मेरी बेहन मेरी घरेलु रंडी

हेलो, दोस्तो मेरा नाम विजय है और मैं पहली बार अपनी कहानी आप सब के लिए ले कर आया हूँ. मुझे उमीद है आप को मेरी ये पहली कहानी सच मे बहोत पसंद आएगी. क्योकि मेरी ये कहानी एक दम सच्ची है. और मेरी लाइफ से जुड़ी हुई है

कहानी शुरू करने से पहले मैं आप को अपने बारे मे बता दूँ. मेरा नाम विजय है और मैं गोआ मे अपनी फॅमिली के साथ रहता हूँ. मेरे घर मे मेरे मम्मी पापा और मेरा एक छोटा भाई है. पापा के बाद घर का सारा काम और ज़िमेदारी मुझे ही संभालनी थी. इसलिए मैं जम कर स्टडी करता और एक अच्छे जॉब की तलाश मे रहता था.
क्योकि मेरे पापा की हेल्थ कुछ ठीक नही रहती थी. वो किसी भी टाइम मर सकते थे. थॅंक्स गॉड मैं उनके रहते अपनी स्टडी पूरी कर ली और मुझे मुंबई की बहोत बड़ी पिक्चर्स इमेजस कंपनी ने मुझे रख लिया. मेरी सॅलरी भी अच्छी थी इसलिए मैं और मेरे घरवाले दोनो बहोत खुश थे.
शुरू से ही इतनी टेन्षन थी मुझे इस स्टडी के इलावा कुछ और सूझा ही नही. मेरी उम्र उस टाइम 23 साल थी और अब तक मैने चूत की असल मे शकल तक नही देखी थी. मैने बस अभी तक सेक्सी मूवीस देख कर ही अपने लंड का पानी निकाला था. मेरी अभी तक कोई गर्ल फ्रेंड भी नही बनी थी.

और दूसरी साइड मेरे सभी दोस्त के पास 2-2 गर्ल फ्रेंड थी. जिनके साथ वो साले हर रोज बहोत मज़े करते थे. और इधर मैं सेक्स की वेबसाइट से ब्लू मूवीस डाउनलोड करके मूठ मरता था. किन बार तो मुझे बहोत गुस्सा आता था की शायद मेरी शादी मेरे ही हाथ से हो गई है.

ऐसी बात नही है की मैं दिखने मे हॅंडसम नही हूँ. मैं दिखने मे ज़्यादा हॅंडसम तो नही पर ठीक तक हूँ. मेरे लंड का साइज़ 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है. मुझे अपने आप पर इतना विश्वास है की जिस दिन कोई लड़की मेरे नीचे आ गई. ना उसकी तो मैं चूत और गांड मे से खून निकल दूँगा. क्योकि मैं बहोत सालो से सेक्स के लिए तड़प रा था.
आख़िर भगवान ने मेरी सुन ली एक दिन मैं ऑफीस से अपने फ़्लैट् मे आ रा था. मैं बस मे था बस एक स्टॉप पर रुकी वाहा पर 2 लड़किया बस मे चड़ी. मुझे उन मे से एक लड़की जानी पहचानी लग रही थी. मैं बैठा बैठा ये सोच रा था की ना जाने मैने इसे कहा पर देखा है.

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तभी अचानक मुझे याद आया की ये तो मेरी मासी की लड़की संध्या है. अगले स्टॉप पर उसकी फ्रेंड उतार गई और वो अकेली सीट पर बैठे हुई थी. मैं उठ कर उसके पास बैठ गया उसने मुझे देखते ही कहा भाईय्या आप यहा कहा. मैने उसे बताया की मेरी यहाँ पर जॉब लगी है.
उसने मुझे बताया की वो यहा पर स्टडी कर रही है और कॉलेज के हॉस्टिल मे ही रहती है. हम दोनो ने अपने अपने मोबाइल नंबर एक्सचेंज करे. फिर संध्या का स्टॉप आ गया और वो चली गई. मेरे दिल मे एक अजीब सी खुशी थी क्योकि इस अंजान शहर मे अगर कोई जान पहचान वाला मिल जाए तो बात ही क्या है.

