दोस्त की कामुक पत्नी से मस्त सम्भोग- 2

माय बेस्ट फ्रेंड वाइफ Xxx स्टोरी में पढ़ें कि मेरी सेटिंग मेरे दोस्त की बीवी से हो चुकी थी. एक दिन वो घर में अकेली थी, उसने मुझे अपने घर बुलाया. वहां क्या हुआ?

मित्रो, मैं कमल किशोर आपको अपने दोस्त की बीवी के साथ सेक्स कहानी सुना रहा था.
पहले भाग
दोस्त की कामुक पत्नी पर दिल आ गया
में अब तक आपने पढ़ा था कि मुकेश की बीवी स्नेहा मेरे साथ चुदाई के लिए एकदम रेडी थी.

अब आगे माय बेस्ट फ्रेंड वाइफ Xxx स्टोरी:

मैं उससे फोन से बात करके घर के अन्दर चला गया.
मेन गेट खुला था जिसे अन्दर घुसते ही मैंने बन्द कर दिया.

पर मेरी अप्सरा नहीं दिखाई दी.
मैं सीधा मुकेश के बेडरूम की तरफ बढ़ गया.

अन्दर गुलाबी चादर पर गुलाब के फूल बिखरे पड़े थे, कमरा एक मनमोहक महक से भरा था.
यह महक मुझे कामुक बना रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे कामदेव स्वयं बाण चला रहे हों.

पर मेरी स्नेहा मुझे दिखी नहीं … फिर अचानक मुझे एक कोने में स्नेहा जींस और पीला टॉप पहने हुई खड़ी दिखी.

यार साड़ी पहनने वाली स्नेहा वेस्टर्न ड्रेस में, वो भी इतनी गजब … मैं चमत्कृत था.

मैं उसकी ओर बढ़ा, तो उसने हाथों से अपना मुँह छुपा लिया.

मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ कर हटाए तो चांद नजर आया.
बड़ी बड़ी आंखों में काजल, हल्का सा मेकअप और लाल लिपिस्टिक उसके गोरे रंग पर ऐसे खिल रही थी जैसे बर्फ की चादर में गुलाब खिला हो.

मैंने घुटनों पर बैठ कर उसके दोनों हाथों को चूमा, तो उसने हाथ ऊपर खींच कर मुझे खड़ा कर लिया और मुझसे जोर से लिपट गयी.

करीब 15 मिनट बाद हम अलग हुए तो मैंने उसके चांद से मुखड़े को हाथ में ले लिया और उसके माथे को हल्का सा चूम लिया.

अब उसने आंख बंद करके खुद को जैसे मुझे सौंप दिया था.
मैंने उसके बड़े सुंदर होंठों को अपने होंठों में समेट लिया और जोरदार स्मूच करने लगा.
वो भी साथ देने लगी.

स्नेहा के मुँह पर लिपिस्टिक फैल गयी थी.
मैं चुम्बन करते करते उसके गले को चूमने लगा तो वो निढाल होकर बेड पर गिर पड़ी.
उसके ऊपर ही मैं भी छा गया.

उसने मुँह पीछे की ओर कर लिया जिससे उसकी लंबी गर्दन और उभर कर सामने आ गई.
मैं उसकी सुराहीदार गर्दन को हल्के से काटते हुए जीभ घुमाता जा रहा था.

उसकी प्यारी मनमोहक आवाज से एक जोर ‘उम्मम आआ आह …’ निकल गया.
इस कामुक आवाज से मैं तो और कामुक होता जा रहा था.

मैं उसकी पूरी गर्दन पर चुम्बन काटते चाटते हुए थोड़ा नीचे वक्ष की ओर आया तो उसने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ लिया.

वो मुझे अपने मुँह के सामने करती हुई बोली- पहले जी भर के देख तो लूं मेरे महबूब को … मैं तो आप पर उसी पल मर मिटी थी जब पहली बार देखा था.
इतना कह कर उसकी आंखें फिर से झुक गईं.

अब फिर से मैं अपनी यौन इच्छा की शांति के काम में लग गया.
मैं उसके कान के नीचे जीभ घुमाने लगा. कान के नीचे का मुलायम हिस्सा मुँह में लेकर चूसने लगा तो उसकी जोर से अहह निकल गयी.

