ब्रदर और सिस्टर की सेक्स स्टोरी

दोस्तो, मैं 20 साल का हूँ और अन्तर्वासना पर मैं अपनी पहली सेक्स स्टोरी लिखने ब्रदर सिस्टर की जा रहा हूँ. मेरा नाम कुछ भी समझ लीजिएगा क्योंकि मैं अपना नाम बताना नहीं चाहता हूँ. अगर मेरे से गलती हो तो माफ़ कर देना. मैं बड़ोदरा का रहने वाला हूँ और ये कहानी अभी 6 महीने पहले की है.

मैं अपनी सिस्टर के प्यार के जाल में फंस गया हूँ. लेकिन उनसे प्यार जैसा कुछ भी नहीं था, बस जवानी का जोश था. आजकल का टाइम ही ऐसा हो गया है कि अच्छी बातें सूझती ही नहीं हैं.
मेरी ये सेक्स स्टोरी मेरी मुँहबोली सिस्टर की है, उसे मैंने कॉलेज में सिस्टर बनाया था, वो भी मेरे कॉलेज की लड़कियाँ पटाने के मतलब के लिए बनाया था.

कॉलेज के नए-नए दिन थे, आपको तो पता ही होगा इस वक्त मजा ही कुछ और होता है. जब मैंने एक सिस्टर बना ली.. इसके बाद जो लड़की मुझे अच्छी लगती.. मैं उस लड़की से बात करने के लिए अपनी इस सिस्टर का सहारा लेता था. लेकिन मुझे नहीं पता था कि सहारा लेते हुए ही हम दोनों में प्यार हो जाएगा.

एक दिन मैं और मेरी सिस्टर बाइक पर कॉलेज जा रहे थे, तब एक लड़की मुझे अच्छी लगी. उस का नाम था रिया वर्मा था. मैंने अपने फ्रेंड से मिल कर उसकी पूरी हिस्ट्री सर्च कर ली कि ये कब क्या करती है.. कब किधर जाती है आदि.. पूरी जानकारी कर ली.

उसके बाद मैंने सिस्टर को पकड़ा और कहा- चल तू मेरे लिए उस लड़की से सैटिंग बिठा!
उसने बोला- करा तो दूँगी ब्रदर… लेकिन मुझे क्या मिलेगा?
मैंने बोला- मैं हूँ न.. तेरा कुछ भी काम हो, मेरे से बता दियो.. मैं तेरा सब काम कर दूँगा.
वो बोली- ठीक है.

मुझे अभी तक कुछ भी नहीं मालूम था कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है.
उसने मेरा टांका रिया से फिट करवा दिया. रिया के साथ डिनर का प्लान भी उसने बनवा दिया.
मैंने कहा- लव यू सिस.. थैंक्यू सो मच.
उसने बोला- चल अब मक्खन मत लगा.. मुझे पता है कि तेरा रिया के साथ क्या करने का इरादा है.
मैंने बोला- तो उसमें क्या है.. जवानी का कुछ तो फायदा होना चाहिए ना.. शादी के बाद कहाँ ऐसा कुछ होगा.
उसने कहा- हाँ ये भी सही है.

बस अब मैं तो नाईट के बारे में सोच रहा था. मैं सोच-सोच कर पागल हो रहा था. रात को मैंने रिया से सीसीडी में मिलने का तय किया था.. 7 बजे मैं टाइम पर वहाँ पहुँच गया.
आप को तो पता ही है कि लड़कियाँ कभी टाइम पर नहीं आती हैं.

इसके बाद मैं वहाँ सात बजे से नौ बजे तक उसका वेट करता रहा लेकिन वो नहीं आई. मैं उसके इन्तजार के चक्कर में दस कॉफ़ी पी गया.. लेकिन वो नहीं आई.
दस बजे रूम पर जाकर मैंने सिस्टर को कॉल किया- यार वो आई ही नहीं.
मैं इतना दुखी था कि क्या बोलूँ.. मैं कॉल पर लगभग रो सा रहा था.

