पाठिका की सीलपैक चूत सिनेमाहॉल में चोदी

यह एक्स एक्स एक्स कहानी एक साधारण लड़की की है जिसे कोई लड़का पसंद नहीं करता था पर उस लड़की को चुदाई की तलब थी. मैंने कैसे उसे सिनेमाहाल में चोदा.

नमस्कार दोस्तो, मैं राम प्रकाश हूँ. आपने मेरी पहली सेक्स कहानी
क्लासमेट की चुदाई उसकी शादी के बाद
पढ़ी थी.
आप लोगों ने जितनी तादाद में मेल किए, उससे प्रभावित होकर मैं आज अपनी दूसरी सेक्स कहानी लिख रहा हूँ.

मुझे बहुत सी लड़कियों, भाभियों, आंटियों के मेल मिले. लगभग वो सभी चूत वालियां अपनी चूत को फड़वाने के लिए बेचैन रहती थीं.

बहुत लोगों ने उनकी चूत चुदाई की और उनकी चूत को चाटने का मज़ा लेने का मौका लिया.
अब उन चूत वालियों की आदत सी हो गयी है कि उनकी चूत में किसी मर्द का लंड घुस जाए या कोई उनकी चुतों को चाट कर उन्हें सुख दे दे.

चूत चाटने का नशा ही कुछ और है. चूत चटाई के बाद लंड से उनकी ताबड़तोड़ चुदाई करवाने के बाद उनको जो परम संतुष्टि मिलती है, वह मैं अपने शब्दों में बयां नहीं कर सकता हूँ.

मेरी यही आशा भी और उम्मीद भी है कि मेरी इस एक्स एक्स एक्स कहानी को भी पढ़कर आप लोगों के तन मन में आग लग जाएगी.

मेरी पहली कहानी प्रकाशित होने के बाद मुझे रीमा नाम की लड़की का मेल आया.
इस मेल में रीमा ने मेरी कहानी की तारीफ की थी.
मैंने रिप्लाई में उसको शुक्रिया बोला.

कुछ औपचारिक मेल के बाद हमारी अच्छी दोस्ती हो गयी.
उसने बताया कि वो गोवा में सेकंड इयर कॉलेज स्टूडेंट है और रूम लेकर रहती है.

अपनी सहेलियों से ही उसने अन्तर्वासना को पढ़ना सीखा.
अब वो अपनी चूत में उंगली डालकर अपने अन्दर की आग शांत कर लेती थी.

उसने बोला कि वो पहली बार किसी स्टोरी को पढ़कर उसके रचनाकार को मेल करने की हिम्मत जुटा पाई.
उसने बातों बातों में यह भी बोला कि उसको अन्तर्वासना की स्टोरी की तरह ताबड़तोड़ चुदाई की बहुत ज्यादा ख्वाहिश है, साथ ही उसने यह भी कहा कि उसने अभी तक अपनी चूत का मज़ा किसी को लेने नहीं दिया है.

उसकी ये बात जानकर कि वो सीलपैक माल है, मेरे लंड ने अंगड़ाई ले ली.

मैंने उससे कहा- अपनी फोटो भेजो.
उसने कहा- मैं दिखने भी थोड़ी मोटी हूँ और एक पढ़ाकू बहनजी टाइप की लगती हूँ.

मैंने कहा- तो उससे क्या होता है?
मेरा आशय उसकी चूत को लेकर था कि किसी भी लड़की की चूत तो होती ही है.

मगर वो कहने लगी- मैं ऐसी हूँ इसीलिए तो लड़कों ने मुझ पर कभी ध्यान ही नहीं दिया.

अब उसने अपनी दास्तान सुनानी शुरू कर दी कि कॉलेज में आने के बाद उसको थोड़ा आजादी मिली और उसकी दोस्ती भी थोड़ा आजाद ख्याल की लड़कियों से हो गयी. उसकी सहेलियां अपनी चुदाई का किस्सा बड़े चाव से सुनाती थीं.
उसकी सहेलियों में से ही एक लड़की अन्तर्वासना की लेखिका भी थी.

