अनजान भाभी से मुलाकात और सेक्स- 1

Xxx Indian Bhabhi Ki Kahani Xxx इंडियन भाभी की कहानी में पढ़ें कि कैसे मैंने एक भाभी ने मुझसे मदद मांगी. मैंने उसकी मदद की तो वो मेरे साथ खुलने लगी. मैंने उसे किस भी किया.

नमस्कार दोस्तो, मैं युवराज आप लोगों के साथ अपने वासना की कहानी का पहला अनुभव लेकर हाज़िर हुआ हूँ.
इस Xxx इंडियन भाभी की कहानी में लिखी एक एक बात सत्य है.

मैं हरियाणा का रहने वाला हूं. मेरा कद 5 फुट 8 इंच है, रंग गोरा है, उम्र 26 है. मैं सामान्य शरीर का मालिक हूं और मेरे लंड की लंबाई 7 इंच है.

यह कहानी वर्ष 2016 के अक्टूबर महीने में शुरू हुई थी.

मैं वैसे तो शर्मीले मिजाज़ का व्यक्ति हूं यानि कि लड़कियों से बात करने में घबरा जाता हूं, धड़कन बढ़ जाती है.

मैं एक फेसरीडर हूं और इंसान को पढ़ना अच्छे जानता हूं. लोगों की तकलीफ़ को महसूस करता हूं … और उनको यथासंभव सहारा भी देता हूं.

अब तक मैं 2500-3000 लोगों को गाइड कर चुका हूं.

लोग अपनी परेशानी लेकर आते हैं, मैं उनको समझता हूं और उन्हें सही दिशा ज्ञान देता हूं.

इसी के चलते एक महिला ने मुझसे संपर्क किया, जिसने अपना नाम रीटा बताया था.
वो जमशेदपुर की रहने वाली थी.

उसकी परेशानी को सुलझाकर मैं उसे भूल भी चुका था.

मेरे जीवन में ज्यादा दोस्त नहीं रहे. लोग स्वार्थ हेतु ही संपर्क में आते थे और आगे निकल जाते थे.
शायद इसलिए भी मुझे उनमें दोस्त नहीं दिखा क्योंकि मुझे लोगों की परख है.

मैंने अपने जीवन का उद्देश्य भी इसी बात को मान लिया कि लोगों की निस्वार्थ सहायता करनी है.
उनको खुशियां जहां तक हो सके, देने का प्रयास कर सकूँ.

किसी के मुझसे जुड़े रहने की आकांक्षा को भी मैंने त्याग दिया क्योंकि ऐसा करना मुझे तकलीफ़ देता था.

इसी के चलते मैं रीटा को भूल चुका था.

एक महीने बाद मेरे पास एक अनजान नंबर से फोन आया. जब मैंने पूछा- कौन बोल रहा है?
तो रीटा ने अपना परिचय दिया.

थोड़ी इधर उधर की बात करने के बाद रीटा ने मुझसे कहा- मैं अपने बच्चों से मिलने राजस्थान उनके हॉस्टल गई थी और अब वापस जमशेदपुर जा रही हूँ. लेकिन मेरी ट्रेन सीधे ना होकर दिल्ली से इंटरकनेक्ट है, जिसमें 12 घंटे का अंतराल है. मैं दिल्ली में किसी को जानती नहीं हूँ, तो क्या आप मेरी सहायता के लिए रेलवे स्टेशन आ सकते हैं?

मैंने थोड़ा सोचा, फिर सोच कर बताने को कहा. मैंने फोन रख दिया.

वो मेरे लिए अनजान थी कुछ भी हो सकता था … तो दुविधा में था.

इंसानियत के नाते मुझे जाना चाहिए था आखिर वो एक महिला है और उसने मुझे किसी उम्मीद के साथ कॉल किया था.

मैंने अपने एक साथी से बात की और उसे साथ चलने के लिए राज़ी कर लिया.

फिर रीटा को फोन करके अपने आने के लिए हामी भर दी.

अगले दिन ठीक 12 बजे में रेलवे स्टेशन पहुंच गया.
जहां वो पहले से मेरा इंतजार कर रही थी.

