मेरी बीबी का हनीमून

नमस्ते दोस्तों मैं राज आज अपनी बीबी ऋतु की दूसरी चुदाई की कहानी पोस्ट करने जा रहा हूँ जो ऋतु की जुबानी है।
नमस्ते दोस्तों आपने मेरी ओर सनी की चुदाई की कहानी पढ़ी है । अब मैं आपको सनी के साथ अपने हनीमून की कहानी सुनाऊँगी । हनीमून इसलिए क्योंकि सनी भी अब मेरे दूसरे पति हैं और हनीमून तो पति के साथ ही होता है।

अब कहानी आगे •••••••••
सनी से चुदवाये हुए मुझे लगभग एक साल हो गया था । हम दोनों रोज फोन पर बात करते । हम एक दूसरे के बिना तड़प रहे थे। सनी कहते थे यार ऋतु फिर कोई प्रोग्राम बनाओ न तुम्हें चोदे साल हो गया । ये सुनकर मेरी चूत रस बहाने लगी । मुझे याद आ गया कि कैसे सनी ने मुझे पत्नी बना के पेला था । मैं खुद चाहने लगी कि सनी अभी आये और मेरी खूब चुदाई करे।
सनी ने कहा चलो मातारानी के दरबार में चलते हैं और उनसे आशीर्वाद लेके हनीमून मनाएंगे। तुम घर पर बोल देना की मैं अपनी सहेलियों के साथ जा रही हूं।मैं तुम्हें रास्ते से ले लूंगा।


मैंने राज को बोल दिया तब राज ने कहा चलो मैं भी चलता हूँ तो मैंने कहा हम सहेलियों के साथ आप क्या करोगे सिर्फ हम चार सहेलियां ही जा रही हैं।बड़ी मुश्किल से मनाया राज को ।
खैर वह दिन भी आ गया और मैं पूरी सुहागिन की तरह सज संवर कर अपने दूसरे पति के साथ जाने के लिए तैयार हुई तो राज ने कहा क्या बात है ऐसे लगता है जैसे हनीमून पर जा रही हो । मैं शर्मा गईं और मन में सोची जा तो मैं हनीमून पर ही रही हूँ ।
मैं सनी के बताए जगह पर पहुंची तो सनी कैब के साथ तैयार खड़े थे।मैं आगे बढ़ी और झुक कर सनी के पांव छुलिये । सनी ने मुझे उठा कर अपने सीने से लगा कर कस लिया और एक प्यारा सा चुम्बन मेरे माथे पर फिर दूसरा चुम्बन मेरे रसीले होंठो पर ।

मैं खुशी के कारण रोने लगी। सनी ने मुझे चुप कराया और शरारत से मेरी चुचियाँ दबा दी । मैं अंदर से खुश हुई पर बाहर से झूठ मुठ का गुस्सा दिखाने लगी । सनी ने हंसते हुए मेरा हाथ पकड़ा और गाड़ी में बिठा लिया।
हम ट्रेन में आ गए तो देखा कि शीट एक ही है। हम उसी पर बैठ गए। हमने खाना एक दूसरे को खिलाते हुए खाया और सो गए । अगले दिन हम माता के दरबार में पहुंचे । मैंने माता से अरदास की वो मेरा सुहाग सदा बनाये रखें ।सब हमें पति पत्नी समझ रहे थे। फिर हम भैरो मन्दिर गए और उसी दिन हम कटरा में आकर एक रूम लिया।

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शाम को हमने खूब खरीददारी की ओर खाना खा कर अपने रूम में आ गए । मैंने अपना लाल सुहाग का जोड़ा पहन रखा था और बेड पर सनी का इंतजार कर रही थी । सारा कमरा महक रहा था । सनी मेरे करीब आकर बैठ गए मैं उठ कर उनके पांव छू लिया सनी ने मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे रसीले होंठो को चूसने लगे हम एक लम्बी किस में डूब गए । हम पागलो की तरह एक दूसरे के होंठ और जीभ को चूस चाट रहे थे । फिर सनी ने मेरे कपड़े निकाल दिया और मुझे बेड पर लिटा कर किस करने लगे और दूसरे हाथ से मेरी कठोर चुचियाँ दबाने लगे मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगी फिर सनी थोड़ा नीचे हुए और उनका मुह मेरी चुचियाँ से भर गया और वो उसे बच्चों की तरह पीने लगे । मेरे अंदर आग भड़क गई और मुह से आह आह निकलने लगी ।

