चढ़ती जवानी में सेक्स की चाह- 8

फक़ फक़ स्टोरी में पढ़ें कि मुझे चूत चुदाई की लत पड़ गयी थी. मैं रोज एक नया लंड लेने को तैयार रहती थी. बारिश वाले एक दिन मैंने चार नए लंड खाए.

नमस्ते दोस्तो. मैं पूनम पांडेय एक बार पुन: आप सभी का अपनी चुदाई कहानी में स्वागत करती हूँ.
स्कूल टीचर को चूत देकर खुश किया
अब तक आपने पढ़ा था कि उस दिन सुबह से ही बारिश हो रही थी और मेरा भी मौसम बना हुआ था.
आज मेरी चूत में भारी खुजली मची थी.

मुझे अपनी बारहवीं की परीक्षा का फॉर्म भरने जाना था.
मैंने तय कर लिया था कि आज फॉर्म भरने जाने के साथ साथ अपने हर छेद को भी भरवा कर रहूँगी.

अब आगे फक़ फक़ स्टोरी:

मैं जल्दी से नहाने चली गयी और आज मैंने नहा कर मिनी स्कर्ट बिना पैंटी के पहन ली.
ऊपर एक सफेद टी-शर्ट पहनी जो कि बिना बांह की थी और इतनी ज्यादा चुस्त थी कि क्या बताऊं.

उसके नीचे मैंने हल्के येल्लो रंग की एक सेक्सी ब्रा पहनी, जिसका फायदा ये था कि अभी तो मेरी टी-शर्ट के अन्दर कुछ नहीं दिख रहा था लेकिन जैसे ही मुझपर पानी पड़ेगा, ये एकदम पारदर्शी हो जाएगी और ब्रा साफ दिखेगी.

ये शार्ट टीशर्ट थी, जिससे मेरा पूरा पेट खुला था और मेरे स्तन के बीच की काफी गहरी घाटी भी साफ नजर आ रही थी.

मैंने जूते पहने और अपने बालों का जूड़ा बना लिया.
फिर मैंने वाटर प्रूफ मेकअप किया जो बारिश में बहे न.
होंठों पर एकदम सुर्ख लाल रंग की लाली और काजल लगा लिया.

अब मैं नीचे आयी तो मम्मी बोलीं- क्या हुआ?
मैंने उनसे झूठ कह दिया- सर बोल रहे हैं कि फॉर्म भरना आज ही ज़रूरी है.

मम्मी ने मुझे पैसे दिए और बोलीं- इतनी दूर जाना है, मौसम की वजह से तुमको यदि रात हो जाए और रात में सवारी न मिले तो रात में कहीं रुक जाना.

अब तो मुझे दिन रात चुदने का मम्मी ने पास दे दिया था.

कुछ देर के बाद बारिश कुछ हल्की हुई लेकिन अभी भी इतनी थी कि बारिश में जाने पर दो मिनट में भीग जाती.

अब मैं घर से 12 बजे के करीब निकली और बाहर आते आते मैं पूरी भीग गयी.
मेरी टी-शर्ट ने तुरंत मेरा साथ छोड़ दिया और पानी पड़ते ही मैं ऊपर से नंगी दिखने लगी.
मेरी छोटी सी ब्रा के कारण मम्मों का अधिकांश हिस्सा खुला हो गया और मेरी चूचियां एकदम साफ नजर आने लगीं.

पहले मैं एक ऑटो से कुछ दूर आयी जहां से मुझे दूसरी ऑटो पकड़नी थी.
मैं एक सवारी गाड़ी में जा बैठी, जो पूरी खाली थी.

उधर सामने एक आदमी खड़ा था, वो छाता लिए हुए था.
उसने जैसे ही मुझको बैठते देखा, वो भी आकर मेरे बाजू में बैठ गया.

ये आदमी कोई 35-38 साल के आस पास का था और ठीक-ठाक दिख रहा था.

इसके बाद धीरे धीरे पूरी ऑटो भरने लगी.
मैं बीच वाली सीट में बैठी रही और मेरी बगल में वो छाता वाला आदमी बैठा था.

उसके बाद 2 मोटे मोटे आदमी उसके बगल आ बैठे, जिससे जगह बिल्कुल नहीं बची.

वो सीट तो 4 के बैठने के लिए सही थी लेकिन वो दो आदमी कुछ ज़्यादा हैवी थे जिससे जगह कुछ बची ही नहीं.
मेरे बगल वाला वो आदमी एकदम से मुझमें घुसा हुआ था.