और उपर से वो लड़की वो तो समझो भगवान ने आप की सुन ली. संध्या के बारे मे अगर मैं बटाऊ तो उसकी उमर 20 साल थी उस टाइम. और उसका रंग शुरू से ही थोड़ा सा सांवला था पर उसका सेक्सी फिगर तो अच्छे अच्छे का लंड खड़ा कर दे. उसका फिगर 34-28-36 था. उसकी मटकती गांड ने मेरे लंड को अपना दीवाना बना लिया था. वो बेह्शक मुझे अपना भाई स्मझती पर मैं उसे अपनी बहन नही समझता था.
मैं तो उसे अपनी रंडी बनाने की सोच रा था. इसलिए मैने उससे फोन पर बात करना शुरू कर दिया. और धीरे धीरे उसके साथ मिलना भी शुरू कर दिया. संध्या को मेरा साथ पसंद आया अब हम दोनो एक साथ शॉपिंग पर जाते. और साथ ही बाहर डिन्नर लंच और कभी कभी मूवी भी एक साथ ही देखते थे.

हुमेशा ही मैं उसे अपने फ़्लैट् मे आने को कहता और कभी कभी तो उसे अपने साथ भी ले जाने की कोशिश करता था. पर वो मेरी कभी नही मानती थी. पर एक दिन मेरे माइंड मे एक आइडिया आया उस दिन शनिवार था. मैने शाम को 7 ब्जे उसे फोन किया और कहा की मेरी तबीयत खराब है. इसलिए प्लीज़ वो मेरे घर आ कर डिन्नर बना दे.
वो मेरी बात सुन कर एक दम एमोशनल हो गई और कहा की डिन्नर क्यो मैं आज रात आप के पास ही रुक जाती हूँ. कुछ ही देर मे वो आ गई जैसे ही उसने मुझे देखा की मैं तो ठीक ठाक हूँ. वो तोड़ा सा गुसा हो गई. पर जब मैने उसे रूम दिखया तो वाहा पर एक केक था. जिसे पर उसका नाम लिखा था क्योकि आज उसका जन्मदिन था.
वो ये देख कर बहोत खुश हो गई. मुझे गले से लगा कर उसने मुझे किस भी कर लिया. फिर हम दोनो थोडा एंजाय्मेंट किया फिर एक साथ ही हम दोनो सो गये. उसने पिंक कलर का टॉप डाला हुआ था और नीचे एक ब्लू कलर की जीन्स. संध्या एक दम मुझसे चिपक कर सो रही थी.

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इतनी हॉट और सेक्सी लड़की मेरे साथ सो रही थी मुझे नींद कहा आने वाली थी. मैने धीरे धीरे उसके चेहरे पर हाथ फैरना शुरू कर दिया. और उसके गुलाबी होंठो को अपनी उंगलियो से खेलने लग गया. जब उसने मुझे कुछ नही कहा तो मैने उसे किस भी कर दिया. मै एक़ा एक उसके बूब्स पर आ गया. और उसे मसलना शुरू कर दिया और एक हाथ से उसके गांड के गोलो को भी दबाना शुरू कर दिया. संध्या के जिस्म मे गर्मी आनी शुरू हो गई.
तभी वो अचानक खड़ी हुई और अपना टॉप उतार कर फिर लेट गई. उसे सच मे गर्मी लग रही थी. पर वो नींद मे होने का नाटक भी कर रही थी. मैं कुछ नही बोला और उसकी कमर मे हाथ डाल उसकी ब्रा के हुक खोल दिए. अब उसके गोरे गोरे बूब्स मेरे सामने थे. मैं पागल सा हो गया मैं ज़ोर ज़ोर से उसके दोनो बूब्स चूसने लग गया. सच मे यार आज तो मुझे मानो जन्नत ही मिल गई थी.
फिर मैने उसकी जीन्स भी उतार दी और साथ ही अपने भी सारे कपड़े उतार दिए. मैने पहली बार नंगा जिस्म देखा था मैं पूरा पागल हो गया. मैं उसके जिस्म को कुत्तो की तरह चूमने और काटने लग गया. संध्या ने खुद ही अपनी दोनो टाँगे खोल दी. मेरे सामने बिना बालो की चिकनी चूत थी जिसे देखते ही मेरे मुह मे पानी आ गया.

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