भाई ने की मजबूरी में दीदी की चुदाई

मैंने अपनी बहन की गांड मारी. दीदी ने खुद मुझे सेक्स के लिए कहा था। पहले तो मैंने मना किया पर दीदी की ख़ुशी के लिए मैंने उन्हें चोद ही दिया। ये सब कैसे हुआ?

मैं आपके लिए अपनी कहानी लेकर आया हूं और सीधे उसी पर चलते हैं।

यह कहानी मेरी दीदी और मेरे बीच हुई चुदाई के बारे में है।
मेरी दीदी शिखा की फिगर ऐसी है कि उन्हें देखकर किसी मुर्दे का भी लण्ड खड़ा हो सकता है।

उनके बड़े-बड़े गोल-गोल 38 के रसीले दूध, बड़ी सी गान्ड और कमर ऐसी लचकदार की देखने वाला आदमी भी साथ में बल खा जाए।
कुल मिलाकर मेरी दीदी खूबसूरती की मूरत है।

वैसे मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं अपनी ही बहन की गांड चुदाई के बारे में कभी लिखूंगा।
मगर दोस्तो, आज के समय में हम लोग ऐसे युग में हैं जहां रिश्तों से ऊपर प्यार और सेक्स हो गया है।

आज के समय में किसी से भी प्यार हो सकता है और किसी के साथ भी चुदाई हो सकती है इसलिए रिश्तों में चुदाई का चलन अब आम बात हो गई है।

जिस दीदी से मैं बचपन से राखी बंधवाता था उनी को मैं चोदने के लिए तैयार हो गया।

बात 2 साल पहले की है जब वह किसी महिला स्व-सहायता समूह में जुड़ी थी और उसी काम से उनका शहर आना-जाना बढ़ गया था।

उस समय उनके हाव भाव बदले बदले देखकर मुझे कुछ गड़बड़ लगने लगी इसलिए मैंने उनकी जासूसी करने की सोची।

मैंने सबसे पहले तो उनके जियो फोन का ऐप अपने फोन में इंस्टॉल कर लिया।
उसमें पता चला कि उसमें दो ऐसे नम्बर हैं जिससे वो बहुत बात करती हैं और वो नम्बर हमारे परिवार में से किसी के नहीं थे।

फिर मैंने एक रोज रात में मौका देखकर उनके रूम में अपना फोन रिकॉर्डिंग पर लगाकर छोड़ दिया।
सुबह उठकर मैंने अपने फोन की सारी रीकॉर्डिंग को देखा तो मेरे होश उड़ गए।

दीदी नंगी होकर रात में किसी से बातें कर रही थी वीडियो में!

मैंने वीडियो में देखा कि वो पूरे जोश में अपनी चूत को सहला रही थी और अपने दूधों को दबा रही थी।
मुझे देखकर बहुत बुरा लगा कि दीदी कितनी गंदी है।
मैंने सोचा कि उनसे इस बारे में बात करनी होगी।

किसी तरह से मैंने हिम्मत की और तीन दिन के बाद मैंने उनसे इस बारे में बात की।

दीदी ने साफ मना कर दिया कि वो ऐसा कुछ नहीं करती।
जब मैंने उनको वो वीडियो दिखाया तो उनके होश उड़ गए।

उनसे कुछ बोलते न बना; वो मेरे सामने रोने लगी।

मैंने उनको चुप करवाया। मैं उनको समझाने लगा कि ये गलत है।

तब दीदी ने जो कहा, उसको सुनकर तो मेरा दिमाग ही घूम गया।

वो कहने लगी कि उनका चुदने का बहुत मन करता है और चुदास के कारण वो रातभर सो नहीं पाती हैं। अगर उनको किसी मर्द का लंड नहीं मिला तो वो मर ही जायेंगी।

फिर वो बोली- अगर तू चाहता है कि मैं ये सब काम न करूं तो मेरे लिए कुछ रास्ता बता। मैं बाहर तो किसी के साथ नहीं कर सकती। अगर तू चाहता है कि मैं घर में ही रहूं तो तेरा लंड चाहिए होगा मुझे!