कुछ देर बाद ऑटो स्टार्ट हुई तो ड्राइवर ने मेरे बगल का परदा डाल दिया क्योंकि पानी अन्दर आ रहा था.
गाड़ी वहां से निकली, जिसके बाद उस आदमी ने मेरे कंधे से ले जाकर सीट के पीछे अपना हाथ रख लिया. इससे मुझे समझ में आ गया कि ये इस गाड़ी में सिर्फ मुझसे मज़ा लेने के लिए बैठा है.

कुछ देर के बाद उसने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया. ऑटो में झटके लग रहे थे तो वो हर झटके में अपना हाथ थोड़ा नीचे सरकाता जा रहा था.
अंत में उसका हाथ मेरी चूची पर आ पड़ा, जिसको वो बार बार हल्का सा छू ले रहा था.

मैं बस मजा ले रही थी.
मेरे चुप रहने से उसकी हिम्मत बढ़ गई थी.

फिर उसने अपना दूसरा हाथ मेरी स्कर्ट पर रख दिया और मेरी नंगी जांघ पर ले जाने लगा.

अभी वो अपने दोनों हाथों से मुझसे मज़ा लेने लगा था. मैं भी उसके स्पर्श का आनन्द लेने लगी थी.

फिर धीरे धीरे उस आदमी का दबाव मेरे शरीर पर बढ़ता जा रहा था और वो अब मेरी राइट वाली चूची को ज़ोर से दबाने लगा था.
जिससे मुझे भी एकाएक उत्तेजना होने लगी.

आगे बढ़ते हुए उसने अपना दूसरा हाथ मेरी स्कर्ट में डाल दिया जिससे मेरी चूत की गर्माहट पाकर मजा आ गया.

उसने जैसे ही मेरी चूत पर हाथ लगाया, मैंने खुद अपने हाथ को उसके हाथ पर रख दिया जो मेरी चूची पर था.

मैंने उसके हाथ को मसल दिया.
वो समझ गया कि मैं तैयार हूँ.
वो मेरी चूची से हाथ हटा कर अपना हाथ सीधा मेरी चूत में ले आया. पहले उसने चूत को ऊपर से मसला, फिर एक उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.

मैं एकदम पागल होने लगी.

लेकिन उसने ऐसा करना जारी रखा जिससे मैं कुछ देर में झड़ गयी और मेरा सारा पानी उसके हाथ में लग गया.

उसने हाथ बाहर निकाल कर अपना हाथ मुझे दिखाते हुए चाटा.

अब वो हंस दिया और फिर से एक बार मेरे कंधे से हाथ लेकर सीधे मेरी टी-शर्ट के अन्दर कर दिया.
वो मेरे निप्पल्स मसलने लगा.

मैंने भी उसका खड़ा लंड पकड़ लिया.
उसका लंड 7 इंच के करीब था.

मैं उसके लंड को उसकी पैंट के ऊपर से ही मसलने लगी.

इसी तरह समय कब बीत गया, मालूम नहीं चला.
मुझे जहां आना था, मैं वहां पहुंच गयी.

मेरे उतरते ही वो आदमी भी मेरे साथ उतर गया.
उसने अपना और मेरा किराया दे दिया और अपनी छतरी खोल ली.
मैं भी उसके साथ हो ली.

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अब वो मुझे रोड से किनारे अन्दर की तरफ ले जाने लगा.

आज बारिश की वजह से यहां काफी सन्नाटा भी था जिससे हमको किसी ने भी नहीं देखा.

हम दोनों गांव के थोड़ा अन्दर गए तो उधर एकदम सुनसान जंगल के जैसी जगह थी.
उधर एक छपरा बना हुआ था.

वो आदमी मुझे लेकर उस छपरे में घुस गया और तभी बारिश फिर से काफी तेज होने लगी.
छपरा ऊपर से एकदम टूटा हुआ था जिससे सारा पानी अन्दर आ रहा था.

लेकिन उस छपरे में एक अच्छी बात ये थी कि वो चारों तरफ से बंद था. जिससे कोई हमें नहीं देख सकता था.

पानी जरूर आ रहा था, जिसकी मुझे कोई परवाह नहीं थी. क्योंकि भीगी तो मैं पहले से ही थी.

वो आदमी मेरे पीछे से आ गया और मेरे मम्मों को पकड़ कर मसलने लगा और मेरी गर्दन को भी चूमने लगा.

