लागी लंड की लगन, मैं चुदी सभी के संग-29

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नमिता की गीली पैंटी का स्वाद अमित और रितेश चख चुके थे, मैंने भी उस पर अपनी जीभ लगा दी, थोड़ी चाटने के बाद मैं मुस्कुरा कर बोली- आज की दारू पार्टी तो बहुत मज़ेदार थी।

नमिता भी अब पूर्ण रूप से खुल चुकी थी, वो बोली- मुझे नहीं मालूम था कि मेरी चूत में इतना रस भरा होगा कि मेरी चूत के नीचे गिलास लगाना होगा और फिर उस रस को जाम समझ कर पी जाओगे।
कहकर हँसने लगी।

मैं उसकी चूत को पैन्टी के ऊपर से ही अपने अंगूठे को रगड़ते हुए बोली- वास्तव में तुम्हारी चूत का जवाब नहीं है!
उसकी पैन्टी को उतार कर मैं नमिता के पीछे आई, उसकी चूत की फांकों दोनों हाथों से खोलते हुए अमित और रितेश से बोली- लो देखो नमिता की चूत की लालिमा और इसको पुचकारो!

मेरे कहने के साथ ही दोनों बारी बारी से नमिता के चूत की लालिमा का मजा लेने लगा। रितेश तो एक्सपर्ट था ही… वो नमिता की चूत की क्लिट और कण्ट को भी दांतों से मसलने लगा।
नमिता सिसकार उठी।

फिर रितेश ने बिस्तर पर रखे हुए गिलास को हटाया और बोला कि तुम दोनों करवट करके लेटो और एक दूसरी की चूत चाटो और हम दोनों तुम्हारी गांड के छेद का मजा लेंगे।
रितेश के इतना कहते ही सब के पूरी तरह कपड़े उतर गये।

मैं और नमिता दोनों करवट होकर 69 की पोजिशन में आ गई और एक दूसरी के मुंह के ऊपर अपने पैरों को टिका दिया ताकि चूत चूसने में आसानी हो सके।

मेरी गांड की तरफ रितेश था और अमित अपनी प्यारी बीवी की तरफ था। रितेश का हाथ मेरे कूल्हों को अच्छे से सहला रहा था और बीच बीच में चूतड़ों को चूम लेता और मेरी गांड के अन्दर उसकी उंगली कब जानी है रितेश को अच्छे से पता था।

कुछ देर तो ऐसा ही चलता रहा। नमिता के साथ क्या हो रहा था, मुझे नहीं मालूम लेकिन उसको खूब मजा आ रहा था क्योंकि उसके जिस्म की हरकत बता रही थी कि वो मेरे साथ साथ अमित को भी एन्जॉय कर रही थी।

मेरी गांड काफी गीली हो चुकी थी। रितेश कोशिश कर रहा था कि जिस पोजिशन में मैं हूँ उसी पोजिशन में वो मेरी गांड के अन्दर अपना लंड डाल दे। लेकिन न कर पाने के कारण रितेश एक हाथ से मेरे कूल्हे को पकड़ा और फिर लंड को छेद में रगड़ने लगा।

मैं नमिता की चूत को चाटने में मस्त थी और रितेश लंड से मेरी छेद की घिसाई कर रहा था और जब तक उसने मेरी गांड की घिसाई चालू रखी जब तक कि वो छेद में ही डिसचार्ज न हो गया। फिर अपने रस को उंगली से मेरे गांड के अन्दर भरने लगा।

एक दूसरी की चूत चाटने से हम दोनों ही झड़ चुकी थी और एक दूसरी का रस को पीने का आनन्द ले रही थी।
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इस दौर के बाद एक बार फिर हम लोगों के बीच अदला बदली हुई। मैं अपने जीजू अमित की बांहों में थी और नमिता अपने भाई के बांहों में थी।

रितेश उठा और नमिता को गोदी में उठा कर कमरे से बाहर ले जाने लगा तो अमित ही पूछ बैठा- साले साहब, कहाँ ले जा रहे हो? रितेश बोला- जीजू, आप मेरी वाली के साथ अब अकेले में मजा लो और मैं नमिता को अपने साथ अपने कमरे में ले जाकर मजा लूंगा।
अमित बोला- साले साहब, तुम मेरी बीवी की चूत या गांड को को मेरे सामने भी चोद सकते हो, मैंने कब मना किया है और तुम्हें अपनी बहन के साथ जो भी करना है, हमारे सामने करो। हमें भी देखना है कि तुम नमिता के साथ नया क्या करते हो?