उसके हाथ मेरे सर में बालों में घूम रहे थे.
वो मुझे अपनी ओर बस ऐसे खींचे जा रही थी जैसे अन्दर समा लेना चाहती हो.

मैं थोड़ा दूर हटा और उसकी पसंद की डार्क चॉकलेट निकाल कर एक टुकड़ा तोड़ कर उसके मुँह में डाल दिया.
उसने चॉकलेट का टुकड़ा मुँह में दबाया और मुझे पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया.

अब मेरे होंठ उसके होंठों पर अतिक्रमण करने लग गए थे.
चॉकलेट का टुकड़ा पिघल कर उसके मुँह में घुल गया था. मैं अपनी जीभ से उस चॉकलेट के स्वाद को महसूस कर रहा था.
मेरी जीभ उसके दांतों, मसूड़ों, होंठ के अन्दर के हिस्से और उसकी जीभ को लगातार चाटे जा रही थी.

काफी देर तक ये चलता रहा.

फिर मैं बैठा हुआ और मेरी शर्ट और बनियान निकाल दी.

ये अप्रैल के शुरूआत के दिन थे उस वक्त न गर्मी, ना सर्दी … सुहाना वासंती मौसम था, जब कामुकता अपने चरम पर होती है.

अब अचानक मुझे धक्का देकर उसने लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर आकर बैठ गयी.
खुले रेशमी सीधे बालों में वो बहुत मदहोश कर देने वाली लग रही थी.

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उसके गौर वर्ण के चेहरे पर होंठों के आसपास उसकी लिपिस्टिक बिखर कर उसे और भी ज्यादा कामुक बना रही थी.

अब उसने खुद एक औऱ टुकड़ा चॉकलेट होंठों में लेकर मेरे दोनों हाथ ऊपर सर की तरफ पकड़ लिए औऱ मेरे मुँह पर झुक गयी.
उसकी बालों की खुशबू से मेरे तन की वासना बढ़ती जा रही थी.

अब वो अपनी जीभ से चॉकलेट मेरे होंठ और मुँह पर फैला रही थी. फिर उसे चाटने लगी.

मेरे लिंग का कड़कपन उसके नितम्ब के ठीक नीचे बढ़ रहा था.
वो मेरे हाथ ऐसे ही पकड़ कर मुझे चाटे जा रही थी.

करीब 10 मिनट बाद मैंने अपने हाथ उठा कर उसे ऊपर किया और वो सीधी बैठ गयी.
अब मैंने उसके टॉप को निकाल दिया.
नीचे उसके परफेक्ट गोल 34 के साइज के बूब्स लाल रंग की पैडेड ब्रा में मुझे दिख रहे थे जिन्हें देख कर जैसे मैं पागल हुए जा रहा था.

मैं अपने दोनों हाथों से उसके कन्धे पर से हाथ घुमाते हुए उसके दोनों हाथों को महसूस कर रहा था.

अब बारी थी मेरे सपने को पूरा करने की.

मैं दोनों हाथों से उसके अंडरआर्म और कमर पर उसके पेट पर घुमा कर उस नाजुक मुलायम रेशमी मक्खन सी त्वचा को महसूस कर रहा था.

मैं जैसे ही अपने दोनों हाथ उसके दोनों अंडरआर्म्स में ले गया, वो अपने दोनों हाथ उठा कर बायां अंडरआर्म्स मेरे मुँह के आगे ले आई.
अपने दाएं हाथ को उसने वापिस नीचे कर दिया और मेरे सर के पीछे ले गयी.

अब मेरा मुँह उसके अंडरआर्म्स पर था.
मैं उसको चूमने चाटने लगा.

वो अंगड़ाई लेती हुई वापिस बैठी हो गयी.
मैंने उसकी पीठ पर हाथ ले जाकर उसके ब्रा के हुक खोल दिए और उसके दोनों कबूतर आजाद कर दिए.
एकदम गोल, जिनके बीच में हल्के भूरे रंग के निप्पल अपने घमंड में अकड़े हुए थे. एकदम सफेद दूध पर भूरे निप्पल एकदम कामुक बना देने वाले लग रहे थे.