मुझे उस समय ये भी ध्यान नहीं रहा कि मैं राज से धोखा देकर सनी से चुदने जा रही हूं। मेरे स्तनों की चुसाई से ही मैं झड़ने लगी । सनी ने जल्दी से नीचे होकर मेरे सारे प्रेमरस को अपनी जीभ से चाट लिया।
अब मैं अपने हाथों से सनी के सारे कपड़े उतार दिया । उनका लन्ड ठुनकी मार रहा था जैसे मुझे सलामी दे रहा हो । मैंने उसको प्यार से हाथ में पकड़ लिया। उनका पूरा लन्ड पूर्वरस से सना हुआ था। मैंने सनी की आंखों में देखा और उनके लन्ड के रस से अपनी मांग को भर लिया। मैंने सनी को बिस्तर पर लिटा दिया और उनके लन्ड के खट्टे नमकीन रस को मुह में भर कर चाट लिया ।

उनका लन्ड लोहे की तरह सख्त और गरम था।मैं भी आंखे बंद करके मस्ती में उनका लन्ड चूस और चाट रही थी। सनी भी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाए और गुर्राते हुए अपने हलब्बी लन्ड को मेरे गले में पेल दिया और अपना सारा माल मेरे गले में भर दिया । मैं भी उनका प्रेम रस उनका प्रसाद समझ कर पी गई। सनी ने मुझे उठा कर गले लगा लिया और बोले ऋतु तुमने मुझे अपना कर मेरा मान बढ़ा दिया।
हम फिर किसिंग में डूब गए सनी के हाथ मेरी चुचियाँ दबा रहे थे।

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मैं फिर गरम हो गई और सनी से चोदने की बिनती करने लगी और उनके लन्ड को अपनी चूत से रगड़ने लगी।सनी भी पूरी तरह उत्तेजित हो चुके थे उन्होंने अपने लन्ड को मेरी चूत पर सेट कर के जोरदार तरीके से मेरी चूत में पेल दिया । उनका लन्ड सीधा मेरी गर्भ से टकराया।मेरे मुंह से एक आह निकल गई और मैं उनको अपने सीने में भींच लिया। अब सनी मेरी चुचियाँ पीते हुए हल्के हल्के धक्के लगाने लगे।मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।ऐसे लग रहा था जैसे मेरी पहली सुहागरात हो।मैं बहुत गर्म हो चुकी थी मैंने नीचे से धक्के लगाने लगी ।

अब सनी ने धक्के तेज़ कर दिया और फूल स्पीड में चोदने लगे ।मेरा पूरा शरीर आनंद से हिल रहा था मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी।मेरी चूत से फच फच की आवाज आने लगी थी।मैं अब तीसरी बार झड़ने को हुई और जोश में सनी के होठों को चूसने लगी ।सनी भी अपने लन्ड को मेरी चूत में जड़ तक घुसा कर चोद रहे थे।इतने में सनी ने मेरे होंठो को अपने होंठो में दबा दिया और मेरे दोनों कबूतरों को दोनों हाथों से भींच लिया और अपने हलब्बी लन्ड को मेरी चूत में जड़ तक पेल दिया और अपने प्रेम रस से मेरी चूत को लबालब भर दिया।मैंने भी उत्तेजित हो कर अपने नाखूनों को सनी की पीठ में जोर से गड़ा दिया। हम दोनों ही तृप्त हो चुके थे।


अगले दिन सनी ने मेरी गांड भी मारी थी।मैंने भी सनी के मूसल के लिए अपने तीनो छेद खोल कर मज़े लिए।
पूरे एक दिन और दो रात हम दोनों ने खूब चुदाई की ।मेरी चूत बुरी तरह सूज गई थीं और मेरे से चला भी नहीं जा रहा था। घर आकर मैं राज से एक हप्ते दूर रही ये बहाना बना कर कि चढ़ाई में मेरे पैर सूज गये है।

आगे की कहानी अगले पार्ट मे जल्दी ही आएगी. ओर भी जवान भाभी लड़किया ओर आंटी को हॉट बाते करना ही तो आप मैल करे [email protected] आप की सारी डीटेल्स एक दम सीक्रेट रहेंगी उससे आप लोग बेफ़िक्र रहे.

समाप्त

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