अब इतना सब आपके आस पास हो रहा हो तो किसी का भी मन आउट ऑफ कंट्रोल हो जाएगा.
पर बहन जी टाइप की लड़कियों की आदत होती है ना … वो अपने आपको कभी जाहिर ही नहीं होने देती हैं कि वो क्या चाहती हैं.
रीमा अपने अन्दर की अन्तर्वासना को सेक्स कहानी पढ़कर और अपनी चूत में उंगली डाल कर शांत करती थी.

छह महीने तक अन्तर्वासना की पाठिका बनने के बाद उसको अपनी चूत चुदवाने की आग लग गई.

उसके सामने मेरी कहानी आ गई थी और उसने मुझको मेल करने का सोची. इस तरह उसने सबसे पहले मुझे मेल की थी.

रीमा अपनी चुदाई तो करवाना चाहती थी, पर उसने मेरे सामने शर्त रखी कि वो अपना मोबाइल नंबर मुझे नहीं देगी और न ही अपनी फोटो भेजेगी.

उसके अनुसार अगर मुझे उसकी चूत की चुदाई की चाहत है, तो पहले हम दोनों को मिलना होगा.
अगर हम दोनों को अच्छा लगेगा, तभी वो अपनी चूत की ताबड़तोड़ चुदाई के लिए राजी होगी.

मुझे उसकी शर्त मजेदार लगी.

हमारा एक दूसरे को संपर्क करने का जरिया केवल मेल ही था.
आखिरकार रीमा से मिलने का दिन फिक्स हो गया.

उसने बताया कि वो जिसके यहां किराए से रहती है, उनकी पूरी फैमिली 3 दिनों के लिए बाहर जा रही है. वो उन तीन दिनों में घर में एकदम अकेली थी तो वो बेफिक्र होकर मुझे अपने रूम में बुला सकती थी.

उसका ये मेल पढ़कर मेरा लंड पूरी तरह से फनफना गया और उसकी चुदाई की कल्पना करते हुए मैंने अपने हाथ से अपना लंड हिला कर अपने आपको शांत कर लिया.

उसने मुझे दो दिन बाद मिलने बुलाया था.

मेरा जॉब गोवा सिटी से 4 घंटे की दूरी पर था तो मैं उसी दिन शाम को ऑफिस से 4 दिनों छुट्टी लेकर गोवा पहुंच गया.

गोवा में मैंने पहले दिन बागा बीच पर रूम ले लिया.
दोस्तो, बागा बीच सच में जन्नत जैसा है.

रूम लेने के बाद मैंने रीमा को बताया कि मैं गोवा आ गया हूँ.
वो चौंक गयी, पर मेरी ये तड़प उसको अच्छी लगी.

फिर उसने मेरे सामने और शर्त रख दी कि वो मुझसे मिलने बागा बीच में आएगी तो जरूर, पर अब भी अपनी पहचान नहीं बताएगी.
उसने ये पक्का ही कर लिया था कि जिस दिन उसको अपनी सील तुड़वाना होगी, उसी दिन वो मेरे सामने आएगी.

उस दिन वो मुझसे मिलने बागा बीच में आई भी थी. वो मेरे आसपास ही बीच के किनारे पर थी.

मैं सभी अकेली लड़की में रीमा को ही देख रहा था. मेरा लंड उससे मिलने की चाह में ऐसे ही खड़ा हो रहा था. मिलने की ये चाहत हम दोनों को ही रोमांचित कर रही थी.

दूसरे दिन उसे भी मुझसे मिले बगैर रहा नहीं गया.
उसने फाइनली मुझे पंजिम में एक रेस्टारेंट में बुलाया.