वो 35 साल की भरे जिस्म की युवती एक मॉडर्न लिबास में अपने साथ दो भारी भारी बैग लिए खड़ी थी.
उसने जिस्म की नुमाइश की, तो अंदाजन 36-30-38 का फिगर लगा, जो बाद में सही निकला.

औपचारिकता पूरी करने के बाद मैंने सबसे पहले उसके रूम का बंदोबस्त कराया और उसका सामान क्लॉक रूम के लॉकर में रखवा दिया.
कमरा रात को 8 बजे से पहले नहीं मिलना था तो मैं उसे अपने साथ ले गया.

मुझे उस दिन कुछ काम था, तो मैंने सोचा कि उसका भी समय अच्छे से निकल जाए.

मेरी मंशा कोई ग़लत नहीं थी.
मैं उसके साथ बड़ी इज्जत और तहजीब के साथ पेश आ रहा था.

हम चांदनी चौक से मेट्रो में सवार हुए और जनकपुरी की तरफ चल दिए.
रास्ते में जो भी नजर आता, मैं उसके बारे में उसे बताने लगता!
कभी उसके साथ थोड़ा हंसी मजाक भी कर लेता, तो वो भी मुस्कुरा देती.

मैंने उसको ऐसे खड़ा कर रखा था, जिससे कोई छेड़खानी ना कर सके जोकि मेट्रो में आम बात है.

एक जगह मेट्रो बदलनी थी तो हम प्लेटफॉर्म पर खड़े थे.
बहुत भीड़ थी जिसके चलते मैंने उसका हाथ पकड़ लिया था … क्योंकि एक जगह उसका पैर फिसल भी गया था.
ऐसा फिर से ना हो, इसलिए मैंने हाथ पकड़ना ठीक समझा.

ऐसे ही बातें करते हुए हम जनकपुरी पहुंच गए.

जब वहां से काम निपटा कर वापस चलने लगे तो हमें भूख लग आई थी.

हम दोनों ने दिल्ली हाथ में पाव भाजी खाई और बात करने लगे.
यहां से मुझे रीटा का बर्ताव बदला बदला लगने लगा.

पहले तो उसने मुझे पैसे नहीं देने दिए, खुद ही दिए.

उसकी जेब में पैसे थे, फिर भी वो झुकी और मेरे सामने बैग से पैसे निकालने लगी.
इस दौरान मुझे पहली बार उसके मोटे मोटे रसीले आम दिखे.

फिर उसके जिद करने पर हम दोनों ने कुल्फी ले ली.

हम वैसे तो 3 लोग थे. मैं, मेरा दोस्त और वो. लेकिन रीटा ने 2 ही कुल्फी लीं.
एक मेरे दोस्त केशु के लिए और दूसरी मेरे लिए.
बीच बीच में वो मेरी कुल्फी लेकर खा रही थी.

मुझे हैरानी इसलिए हुई कि जिधर से मैं खा रहा था, वहीं से वो भी जीभ से कुल्फी चूस रही थी.
उसे बड़ी अदा से चाट रही थी और खा रही थी.

मैं और मेरा दोस्त एक दूसरे की ओर देख कर मुस्कुरा दिए.

फिर मेट्रो में सवार होने के बाद रीटा मेरे बेहद करीब आकर खड़ी हो गई.
उसने मेरी टी-शर्ट को मुठ्ठी में जकड़ लिया था.

चूंकि अब भीड़ भी बढ़ने लगी थी तो वो मुझसे और भी चिपक गई.
मेरी हालत पतली हो रही थी, धड़कन तेज हो गई, सिर की नसें जोर जोर से चल रही थीं.

जनकपुरी जाते वक़्त मैंने उसका हाथ पकड़ा था, मगर अब वो मुझे नहीं छोड़ रही थी.

जब मेट्रो बदली तो आजमाने के लिए उसका हाथ छोड़ कर देखा, तो उसने वापस पकड़ लिया.
इससे मुझे अंदाज़ा हो गया था कि उसको मैं भा गया था.

मैं फेसरीडर था, सब समझ रहा था लेकिन फिर भी मन में बहुत डर था.