मैं विश्वास नहीं कर पा रहा था कि दीदी ये सब सच में बोल रही हैं।
जब उन्होंने मेरे लंड को पकड़ कर सहलाया तो मेरे होश ठिकाने आए।

मैंने कहा- ये आप क्या बोल रही हो, हम दोनों भाई बहन हैं।
वो बोली- तभी तो बोल रही हूं। तेरा लंड मेरा अपना ही तो हुआ। भाई बहन हैं तो कहीं जाने की जरूरत नहीं, मुझे किसी और के सामने नंगी होने की जरूरत नहीं। अपनी चूत में उंगली करने की जरूरत नहीं।

उनकी बातें सुनकर धीरे धीरे मेरा लंड भी खड़ा होने लगा।
मैंने सोचा कि अगर ये बाहर चुदवाती है तो घर की कितनी बदनामी होगी और अगर मैंने किया तो घर की बात घर में रह जायेगी।

मैं बोला- कुछ गलत तो नहीं होगा न ये?
इतना कहते ही उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया और मेरे पास आकर मेरे होंठों को चूमने लगी।
मुझे कुछ पल अजीब लगा लेकिन वो मेरे लंड को सहलाती रही और मुझे अच्छा लगने लगा।

देखते ही देखते मेरा लौड़ा उनके हाथ में पूरा तन गया और हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर किस करने लगे।
अब मेरे हाथ खुद ही मेरी दीदी के चूचों पर पहुंच गए।
मैं दीदी के बूब्स दबाने लगा।

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फिर तो धीरे धीरे मैं भी भूल गया कि ये मेरी बहन है और मैं भी उनका पूरा साथ देने लगा।

धीरे धीरे हम लोग नंगे हो गए।
मैं उनके गदराए शरीर को देखकर पागल सा होने लगा और उनके मस्त रसीले दूधों को बेतहाशा पीने और दबाने लगा।

वो भी मस्त होने लगी। मुझे लड़कियों का दूध पीना बहुत पसन्द है इसलिए मैं जोर जोर से उनकी चूचियों को पीता रहा। उनकी चूचियों को पीने में गजब का मजा आ रहा था मुझे!

वो अब सिसकारियां लेने लगी थी।

धीरे से मेरा हाथ उनकी चूत को सहलाने लगा और वो मेरे लण्ड को मसलने लगी।
मेरा लौड़ा तो उनके हाथ में जाकर जैसे ऐंठ गया था।

उन्होंने कहा- 69 में हो जाते हैं, बहुत मजा आएगा।
हम दोनों 69 पोजिशन में हो गए। अब मेरे मुंह के सामने उनकी चूत थी और उनके मुंह के सामने मेरा लंड था।

उनकी चूत की खुशबू इतनी मादक थी कि क्या बताऊँ … दोस्तो, मैं तो एकदम मस्त होकर अब अपनी बहन की चूत चाट रहा था और उधर वो मेरा लौड़ा इतने प्यार से चूस रही थी मानो कोई आइसक्रीम चाट रही हो।

दीदी की चूत पानी छोड़ रही थी जिसे मैं मज़े से पी रहा था।
क्या मस्त स्वाद था, नमकीन सा … कुछ खारा सा लेकिन मजेदार।
फिर मैं बोला- मेरा अब निकलने वाला है दीदी।

फिर भी वो मेरे लंड को लगातार चूसती रही। इतने में ही मेरा वीर्य दीदी के मुंह में ही निकल गया।

दीदी को मानो आज सेक्स का भूत सवार हो गया था।
वो सारा वीर्य गटक गई।

मैं अभी भी उनकी चूत को चाट रहा था।

मेरा वीर्य निकल गया था तो मुझे उतना मजा नहीं आ रहा था अब!

