मेरे गांडू जीवन के कुछ यादगार पल- 1

स्कूल स्टूडेंट सेक्स लाइफ कैसी बीती मेरी … पढ़ें इस कहानी में! मेरे स्कूल के साथी मेरे ऊपर मरते थे. कोई बहाने से मेरे गालों पर हाथ फेर देता, कोई मौका मिलते ही चूतड़ सहला देता.

वे भी क्या दिन थे, जब मैं एक चिकना दुबला पतला गोरा माशूक लौंडा था और स्कूल में पढ़ता था.

मेरी क्लास के साथ वाले तक मेरे ऊपर मरते थे. कोई बहाने से मेरे गालों पर हाथ फेर देता, कोई मौका मिलते ही चूतड़ सहला देता.

मेरे गले में हाथ डाल कर बात करना तो उन सबके लिए एक सामान्य सी बात थी.
मैं इस सबको माइंड नहीं करता था. पर गले में हाथ डाले ही कोई दोस्त शरारत से बात करते करते अकसर गाल चूम लेता और मुस्कराने लगता.

मैं गाल पौंछ लेता.
वह मुस्करा कर कह देता- अरे यार, गलती हो गई, असल में तुम इतने चिकने हो कि रहा नहीं जाता.
बस ये कह कर वो और एक और चुम्मा ले लेता.

जो लौंडे मुझ पर ज्यादा मरते थे, वे तो सुबह स्कूल की प्रार्थना में अगर मेरे पीछे खड़े होते, तो पूरे चिपक जाते और गांड में उंगली तक कर देते.

मैं अपनी गांड बचाते फिरता रहता, पर कब तक बचाता.

एक बार मैं एक दोस्त के साथ सुबह से बाहर घूमने गया.
वो मुझसे उम्र में दो तीन साल बड़ा था.
मस्त लौंडा था.

घूमते हुए काफी दूर निकल गए. शहर के बाहर बने तालाब के पास मुझे लेट्रिन लगी.
मैं हाफ पैंट उतार कर तालाब के किनारे बैठ गया.

जब गांड साफ करके दोस्त के पास आया और पैंट पहनने लगा, तो दोस्त ने पहनने नहीं दी.
उसका खड़ा हो गया था, वह बार बार लंड सूंत रहा था.

उसने थूक लगा कर मेरी में पेल दिया.
जब तक मैं कुछ कहता, तब तक तो उसका सुपारा मेरी गांड के अन्दर था.

वह मुझे एक पेड़ से टिका कर खड़े खड़े ही चोदने की कोशिश कर रहा था.

लंड अन्दर घुसा तो मैं चिल्ला पड़ा- आह … आह … लग रई … बस … बस … फट गई … आ … आ!

मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उसका लंड पकड़ना चाहा पर उसने जोर लगा कर मेरा हाथ हटा दिया और चिपक गया.

अब उसने पूरा पेल दिया और दे दनादन दे दनादन लंड अन्दर बाहर अन्दर बाहर करने लगा था.
न जाने लंड की कितनी ठोकरें गांड में पड़ रही थीं.

पहले तो मैंने गिनने की कोशिश की, एक दो तीन … बीस इक्कीस.
फिर गिन ही नहीं सका.

स्कूल स्टूडेंट सेक्स करने में पूरी गांड छिल गई थी, बहुत दर्द कर रही थी.
वह पट्ठा मस्ती से पेले जा रहा था.

बाद में बोला- अभी किसी से ज्यादा नहीं करवाई … बहुत कसी है.
मैं गिड़गिड़ाया- अब निकाल लो, बहुत दर्द हो रहा है.

वह बोला- ठहर जा ढीली करे रह, तू टाईट करेगा तो लगेगी ही, लंड का मजा ले. ये मजा सबको नहीं मिलता. तेरी माशूकी का परसाद है, मैं ऐसों वैसों की नहीं मारता. टांगें चौड़ी कर.
उसने अपने हाथ से मेरी टांगें फैला दीं और झटका देकर पेल दिया.

अब वो मेरी गांड में लंड पेल कर चिपक कर रह गया था.
तभी उसका पानी छूट गया था.

उसने मेरा जोरदार चुम्बन लिया और मेरे होंठ ही दांतों से चबा लिए, मुझे एकदम से जकड़ लिया, फिर ढीला पड़ गया.