मैंने भी हाथ पीछे करके उसका लौड़ा बाहर निकाल लिया और उसको मसलने लगी.

उसने मुझे अपनी तरफ किया और एक ही बार में मेरी टी-शर्ट और ब्रा उतार कर मेरे दोनों मम्मों पर टूट पड़ा.
वो मेरे दोनों मम्मों को खूब चूसने और मसलने लगा.
मैं भी मस्त होकर उससे अपने दूध चुसाने लगी.

मम्मों से मन भर लेने के बाद उसने मेरे पूरे बदन को चूमना चाटना चालू कर दिया.
फिर वो नीचे होकर मेरी गर्म चूत पर मुँह रख कर मजा लेने लगा.
मेरी चूत चूस कर उसने मुझे एक और बार झड़ा दिया.

मैंने भी कुछ देर उसका लंड चूस कर उसे चुदाई के लिए तैयार कर दिया.

चौपाया बन कर मैंने उसका लंड अपनी चूत में ले लिया और वो आदमी मुझे पूरी रफ्तार में चोदने लगा.

मैं भी उस तेज़ बारिश में एक अनजान आदमी से आधी नंगी होकर कामुक सिसकारियां फक़ फक़ … बोलती हुई अपनी चूत चुदवा रही थी.
कुछ देर मेरी चूत चोदने के बाद उसने मुझे फिर से अपना लंड चुसाया.

उसके बाद मैंने उसका लौड़ा अपनी गांड में ले लिया और बड़े प्यार से गांड मरवाई.
हम दोनों को अब तक करीब एक घंटा हो गया था.

उसने मेरी गांड और चूत दोनों की चुदाई की.

अब हम दोनों अपने गीले कपड़े ही पहन कर सड़क तक आ गए.
उसके बाद वो दूसरी ऑटो करके वापस चला गया.

जबकि मैं वहां से अपने काम के लिए स्कूल में चली गयी.

अभी 4:30 हो रहे थे और सड़क पर जैसे लग रहा था कि रात के 2 बज रहे हैं, इतना सन्नाटा और अंधेरा हो रहा था.

मैं सर के यहां गयी तो वो एक छोटे बच्चों का स्कूल था.
उसी स्कूल में उनका ऑफिस और कमरा था.

उस समय मेरी हालत एकदम किसी सस्ती रांड की तरह हो रही थी क्योंकि मैं पूरी तरह से भीगी थी और उस आदमी की चुदाई के बाद मेरा मेकअप भी फ़ैल गया था.

मेरी शक्ल देख कर साफ़ लग रहा था कि मैं बुरी तरह से चुद कर आयी हूँ.
मैं सर के यहां आयी तो देखा दरवाज़ा बंद था.

मैंने बगल में लगी खिड़की से अन्दर झांका तो अन्दर भी एकदम रंगारंग कार्यक्रम चल रहा था.

इन सर की उम्र 50 के आस पास की थी.
मेरे सर के साथ में एक और आदमी था और वो भी उनके ही उम्र का था.

कमरे के अन्दर दारू चल रही रही और वो दोनों टीवी पर एक ब्लू फिल्म देखते हुए मज़े ले रहे थे.

यह देख कर मैंने सोचा कि यहां भी मस्ती करने का पूरा इंतज़ाम है बस इन दोनों को थोड़ा सैट करने की देर है, फिर तो ये दोनों खुद ही मुझ पर टूट पड़ेंगे.

मैंने स्कर्ट थोड़ी और ऊपर की और खुद को थोड़ा ठीक करके दरवाज़ा खटखटाया.
उन लोगों ने पहले तो टीवी बंद किया और अपने कपड़े ठीक करने लगे.
क्योंकि वो दोनों ही बस अपनी अपनी अंडरवियर में थे.
उन दोनों ने अपनी अपनी कमर पर गमछा बांध लिया.

एक आदमी दरवाज़ा खोलने आया.
उसने दरवाजा खोला और जैसे ही मुझे देखा वो भौचक्का रह गया.
उसने बड़ी वासना भरी नजरों से मुझे ऊपर से नीचे तक देखा.

मैंने देखा कि मेरी जैसी माल लौंडिया देख कर उसकी आंखों में एक चमक सी आ गयी थी.

तभी मेरे सर भी उठ कर आ गए और मुझे देख कर बोले- अरे पूनम तुम … इतनी बारिश में कैसे आ गयी?
मैं बोली- सर ऑटो से.