सिस्टर बोली- ब्रदर मत रो.. वो नहीं तो कोई और सही.
मैं सुबकता रहा.
वो बोली- तू अभी कहाँ है?
मैंने बोला- रूम पर..!
वो बोली- तू रुक.. मैं 15 मिनट में आती हूँ.

इसके बाद सिस्टर मेरे रूम पर आ गई. वो नाईट ड्रेस में थी.. क्या लग रही थी. मैंने दरवाजे पर जैसे ही उसे देखा तो बस मदहोश हो गया और उसको देखता ही रह गया.. मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं.

मैंने उसे अन्दर आने को बोला और उसके अन्दर आते ही मैंने उसके पिछवाड़े पर नजर मारी.. हाय क्या गांड मटका कर चल रही थी.

मैंने उसी दिन उसे इस तरह से नोटिस किया था. मेरी ये मुँहबोली सिस्टर भी माल से कम नहीं लग रही थी. मैं अभी कुछ और सोच पाता कि उसी वक्त वो मेरी तरफ घूमी.. तो मेरी नजरें उसके उभारों पर जम कर रह गईं.

वो मुझे देख कर बुला रही थी.. लेकिन मुझे उसकी आवाज सुनाई ही नहीं दे रही थी.
वो मेरे करीब आई और मुझे हग करने लगी, वो बोली- टेंशन मत ले.. मैं हूँ ना तेरे साथ!

जब उसने मुझे अपनी बांहों में लिया तो मैंने भी उसको कसकर हग कर लिया और उसे भींचने लगा. उसके फूले हुए बोबे मेरी छाती से पूरे दब रहे थे.. मुझे मजा आ रहा था.
मैंने कहा- हाँ यार, तू ही तो मेरी जान है.. हर पल मेरा साथ देती है.
मैं उसके सीने से लग कर रोने लगा.

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उसने मुझे पलंग पे लिटा दिया और बोली- तू सो जा.. कल बात करेंगे.
मैंने कहा- मुझे नींद नहीं आएगी.
वो मेरे साथ ही बैठी रही.

फिर थोड़ी देर बाद उसे लगा कि मैं सो गया हूँ और जैसे ही वो पलंग से उठी मैंने उसके हाथ को पकड़ कर मेरे साइड में खींच कर अपने ऊपर गिरा लिया.

उसका पूरा शरीर मेरे ऊपर था और उसके होंठ बिल्कुल मेरे होंठों से जुड़ गए थे. उसकी आँखें मेरी आँखों के सामने थीं. वो कुछ बोलती.. उसके पहले मैंने उसके नर्म गुलाबी होंठों को मेरे होंठों से मिला लिया.
इस 4-5 सेकंड की किस के मैंने उसको धीरे से मेरी बांहों में जकड़ लिया. वो कुछ भी बोलने के मूड में नहीं थी और मैं उसे प्यार करने के मूड में था. उसके होंठों को अपने होंठों के पास लाया लेकिन इस बार मैंने उसे किस नहीं किया. मैं देखना चाहता था कि वो क्या सोच रही थी.

मेरी आँखें खुली ही थीं.. उसकी आँखें भी मेरी आँखों में ही देख रही थीं. उसने धीरे से प्यारी सी स्माइल दी और उसने मुझे चूम लिया. मैंने भी उसका साथ दे दिया. अब मैं और वो बस देर तक किस करते रहे.

वो मेरे ऊपर थी और उसके सर को पकड़ कर किस कर रहा था. ऐसा लग रहा था मानो हम रूम में थे ही नहीं.. किसी और दुनिया में थे. उसके बाद जब मैं और वो अलग हुए तो वो प्यारी सी स्माइल दे रही थी.
उसने बोला- तुझे कैसे पता था कि मैं तुझसे प्यार करती हूँ?