ऐसे ही मेरी चिकनी गांड में कई लौंडों ने लंड पेला.
किसी ने जबरदस्ती गांड मारी, किसी ने पटा कर!
मगर मेरी गांड का भुर्ता बना दिया गया.

किसी ने आधा लेटा कर मेरे ऊपर चढ़कर मेरी में पेला, किसी ने घोड़ी बना कर चोदा.
तो किसी मोटे हाथी जैसे दोस्त के खड़े नौ इंची के मस्त लंड पर मुझे ही गांड खोल कर बैठना पड़ा और उचकना पड़ा.

एक चाचा ने तो मेरी में उस वक्त लंड पेल दिया, जब मैं सो रहा था.
तब मुझे नींद भी गहरी आती थी.

जब तक मेरी नींद खुलती, तब तक वे पूरा लंड पेल चुके थे और शुरू हो गए थे.
मुझे औंधा करके मेरे ऊपर सवार हो गए थे.

वे पच्चीस साल के जवान तगड़े मस्त लम्बे मोटे लंड के मालिक थे.

मेरी छोटी सी चिकनी गुलाबी गांड छोटे छोटे गोल गोल गोरे गोरे चूतड़, जिन्हें वे बेरहमी से मरोड़ रहे थे.
उनके भयंकर सुपारे ने मेरी गांड की ऐसी तैसी कर दी.

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इतने भयंकर हथियार से तब पहली बार पाला पड़ा था.

मुझको गांड मराने में पसीना आ गया, पर वे कहां मानने वाले थे.
चचा ने बिल्कुल रहम नहीं किया, पूरा पेल दिया और आधे घंटे तक अन्दर बाहर अन्दर बाहर करते रहे.

क्या जोरदार झटके थे. उनके हैवी लंड की वे ठोकरें अब तक याद हैं.
वैसी चुदाई कम लोगों ने की.

जब चचा का पानी छूट गया, तभी मेरे ऊपर से उतरे.
इस तरह दोस्तो, मेरी चिकनी गुलाबी गांड ने बहुत से लंड की ठोकरें झेली थीं.

अब मैं चौबीस साल का मस्त जवान हूं. गोरा लम्बा पूरा तगड़ा और खूबसूरत हूँ.
लोग व दोस्त प्रशंसा करते हैं.

कोई नया मिलता है, तो देखता रह जाता है.
कुछ तो कह भी देते हैं कि आप बहुत हैंडसम हैं.

मैं तगड़ा लम्बा पूरा मस्त नौजवान हूं, तो कई बार लड़कियां भी मेरे हुस्न पर मर मिटती हैं.
अब भी मेरे दोस्त मेरा चुम्मा ले लेते हैं, मेरे चूतड़ मसक देते हैं, होंठ चूस लेते हैं.

उन्हें पता नहीं कि मैं गांडू हूं, मेरी गांड लंड लेने को तड़पती है पर कोई मारने वाला नहीं मिलता.
जो मेरी मारने वाले थे, मेरे ऊपर मरते थे, मेरी गांड का मजा लेते थे, वे सब पुराने कस्बे में छूट गए.

कुछ पिचक कर रह गए, उनमें अब कोई दम नहीं बचा.
उनसे तो कुछ हो ही नहीं पाता है.

कुछ जिन्दगी में पीछे रह गए, कुछ नहीं बन पाए … न कर पाए, वो मिलने में झेंपते हैं.

दोस्त लौंडिया दिलवाने की बात करते हैं, पर मैं उनका लंड लेना चाहता हूं.
जब दोस्त कहते हैं कि यार तू बड़ा नमकीन है, तेरे ऊपर तो लौंडियां मरती हैं.

जब मैं कहता हूँ कि अगर तेरा खड़ा हो रहा है, ज्यादा सुरसुरा रहा है, तो मेरी में डाल दे.
तो वो हंस पड़ते हैं और मेरी बात को मजाक समझते हैं.

इसे मेरी स्मार्टनेस मानी जाती थी.
मैं उनमें पापुलर था.

आज मैं एक बड़े शहर में मेडिकल स्टूडेंट हूं.
मेरे रूम पार्टनर डा. किशोर जो मेरे सीनियर भी थे.
उनके परिवार में लड़की की शादी थी, वे मुझे भी ले गए.