उन्होंने मुझे अन्दर बुलाया और दूसरे आदमी ने दरवाज़ा अन्दर से बंद कर लिया.

सर ने मुझे तौलिया लाकर दिया और कहा- ये लो तौलिया और खुद को पौंछ लो, वरना ठंड लग जाएगी.
मैं बोली- हां सर, मुझे काफी सर्दी लग रही है.

सर ने उस आदमी की तरफ देखा तो वो आदमी बोला- एक बड़ा सा इसके लिए बना दूँ?
सर ने मेरी तरफ देखा और बोले- सर्दी दूर करने का तो फिलहाल मेरे पास एक ही उपाय है.

मैंने कहा- आपके पास जो भी दवा है, जल्दी से दे दीजिए.
अब उस आदमी ने एक पैग बनाया और मेरी बढ़ा दिया.

सर ने मुझसे पीने का इशारा करते हुए कहा- लो इसको दवा की तरह पी लो, इससे तुम्हें ठंड नहीं लगेगी.

मैंने गटगट करके पूरा गिलास खाली कर दिया.

तभी वो दूसरा आदमी एक और हार्ड पैग बना कर मेरी तरफ लेकर आ गया.

सर ने मुझे ज़बरदस्ती दूसरा पैग भी पकड़ा दिया.

हालांकि इसमें मेरी भी मर्ज़ी थी लेकिन उन दोनों को दिखाने के लिए मैंने थोड़ा नाटक किया.

अब मेरी शर्म खत्म हो गई थी. मैंने उनके साथ बैठ कर दूसरे पैग को धीरे धीरे पीना शुरू कर दिया.

उधर सर और उनके साथी ने भी अपने गिलास उठा लिए थे.
वो पैग पीने के साथ साथ चखना भी खा रहे थे.

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ये देख कर मैंने भी उनके साथ चखना खाना शुरू कर दिया.
कुछ देर के बाद मुझे नशा चढ़ गया.

उस आदमी ने एक सिगरेट सुलगा ली.

सर ने उस आदमी से सिगरेट लेकर धुंआ उड़ाया और मेरी तरफ देखने लगे.
मैंने भी बेशर्मों की तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया और सर के हाथ से सिगरेट ले ली.

हम तीनों शराब और सिगरेट का मजा लेने लगे.

कुछ देर बाद सर ने मुझसे मेरा कागज़ लिया और बोले- फॉर्म भर जाएगा.
मैंने सर से पास होने के लिए नकल की जुगाड़ के लिए पूछा, तो सर ने उस दूसरे आदमी की तरफ इशारा करते हुए कहा- अरे तुम चिंता मत करो, यही सर सब करवा देंगे.

अब मैं उस आदमी को भी सैट करने लगी.
मैंने उससे कहा- सर, मुझे एक पैग और बना दीजिए.

उसने झट से पैग बना कर मेरे हाथ में दिया और मेरे हाथ को मसल दिया.
मैं हंस दी, वो खुश हो गया कि लौंडिया नीचे आने को राजी दिख रही है.

इस तीसरे पैग के बाद मुझे खूब अच्छी चढ़ गई थी, लेकिन अभी भी मैं होश में थी.
मुझे तो चुदवाने की चुल्ल थी तो मैंने नाटक किया.

मैं ये कह कर खड़ी हुई- अच्छा सर अब मैं चलती हूँ.
मगर मैं ड्रामा करती हुई लड़खड़ाने लगी.

तभी उस दूसरे आदमी ने मुझे सहारा देते हुए पकड़ा और मेरी एक चूची को अपने हाथ में ले लिया.

मैं और ज्यादा नाटक करते हुए उसी के ऊपर गिर पड़ी, जिससे उसने मेरी गांड से मुझे पकड़ लिया.
मुझे पकड़ने के चक्कर में मेरी स्कर्ट पीछे से पूरी उठ गई और मेरी नंगी गांड सर ने देख ली.

वो भी अब उठ कर मेरे पीछे से आकर मुझसे सहारा देने के बहाने मेरी गांड से एकदम सट गए.

कुछ ही देर में देखते देखते वो दोनों मेरे शरीर से खेलने लगे और मैं नशे में झूठ मूठ का नाटक करती हुई बड़बड़ाने लगी कि मुझे जाने दो.
इस पर मेरे सर ने मेरे बालों से मुझे पकड़ा और मुझे ले जाकर अपने तख्त पर लिटा दिया.