अब मैंने उसे लेटा दिया और खुद उसके बगल में आ गया.
चॉकलेट लेकर अच्छे से स्नेहा के दोनों स्तनों पर औऱ अंडरआर्म्स में लगा दी.

मैं फिर से उसके ऊपर आकर उसके दोनों हाथों की उंगली में अपनी उंगलियां फंसा कर उसके सर के ऊपर ले गया जिससे उसके दोनों स्तनों का उभार और बढ़ गया था और अंडरआर्म्स भी खुल कर सामने आ गए थे.

मैंने एक स्तन की नोक को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया तो उसकी मादक ‘आहाहाह …’ निकल गयी.

मैं और कामुक हो गया और उसके दोनों स्तनों को बारी बारी से तब तक चाटता रहा जब तक चॉकलेट का स्वाद खत्म नहीं हो गया.

वो बस आंखें बंद करके अपनी पीठ को बार बार उठाती जा रही थी जिससे उसके स्तन और ज्यादा खुलकर बाहर निकल रहे थे.

अब आजाद पंछी की तरह उसके स्तन पंख फैलाने लगे थे.

‘उम्म मम्मआआ आआ नहीं रुको …’ की मदमाती आवाज कमरे में गूंजने लग गयी थी.
उसकी छटपटाहट बढ़ती जा रही थी.

अब बारी थी स्नेहा के दोनों अंडरआर्म्स में लगी चॉकलेट खाने की, जिसमें उसके जिस्म का रस भी मिल चुका था.

जैसे ही मैंने उसकी अंडरआर्म्स में जीभ घुमानी शुरू की.
वो और जोर से मोनिंग करने लगी- उम्म मम्म कमल मेरी जान आआ आआह उमम्म उफ़्फ़!

इस तरह की आवाज कमरे की मदहोशी बढ़ाती जा रही थी.
अब उसने अपना हाथ छुड़ा कर मुझे थोड़ा ऊपर किया और एक तरफ धकेल कर मुझे लिटा दिया.
उसने मेरी छाती, गर्दन, लिप्स पर चुम्बनों की बौछार कर दी.

मेरे हाथ उसके जिस्म को सहलाने लगे थे, उसकी कमर, गर्दन, मुलायम स्तनों पर घूमते जा रहे थे.

कुछ समय ऐसे ही करने के बाद मैं उठ गया और उसे वापिस लेटा कर उसकी जींस के बटन खोलने लगा.

करीब 5 बटन थे, तीन ऊपर, दो ज़िप की जगह.
जैसे ही मैं उसकी पैंट उतारने लगा, उसने दोनों हाथ अपने मुँह पर रख लिए और शर्म से मुँह छुपा लिया.

मैंने जैसा सोचा था वो वैसी ही दिख रही थी. इतनी सफेद और मांसल पैर, लाल रंग की ब्रा के साथ के सैट की पैंटी, जिसमें नेट लगी हुई थी.

उसे यूं ही छोड़ कर मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर उतार दिया.

मैं पूरा नंगा हो गया था और वो सिर्फ लाल रंग की पैंटी में थी.
जाली वाली पैंटी में वो एकदम अप्सरा लग रही थी.

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मैंने उसे कुछ पल निहार कर उसके नाजुक मलाई से पैरों को चूमना शुरू किया.
एकदम मुलायम चिकने, जैसे मैं सिल्क की चॉकलेट खा रहा होऊं.

वो अब भी ‘आआह …’ भरे जा रही थी.

मैं दोनों पैरों से धीरे धीरे ऊपर बढ़ता हुआ उसकी पैंटी तक पहुंचा, जहां उसने योनि में परफ्यूम लगा रखा था जो उसके रस से बह कर पूरे कमरे में खुशबू भरे जा रहा था.

उसकी पैंटी उसके योनिरस से पूरी तरह गीली हो चुकी थी.
उसकी गोरी नाभि में मैंने जीभ घुमाई तो वो तेज ‘आआ … आआह …’ करने लगी.

मैंने दांतों से पकड़ कर उसकी पैंटी नीचे खिसकानी शुरू की.
सामने एकदम चिकनी चूत थी.

कल ही तो उसमें वैक्सिंग करवाई थी. मेरी नाक उस चूत पर फिसल रही थी.

अपने हाथ से मैंने उसकी पैंटी निकाल कर चुत को भी पूरी तरह से नंगी कर दिया.