यह बात सुन कर मेरे दिमाग चकरा गया. मैंने सोचा ये क्या बोल रही है.. मैं तो ऐसे ही इसे प्यार कर रहा था.. लेकिन ये तो मेरे पे ही लट्टू थी.

फिर क्या.. मैं तो काम पर लग गया. मैंने उसको उठाया और पलंग पर गिरा दिया और वापिस किस करने में लग गया. कुछ ही पलों बाद मैं उसकी नाईटी निकालने लगा. अगले ही पल नाइटी निकल गई. वो मेरे सामने ब्रा और पेंटी में पड़ी थी.. क्या परी लग रही थी.
उसने बोला- ब्रदर अपने कपड़े भी निकालो.
मैंने कहा- तू ही निकाल दे.. वैसे भी अब तेरे ही हैं.

उसने बिना सोचे जल्दी से भूखी शेरनी की तरह मेरे कपड़े निकाल दिए. अब वो मेरे लंड को ऐसे पकड़ कर देख रही थी कि उसकी चूत के अन्दर जाएगा कि नहीं.
मैंने कहा- स्वीट हर्ट टेंशन मत ले.. बस अब तू देखती जा तुझे कैसे जन्नत की सैर कराता हूँ.
वो बोली- तू साथ है.. तो किस बात से डरना.
वो मेरे पर ट्रस्ट कर रही थी.

मैंने अगले झटके में उसकी पेंटी निकाली और गुलाबी पंखुड़ी जैसी बिना बालों की चूत को देख कर मैं खुश हो गया.
मैंने उसे आँख मारते हुए कहा- घर से क्या यही सोच कर निकली थी?
वो स्माइल देने लगी.

मैं सिस्टर की चूत पे टूट पड़ा और चूत चाटने लगा. उसका एक हाथ मेरे सर पर था और वो मेरे सर को अपनी चूत पर खींचते हुए जोर लगा रही थी.

सिस्टर बोल रही थी- अह.. ब्रदर खा जा साली चूत को बहुत तड़पा रही है साली.
मैंने कहा- अब टेंशन मत ले.. अब से ये तुझे कुछ भी नहीं करेगी.

बस 5 मिनट में ही उसकी चूत का पानी निकल गया. मैं अब उसके मम्मों पर आ गया. एक हाथों से लेफ्ट वाला दबा रहा था और दूसरी साइड वाले को अपने मुँह में लेकर प्यार से खा रहा था. मैंने इतने प्यार से मम्मे को मुँह में ले रखा था कि उसके चूचे पूरे लाल हो गए थे और निप्पलों को दांतों से काट रहा था. वो तो चुदास से पागल सी हो गई थी. उसके बाद वो मेरा लंड पकड़ कर आगे-पीछे करने लगी.

मैं उससे लंड को मुँह में लेने के लिए बोलने ही वाला था कि उससे पहले मेरी सिस्टर ने लंड को मुँह में ले लिया.
हाह.. क्या लॉलीपॉप की तरह आगे-पीछे कर रही थी. मैं तो बस जन्नत की सैर पर था.

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उसके बाद मैंने उसकी टांगों को थोड़ा चौड़ा किया और मेरा लंड उसकी चूत के छेद पर ले गया. मैं लंड को उसकी चूत की फांकों में फंसा कर पेलने ही जा रहा था कि उसे दर्द होने लगा.

मैंने देखा कि ये तो अभी तक कुंवारी है. ये देख कर मैं बहुत खुश हो रहा था कि सील पैक माल मिला.. आज मजा आने वाला है.
मैं थोड़ा जोर लगा कर लंड अन्दर डालने लगा. वो ‘आआह.. दर्द हो रहा है..’ बोल रही थी.

मेरे जोर लगाने से उसके आंसू निकलने लगे और वो दबे स्वर में रो रही थी. मैं उसे चुम्बन करने लगा और मम्मों को सहलाने लगा. उसके चुप होते ही थोड़ा जोर लगा कर मैंने उसकी चूत का दरवाजा एकदम से फाड़ दिया.

