ट्रेन में लड़के को पटाया, घर बुलाकर चुदवाया

भाभी सेक्स Xxx कहानी में पढ़ें कि फर्स्ट क्लास कूपे में कैसे मैंने एक लड़के के साथ सेक्स की बातें करके उसे सेट किया, फिर घर बुलाकर उसके बड़े लंड का मजा लिया.

यह कहानी सुनें.

मेरा नाम बरखा तिवारी है. मैं रहने वाली तो कानपुर की हूँ लेकिन आजकल मैं मुंबई में काम कर रही हूँ.

मैं उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त हूँ इसलिए मैं यहां मुंबई में एक बहुत बड़े कॉर्पोरेट में एक उच्च पद पर काम कर रही हूँ.

मुझे आमतौर पर अक्सर बाहर आना जाना पड़ता है. ज्यादातर बार मैं हवाई जहाज से ही जाती हूँ, पर कभी कभी ट्रेन से भी चली जाती हूँ.

मैं बेहद खूबसूरत हूँ, गोरी चिट्टी हूँ, लंबे लंबे बालों वाली और बड़े बड़े बूब्स वाली एक स्मार्ट महिला हूँ.
साड़ी और स्लीवलैस और गहरे गले वाला ब्लाउज पहनना मैं ज्यादा पसंद करती हूँ, पर कभी कभी टॉप और जीन्स में भी रहती हूँ.

एक बार मुझे दिल्ली से मुंबई ट्रेन से आना पड़ा.
मैं प्रथम श्रेणी के एसी कूपे में थी, जिसमें 4 बर्थ होती हैं.

दिल्ली से चारों भरी हुई थीं लेकिन अगले दिन सुबह 4 बजे दो बर्थ खाली हो गईं. अब दो ही बची थी. एक में मैं थी और एक पर एक मस्त जवान लड़का था, जिसका नाम रोहित था.

उसका नाम मैंने लिस्ट में देख लिया था.
लड़का मुझे एक ही नज़र में भा गया था लेकिन मैं उससे कुछ बोली नहीं थी.

अब जब वो मेरे सामने अकेला था, तो मैं उससे बोली.

मैंने पूछा- आपको कहां तक जाना है रोहित?
वो मेरे मुँह से अपना नाम सुनकर एक बार को तो चौंका, मगर मैंने तभी उसे बता दिया कि मैंने तुम्हारा नाम बाहर आरक्षण सूची में देख लिया था.

वो मुस्कुरा कर बोला- भाभी, मुझे तो मुंबई तक जाना है.
मैंने फिर से पूछा- ओके, वहां क्या करते हो?

वो- मैं उधर एक कंपनी में काम करता हूँ.
मैंने पूछा- किधर के रहने वाले हो?

वो- मैं दिल्ली से हूँ.
फिर इसी तरह से मैंने उसे थोड़ी सी लिफ्ट दी तो वो मेरी तरफ आसक्त होने लगा.

मैंने पूछा- तुम मैरिड हो या नहीं?
वो- नहीं, अभी मैं अनमैरिड हूँ.

मैं- तुम्हारी पसंद क्या क्या हैं?
इस बार वो थोड़ा रुका, फिर बोला- लिखना पढ़ना और म्यूज़िक.

मैं- अरे वाह … तुम्हारी इस भरी जवानी में तुम्हारी पसंद तो बड़े बुज़ुर्गों वाली हैं.
वो हंसने लगा और बोला- भाभी जी, पसंद तो कुछ और भी हैं, पर वो सब बताने वाली नहीं हैं मेम!

मैंने आंख मारते हुए कहा- क्या बताने में तेरी गांड फट रही है?
गांड शब्द सुनकर उसने मेरी तरफ हैरानी से देखा, तो मैं फिर से बोली- हां हां … गांड फट रही है क्या तेरी बताने में?

अब उसने बड़ी बिंदास मुद्रा में कहा- बताने में तो नहीं फट रही है लेकिन बताने के बाद कहीं आप मेरी गांड न फाड़ दें, इस बात से डर लग रहा है.
मैं इसी बात से उस पर फिदा हो गयी और उसे अपना दिल दे बैठी.

मैंने कहा- अच्छा अब खुल कर बताओ कि तुम्हारी क्या क्या पसंद हैं?
वो बोला- सेक्स स्टोरीस पढ़ना, पॉर्न मूवीस देखना और लड़कियों के साथ घूमना.

मैंने कहा- अच्छा सिर्फ़ घूमते ही हो कि कभी उन्हें ठोकते भी हो?
वो थोड़ा शर्माते हुए बोला- हां, कभी अवसर मिले तो ठोक भी लेता हूँ.

मैंने उसे छेड़ते हुए फिर से कहा- अच्छा ये बताओ कि अच्छी तरह ठोक लेते हो कि बस ऐसे ही पुल्ल पुल्ल करके पानी निकाल देते हो?
वो बोला- नहीं भाभी, अच्छी तरह ठोक लेता हूँ. जिनको मैं एक बार ठोकता हूँ, वो बार बार मेरे पास चुदवाने आती हैं.