‘ठीक है, अगर तुम लोग नहीं मानते तो मैं यहीं पर मजा करता हूँ।’ भाई ने अपनी नंगी बहन को गोद से उतारते हुए पलंग पर बैठा दिया और उसके दोनों हाथों का टेक पीछे की तरफ दे दिया और नमिता के गालों को दोनों हाथ रखते हुए बोला- मैं जो भी करूँ, तुम केवल उसमें साथ देना।

रितेश ने एक गिलास पानी से भरा हुआ लिया और नमिता के पीने के लिये दिया, नमिता ने बिना कुछ बोले उस गिलास को खाली कर दिया।
रितेश ने फिर से उस गिलास को भर दिया, नमिता ने रितेश को देखा पर बोली कुछ नहीं और गिलास का पानी फिर पी गई।
उसके बाद रितेश ने भी दो गिलास पानी पिया।

पानी पीने के बाद रितेश नमिता के दोनों पैरों के बीच आकर बैठ गया और उसकी तरफ देखते हुए बोला- शनिवार को चार नये पार्टनर और जुड़ेंगे, खूब खुला सेक्स होगा, खूब मस्ती होगी। हो सकता है कि दो दिन तक हमारे जिस्म में एक भी कपड़ा न हो। जिसकी जहाँ मर्जी होगी, खड़ा होकर मूतेगा, जहाँ मर्जी होगी और जिसके साथ किसी को सेक्स करना होगा, बिना कुछ पूछे वो अपने पार्टनर को पकड़ लेगा और सबके सामने चाहे लंड चूत के अन्दर जाये या फिर चूत लंड को अपने अंदर ले ले।

नमिता की जांघ को सहलाते हुए बोला- तुम दिल और दिमाग दोनों से तैयार हो न?
नमिता बोली- भाई, जब मैं तुम्हारे समाने नंगी हूँ और तुम्हारे लंड को अपने अन्दर ले चुकी हूँ तो अब किसी के लंड से कोई परेशानी नहीं।

रितेश का हाथ नमिता की जांघ पर ही था, उसने पूछा- नमिता तुमने किसी मर्द को मूतते हुए देखा है?
‘कई बार देखा है मगर चोर नजरों से!’
‘कभी इच्छा हुई कि कोई तुमको मूतता हुआ देखे?’
‘नहीं, कुछ दिन पहले तक तो नहीं लेकिन इधर जब से भाभी हम सब साथ सब कुछ कर रहे है तो मन में इच्छा होती है कि कोई अजनबी मर्द मुझे भी मूतते हुए देखे और ललचाये।’

रितेश ने नमिता की चूत की फांकों को फैलाया और उसको चाटते हुए बोला- पेशाब लगी है मेरी प्यारी बहना?
नमिता ने हाँ में सर हिलाया।

रितेश ने अपनी लम्बी सी जीभ निकाली और उसकी चूत के पास ले जाकर लगा दी और बोला- अपनी धार को अहिस्ते से छोड़ना, ध्यान रखना कि कोई बूंद मेरी जीभ से बाहर ना जाये।

नमिता ने रितेश के कहे अनुसार ही किया और नमिता की मूत की एक-एक बूंद रितेश की जीभ से होते हुए उसके हलक के नीचे उतर रही थी, रितेश बड़ा ही स्वाद ले लेकर उसे पी रहा था।
नमिता का पूरा पेशाब गटकने के बाद रितेश एक बार फिर नमिता की चूत की फांकों के बीच अपनी जीभ चलाने लगा तकि बचा खुचा रस भी वो गटक सके।

ऐसा करने के बाद जैसे ही रितेश ने उसकी फांकों से अपना मुंह हटाया तो नमिता बोली- कि इसका स्वाद कैसा है?
वो मुस्कुराते हुए बोला- तुम्हारी भाभी की चूत का पानी और तुम्हारी चूत का पानी बहुत ही मस्त है।

मैं और अमित दोनों ही केवल उन दोनों की बातों को और क्रियाओं को देख रहे थे।

फिर रितेश खड़ा हुआ और नमिता को जमीन पर बैठ कर अपना मुंह खोलने के लिये बोला।
नमिता वहीं जमीन पर अपना मुंह खोल कर बैठ गई और आँखें बन्द कर ली और आने वाले उस पल का इन्तजार करने लगी।