हम वापस रेलवे स्टेशन पहुंचे और तब तक 8 भी बज गए थे.
लेकिन रीटा अभी नहीं जाना चाहती थी तो हम एक जगह बैठ गए.

मेरा दोस्त पानी और कुछ खाने के लिए लेने चला गया.

रीटा बार बार मेरा हाथ दबा रही थी.
एक दो बार उसने मेरे हाथ को चूमा भी और मुझे रुकने के लिए बोल भी रही थी, पर वो संभव नहीं था.

मेरे दोस्त के आने के बाद हम रेलवे रूम की तरफ बढ़े तो पता लगा रूम अलॉट नहीं हुआ.
लेकिन एक हॉल में जगह मिल गई जहां तख्त डाले हुए थे और लोगों ने जगह कब्ज़ा रखी थी.

वहां सामान रखवा कर मैंने रीटा के लिए आराम करने की जगह बनाई.
जब मैं जाने लगा तो रीटा बोली- मैं नहा लेती हूं, उसके बाद चले जाना.

उस हॉल में एक बाथरूम था लेकिन उसका बाहर का दरवाजा टूटा हुआ था.
इसलिए मैं वहां खड़ा हो गया.

जब रीटा नहा कर आ गई, तब तक मुझे अन्दर से उत्तेजना होने लगी, जिसके चलते मेरे मन में हो चुका था कि कुछ हो ना हो, चुम्बन तो जरूर लेकर देखना चाहिए, फिर जो भी होगा देखा जाएगा.

मैंने घबराते हुए रीटा को देखते हुए अपने गाल की ओर इशारा किया, जिसे झट से उसने स्वीकार करते हुए मेरे दोस्त की तरफ इशारा किया.
मैंने मूक भाषा में उससे कहा कि ये साइड में चला जाएगा.

फिर हम खुद ही बाहर जाकर जगह देखने लगे.
मैं सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था, तभी रीटा ने पीछे से मुझे घुमा कर मेरे गाल पर चुम्बन ना देकर होंठों से होंठ मिला दिए और गहरे गहरे 5 चुम्बन धर दिए.

एक तरफ वासना हावी हो रही थी और दूसरी तरफ लोगों के आने का डर था, पुलिस भी घूम रही थी.

फिर भी मैं हिम्मत करके रीटा से लिपट गया और उसके आम से रसीले मम्मों को दबाने लगा.

उसके होंठ भी चूसे … और ऐसा करते हुए उसके कपड़ों में हाथ डालकर उसकी चुत में उंगली घुसा दी.
मैं उसकी चुत में जोर जोर से उंगली चलाने लगा.

उसकी मादक कराहें निकलने लगीं और वो मुझे दूर हटाने लगी.
मैंने जैसे ही हाथ निकाला, मेरा हाथ चिपचिपा हो चुका था.

वो उसके बाद भी कुतिया के जैसे हिले जा रही थी जो कि एक और नया अनुभव था.
क्योंकि मैं अक्सर ऐसे ही मेरी गली की कुतिया को उस वक्त हिलते देखा था, जब कुत्ता बीच में ही संभोग से हटा दिया जाता था.

इसके बाद मैं बिना मुड़े उसे तड़पता छोड़ कर घर की ओर निकल गया क्योंकि रात के 10 बज चुके थे और घर से मैं अभी भी 2.5 घंटे की दूरी पर था.

इसके बाद मेरी रीटा से फोन पर वॉट्सएप पर बहुत बातें हुईं और उसने मुझे अपनी हर फीलिंग बताई कि कब वो कैसा महसूस कर रही थी.

वहां से वापस घर निकलने के बाद मैं रास्ते में भी रीटा से चैट करते हुए आ रहा था.

वो मुझसे वापस आने का आग्रह किए जा रही थी.
लेकिन मैं अपने परिवार के साथ रहता था और हरियाणा के घरों के माहौल से आप सभी परिचित ना हों, तो बताना चाहूंगा कि अधिकांश परिजन बहुत सख्त होते हैं.

मेरे घर का माहौल भी कुछ ऐसा ही है.
अत: मैं नहीं रुक सकता था इसलिए मैंने रीटा से माफी भी मांग ली थी.

फिर उसने मुझसे अपना अनुभव साझा करना शुरू किया.