वो इस बार चुदाई की बातें करने लगा था.
झुककर मैंने उसे अपने मम्मे दिखाए तो वो मेरे मम्मों की तारीफ़ करने लगा.

मैंने उसके मन को भांप लिया कि लौंडा चूत के मतलब से मस्त दिख रहा है. मगर उसका लंड कैसा होगा, ये अभी मुझे नहीं मालूम था.

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मैंने पूछा- जिसे तुम एक बार चोद देते हो, तो वो तुम्हारे पास बार बार क्यों आना पसंद करती है?
इस बार वो बोला- मेरा लंड उन्हें पसंद आ जाता है न!

मैंने कहा- क्या तुम मुझे दिखा सकते हो या ऐसे ही फैंक रहे हो.
उसने अपनी जिप खोली और मुझे अपने लंड की लम्बाई का अहसास कराया.

हमारी इस तरह की बातें चलने लगी थीं.
अभी कुछ होने की स्थिति बनती कि तभी मालूम हुआ कि मुंबई स्टेशन आने वाला है.

तब मैंने अपना विज़िटिंग कार्ड निकाला और उसे देते हुए कहा- लो तुम इसे रख लो … और कल संडे है, कल मेरे घर सुबह 11 बजे आ जाना.

उसने भी अपना विज़िटिंग कार्ड मुझे थमा दिया और इस तरह हम दोनों अपने अपने रास्ते चले गए.

अगले दिन वो सही टाइम पर आ गया और बोला- मेम गुड मॉर्निंग.

मैंने उसे बड़े प्यार और सम्मान से बैठाया. उसे एक गिलास पानी दिया और बातें करने लगी.

मैंने कहा- रोहित तुम छुट्टी के दिन क्या करते हो?
उसने कहा- अगर पहले से प्लान होता है तो वो करता हूँ. नहीं तो घर में रह कुछ करता रहता हूँ या फिर किसी फ्रेंड के पास चला जाता हूँ.

मैंने पूछा- मेल फ्रेंड या फीमेल?
वो बोला- भाभी …

मैंने उसे बीच में ही टोकते हुए बड़े प्यार से कहा- भाभी की मां का भोसड़ा और भाभी की बहन की चुत. मैं भाभी वाभी नहीं हूँ यार. ये मेरा घर है ऑफिस नहीं. घर में मैं केवल बरखा हूँ. बुरचोदी बरखा हूँ. मादरचोद बरखा हूँ. मुझे बस इसी नाम से पुकारो.

मेरी गालियां सुनकर वो मस्त हो गया और उसके लंड में आग लग गयी.

इसी बीच मैंने उसे एक व्हिस्की का पैग पकड़ा दिया.
हम दोनों ने दारू पीना चालू कर दी.

केवल गाउन पहना था मैंने … बाकी अन्दर से बिल्कुल नंगी थी.
मैंने कहा- रोहित कभी किसी लड़की की मां चोदी है तुमने?

वो तपाक से बोला- हां, एक लड़की जुबैदा की मां चोदी है. उस लड़की ने साफ़ साफ़ कहा था कि मैं जिससे चुदवाती हूँ, उससे अपनी अम्मी को भी चुदवाती हूँ. तुमने मुझे चोदा, तो अब मेरी अम्मी को भी चोदो. मैंने फिर उसकी अम्मी भी चोदी. मैंने उसे रंडी की तरह चोदा था.
मैं इन बातों से बहुत उत्तेजित हो गयी.

मैंने धीरे से अपने गाउन का फीता ढीला कर दिया, तो मेरे बूब्स बाहर झांकने लगे. रोहित की नज़र वहीं पर टिक गयी.
मैं फिर उठी और उसके बगल में बैठ गयी. मेरा हाथ उसकी जांघ पर चला गया.

मैंने उसकी चुम्मी ले ली और कहा- तुम्हें अगर सच में ठोकना आता है, तो मुझे ठोक कर दिखाओ. आई लव यू माय डियर रोहित. मैं तुम्हें नंगा देखना चाहती हूँ.

तब तक मेरी दोनों चूचियां पूरी तरह खुल चुकी थीं. मैं उसकी पैंट खोलने लगी और कहा- यार, मैं तेरे लंड का दर्शन करना चाहती हूँ.
वो भी गर्म हो चुका था, तो मुझसे अपने कपड़े उतरवाने लगा.

वो अब चड्डी में आ चुका था. उसके लंड का उभार मुझे और उत्तेजित कर रहा था.

मैंने उसके उभार को बड़े प्यार से चूमा और दोनों तरफ से उंगली डाल कर चड्डी उतार कर फैंक दी.

मुझे टनटनाते हुए उसके लंड के दर्शन हुए तो मेरी खुशी का ठिकाना न रहा.
वो मेरे सामने एकदम नंगा हो चुका था और मैं भी अपना गाउन खोल कर उसके आगे नंगी हो गयी.

वो मेरा नंगा जिस्म देखने लगा, मैं उसका नंगा जिस्म.
मैंने उसका लंड पकड़ लिया, तो उसने मेरी चूचियां.

लंड हाथ में आते ही मेरे मुँह से निकला- वाह क्या कड़क लंड है यार … एकदम सख्त और लोखंड सा है!