रितेश ने अपने लंड को बिल्कुल नमिता के मुंह के करीब ले गया और बहुत ही धीरे से अपनी पहली धार नमिता के मुंह में छोड़ी। नमिता ने उसे बड़ी ही मुश्किल से गटक पाई जैसे वो उसके स्वाद को समझने की कोशिश कर रही हो, फिर अपनी जीभ को अपने होंठों पर फेरा और फिर मुंह को खोल दिया।

अब वो उस स्वाद के लिये तैयार थी जिसके बारे में रितेश ने नमिता को बताया था।

रितेश ने समय लेते हुए नमिता के मुंह में धार गिराना चालू रखा। नजारा तो बेहद कामुक और गंदा था लेकिन अब हम लोगों के लिये ये नजारा चुदाई के खेल का एक पार्ट हो चुका था।

मैं भी अमित के लंड को पकड़ कर चूसने लगी और अपना मुंह खोल दिया।
अमित समझ गया और अपना सारा ध्यान एक जगह केन्द्रित कर लिया, थोड़ा सा समय लेने के बाद अमित के लंड से एक बूंद मेरी जीभ को टच की। मुझे तुरन्त अपनी सुहागरात याद आई जब मैंने और रितेश ने मजबूरी में एक दूसरे की मूत पी थी लेकिन आज मूत पीने का बहुत ही आनन्द ले रहे थे।

अमित शायद अपने दिमाग को कंट्रोल नहीं कर पा रहा था, उसका पेशाब रूक रूक कर आ रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं हॉट काफी पी रही हूँ, बहुत ही कसैला सा स्वाद था लेकिन लग रहा था कि यह स्वाद बना रहे।

जब अमित पेशाब कर चुका तो मैंने उसके सुपारे के खोल को हटाते हुए उसकी लंड के अग्र भाग को चाटने लगी।
उसके बाद अमित घुटने के बल नीचे बैठ गया और अपने मुंह को खोल दिया।

उस दिन मैंने बदला लेने की गरज से अमित को जबरदस्ती अपना मूत पिलाया था पर आज मैंने अपनी चूत को बहुत ही आहिस्ते से उसके मुंह के पास लगा दिया और फिर धार छोड़ने लगी।

जब मेरी भी धार खत्म हुई तो अमित ने अपने उंगलियों का यूज करते हुए मेरी चूत की फांकों को मसलता और फिर उसे चाटता।

तभी मेरी नजर रितेश पर पड़ी, वो अपनी बहन को बिस्तर पर लेटा कर बहन की चूत के अन्दर अपना लंड डाल चुका था और उसके दोनों पैरों को अपने कंधे की ऊँचाई तक कर दिया था।

मैंने भी जल्दी से पलंग पर आकर उसी पोजिशन पर अपने पैरों को उठा लिया और अमित मेरे पैरों के बीच आकर अपने लंड को मेरी चूत में डाल कर हल्के हल्के धक्के लगाने लगा।

ननद और भाभी अगल बगल लेटी हुई थी और दोनों की चूचियाँ चूत ठुकाई से खूब हिल डुल रही थी।
नमिता मुझे देखकर मुस्कुराती और मैं नमिता को देख कर मुस्कुराती।

मैं रितेश की बातों को भी अपने जेहन में उतारती चली गई कि शनिवार से एक नया माहौल होगा और खूब मस्ती होगी।

मेरी चूत में अमित के धक्के कभी धीरे होते तो कभी तेज होते।

कुछ देर की ठुकाई से मेरे अन्दर की गर्मी बाहर निकल चुकी थी और शायद अमित की भी गर्मी शांत होने वाली थी।
तभी अमित ने अपने लंड को मेरी चूत से बाहर निकाला और अपने लंड की मुठ मारने लगा, उसका लावा मेरी जांघों पर गिरने लगा। रितेश ने भी कुछ इस तरह ही नमिता के ऊपर किया।
दोनों के डिस्चार्ज होने के बाद का जो माल हम दोनों के ऊपर गिरा था, उसको वहीं पास पड़ी चादर से साफ किया और फिर वही एक दूसरे की बांहों में सिमट कर सो गये।

कहानी जारी रहेगी।
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