर रुका रहा और उसके होंठों और चूचियों को चूमता रहा।

अब मैंने उसके बदन से बदन को चिपकाए हुए ही धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करना शुरू किया।

उसे दर्द तो रहा था लेकिन वो बर्दाश्त करने की कोशिश कर रही थी।
फिर होते होते लंड ने चूत में जगह बना ली।

मेरा लंड भी औसत ही है मगर स्टेमिना बहुत है।
मैं रीना की चुदाई करने लगा।

कुछ ही देर में उसको भी मजा आने लगा और दोनों एक दूसरे से लिपटकर एक दूसरे को चूमने लगे और चुदाई का मजा लेने लगी।

रीना अब खुद ही अपनी चूत को आराम से मेरी ओर धकेलते हुए चुदवा रही थी।
लगभग 20 मिनट तक मैंने उसको चोदा और फिर मैं स्खलित हो गया।

भले ही वीर्य कॉन्डम में निकला लेकिन तृप्ति ऐसी मिली कि जिसका कोई वर्णन नहीं। उसके कोमल बदन को चूमते हुए उसको चोदने के ख्याल ही वीर्य निकलवाने के लिए काफी थे।

कुछ देर हम दोनों लिपटे रहे और फिर मैंने लंड को बाहर लाकर कंडोम उतार कर फेंक दिया।

उसकी चूत अब थोड़ी खुली खुली लग रही थी।

उसने अपनी चूत को ध्यान से देखा और फिर मेरी ओर देखकर शर्माने लगी और मेरे गले से लिपट गई।

हम दोनों फिर नंगे ही एक दूसरे के साथ लेटे रहे। वो मेरे सीने पर सिर रखकर लेटी रही और मैं उसकी कमर को सहलाता रहा।

उसकी शर्म अब खुल गई थी।
मैं भी फूला नहीं समा रहा था कि ऐसी कमसिन लौंडिया को चोदने का मौका मिला है और वो भी इतनी टाइट चूत वाली लड़की की चुदाई करने का मौका!

खैर, लेटे लेटे हम दोनों में फिर से भावनाएं जागीं और एक दूसरे को चूमने लगे।

हम दोनों फिर 10 मिनट तक एक दूसरे के होंठों को चूमते रहे। मेरा मन एक बार और उसकी चूत मारने का था लेकिन उसकी चूत में दर्द हो रहा था और घरवालों का भी डर था इसलिए उसने मना कर दिया।

फिर वो कॉलेज गर्ल सेक्स के बाद अपने कपड़े पहन कर धीरे से मेरे रूम से निकल गई।

उस दिन के बाद से तो मैंने उसको न जाने कितनी बार चोदा, उसको लंड का माल पिलाया, उसकी गांड चोदी और न जाने क्या क्या किया।

तो दोस्तो, आपको देसी कॉलेज गर्ल सेक्स स्टोरी कैसी लगी मुझे जरूर बताना।
मुझे कमेंट्स और ईमेल में अपनी प्रतिक्रियाएं भेजें।
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