अब समय आ गया था उसकी योनि के दिव्य दर्शन करने का.

मैं जैसे ही चुत को देखने की कोशिश करने लगा, उसने अपनी चिकनी टांगें एक दूसरी के ऊपर रख लीं जिससे योनि पूरी तरह से छुप गयी.

पर मैंने भी बिना कुछ बोले उसके पेट से नीचे योनि के ऊपर के भाग पर जीभ घुमाना, हल्का काटना और प्यार करना शुरू कर दिया.

मेरा एक हाथ उसके स्तन दबा रहा था, दूसरा उसकी चिकनी टांगों पर घूमे जा रहा था.

उसकी जोर से सिसकारियां निकलने लगी थीं- उम्म आआ आह आउच हम्म!

उसने अपने निचले होंठ को दबा लिया और काटने लगी.
मेरा जो हाथ उसके स्तन पर था, अब वो उसके चेहरे पर चला गया और एक उंगली उसके मुँह में डाल दी जिसे वो चूसने लगी.

इधर नीचे उसने अपनी टांगें पूरी तरह से खोल दीं जिससे उसकी एकदम गुलाबी छोटी सी चूत पूरी दिखने लगी थी.
चुत से योनिरस लगातार बहता जा रहा था.
मैंने चुत रस को चाटना शुरू कर दिया.

मैं नीचे खिसक कर उसकी दोनों टांगों के बीच में उल्टा लेट गया.
उसने टांगें उठा लीं जिससे उसकी खूबसूरत गुलाबी चूत बाहर आ गयी थी.

उसने उचक कर कमर उठा ली और अंगड़ाई लेने लगी.

कुछ ही समय में वो एक बार ऑर्गज्म पर पहुंच कर छूट चुकी थी और एकदम निढाल हो गयी.
पर मैं चूसता रहा.

मेरे दोनों हाथ उसके दोनों स्तनों पर थे.
उसके हाथ मेरे सर पर थे; वो मुझे अपनी चूत पर दबाती जा रही थी.

करीब दस मिनट बाद वो पुनः बहुत गर्म हो गयी और मुझे नीचे लेटा कर काऊगर्ल की पोजिशन में आ गयी.
मतलब मेरे ऊपर बैठ कर उसने मेरा लिंग अपनी चूत में डाल लिया और जोर जोर से हिलने लगी.
साथ ही कामुकता से आवाज भरने लगी- आआह … आआह … ऊई मां … मर गई … आआह!

मेरे दोनों हाथ भी उसके दोनों स्तन पर घूम कर उन्हें दबाते जा रहे थे.

तभी वो झुक कर मेरे होंठ बुरी तरह से काटने लगी और कांपने लगी.
मैं समझ गया कि वो फिर से ऑर्गज्म पर पहुंचने वाली है, मैं नीचे से जोर से झटके लगाने लगा.

वो जोर जोर से ‘आआह … आआह …’ करके एकदम निढाल हो गयी.
मेरा भी बस चरम पर पहुंचने वाला था, मैंने जोर जोर से धक्के लगाने शुरू किए.
तो वो दर्द से चिल्लाने लगी- आआह मर गई आआह!

मैं बहुत अधिक उत्तेजना में हो गया था, तो उसे चोदता चला गया.
फिर एकदम से वीर्य की बारिश हो गई.

उसके बाद वो काफी देर तक मेरे ऊपर लेटी रही.

मैंने उससे पूछा- कैसा लगा?
वो बोली- आज जिंदगी में पहली बार इतना चरमसुख प्राप्त हुआ है … लव यू.
ये कह कर उसने मुझे चूम लिया.

चुदाई के पहले दौर के बाद उस दिन दो दौर और चले.
फिर मैं घर आ गया.

उसके बाद भी हमारी बहुत सी इच्छाएं अधूरी थीं जो बाद में हम दोनों पूरी करने वाले थे.
जैसे 69 का सुख … फुट-फेटिश, पेशाब ऊपर करना, मुँह पर लिंग रगड़ना … ये सब अगली चुदाई की कहानी में लिखूँगा.
कैसे हुआ ये सब और इसका पता कैसे चला, हम दोनों फिर से कैसे मिले, वो सब जानिए अगली सेक्स कहानी में!

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