दस बजे मैं उस रेस्टारेंट में पहुंच गया. मैंने उसको मेल किया कि मैं रेस्टारेंट पहुंच गया हूँ और गेट के सामने खड़ा हूँ. दो मिनट बाद वो बाहर आयी और मुझे मेरे नाम से आवाज दी.
तब वो पहला पल था, जब हमने एक दूसरे को देखा था.

उसने उस दिन लाइट ब्लू कलर का सलवार सूट पहन रखा था.
उसकी ऊंचाई 5 फुट 5 इंच की थी और शरीर भरा हुआ था.
उसे दिखने में थोड़ी मोटी बोल सकते हैं.
जैसा उसने अपने बारे में बताया था, वो लगभग वैसी ही थी.

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उसका मेकअप देख कर लग रहा था कि उसने इससे पहले आज तक इतना ज्यादा मेकअप नहीं किया होगा.

हम लोग अब रेस्टोरेंट के अन्दर गए और ब्रेकफास्ट का ऑर्डर दे दिया.
उसकी नजरें मुझे बार बार देखतीं और फिर नीचे हो जाती थीं.

उसके हाथ पैर कांप रहे थे और धड़कन बढ़ी हुई थी. ये मैं महसूस कर सकता था.
चूंकि हम दोनों एक दूसरे के सामने बैठे थे तो मैं उठ कर उसके बगल में उससे चिपक कर बैठ गया और अपना हाथ सीधे उसकी जांघों में रख दिया.

मेरी इस हरकत से वो एकदम से सनाका खा गयी, जैसे उसे सांप सूंघ गया हो.
वो कुछ भी नहीं बोल पा रही थी.

इतने में हमारा ब्रेकफास्ट आ गया तो मैंने अपना हाथ उसकी जांघों से हटा दिया.

फिर ब्रेकफास्ट खत्म होते तक उसने कुछ बात ही नहीं की और न ही नजरें उठा कर देखा.
हमने ब्रेकफास्ट खत्म किया.

फिर मैंने उससे आज का प्लान पूछा.
चूंकि ये हमारी चुदाई का दिन नहीं था. तो हमने घूमने का प्लान बनाया.

उसके पास स्कूटी थी, तो मुझे मेरी मर्जी से कहीं भी घुमाने को तैयार थी.

मेरा मन तो उसकी आज ही चुदाई करने का था, पर कुछ जुगाड़ नहीं बन रहा था. मन मारकर मैंने उससे कहा कि लांग ड्राइव पर ले चलो.

वो मुझे 60 किलोमीटर दूर एक जू में ले जाने को तैयार हो गयी.

पहले तो मैंने ही ड्राइविंग की और वो रास्ता दिखा रही थी.
ड्राइविंग के दौरान मैं जानबूझ उसके मम्मों से टकरा रहा था और वो मुस्कुरा देती थी.

बीस किलोमीटर ड्राइविंग के बाद मैंने उसको ड्राइविंग के लिए बोला क्योंकि अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था.

उसको अपनी बांहों में भरने की मेरी तड़प बढ़ती जा रही थी.

अब वो ड्राइविंग कर रही थी और मैं उसके पीछे बैठा था.
मैंने तो पहले उसके कमर को पकड़ लिया और अपनी दोनों टांगों से उसकी टांगों को दबाने लगा.

मेरी इस हरकत से उसको बहुत ख़ुशी हो रही थी, उसको खुश होता देख मेरी हिम्मत और बढ़ गयी.
अब मैंने अपनी बांहों का घेरा उसके पूरे जिस्म में कस दिया और उसको जकड़ लिया.

अब उसकी झिझक लगभग खत्म हो गयी थी और अब वो भी ड्राइविंग करती हुई मेरे अन्दर और समा कर बैठ गयी थी.
इधर मेरे लंड का तनाव भी वो अपने गांड में महसूस करने लगी थी. इसलिए अब वो अपनी गांड बार बार उठा कर मेरे लंड में घुसी जा रही थी.

उसे सच में बहुत मज़ा आ रहा था.
तभी मैंने अचानक पीछे से अपने हाथ आगे किए और उसके दोनों मम्मों को जोर से पकड़ लिया.