मगर दीदी ने अब मेरे मुंह को अपनी चूत पर दबा लिया और अपनी टांगों के बीच में मेरे सिर को दबा लिया।
मेरा दम सा घुटने लगा लेकिन मैं लगातार दीदी की चूत में जीभ को अंदर बाहर करता रहा।

वो बहुत जोर जोर से सिसकारने लगी थी।
अब वो हाथों से बार बार मेरे सिर को अपनी चूत में धकेलने लगी। ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे मुंह से अपनी चूत को चोदना चाह रही हो।

करते करते उन्होंने फिर पूरा जोर लगाकर मेरे सिर को अपनी चूत में दबा दिया और उनकी चूत का गर्म गर्म पानी मेरे मुंह पर निकलने लगा। मेरा पूरा मुंह उनकी चूत के रस में सन गया।

उन्होंने एकदम से मुझे अपनी ओर खींचा और मेरे पूरे चेहरे को चाटने लगी, मेरे होंठों को चूसने लगी।
चाट चाटकर उन्होंने मेरे चेहरे को साफ कर दिया।

मैं हैरान था कि दीदी के अंदर चुदाई की इतनी प्यास कैसे बन गई है।

अब हम दोनों झड़ गए थे तो दोनों कुछ देर के लिए शांत हो गए।
थोड़ी देर के बाद उन्होंने फिर से मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको हिलाने सहलाने लगी।

इधर मैं भी दीदी की चूत को छेड़ने लगा। मैं दीदी की चूत में उंगली करने लगा। उनकी चूत अंदर से पूरी गीली थी।

दस मिनट के अंदर मेरा लंड एक बार फिर से तन गया था।
वो बोली- अब मेरी प्यास बुझाओ।
मैंने कहा- ठीक है दीदी, तैयार हो जाओ।

उनको मैंने बेड पर लिटा लिया और उनकी टांगें खोल दीं।
मैंने दीदी की चूत पर लंड को सेट किया और धक्का देने लगा।
एक बार में ही दीदी की चूत में लंड अंदर सरक गया।

उनकी चूत पहले से ही इतनी चिकनी थी और फिर उंगली कर करके मैंने दीदी की चूत को फुला दिया था। उनकी चूत ने पक्क से मेरे लंड को निगल लिया।

मैंने फिर थोड़ा और जोर लगाया और धीरे धीरे धकेलते हुए पूरा लंड दीदी की चूत में उतार दिया।
उनका मुंह खुल गया और वो हवस भरी नजरों से मुझे देखने लगी।

वो सिसकारते हुए बोली- आह्ह … रॉकी … यही तो चाहिए था मुझे … इतने दिनों से इसी के लिए तो तड़प रही थी मैं … इसी की प्यास लगी थी। चोदो मुझे भैया … आह्ह चोदो।

दीदी की चूत की प्यास वाकई बहुत भड़की हुई थी।
मुझे भी उनकी चूत में लंड डालकर इतना मजा आ रहा था कि क्या बताऊं।

मैंने दीदी की चूत में हल्के हल्के धक्के देना शुरू कर दिया।

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उन्होंने मुझे अपने ऊपर झुका लिया और मेरे होंठों को चूसने लगी।
मैं भी दीदी की चूत की चुदाई करने लगा। बीच बीच में उनकी चूचियों को भी पी रहा था, कभी निप्पलों को काट लेता था।

अब मेरी स्पीड बढ़ने लगी थी।
दीदी भी मस्त होकर चुदवा रही थी।

फिर मैंने दीदी को घोड़ी बना लिया, पीछे से उनकी चूत में लंड डाल दिया और चोदने लगा।

चोदते हुए मेरा ध्यान दीदी की गांड के छेद पर गया।
मेरा मन दीदी की गांड में भी चोदने के लिए हुआ।
मैं बोला- दीदी, आपकी गांड चुदाई करनी है।
वो बोली- नहीं, वहां पर बहुत दर्द होगा।

मगर मैंने दीदी की चूत से लंड बाहर निकाल लिया और बोला- मुझे आपकी गांड भी चोदनी है, एक बार चोदने दो।
वो बोली- तू चूत चोद ले पहले, बाद में कर लेना।

मैंने सोचा कि दीदी बाद में गांड नहीं चुदवायेगी इसलिए मैंने उनसे जिद की और वो फिर आखिर में मान गई।
अपने लौड़े पर तेल लगाया मैंने और थोड़ा उनकी गान्ड में भी लगाया।