वो मेरी तारीफों के पुल बांधे जा रही थी. वो बोली- मुझे ये वक़्त हमेशा याद रहेगा. जैसे आपने मुझे संभाला, ख्याल रखा … और मेरे साथ पता नहीं क्या क्या किया.
मैंने उसे तारीफ के लिए धन्यवाद दिया.

अब रीटा अपने जज्बातों को एक एक करके मेरे सामने रखने लगी.

उसने मुझे बताया कि जब मेट्रो में भीड़ में मेरे पास खड़ी थी, तब वो मेरी सांसों को महसूस कर रही थी. उसका दिल कर रहा था कि मुझसे गले लग जाए. जब जब भीड़ में अनजाने में मेरा हाथ या मेरा सीना उसे छू रहा था, तो उसके बदन में करंट सा लग रहा था, इसलिए वो जानबूझ कर भी मुझे बार बार स्पर्श करने की कोशिशें भी कर रही थी.

ये बात सुनकर मैं रोमांचित हो उठा.
सच बताऊं तो मुझे भी उस वक्त बहुत अच्छा लग रहा था, जब भीड़ में ऐसा हो रहा था, पर मेरा जमीर मुझे अपनी मर्यादा तोड़ने की इजाज़त नहीं दे रहा था.

उसने मुझे ये भी बताया कि मुझे इशारा देने के लिए ही उसने नहाने का बोला था वरना सार्वजनिक बाथरूम में नहाना उसे पसन्द नहीं.
पर मैं ही नादान था जो उसके इशारे ना समझ सका.

इसके बाद वो स्पेशली मुझसे मिलने के लिए दिल्ली आई और तब हम दोनों के बीच क्या क्या घमासान हुए, ये मैं अगले भाग में बताऊंगा.
अब तक की सेक्स कहानी आपको कैसी लगी, मुझे ईमेल करके बताएं.

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आयेज की कहानी अगले पार्ट मे जल्दी ही आएगी. ओर भी जवान भाभी ओर आंटी को हॉट बाते करना ही तो आप मैल करे [email protected] आप की सारी डीटेल्स एक दम सीक्रेट रहेंगी उससे आप लोग बेफ़िक्र रहे.

अनजान भाभी से मुलाकात और सेक्स- 1

Xxx इंडियन भाभी की कहानी में पढ़ें कि कैसे मैंने एक भाभी ने मुझसे मदद मांगी. मैंने उसकी मदद की तो वो मेरे साथ खुलने लगी. मैंने उसे किस भी किया.

नमस्कार दोस्तो, मैं युवराज आप लोगों के साथ अपने वासना की कहानी का पहला अनुभव लेकर हाज़िर हुआ हूँ.
इस Xxx इंडियन भाभी की कहानी में लिखी एक एक बात सत्य है.

मैं हरियाणा का रहने वाला हूं. मेरा कद 5 फुट 8 इंच है, रंग गोरा है, उम्र 26 है. मैं सामान्य शरीर का मालिक हूं और मेरे लंड की लंबाई 7 इंच है.

यह कहानी वर्ष 2016 के अक्टूबर महीने में शुरू हुई थी.

मैं वैसे तो शर्मीले मिजाज़ का व्यक्ति हूं यानि कि लड़कियों से बात करने में घबरा जाता हूं, धड़कन बढ़ जाती है.

मैं एक फेसरीडर हूं और इंसान को पढ़ना अच्छे जानता हूं. लोगों की तकलीफ़ को महसूस करता हूं … और उनको यथासंभव सहारा भी देता हूं.

अब तक मैं 2500-3000 लोगों को गाइड कर चुका हूं.

लोग अपनी परेशानी लेकर आते हैं, मैं उनको समझता हूं और उन्हें सही दिशा ज्ञान देता हूं.

इसी के चलते एक महिला ने मुझसे संपर्क किया, जिसने अपना नाम रीटा बताया था.
वो जमशेदपुर की रहने वाली थी.

उसकी परेशानी को सुलझाकर मैं उसे भूल भी चुका था.