एक हल्की सी सिसकारी के साथ वो मेरे पीछे को झुक गई और उसने अपनी आंखें बंद कर लीं.
कुछ देर के लिए तो वो भूल ही गयी कि वो ड्राइविंग कर रही है.

मैंने उससे कहा- यार, ड्राइविंग पर भी ध्यान दो.
ये कह मैंने एक बाईट उसके गले में दे दिया.

वो थोड़ा सिहरी और मुझसे चिपक कर ही ड्राइविंग करने लगी.

रास्ता थोड़ा सुनसान होने पर अब मैंने उससे गाड़ी को रुकवाया और पहली बार उसको बांहों में भर लिया.
वो भी मेरी बांहों में समाने के लिए तड़प रही थी.

मैंने उसको लिप किस किया और उसके मम्मों को जोर से मसलते हुए उसकी मम्मों की बहुत तारीफ की.

धीरे धीरे मेरा हाथ उसके टांगों के बीच जाने लगा तो उसने रोक दिया.
वो बोली- यार, आज चुदाई का दिन नहीं है … थोड़ा कंट्रोल करो और मुझे भी कंट्रोल में रहने दो.

अभी हम दोनों कुछ और करते, उससे पहले ही कुछ लोग आ गए.
फिर हम लोग आगे अपनी मंजिल की ओर निकल पड़े.

अब भी ड्राइविंग वही कर रही थी. मुझे उसके पीछे बैठने में ही मज़ा आ रहा था.
अब तो मैं उसके सभी अंगों में अपना हाथ फिरा रहा था.
मेरा हाथ बार बार उसकी दोनों टांगों के बीच जा रहा था और बार बार वो मना कर रही थी.

मैंने उसे समझाया कि आज भले चुदाई नहीं हो, पर बाहर से तो चूत का मज़ा लेने दो.
उसकी नानुकुर के बाद भी मैंने उसकी चूत को रगड़ दिया.

कुछ देर वो फिर शान्त रही, फिर उसने अपनी टांगें खोल दीं.
मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली डाल दी.

मेरे ऐसा करते ही वो चिहुंक उठी और उसने गाड़ी को रोक दी.
वो रिक्वेस्ट करने लगी कि प्लीज अब इससे आगे कुछ मत करो.

मैंने भी उसको किस किया और सॉरी बोल कर कहा- ठीक है जान और कुछ नहीं करूंगा.

अब वो फिर से ड्राइविंग करने लगी.
मुझे तो अभी भी शरारत सूझ रही थी.

मैंने फिर से उसकी चूत में उंगली घुसा दी. इस बार मैंने महसूस किया कि वो पूरी तरह से गीली हो गयी थी.
उसकी चूत का पानी उसके कपड़ों को पार करता हुआ मेरी उंगली को भिगो गया था.

उसकी चूत की पानी की सुगंध से तो मैं पागल घोड़े की तरह हो गया. मेरा दिल उसकी चूत का स्वाद चखने के लिए पूरी तरह तड़प उठा.

मैंने रीमा से कहा कि यार अब तो जरा सा भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है.
मुझे तो आज ही तुम्हारी चुदाई करनी है.

आग तो रीमा की भी भड़क गई थी, पर कल के दिन वो पूरे इत्मीनान से चुदवाना चाहती थी इसलिए फिर से उसने मुझे कण्ट्रोल में रहने को बोला.

खैर … अब हमारी मंजिल आ गयी थी.
हमने चिड़ियाघर घूमकर थोड़ा एन्जॉय किया.

पर उधर हम लोग ज्यादा नहीं रुके. हमें तो ज्यादा मज़ा ड्राइविंग में ही आ रहा था.
इस बार मैं ड्राइविंग कर रहा था और वो अब लड़कों की तरह अपनी दोनों टांग दोनों बाजू लटका कर मेरे पीछे बैठ गयी.
उसने अपने मम्मों को मेरी पीठ से पूरी तरह चिपका दिया.

