जयपुर की मस्त चालू भाभी की चुदाई यात्रा- 3

गरम भाभी बस सेक्स कहानी में पढ़ें कि कैसे चलती बस में एक देसी भाभी और एक गोरे टूरिस्ट की आपस में सेटिंग हुई. वे दोनों बस में ही सेक्स करने लगे.

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कहानी के पिछले भाग
चलती बस में अंग्रेज टूरिस्ट के साथ मजा
में आपने पढ़ा कि मैं अपने मायके से लौटते हुए एक टूरिस्ट बस में थी. वहां एक गोर अंग्रेज के साथ बैठी थी. मेरी अन्तर्वासना उफान पर थी और मैंने कभी किसी गोरे का लंड नहीं खाया था तो मैं उसके लंड का मजा लेना चाहती थी.

अब आगे गरम भाभी बस सेक्स कहानी:

मैंने अपना चेहरा उसके कंधे से हटाकर बिल्कुल उसके गाल के पास अपना गाल कर टच कर दिया.
उसके गाल पर मेरा गाल टच होते ही वो मचल उठा.
डर की सारी सीमाएं तोड़ते हुए उसने झट से मेरे होठों को अपने होठों में ले लिया और जमकर चूसने लगा.

अब मैं भी उसका साथ देने लगी और उसके होंठों को अपने होंठों में खाने लगी और उसका लण्ड धीरे मसलने लगी.

शायद विलियम समझ चुका था मैं जग गई हूँ.
वो अपना मुंह मेरे कान के पास लाकर धीरे से मेरे कान में बोला- मिस राठौड़, प्लीज ओपन योर आइज़!

अब मैंने भी इस नाटक को बंद करना ही उचित समझा. मैं खुलकर विलियम के साथ मजे लेने का मूड बना चुकी थी.
तो मैंने अपनी आंखें खोल दी.

हम दोनों मुस्कुरा उठे और एक दूसरे की आंखों में काफी देर तक देखते रहे.
उसने झट से अपने दोनों हाथों से मेरे चेहरे को पकड़ लिया और अपने होठों को दोबारा से मेरे होठों से मिला दिया.

वह मेरे पूरे चेहरे को चूमने लगा और जगह-जगह किस करने लगा.
मेरा हाथ भी अब उसके लण्ड पर तेज तेज चलने लगा, मैं उसका लण्ड जोर जोर से मसलने लगी.

वो मेरे चेहरे पर, मेरे होठों पर, मेरी गर्दन पर और मेरे कानों के लौ को बार बार चूमने लगा.

उसके चुम्बनों की बौछार से मैं पुनः बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी.

उसने अपने दोनों हाथ मेरे चेहरे पर से हटा कर एक झटके में मेरे कपड़ों के ऊपर से मेरे दोनों बूब्स को जोर से दबा दिया.
अगर मैं अपना हाथ पर मुंह पर नहीं देती तो शायद मेरी इतनी जोरदार चीख निकलती कि पूरी बस के गोरे रात को 3: 00 बजे जग जाते.

उसने झट से दुबारा से मुझे अपने पास खींच कर मेरा एक हिप्स अपनी जांघ पर रखवा लिया अब मैं आधी उसकी गोद में बैठी थी.
अभी भी उसके लण्ड को मसल रही थी.

हम दोनों के होंठ दोबारा से आपस में मिल चुके थे. हम दोनों फिर से किस करने लगे.

फिर उसने धीरे से मुझे बोला- मिस राठौड़, अब बर्दाश्त नहीं होता, मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं.

उसके स्थान पर एक भारतीय मर्द होता तो शायद वो इतना खुला नहीं कह पाता.
मैं तो उसके खुलेपन की दीवानी हो गई. मैं भी शर्म छोड़कर उसी की तरह बोलना चाह रही थी तो मैंने भी बोल दिया- मैं भी बहुत भूखी हूं, तुम्हारे लण्ड को खाना चाहती हूं.

विलियम मुझसे बोला- तुम भूखी शेरनी लग रही हो.
तो मैंने भी अपना सर हिला कर उसकी हां में हां मिलाया और मुस्कुराने लगी.

उसने तुरंत अपने एक हाथ को बढ़ाकर मेरी सलवार के ऊपर से ही मेरे चूत अपने हाथों में भींच दिया.
उसका हाथ जैसे ही मेरी चूत पर आया, मेरे मुंह से एक जोर की आह हह की आवाज निकल गई.

मैंने भी अपनी सलवार की गांठ खोल कर उसको ढीला ला कर दिया और विलियम ने उसको अपने हाथों से खींच कर नीचे उतार दिया.
मैंने भी अपनी गांड सीट से उठाते हुए उसको नीचे जाने दिया.

विलियम ने दोबारा से मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को अपने हाथों में भर लिया.
और हाथ लगाते ही उसको पता चल गया कि मैं एक बार झड़ चुकी हूं क्योंकि पैन्टी पूरी की पूरी भीगी हुई थी मेरी चूत के पानी से!