मेरे जीवन में ज्यादा दोस्त नहीं रहे. लोग स्वार्थ हेतु ही संपर्क में आते थे और आगे निकल जाते थे.
शायद इसलिए भी मुझे उनमें दोस्त नहीं दिखा क्योंकि मुझे लोगों की परख है.

मैंने अपने जीवन का उद्देश्य भी इसी बात को मान लिया कि लोगों की निस्वार्थ सहायता करनी है.
उनको खुशियां जहां तक हो सके, देने का प्रयास कर सकूँ.

किसी के मुझसे जुड़े रहने की आकांक्षा को भी मैंने त्याग दिया क्योंकि ऐसा करना मुझे तकलीफ़ देता था.

इसी के चलते मैं रीटा को भूल चुका था.

एक महीने बाद मेरे पास एक अनजान नंबर से फोन आया. जब मैंने पूछा- कौन बोल रहा है?
तो रीटा ने अपना परिचय दिया.

थोड़ी इधर उधर की बात करने के बाद रीटा ने मुझसे कहा- मैं अपने बच्चों से मिलने राजस्थान उनके हॉस्टल गई थी और अब वापस जमशेदपुर जा रही हूँ. लेकिन मेरी ट्रेन सीधे ना होकर दिल्ली से इंटरकनेक्ट है, जिसमें 12 घंटे का अंतराल है. मैं दिल्ली में किसी को जानती नहीं हूँ, तो क्या आप मेरी सहायता के लिए रेलवे स्टेशन आ सकते हैं?

मैंने थोड़ा सोचा, फिर सोच कर बताने को कहा. मैंने फोन रख दिया.

वो मेरे लिए अनजान थी कुछ भी हो सकता था … तो दुविधा में था.

इंसानियत के नाते मुझे जाना चाहिए था आखिर वो एक महिला है और उसने मुझे किसी उम्मीद के साथ कॉल किया था.

मैंने अपने एक साथी से बात की और उसे साथ चलने के लिए राज़ी कर लिया.

फिर रीटा को फोन करके अपने आने के लिए हामी भर दी.

अगले दिन ठीक 12 बजे में रेलवे स्टेशन पहुंच गया.
जहां वो पहले से मेरा इंतजार कर रही थी.

वो 35 साल की भरे जिस्म की युवती एक मॉडर्न लिबास में अपने साथ दो भारी भारी बैग लिए खड़ी थी.
उसने जिस्म की नुमाइश की, तो अंदाजन 36-30-38 का फिगर लगा, जो बाद में सही निकला.

औपचारिकता पूरी करने के बाद मैंने सबसे पहले उसके रूम का बंदोबस्त कराया और उसका सामान क्लॉक रूम के लॉकर में रखवा दिया.
कमरा रात को 8 बजे से पहले नहीं मिलना था तो मैं उसे अपने साथ ले गया.

मुझे उस दिन कुछ काम था, तो मैंने सोचा कि उसका भी समय अच्छे से निकल जाए.

मेरी मंशा कोई ग़लत नहीं थी.
मैं उसके साथ बड़ी इज्जत और तहजीब के साथ पेश आ रहा था.

हम चांदनी चौक से मेट्रो में सवार हुए और जनकपुरी की तरफ चल दिए.
रास्ते में जो भी नजर आता, मैं उसके बारे में उसे बताने लगता!
कभी उसके साथ थोड़ा हंसी मजाक भी कर लेता, तो वो भी मुस्कुरा देती.

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एक जगह मेट्रो बदलनी थी तो हम प्लेटफॉर्म पर खड़े थे.
बहुत भीड़ थी जिसके चलते मैंने उसका हाथ पकड़ लिया था … क्योंकि एक जगह उसका पैर फिसल भी गया था.
ऐसा फिर से ना हो, इसलिए मैंने हाथ पकड़ना ठीक समझा.

ऐसे ही बातें करते हुए हम जनकपुरी पहुंच गए.

जब वहां से काम निपटा कर वापस चलने लगे तो हमें भूख लग आई थी.

हम दोनों ने दिल्ली हाथ में पाव भाजी खाई और बात करने लगे.
यहां से मुझे रीटा का बर्ताव बदला बदला लगने लगा.

पहले तो उसने मुझे पैसे नहीं देने दिए, खुद ही दिए.