मैं भी अब उसके मम्मों के साथ ड्राइविंग का मज़ा लेने लगा.
मैंने एक कदम और आगे बढ़ाया.

अब मैं उसके हाथ को अपने लंड के पास ले गया और उससे लंड पकड़ने को बोला.
वो अब तक पूरी तरह से खुल गयी थी, तो उसे भी अब मेरा साथ देने में मज़ा आने लगा.

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इस समय रास्ता पूरा सुनसान हो गया था, तो मैंने अपने पैंट की चैन खोल कर अपना लंड उसके हाथों में दे दिया.
उसने मेरा लंड पकड़ लिया और अपने दुपट्टे से ढक कर लंड सहलाने लगी.

मैंने उससे लंड हिलाने के लिए बोला, तो वो मेरे लंड को हिलाने लगी.
उसे मेरा लंड पकड़ कर हिलाने में बहुत मज़ा आ रहा था.

कुछ देर तक वो मेरा लंड हिलाती रही, इससे मैं भी झड़ गया.

फिर शहर आने से पहले हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए.

कुछ देर और ड्राइविंग करने के बाद अचानक बारिश होने लगी.
उस बारिश में हम लोग लगभग आधे गीले हो गए थे पर कोई रुकने की जगह ही नहीं मिल रही थी.

कुछ दूरी पर लोग बारिश से बचने के लिए रुक गए थे तो हम दोनों भी वहीं रूक गए.

उस भीड़ में हम दोनों ने पीछे की जगह ले ली.
मैं दीवार के सहारे … और रीमा मेरे सहारे वहां खड़ी हो गयी.

रीमा की गांड मेरे लंड से टकरा रही थी जिससे मेरा लंड फिर से उफान पर आ गया.

मैंने रीमा को अपनी तरफ थोड़ा खींच लिया जिससे मेरा लंड रीमा की गांड के बीच में घुस गया.
रीमा ऐसे रियेक्ट कर रही थी, जैसे कुछ हुआ ही न हो.
बेचारी वो करती भी क्या … इतनी भीड़ जो थी.

फिर बारिश के बंद होते तक मैंने रीमा की गांड में अपना लंड घुसाए ही रखा था और रीमा को भी इससे बहुत मज़ा आ रहा था.

बारिश पूरी तरह से बंद हो चुकी थी और हम लोग भी वापस पणजी पहुंच गए थे.

उस समय 3 बज रहे थे, तो मैंने रीमा से कहा- यार चलो मूवी देखने चलते हैं.
इस पर वो भी रेडी हो गयी.

हमने पणजी के एक सिनेमा हॉल में बालकनी की टिकट ले ली.
हमारे अलावा उस हॉल में एक और कपल था.
बाकी हॉल खाली था.

मूवी शुरू हुयी और जैसे ही अंधेरा हुआ.
मैंने रीमा को पकड़ कर उसके गालों को किस कर लिया.
वो भी मुझे किस करने लगी.

तभी वो बोली- आज का दिन मेरे लिए सचमुच बहुत यादगार दिन रहेगा.

हॉल में जो दूसरा कपल था, वो हम दोनों से दूर दूसरे कोने में था.
उन्होंने तो चुदाई करना भी शुरू कर दिया था.

मैंने रीमा को बोला- देखो रीमा, लाइव चुदाई चल रही है.
इतना बोल कर मैंने अपना पैंट खोलकर अपने लंड को आज़ाद कर दिया और रीमा के हाथ में दे दिया.

रीमा मेरे लंड को देख कर आश्चर्यचकित हो गयी और बहुत खुश भी.
आखिर उसका बड़े लंड से सील तुड़वाने का सपना जो पूरा होने वाला था.

मैंने उसके मम्मों को भी उसके कपड़ों से आज़ाद कर दिया और चूसने लगा.
इससे वो अपना सुध बुध खो बैठी और उसने अपनी आंखें बंद कर लीं.

