बीवी की बड़े लंड की चाहत-2

बीवी की अदला बदली की मेरी सेक्स कहानी के पहले भाग
बीवी की बड़े लंड की चाहत-1
में अब तब आपने पढ़ा कि कैसे मेरी बीवी होटल के कमरे में मेरे दोस्त के लंबे लन्ड से चुदी और अपनी मन की इच्छा पूर्ति की। यह तब सम्भव हुआ था जब मेरी पत्नी को प्राइवेसी देने के लिए मैं निक्कू (रॉकी की वाईफ) को लेकर घूमने निकल गया था. लेकिन हम दोनों बारिश में फंस भी गए।

अब आगे:

जब मौसम ज्यादा खराब हुआ तो निक्कू थोड़ा घबराने लगी और उसे रॉकी की फिक्र होने लगी तो मैंने कांची को कॉल किया और फ़ोन स्पीकर पर लगाकर अपनी और कांची की बात निक्कू को सुनाई। निक्कू रॉकी की तरफ से निश्चित हो गयी। पर खुद के लिए थोड़ा चिंतित हुई क्योकि बारिश की वजह से वापसी के रास्ते बंद हो गए थे। अब हमारे पास वही किसी होटल में रुकने के अलावा कोई चारा ही नहीं बचा था।

हम नजदीक ही कुछ होटलों में गए पर करीब करीब सब फुल थे, बड़ी मुश्किल से एक होटल में रूम खाली मिले पर वो ओवर रेट मांग रहा था। अब समस्या या मेरी खुशनसीबी थी कि मेरे पास एक रूम के रेंट के जितने पैसे ही बचे गए। हम अपना ए टी एम या और कुछ भी साथ नहीं ले गए थे।
घूमते हुए हमने ठेले पर और अन्य कुछ फ़ास्ट फ़ूड खा लिया था तो बस रात बिताने की मजबूरी थी।

मैंने निक्कू को प्रॉब्लम बताई और कहा- आप बेड पर सो जाना, मैं सोफे पर ही सो जाऊँगा।
उसके पास भी कोई और रास्ता तो था नहीं तो वो भी मान गयी।

होटल के कर्मचारी ने हमें अपना रूम दिखाया। हम दोनों अपने रूम में घुस गए। कपड़े पूरी तरह से भीगे थे पर हमारे पास ना तो नाईट ड्रेस थी ना कोई और कपड़े!

तो मैंने तो अपना शर्ट तो उतार कर रख दिया पर निक्कू उन्ही कपड़ों में सो गई।

पूरा दिन के थके हारे थे तो मुझे तो सोते ही नींद आ गयी। अभी सोये हुए शायद 2 घंटे ही हुए होंगे कि अचानक कुछ आवाज से मेरी आँख खुल गयी। समय करीब 12.15 बज रहे थे। आवाज निक्कू के बेड से ही आ रही थी, वो ठंड से कांप रही थी और सुबकियां ले रही थी।

मैं झट से उसके पास गया। वो ठंड से कांप रही थी, उसको हल्का हल्का बुखार भी लग रहा था।
मैंने उसे अपनी गोदी में लिया और उसके आँसू पौंछे।
इतनी रात में अनजान जगह पर कोई मेडिसिन वो भी खाली जेब मुश्किल ही नहीं नामुनकिन थी।
तो उसके लिए सोचना भी गलत था।

पर जब दो विपरीत लिंगी भीगे बदन एक बंद कमरे में इतने नजदीक हो तो सर्दी अपना कमाल दिखा ही देती है।

अब मुझे और निक्कू को हिंदी फिल्म का (नाम तो याद नहीं रहा) वो सीन दिख रहा था जिसमें इन्ही हालात में हीरो हीरोइन किसी जंगल में सर्दी के मारे … सेक्स करते हैं।

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यहाँ थोड़ा उल्टा था। यहाँ शुरुवात निक्कू ने ही की। उसके होंठ कब मेरे होंठों से चिपक गए वो कुछ देर बात ही पता चला। हमने एक दूसरे को जम कर चूसा। लब से लेकर चूची चूत और लन्ड सब जगह चूसने के बाद कब कपड़े हमारे शरीर से अलग हुए हमें खुद ही पता नहीं चला। जब सेक्स की खुमारी चढ़ जाए तो वो किसी भी नशे से ऊपर होती है।

अब मैं और निक्कू पूर्णरूपेण जन्मजात नंगे एक दूसरे से ऐसे चिपटे थे एक जिस्म दो जान हो। मेरा हाथ निक्कू के चूची पर था और निक्कू मेरे लण्ड को सहला रही थी।
यह भगवान का चमत्कार था या मौसम का आज दूसरी बार मेरा लन्ड अपेक्षा से बड़ा लग रहा था।

मैंने निक्कू के पूरे शरीर पर चुम्बन करते हुए उसे बेड पर लिटाया और उसकी चूत चाटने लगा। निक्कू की सर्दी अब गर्मी में बदल चुकी थी। उसकी चूत गर्म लावा छोड़ रही थी। और वो चूत रस मुझे कामरस लग रहा था।

अब चूसने की बारी निक्कू की थी और आंनद लेने की मेरी बारी थी। मैं बेड के पास खड़ा हो गया और निक्कू ने बेड पर बैठे बैठे ही मेरा लन्ड अपने मुँह में ले लिया और मुँह आगे पीछे कर के चूसने लगी.
पर मुझे अच्छे से मजा नहीं आ रहा था तो मैंने उससे कहा- थोड़ा कुल्फी की तरह से चूसो तो आंनद आ जाये.
और उसने ऐसा ही किया।