वह एक बड़ा टाऊन था.

उनकी बड़ी बहन का पूरा परिवार आया था, उनकी ननद भी आई थी.

उसकी दो साल पहले ही शादी हुई थी. अभी उसे कोई बच्चा नहीं हुआ था. जिस वजह से उस ग्रामीण माहौल में उसे बहुत ताने सुनना पड़ते थे.
वह सुंदर नई उम्र की लड़की थी.

दूसरे दिन मैं एक अलग दूर को बने कमरे में सोया था कि वह आई.
तब मेरा खड़ा था, मैं लेटा था.

उसे कमरे की टांण के ऊपर से कोई चीज उतरवाना थी.
उसने मेरी तरफ देखा और कहा.

मैं उठा व उसे सामान उतार कर देने लगा था.
वह बार बार मेरे खड़े मस्त लंड को देख रही थी. तभी वह एकदम से मुस्कराने लगी और पास आ गई.

उसके हाव भाव देख कर मैंने उसे लपक कर चूम लिया.
मेरा लंड उसके बदन से टकरा रहा था.

मैंने उसकी साड़ी पेटीकोट ऊपर को खिसकाया और उसकी तड़पती फड़कती चूत में पेल दिया.

अब मेरा भी मस्त लंड था. अन्दर लेते ही वह कामुक सिसकारियां भरने लगी- आ पूरा पेल दिया … बड़ा है निकाल लो .. आ!
वो सिसियाने लगी.

मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और धीरे से कहा- ज्यादा हल्ला नहीं करो, कोई आ जाएगा.

मैं उसकी चुदाई तो कर रहा था पर गांड मेरी भी फट रही थी.
हम कमरे के किवाड़ नहीं लगा सकते थे. वरना शक हो जाता तो दोनों को जूते पड़़ते.

मेरे लंड से पानी छूटा ही था कि किसी ने उसका नाम लेकर आवाज लगा दी.
वह जल्दी-फल्दी में अपनी साड़ी सम्हालती चली गई.

अगले दिन वह सुबह चाय लेकर आई. मैं नीचे फर्श पर बिस्तर बिछा कर लेटा था.
वो चाय रख कर बैठ गई और मुस्कराने लगी.
मैं उठ कर पेशाब करने गया.

वह रूकी रही थी.
मैं समझ गया कि चुदने को मचल रही है.

वहीं कोने में खड़ी करके उसकी चूत में फिर से मैंने अपना लंड पेल दिया.
तब मैं अनमेरिड स्टूडेंट था. चुदाई का ज्यादा तजुर्बा नहीं था.
वह ज्यादा एक्सपीरियंस वाली थी. बढ़िया झटके दे रही थी, पूरी मस्ती में थी.

मैंने उसे चूमना चाहा तो उसने रोक दिया.
वो बोली- देख कर लोग शक करेंगे.

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हां दोस्तो, चूत की चुदाई तो पता नहीं लगता है, पर चेहरे का चुम्बन खतरनाक होता है.
हम दोनों लगे रहे.

चुदने के बाद वह कप लेकर चली गई.

ऐसा दो बार और हुआ.
मेरे लिए ये अचानक से हुआ मामला था मगर अनोखा रसीला अवसर था.

गांव का माहौल था, उधर ज्यादा व्यवस्था नहीं थी.

मैं शादी के घर के एक युवा लड़के राकेश के साथ खेतों में गया.
उसे मैं दोस्त कहने लगा था.

वहीं खेतों में पानी के हौद के पास दातुन कर ली.
उधर बोरिंग भी लगी थी, उधर लड़के नहा रहे थे.
वे सब लड़के सारे कपड़े उतार कर नहा रहे थे.
वह बस्ती से दूर का इलाका था.

मेरा साथी बोला- आप भी नहा लें.

मैं भी सारे कपड़े उतार कर नहाने लगा क्योंकि साथ में कोई अलग से कपड़े नहीं लाया था.

दोस्त राकेश बोला- भाई साब, आपने बॉडी बढ़िया बनाई है.

तब तक वहां एक मुच्छड़ दादा आ गए.
उनकी बड़ी मूंछें होने से गांव लोग के उन्हें मुच्छड़ दादा कहते थे.