मैं रोहित का लंड हिलाने लगी, उसे चारों तरफ से देखने लगी और अचानक से लंड पर ताबड़तोड़ चुम्मियां लेने लगी.

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सच में दोस्तो, मुझे लंड बहुत अच्छे लगते हैं.
मैं बोली- रोहित … ये कितने इंच का है?

तो रोहित बोला सही पकड़े हो मेरी जान … ये साढ़े सात इंच का ही है.
अगले कुछ पलों में हम दोनों 69 में आ गए और मैं उसका लंड चाटने लगी और वो मेरी चूत चाटने लगा.

हम दोनों चूत लंड का मज़ा लूटने लगे.
मुझे लंड चाटने बड़ा मज़ा आने लगा.
फिर मैंने उसका 3 इंच मोटा टमाटर सा लाला सुपारा मुँह में भर लिया और अन्दर ही अन्दर अपनी जीभ को सुपारे के चारों तरफ फिराने लगी.

वो सिसयाने लगा. वो भी जीभ घुसेड़ कर मेरी बुर चाट रहा था और मैं भी बीच बीच में सिसकारने लगी.

फिर उसने मुझे बेड पर चित लिटा दिया और खुद नीचे खड़ा हो गया.

मेरी दोनों टांगें फैला कर लंड मेरी चूत पर टिका दिया. पहले तो लंड चूत पर रगड़ा और फिर गप्प से अन्दर पेल दिया.

लंड सरसरता हुआ पूरा अन्दर घुस गया तो मेरे मुँह से निकला- उई मां फट गयी मेरी बुर … साले भोसड़ी वाले ने फाड़ डाला … तेरी बिटिया की बुर … मम्मी … आह रे अब मैं मुँह दिखाने के काबिल नहीं रही.

वो मादरचोद धकापेल मेरी बुर चोदने लगा और मैं भी मज़े से चुदवाने लगी.

उसे भी ताव आ गया, वो बोला- ले साली बरखा बुरचोदी भाभी … आज मैं तेरी चूत फाड़ डालूँगा … चोद डालूँगा तेरी बुर … तेरी मां का भोसड़ा साली बुरचोदी ले. आज मुझे कोई नहीं रोक सकता.
मैंने गांड उठाते हुए कहा- आंह तू आज चोद ले मेरी बुर … साले कल मैं तेरी गांड मारूँगी.

रोहित का लंड मुझे बड़ा मज़ा दे रहा था. मेरे मुँह से मस्ती में सिसकारियां निकलने लगीं- आह ओह हां हां चोद … और चोदो खूब चोदो वाह हां … और तेज़ी से चोदो चीर डालो मेरी बुर उन्ह हां ओह हाय मेरी जान निकली जा रही है बड़ा मोटा है तेरा लंड … आह तेरा लंड तो साला मोटा ही होता जा रहा है वाउ क्या लंड है तेरा … ग़ज़ब का लंड है तेरा रोहित तेरी मां की चूत साले कुत्ते अकेली पाकर मेरी बुर ले रहा है.

उसका साढ़े सात इंच लंबा और मोटा लंड मेरी चूत की धज्जियां उड़ाने लगा था.

मैं जितना चुद रही थी, उतनी ही और ज्यादा मस्त होती जा रही थी.

वो अब घूमा और मुझे घोड़ी बनाकर पीछे से चोदने लगा. उसका लंड बहनचोद बड़ा ख़ूँख़ार लग रहा था.
कुछ देर बाद उसने मुझे अपने लंड पर बिठाया और उठा उठा कर चोदने लगा. मैं समझ गयी कि इसे बुर चोदने का बहुत अनुभव है.

आख़िरकार मेरी चूत ढीली हो गयी. मेरी आग ठंडी हो गयी.
फिर वो बोला- मैं भी निकलने वाला हूँ.

ये सुनकर मैं उसके लंड से उतरी और लंड का सड़का मारने लगी. मैंने मुँह खोला और अन्दर लिया ही था कि उसके लंड ने सारा वीर्य मेरे मुँह में उगल दिया. मैं माल गटक गयी और झड़ता हुआ लंड चाटने लगी.

वो भी खुश हो गया.

कुछ देर बाद रोहित मुझे छोड़ कर चला गया.

दोस्तो, अब मुझे ट्रेन में सफ़र करने में मजा आने लगा. मैं इसी तरह ट्रेन में फंसती गयी और घर में चुदवाती गयी.

अब तक मैं और 4 लड़कों से चुदवा चुकी हूँ. मज़े की बात यह थी कि सबके लंड बड़े बड़े थे और अलग अलग तरह के थे. सबकी चोदने की स्टाइल भी अलग अलग थी, इसलिए सबसे चुदवाने में खूब मज़ा आया.

अब हर महीने मुझे चोदने वाले 2-3 नए लड़के मिल ही जाते हैं. मेरी तो सेक्स लाइफ खूब फल फूल रही है. आपकी कैसी गुजर रही है.
मुझे मेल से बताएं कि भाभी सेक्स Xxx कहानी कैसी लगी?
[email protected]

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