उसने दुबारा से एक झटके में मेरी पैंटी के अंदर अपनी 4 उंगलियां डालकर उसको झट से नीचे खींच दिया.
मैंने उसकी आंखों में देखा तो उसने इसको नीचे जाने देने का इशारा किया.
तो मैंने भी दोबारा से गांड उठा कर पैंटी को भी नीचे जाने दिया.

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अब की बार जो विलियम ने मेरी नंगी चूत पर अपनी उंगलियां रखी तो मैं उस उछल पड़ी. मेरा मुंह खुला का खुला रह गया.
वह अपनी उंगलियों से मेरी चूत को ऊपर नीचे करके रब करने लगा और अपनी एक उंगली से मेरी चूत के अंदर तक कुरेदने लगा.

मुझे अब अपनी चूत में उसकी उंगलियों से ज्यादा उसके लण्ड की जरूरत थी.
तो मैं उससे चिपकती हुई उसके कान में बोल पड़ी- मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा … मुझे तुम्हारा लण्ड चाहिए अभी!

मेरा इतना कहते ही उसने झट से मुझे पकड़कर अपनी गोद में बिठा लिया. हम दोनों का चेहरा एक दूसरे के सामने था.

मेरी सलवार और मेरी पैंटी बिल्कुल मेरे पैरों मैं नीचे थी. लेकिन पैर चौड़े करके बैठने में दिक्कत दे रही थी तो मैंने मेरी सलवार और पैन्टी को मेरे पैरों से निकालकर सीट पर पटक दिया.
अब मैं नीचे से पूरी नंगी थी और विलियम की गोद में बैठी थी.

वह भी नीचे से पूरा नंगा था और उसका कड़क लण्ड मेरी चूत पर ठोकर मार रहा था.

मुझे विलियम पर बहुत ज्यादा प्यार आ रहा था. मैं उसके गोद में बैठे बैठे ही उसके गले लग गई.
उसने भी अपने दोनों हाथ मेरी पीठ पर ले जाकर मुझे कसकर अपने से गले लगा लिया और हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे.

मैंने उसकी आँखों, गर्दन … चेहरे .. कानों … कंधों … पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी।
उसने भी मुझे चूम चूम कर मेरे अंगों को लाल कर दिया.

काफी देर एक दूसरे को चूमने के बाद उसने मेरी गांड को अपने दोनों हाथों में थामा और मेरी गांड हो थोड़ा ऊपर उठाया.
फिर अपने लण्ड को एक हाथ से पकड़ कर मेरी चूत पर रब करने लगा.

वैसे तो मैं एक खेली खाई हुई औरत हूँ. लेकिन जब भी नया लण्ड मिलता है तो ऐसा लग रहा है कि पहली बार चुद रही हूं.
और वही आग इस समय मेरी चूत में लगी हुई थी.

विलियम लगातार अपने कड़क लण्ड को मेरी रसीली गीली चूत पर रब कर रहा था और अपना लौड़े का टोपा मेरी चूत की फांकों के अंदर डालकर उसको अंदर से भी रब करने लग गया.

उसके ऐसा करने से मेरी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी. उसके लण्ड का टोपा और पूरा लण्ड मेरी चूत के अमृत जल से भीग चुका था.

विलियम जानता था कि एक औरत को चुदाई के लिए किस तरह तड़पाया जाता है. वह उसी तरह मुझे भी तड़पा रहा था.

मैंने उसकी आंखों में आंखें डाल कर इशारे से रिक्वेस्ट की और फिर धीरे से उसके गले लगते हुए उसके कान में ‘प्लीज’ बोलकर उसका लण्ड खाने के लिए मिन्नत करी.

मेरी मिन्नत का उस पर असर हुआ और उसने अपने लण्ड के टोपे का दबाव मेरी चूत में कर दिया.
जैसे उसका टोपा मेरी चूत में गया, मेरा मुंह खुला रह गया.

उसने मेरी कमर पर अपने दोनों हाथ लेकर मेरी गांड को अपने लण्ड पर दबाया जिससे मैं भी उसके लण्ड पर बैठने लगी.
उसका आधा लण्ड मेरी चूत में उतर गया और मेरा मुँह पहले के मुकाबले और ज्यादा और पूरा खुल गया.

अबकी बार मैं अपनी गांड को ऊपर उठाकर उसका पूरा लण्ड अंदर लेने के लिए तैयार बैठी थी.

जैसे ही मैंने अपनी गांड ऊपर उठाई … हम दोनों ने देखा कि बस रुक चुकी है.
हम दोनों डर के मारे एक दूसरे की आंखों में देखने लगे कि अचानक सबसे आगे की सीटों की एक लाइट ऑन हो चुकी थी.

मैं और विलियम बहुत ज्यादा डर गए कि अचानक बस क्यों रुक गई और लाइट ऑन क्यों हुई.
झट से मैं उसकी गोद में से नीचे उतर गई और अपने सलवार और पैन्टी अपने हाथ में लेकर बैठ गई.