वे मुझे नहाते देख कर पहले तो बड़ी देर देखते रहे, फिर बोले- बॉडी तो बढ़िया बनाई है, पर नंगे क्यों नहा रहे हो?

मैंने कहा- अब कपड़े नहीं थे, तो नहाने लगा. फिर ये जगह बस्ती से दूर है, यहां कौन आता है. सब नहा रहे थे तो मैं भी नहाने लगा.
दादा- सब तो यहीं के हैं और छोटे हैं. तुम्हारे आइटम पर झांटें आ गई हैं. गांड पर भी बाल हैं. फिर इतने मस्त हो कि कोई देखेगा तो क्या होगा?

मेरी कुलबुलाने लगी थी. मैंने कहा- अरे लड़की थोड़े ही हूं, कोई क्या करेगा?
मुच्छड़ दादा बोले- यहां लड़कों पर भी नियत बिगड़ जाती है.

मैं- अरे दादा. अगर आपकी तबियत आ गई तो मैं तैयार हूँ.
मैंने उन्हें अपने चूतड़ दिखाए, उन पर तबला बजाने लगा, चूतड़ अलग करके गांड का छेद दिखाने लगा.

वे बोले- बस बस, तुम बहुत बदमाश हो, चालू चीज हो.

मैंने फिर से कहा- दादा, मेरे से तो ज्यादा माशूक ये मेरे दोस्त हैं, सब चिकने हैं.
मैंने अपने दोस्त राकेश के चूतड़ पर हाथ फेर कर कहा- इसकी तो अभी झांटें भी नहीं आई हैं, अभी एकदम चिकनी रखी है. मस्त चीज है.

ये कह कर मैंने उनके सामने ही राकेश का चुम्मा ले लिया.
वे चुप हो गए और हंसते हुए चले गए.

मैंने दोस्त से उनके जाने के बाद माफी मांगी- यार वो दादा गड़बड़ बात कर रहा था, वैसी कोई बात नहीं है.

ये कह कर मैंने एक बार फिर से उसके चूतड़ पर हाथ मारा और चूतड़ मसक दिया.
वह हंसा और बोला- भाई साब कोई बात नहीं, यह दादा तो लौंडे बाज है, गांव के सब जानते हैं.

मैंने राकेश से कहा- तो तुम्हारी भी मारी होगी?
दोस्त- हां, पर अब मैं बड़ा हो गया हूँ. वह नए लौंडों की तलाश में रहता है. आपको देख कर आप पर मर गया, पर आप तो उससे तगड़े हो लम्बे हो. फिर आपने तो उसे अपनी गांड चौड़ी करके दिखा दी. वह आपके लम्बे लंड को भी देख रहा था, उससे डयोढ़ा है.

राकेश ने ये सब बात करते करते मेरा लंड पकड़ लिया व दो तीन बार सड़का भी मारा.
मैंने कहा- अबे यार रूक जा, वरना गड़बड़ हो जाएगी.
वो बोला- क्या गड़बड़ हो जाएगी?

तब तक मेरा खड़ा हो गया और टुनकी मारने लगा.
ये देख कर साथ के दो तीन लड़के भी मस्ती से नंगा लंड देखने लगे.

उनमें से एक बोला- भाई साहब का तो बहुत बड़ा है. अपने गांव में तो एकाध का ही इतना होगा.
दूसरा बोला- इतना बड़ा तो मैं अपनी गांड में झेल ही नहीं पाऊंगा. हां भाई साहब कहें, तो चूस लूं.

उसने कहने के बाद मेरी हां की भी जरूरत नहीं समझी. बस लपक कर मुँह में ले लिया और लप लप कर चूसने लगा.
वो अपनी जीभ मेरे लंड पर फिरा रहा था.

लंड खड़ा था तो चुसवाने में मजा आने लगा था.

दोस्तो, मजा आ रहा होगा. गे सेक्स कहानी के अगले भाग में आगे का मजा लिखूंगा.
स्कूल स्टूडेंट सेक्स लाइफ कैसी लग रही है? मुझे मेल करें.
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स्कूल स्टूडेंट सेक्स लाइफ का अगला भाग: मेरे गांडू जीवन के कुछ यादगार पल- 2