उसकी जेब में पैसे थे, फिर भी वो झुकी और मेरे सामने बैग से पैसे निकालने लगी.
इस दौरान मुझे पहली बार उसके मोटे मोटे रसीले आम दिखे.

फिर उसके जिद करने पर हम दोनों ने कुल्फी ले ली.

हम वैसे तो 3 लोग थे. मैं, मेरा दोस्त और वो. लेकिन रीटा ने 2 ही कुल्फी लीं.
एक मेरे दोस्त केशु के लिए और दूसरी मेरे लिए.
बीच बीच में वो मेरी कुल्फी लेकर खा रही थी.

मुझे हैरानी इसलिए हुई कि जिधर से मैं खा रहा था, वहीं से वो भी जीभ से कुल्फी चूस रही थी.
उसे बड़ी अदा से चाट रही थी और खा रही थी.

मैं और मेरा दोस्त एक दूसरे की ओर देख कर मुस्कुरा दिए.

फिर मेट्रो में सवार होने के बाद रीटा मेरे बेहद करीब आकर खड़ी हो गई.
उसने मेरी टी-शर्ट को मुठ्ठी में जकड़ लिया था.

चूंकि अब भीड़ भी बढ़ने लगी थी तो वो मुझसे और भी चिपक गई.
मेरी हालत पतली हो रही थी, धड़कन तेज हो गई, सिर की नसें जोर जोर से चल रही थीं.

जनकपुरी जाते वक़्त मैंने उसका हाथ पकड़ा था, मगर अब वो मुझे नहीं छोड़ रही थी.

जब मेट्रो बदली तो आजमाने के लिए उसका हाथ छोड़ कर देखा, तो उसने वापस पकड़ लिया.
इससे मुझे अंदाज़ा हो गया था कि उसको मैं भा गया था.

मैं फेसरीडर था, सब समझ रहा था लेकिन फिर भी मन में बहुत डर था.

हम वापस रेलवे स्टेशन पहुंचे और तब तक 8 भी बज गए थे.
लेकिन रीटा अभी नहीं जाना चाहती थी तो हम एक जगह बैठ गए.

मेरा दोस्त पानी और कुछ खाने के लिए लेने चला गया.

रीटा बार बार मेरा हाथ दबा रही थी.
एक दो बार उसने मेरे हाथ को चूमा भी और मुझे रुकने के लिए बोल भी रही थी, पर वो संभव नहीं था.

मेरे दोस्त के आने के बाद हम रेलवे रूम की तरफ बढ़े तो पता लगा रूम अलॉट नहीं हुआ.
लेकिन एक हॉल में जगह मिल गई जहां तख्त डाले हुए थे और लोगों ने जगह कब्ज़ा रखी थी.

वहां सामान रखवा कर मैंने रीटा के लिए आराम करने की जगह बनाई.
जब मैं जाने लगा तो रीटा बोली- मैं नहा लेती हूं, उसके बाद चले जाना.

उस हॉल में एक बाथरूम था लेकिन उसका बाहर का दरवाजा टूटा हुआ था.
इसलिए मैं वहां खड़ा हो गया.

जब रीटा नहा कर आ गई, तब तक मुझे अन्दर से उत्तेजना होने लगी, जिसके चलते मेरे मन में हो चुका था कि कुछ हो ना हो, चुम्बन तो जरूर लेकर देखना चाहिए, फिर जो भी होगा देखा जाएगा.

मैंने घबराते हुए रीटा को देखते हुए अपने गाल की ओर इशारा किया, जिसे झट से उसने स्वीकार करते हुए मेरे दोस्त की तरफ इशारा किया.
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फिर हम खुद ही बाहर जाकर जगह देखने लगे.
मैं सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था, तभी रीटा ने पीछे से मुझे घुमा कर मेरे गाल पर चुम्बन ना देकर होंठों से होंठ मिला दिए और गहरे गहरे 5 चुम्बन धर दिए.

एक तरफ वासना हावी हो रही थी और दूसरी तरफ लोगों के आने का डर था, पुलिस भी घूम रही थी.