अब वो दूसरे आदमी से बोले- एक पैग और बना … क्योंकि इस शहरी रांड को चोदने में ज़्यादा नशा चाहिए.

इस पर वो आदमी झट से पैग बना कर लाया और बोला- आज तो इस रांड का मैं भी भोग लगाऊंगा.
अब वो दोनों अपने पैग पीते हुए मुझे चोदने के तरीके पर विचार कर रहे थे.

मुझे सब समझ में आ रहा था.
इन दोनों की बातें सुन कर मुझे और ज़्यादा चुदास चढ़ने लगी थी.

कुछ ही देर में वो दोनों मुझ पर लगभग टूट पड़े.
वो दोनों किसी जंगली भेड़ियों की तरह मुझे हर तरफ से चूम और चाट रहे थे.

जल्दी ही उन दोनों ने मुझे नंगी कर दिया था और मेरे एक एक स्तन को पकड़ कर बड़ी तेज़ी से चूसने और मसलने लगे.

मम्मों के बाद दोनों ने बारी बारी से मेरी गांड और चूत को चाटा.

फिर वो दोनों नंगे होकर मुझे अपना लंड चुसाने लगे.
मैंने बड़े तरीके से उन दोनों का लौड़ा चूसा.

फिर उन दोनों में मुझे अपने बीच में सैट करके मेरी सैंडविच चुदाई शुरू कर दी.
मैं मस्ती से एक साथ अपनी चूत और गांड में लंड का मजा लेने लगी थी.

सर मेरी गांड चोद रहे थे, उन्होंने अपना वीर्य मेरी गांड में ही छोड़ दिया और दूसरे वाले ने मेरी बुर के मुहाने पर रस टपका दिया.

चुदाई के बाद वो दोनों हांफते हुए मेरे अगल बगल में लेट गए और मेरे चुचों को चूसने लगे.
कुछ देर के बाद मैंने बारी बारी से उनका लंड खड़ा करके दोनों से दूसरे राउंड की चुदाई भी करवाई.

अब हम तीनों थक कर लेट गए.

कुछ देर बाद सर ने सबके लिए एक एक पैग और बनाया.

अपना पैग पीने के बाद मैं खड़ी हुई और खुद को साफ करके कपड़े पहन कर वहां से निकलने लगी.

उस समय रात के करीब 8 बजे थे.

मैं सड़क पर आई तो जाने के लिए कोई साधन देखने लगी.
इतनी रात में वहां एकदम सन्नाटा पसरा था.

कुछ देर बाद एक बाइक वाला निकला.
मैंने उसे रोका और उससे लिफ्ट मांगी.

उसने आगे जाकर सन्नाटे में मुझे नंगी करके चोदा और मुझे मेरे घर छोड़ गया.

दोस्तो, इसी तरह मेरी हर रोज़ तबीयत से चुदाई होने लगी.

समीर भैया की अब शादी हो गयी थी लेकिन अभी भी वो मेरी चुदाई नियमित तौर पर करते हैं.
जब उनकी बीवी मायके चली जाती है तो वो उन दिनों में मुझे अपने कमरे में ही बुला कर चोदते हैं.

मेरे भाई का दोस्त रोहण भी मुझे बाहर होटल या कहीं भी ले जाकर चोद देता है.
या जब मुझे घर पर मौका मिलता है तो मैं उसे बुला लेती हूँ और वो मेरी फुद्दी लेने मेरे घर चला आता है.

पापा के दोस्त राजेश अंकल भी हफ्ते में एक दिन आकर मुझे खुश करके जाते हैं.
मुझे अपने भाई के टीचर के पास भी जाना पसंद आने लगा है.

मैं अपना पेपर देने जब जब जाती थी, तो मेरे वो दोनों सर मुझे अपने साथ कहीं बाहर ले जाते थे.

कभी कभी तो वो दोनों गाड़ी में ही मेरी लेते हुए मुझे होटल ले जाते.

मेरी चूत की वासना कभी खत्म ही नहीं होती, चूत बस फक़ फक़ बोलती है.

इतने लंड होने के बावजूद भी मैं कांटा डालने के मूड में रहती हूँ कि कहीं कोई नया मर्द मिल जाए जो मेरी हचक कर चूत चोद दे.

इसी के साथ मैं अब आप से विदा लेती हूं. मेरी फक़ फक़ स्टोरी पढ़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद. मुझे मेल करें.
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