फिर मैंने थोड़ा सा लंड घुसाया तो दीदी को दर्द हुआ।
मगर मुझे और मज़ा आया।
मैंने और थोड़ा अंदर डाला तो दीदी चिल्लाने लगी।

मैं रुक गया और वैसे ही पड़ा रहा उनके ऊपर!
एक मिनट रुकने के बाद फिर थोड़ा और अंदर किया।

ऐसे करके धीरे धीरे मैं पूरा लंड बहन की गांड में घुसाकर अंदर बाहर करने लगा।

दीदी का दर्द भी धीरे धीरे कम होने लगा था। वो अब हल्की सिसकारियां लेने लगी थी।
कुछ देर में गांड में लंड आराम से अंदर बाहर होने लगा।

अब मैंने दीदी की गांड को पकड़ लिया और तेजी से उनकी गांड में अपने लौड़े को पेलने लगा।

मेरे झटके बहुत तेज हो गए थे और दीदी हर झटके साथ अब और मजा लेने लगी थी।
दीदी की चूत चुदाई से ज्यादा मुझे अब दीदी की गांड चुदाई में मजा आ रहा था।

दस मिनट बहन की गांड चुदाई के बाद अब मेरा माल निकलने को हो गया।
मैं चोदते हुए बोला- दीदी, मेरा गिरने वाला है।
वो बोली- तो मेरी चूत की प्यास कैसे शांत होगी?

मैं दीदी की बात समझ गया और मैंने गांड से लंड को बाहर खींच लिया।
दीदी की गांड का छेद फैल गया था और अंदर से गांड का लाल हिस्सा दिख रहा था।

फिर मैंने दीदी की चूत में पीछे से लंड घुसा दिया और उनके ऊपर झुककर उनको कुतिया की तरह चोदने लगा।
मैंने उनकी चूचियों को कसकर भींच लिया और तोबड़तोड़ चुदाई करने लगा।

दो मिनट के बाद मेरा स्खलन नजदीक आ गया और मैं दीदी की चूत में ही झड़ गया।
इस बीच दीदी भी झड़ गई थी।

हम दोनों हांफते हुए लेट गए और फिर नॉर्मल हो गए।

पहली बार में ही मैंने दीदी की चूत चुदाई और गांड चुदाई दोनों कर डाली।

मैं दीदी को चोदकर काफी खुशी महसूस कर रहा था। मैंने दीदी की प्यास बुझा दी थी और उनके होंठों पर अब एक मुस्कान आ गई थी।

उन्होंने मेरे लंड को हाथ में लिया और उसको प्यार से सहलाते हुए मेरे गालों को चूमकर बोली- थैंक्यू रॉकी, आज मैं बहुत खुश हूं। मैं बहुत दिनों से ऐसा मजा लेना चाहती थी।

मैं बोला- कोई बात नहीं दीदी, हम दोनों एक दूसरे को प्यार करते हैं और अब तो जिस्म का रिश्ता भी हो गया है। आपको अब किसी और के पास अपनी सेक्स की प्यास बुझाने के लिए नहीं जाना पड़ेगा।

वो बोली- मगर ये बात तेरे और मेरे बीच में ही रहनी चाहिए।
मैं बोला- बिल्कुल दीदी, आप ये कैसी बात कर रही हो, ये बात इस कमरे से बाहर कहीं नहीं जाएगी।

फिर हम दोनों ऐसे ही बातें करते हुए नंगे ही सो गए।
रात को एक बार फिर से दीदी ने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया।
जब मेरी आंख खुली तो मेरा लंड दीदी के मुंह में था।

मुझे भी जोश आ गया और मैंने दीदी को पटक कर फिर से उनकी चुदाई कर डाली और फिर हम सो गए।
दोस्तो, ये थी मेरी दीदी के साथ मेरी पहली चुदाई की कहानी।

आपको ये बहन की गांड वाली हिंदी सेक्स स्टोरी कैसी लगी मुझे जरूर बताना।
आगे मैं आपको अपनी और अपनी बहन की चुदाई की और भी कहानियां बताऊंगा।
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