जोर से चीख उठी- आआआ.. मर गई मम्मी.. आआहह..
सिस्टर की आँखों में से आंसू आ रहे थे. मैं एक मिनट रुक गया और उसे किस करने लगा. मेरा लंड अभी भी अन्दर ही था.. अपने लिए चूत में जगह बना रहा था. थोड़ी देर के बाद जब लंड ने सैटिंग बना ली तो उसका दर्द कम होने लगा.

अब वो अपनी कमर मेरी तरफ उठा करके हिलाने लगी. मैं भी खुश हो गया कि चलो अब खेल शुरू करने का वक्त आ गया.
मैं जोर से धक्के लगाने लगा. कुछ ही धक्कों में मी सिस्टर भी चिल्ला कर बोल रही थी- आह.. और जोर से डाल लंड को.. मजा आ रहा है.

अब मैं भी दम लगा कर लंड को चूत में पेल रहा था. थोड़ी देर में मैंने लंड बाहर निकाला और पोज चेंज किया. अब वो घोड़ी की तरह बन गई थी. मैं उसके पीछे से उसकी चूत में लंड पेल रहा था. दस मिनट तक हचक कर चोदने के बाद वापस पोज़ चेंज किया. अब मैंने उसको औंधा कर दिया और उसकी गर्दन पकड़ कर उसकी चूत में लंड पेलने लगा. लेकिन इसमें मुझे मजा नहीं आया तो मैंने फिर से उससे लंड को मुँह में लेने को बोला. वो लॉलीपॉप की तरह लंड चूसने लगी.

मैंने कहा- अब तेरी गांड को भी चोदना है.
वो बोली- नहीं ब्रदर… मेरी चूत वैसे भी सूज गई है… अब नहीं झेल पाऊंगी.
मैंने कहा- मेरा अभी निकला नहीं है.. लंड अभी भी खड़ा है.
उसने कहा- मैं लंड को मुँह में लेकर रस निकाल देती हूँ.. अब तो मैं तेरी ही हूँ कभी और किसी दिन चोद लेना.

मैं नहीं माना और लंड पे तेल लगा कर उको पीछे से पकड़ कर उसकी गांड में लंड डालने लगा.

थोड़ी देर की पीड़ा के बाद उसकी गांड में लंड चला गया. हालांकि वो दर्द से रो रही थी लेकिन मैंने कुछ नहीं सोचा बस चोदता रहा.

थोड़ी देर बाद उसे भी गांड मराने में मजा आने लगा था. आखिर में मेरा माल निकलने वाला था तो मैंने लंड को बाहर निकाल कर उसकी चूत में लगा दिया और तेज धक्के लगाने लगा.

कुछ ही पलों में मेरा पानी उसकी चूत में ही निकल गया. मैं उसके ऊपर ही गिर गया. मेरा पूरा शरीर पसीने से भीग गया था.

उसके बाद वो बोली- ब्रदर, मेरे मुँह में भी चोदो.
मैं बोला- पागल है.. अभी तो रस निकला है.. मेरी हालत ख़राब हो जाएगी.
लेकिन वो बोली- तू कुछ भी कर.. मुझे अभी ही चाहिए.

वो लंड हिलाने लगी. एकाध मिनट के बाद मेरा लंड खड़ा हो गया.

मेरा चेहरा एकदम लाल हो गया था. आखिर मुझे बहुत मजा आया.. उसके बाद हम बाथरूम में जाकर फ्रेश हो गए.
मैंने देखा कि उससे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था. बाद में मैं उसे उसके रूम पर छोड़ कर आया.

उस दिन के बाद हम दोनों हफ्ते में एक बार तो चुदाई करते ही हैं.

स्टोरी में मैंने मेरी सिस्टर का नाम नहीं बताया सो उसको इग्नोर कर देना. ये मेरी सच्ची ब्रदर सिस्टर सेक्स स्टोरी कैसी लगी मुझे मेल करें.
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