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अचानक दो और लाइट ऑन हो गई.
वह लड़का जिसने मुझे सीट दिलवाई थी, अंदर की तरफ आया और बोलने लगा- बस जयपुर पहुंच गई है होटल के आगे!
मैं तो बहुत ज्यादा डर गई थी कि अगर इस हालत में मुझे किसी ने देख लिया तो बहुत ही बड़ी गड़बड़ हो जाएगी.

मैंने झट से अपनी पैन्टी को पहन लिया और दूसरे ही पल सलवार को भी अपनी गांड ऊपर उठा कर पहन लिया.

उधर विलियम ने भी अपने अंडरवियर और पैन्ट को ऊपर खींच कर पहन लिए और मैं भी अपने कपड़ों को व्यवस्थित करने लगी.

हम दोनों की तो मानो ‘काटो तो खून नहीं’ जैसी हालत हो गई.
मैंने अपना मोबाइल निकाल कर देखा तो रात के 3.30 बज रहे थे.

बस जयपुर में उसी होटल के आगे आकर खड़ी हो गई जिस होटल में इन सभी यात्रियों को रुकना था.

मैं सोचने लगी कि बहनचोद बस को भी उसी समय होटल पर पहुंचना था जब विलियम का लण्ड मेरी चूत में घुसा ही था.

मेरा पूरा बदन चूत की आग से जल रहा था; मुझे इस समय बस लण्ड की जरूरत थी.

बस की सभी लाइटें ऑन हो चुकी थी और सभी विदेशी अपना अपना सामान लेकर धीरे-धीरे बस से नीचे उतर रहे थे.

हम दोनों एक दूसरे को देखने लगे.
हमारे लण्ड और चूत में जो आग लगी हुई थी, वह एक दूसरे की आंखों से पता चल रही थी.
मैं ज्यादा तड़प रही थी या विलियम … यह तो पता नहीं लेकिन तड़प दोनों में जबरदस्त एक दूसरे को पाने की थी.

अब लगभग पूरी बस खाली हो चुकी थी.
विलियम का दोस्त डेविड जो ऊपर स्लीपर में सो रहा था, वह नीचे उतर आया और विलियम को बोलने लगा- क्या हुआ? तुम अभी तक नीचे नहीं उतरे?
तो विलियम ने कहा- नहीं, थोड़ी आंख लग गई थी, बस कब आकर रुकी पता ही नहीं चला. और लोग नीचे उतर गए मैं खुद अभी जगा हूं।

डेविड ने आंखें तितरते हुए बड़ी अचरज से विलियम को देखा और बोला- लग तो नहीं रहा कि तुम सोकर उठे हो, ऐसा लग रहा है जैसे पूरी रात एक सेकेंड के लिए भी नहीं सोए हो और फिर ऐसा बोल कर वो मेरे सामने देखने लगा और मुस्कुराने लगा।

डेविड के ऐसा बोलते ही मैं थोड़ी सपकपा गई और अपनी गर्दन दूसरी तरफ करके अपना बैग उठाने लगी.
मैं सोचने लगी कि कहीं उसने हम दोनों को इस हालत में देख तो नहीं लिया? मैं जरूर डर गई लेकिन विलियम को कोई फर्क नहीं पड़ा उसने डेविड को बोला- चलो भी अब!

विलियम के ऐसा बोलते ही डेविड ने अपना बैग अपनी पीठ पर डाला और हम दोनों को देखकर मुस्कुराते हुए बस की गैलरी में से आगे बढ़ने लगा.

डेविड के थोड़े आगे जाते ही मैंने धीरे से विलियम को पूछा- वह तुम्हारा फ्रेंड इस तरह कैसे देख रहा था हम दोनों को? कहीं उसको कुछ पता तो नहीं चल गया?
तो विलियम ने मुझे कहा- उसकी चिंता तुम मत करो. उसको कुछ पता नहीं चला. और मान लो अगर चल भी जाता है तो वह किसी से कुछ नहीं कहने वाला. वह मेरे हर राज जानता है और मैं उसके! लेकिन वो हम दोनों तक है. तुम निश्चिंत हो जाओ, डरने की जरूरत नहीं है. आओ नीचे चलते हैं।

उसके ऐसा बोलने से मेरा डर थोड़ा कम हुआ.
मैंने अपना बैग उठाया और मैं भी सबसे अंत में विलियम के पीछे धीरे धीरे चलने लगी.
हम दोनों बस से नीचे उतर आए।

मैं भी विलियम के साथ बस से नीचे उतर तो गई थी लेकिन अब आगे क्या होगा ये मुझे भी नहीं पता था.
रात को अब मैं अपने घर पर जाऊं या यहीं रुक कर अपनी चूत की आग विलियम के लण्ड से बुझाऊं … मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था.

यह गरम भाभी बस सेक्स कहानी आपको कैसी लग रही है? कमेंट्स में बताएं.

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