वो मादक सिसकारी भरने लगी और उसने मेरे लंड को बहुत मजबूती से जकड़ लिया.
मैं उसको सभी जगह चूमे जा रहा था और वो मदहोश होती जा रही थी.

चूंकि दूसरा कपल तो अपनी चुदाई में मशगूल था तो उनको कोई फर्क नहीं पड़ रहा था कि हम लोग क्या कर रहे हैं.
हम लोग भी निश्चिंत हो गए थे.

अब मैंने रीमा की सलवार का नाड़ा खोल दिया.
मेरे ऐसा करने पर उसने मेरा लंड छोड़ कर मेरे हाथ को पकड़ लिया और मना करने लगी.

मैंने जबरदस्ती उसकी सलवार को नीचे सरका दिया और पैंटी के अन्दर उसकी चूत में उंगली को डाल दिया.
उंगली डालने के पहले तक तो वो मेरा भरपूर विरोध करती रही पर जैसे ही मेरी उंगली उसकी चूत में घुसी, वो पूरी तरह बदल गयी और उसने अपनी टांगें फैला दीं.

मैंने उसकी पैंटी को भी घुटने के नीचे सरका दिया.
उसने कोई विरोध नहीं किया.

अब उसकी नंगी चूत मेरे सामने थी, मैं कुर्सी से नीचे जमीन पर बैठ गया और उसकी चूत की सहलाते हुए फिर से उंगली को चूत के अन्दर डाल दिया.

उसकी चूत तो बहुत ही ज्यादा गीली हो गयी थी.
मैंने उसकी चूत को किस करते हुए जीभ को उसकी चूत के अन्दर घुसा दिया.
इससे तो वो पागल ही हो गयी और मेरे सर को जोर से पकड़ कर चूत में दाबने लगी.

फाइनली उसने बोला- जान प्लीज मेरी अभी चुदाई करो!
इतना बोल कर उसने मुझे कुर्सी पर बिठा दिया और मेरे ऊपर आकर बैठ गयी.

मेरे आज़ाद लंड को उसने डायरेक्ट अपनी चूत में भर लिया.

मेरा लंड इतना बड़ा होने के बाद भी एक ही झटके में पूरा अन्दर घुस गया और वो आंखें बंद करके निढाल होकर मेरे ऊपर झुक गयी.
उसकी चीख निकली और वो निढाल होकर बेहोश हो गई.

उसकी चीख से बगल में चुदाई कर रहे कपल ने ‘बधाई हो’ की आवाज दे दी.
मैं अनसुना करके रीमा को चोदने लगा.

कुछ ही देर में रीमा को होश आ गया और वो उन्ह आंह करती हुई मेरे लंड को अपनी चूत में आता जाता महसूस करने लगी.

कुछ ही देर में वो झड़ चुकी थी, पर मेरा लंड अभी उसकी चूत में ही था.
जैसे ही मैंने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाला, उसकी चूत से खून निकलने लगा.
खून बहता हुआ मेरे लंड से होता मेरे जांघों में भी आने लगा.

हम दोनों ने बाथरूम जाकर उसकी सफाई की और फिर से ताबड़ तोड़ चुदाई के लिए हाल में आ गए.

इस बार मैंने रीमा को जमीन पर लिया दिया और लगभग 30 मिनट चुदाई की.

इस तरह दोस्तो, रीमा की सील पैक चूत की चुदाई उसके तय किए दिन के एक दिन पहले ही हो गयी, वो भी सिनेमा हॉल में!

मैंने ये जो भी लिखा है, हर एक शब्द सत्य घटना है.
मेरे और रीमा की मुलाकात के दौरान हुआ सच एक सेक्स कहानी के रूप में आपके सामने है.

अब आपको मेरी एक्स एक्स एक्स कहानी जैसी भी लगी हो, मुझे मेल करें.
मेरा ईमेल पता है
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