मेरा मन तन खुशी से हिलौरें लेने लगा।

उसने पहले ही मना किया था तो मैंने चर्मोत्कर्ष होने से पहले ही उसका मुंह से लन्ड बाहर ले लिया।
उसने आभार की नजर से मुझे देखा।

निक्कू की धड़कन तेज हो रही थी तो मैं समझ गया कि अब देर करना उचित नही। शायद निक्कू भी समझ गयी कि अब मैं भी मुख्य कार्य के लिए तैयार हूँ तो वो समझदारी दिखाते हुए बेड पर टांगें उठाकर लेट गयी।

मेरा लिंग उसके चूसने से कड़क हो ही गया था तो मैंने बिना देर किए लन्ड उसकी चूत के छेद पर सेट किया और एक जोर का धक्का दे मारा. मेरा पूरा लन्ड एक ही झटके से उसके चूत में समा गया।
क्योंकि निक्कू कोई कुंवारी कली तो थी नहीं … उसकी चूत तो रॉकी के लण्ड से फटी ही थी। पर नई चूत या लन्ड का स्वाद तो अलग होता ही है … चाहे आपने उससे पहले कितना भी मोटा लन्ड या कितनी भी टाईट चूत चोदी हो।

अब हमने धक्कापेल शुरू कर ही दिया और निक्कू मेरे धक्कों का पूरा साथ दे रही थी। ऐसा साथ मेरी कांची ने मुझे कभी नहीं दिया था।
यहाँ मैं अन्य लोगों की तरह झूठ नहीं लिखूँगा कि मैंने आधा घंटा किया या 25 मिनट, मेरा काम सिर्फ 12 या 13 मिनट में ही हो गया क्योंकि एक तो मुझे आधा चूस कर ही निक्कू ने छोड़ दिया था और निक्कू भी थोड़ी नर्वस हो गयी थी तो उसकी चूत ने भी जल्दी ही पानी छोड़ दिया था।

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चुदाई पूरी करके मैं निक्कू के ऊपर ही लेट कर साँस लेने लगा। जब हमारी आग शांत हुई तो निक्कू को दुनियादारी का ख्याल आया। वो अपने आप से शर्माने लगी और जल्दी से अपने कपड़े पहनना चाह रही थी. पर उसके कपड़े अभी भी थोड़े गीले थे तो फिर से सर्दी का डर तो था ही … तो मैंने उसे समझाया कि जो होना था वो हो गया अब शर्म कैसी।

वो थोड़ा समझाने पर समझ गयी और हम बिना कपड़ों के चिपक कर सो गए।

सुबह मेरी आँख खुली तो 7.30 बजे थे। मेरा मन फिर से मचल गया मैंने निक्कू को थोड़ा और कन्वेंस किया। वो थोड़ा मान ही नहीं रही थी तो मैंने उसे मनाने के लिए उसे कहा कि रात को तुम्हें सर्दी लग रही थी तो मैंने वो सब कुछ किया जो तुम्हारे लिए जरूरी था. अब क्या मेरा मन भी नहीं रखोगी? और क्या वहाँ रॉकी और कांची एक ही होटल में अकेले है तो क्या काँची अपने रूम में अकेले सोई होगी? मैं तो नहीं मानता।

यह तीर निशाने पर लगा और निक्कू एक शर्त पर मान गयी कि यह सब हम दोनों के बीच रहनी चाहिए, किसी को पता नहीं चलना चाहिए, काँची को भी नहीं।
मैंने वादा किया।

हमने कपड़े तो वैसे ही खोल रखे थे। मैं निक्कू को लेकर बाथरूम में घुस गया निक्कू को सुसु लगी थी तो मैंने उसे अपने सामने ही सुसु करने का बोला तो वो शर्माते हुए वहीं मेरे सामने पेशाब करने लगी तो मैं उसके पेशाब और चूत से खेलने लगा।

इस छेड़खानी से वो भी गर्म हो गयी। उसने फिर से मेरे लन्ड को अपने मुँह में लिया औऱ इस बार पूरा ही चूस लिया, वो पहली बार मेरा वीर्य पी रही थी। पी ही नहीं रही थी … पूरा चाट ही रही थी।
लन्ड चाटने के बाद हम लोगों ने एक बार फिर से चुदाई की और साथ में नहा कर बाहर आये।

टॉवेल होटल सर्विस ने रखे हुए थे तो हमने अपने शरीर पौंछे और कपड़े पहनकर होटल से चेक आउट किया।

रात की बारिश का कहर सब तरफ दिख रहा था। हमने एक ऑटो किया औऱ अपने होटल पहुँचे।

अपने आप को सही साबित करने के लिये मैं निक्कू को लेकर पहले अपने रूम की तरफ गया पर वो तो लॉक था। मैंने निक्कू को बताया कि जो हमने किया वो ही यहाँ भी हुआ होगा और मेरी काँची आपके रूम में ही मिलेगी।

जब हम रॉकी के रूम में पहुंचे तो दरवाज़ा काँची ने ही खोला। अब निक्कू भी सब समझ गयी पर कोई किसी पर गुस्सा करने की हालात में भी नहीं था।

थोड़ी देर की चुप्पी के बाद मैंने ही माहौल बदलने के लिए चाय मंगवाई और अपने घूमने का बताने लगा।
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