फिर भी मैं हिम्मत करके रीटा से लिपट गया और उसके आम से रसीले मम्मों को दबाने लगा.

उसके होंठ भी चूसे … और ऐसा करते हुए उसके कपड़ों में हाथ डालकर उसकी चुत में उंगली घुसा दी.
मैं उसकी चुत में जोर जोर से उंगली चलाने लगा.

उसकी मादक कराहें निकलने लगीं और वो मुझे दूर हटाने लगी.
मैंने जैसे ही हाथ निकाला, मेरा हाथ चिपचिपा हो चुका था.

वो उसके बाद भी कुतिया के जैसे हिले जा रही थी जो कि एक और नया अनुभव था.
क्योंकि मैं अक्सर ऐसे ही मेरी गली की कुतिया को उस वक्त हिलते देखा था, जब कुत्ता बीच में ही संभोग से हटा दिया जाता था.

इसके बाद मैं बिना मुड़े उसे तड़पता छोड़ कर घर की ओर निकल गया क्योंकि रात के 10 बज चुके थे और घर से मैं अभी भी 2.5 घंटे की दूरी पर था.

इसके बाद मेरी रीटा से फोन पर वॉट्सएप पर बहुत बातें हुईं और उसने मुझे अपनी हर फीलिंग बताई कि कब वो कैसा महसूस कर रही थी.

वहां से वापस घर निकलने के बाद मैं रास्ते में भी रीटा से चैट करते हुए आ रहा था.

वो मुझसे वापस आने का आग्रह किए जा रही थी.
लेकिन मैं अपने परिवार के साथ रहता था और हरियाणा के घरों के माहौल से आप सभी परिचित ना हों, तो बताना चाहूंगा कि अधिकांश परिजन बहुत सख्त होते हैं.

मेरे घर का माहौल भी कुछ ऐसा ही है.
अत: मैं नहीं रुक सकता था इसलिए मैंने रीटा से माफी भी मांग ली थी.

फिर उसने मुझसे अपना अनुभव साझा करना शुरू किया.

वो मेरी तारीफों के पुल बांधे जा रही थी. वो बोली- मुझे ये वक़्त हमेशा याद रहेगा. जैसे आपने मुझे संभाला, ख्याल रखा … और मेरे साथ पता नहीं क्या क्या किया.
मैंने उसे तारीफ के लिए धन्यवाद दिया.

अब रीटा अपने जज्बातों को एक एक करके मेरे सामने रखने लगी.

उसने मुझे बताया कि जब मेट्रो में भीड़ में मेरे पास खड़ी थी, तब वो मेरी सांसों को महसूस कर रही थी. उसका दिल कर रहा था कि मुझसे गले लग जाए. जब जब भीड़ में अनजाने में मेरा हाथ या मेरा सीना उसे छू रहा था, तो उसके बदन में करंट सा लग रहा था, इसलिए वो जानबूझ कर भी मुझे बार बार स्पर्श करने की कोशिशें भी कर रही थी.

ये बात सुनकर मैं रोमांचित हो उठा.
सच बताऊं तो मुझे भी उस वक्त बहुत अच्छा लग रहा था, जब भीड़ में ऐसा हो रहा था, पर मेरा जमीर मुझे अपनी मर्यादा तोड़ने की इजाज़त नहीं दे रहा था.

उसने मुझे ये भी बताया कि मुझे इशारा देने के लिए ही उसने नहाने का बोला था वरना सार्वजनिक बाथरूम में नहाना उसे पसन्द नहीं.
पर मैं ही नादान था जो उसके इशारे ना समझ सका.

इसके बाद वो स्पेशली मुझसे मिलने के लिए दिल्ली आई और तब हम दोनों के बीच क्या क्या घमासान हुए, ये मैं अगले भाग में बताऊंगा.
अब तक की सेक्स कहानी आपको कैसी लगी, मुझे ईमेल करके बताएं.

मैं उम्मीद करता हूं कि आप जब इस Xxx इंडियन भाभी की कहानी का अगला भाग पढ़ेंगे, तो वासना के सागर में गोते लगाएंगे.
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Xxx इंडियन भाभी की कहानी का अगला भाग: अनजान भाभी से मुलाकात और सेक्स- 2

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