सास के सामने ससुरजी का मोटा लन्ड लिया

इस कहानी में पढ़ें कि कैसे ससुर ने बहू को पेला. मेरे पति शहर में नौकरी करते थे, मैं प्यासी रहती थी. एक दिन मैंने ससुरजी को सास की चुदाई करते देखा.

दोस्तो, मैं पायल आप सबको आज अपनी सच्ची चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ जो मुझे मेरे ससुर जी से मिली है. ससुर ने बहू को पेला!

मैं एक गाँव की सीधी साधी लड़की थी. मेरा शरीर बहुत भरा हुआ था 36-30-38.

मेरे घर वालों ने मेरी शादी 18 साल की उम्र में ही करवा दी थी.
ससुराल में मेरे पति नमन जिनकी उम्र 23 साल लन्ड 8”, सास शांति उम्र 40 साल भरे पूरे बदन वाली औरत और मेरे ससुर जी हिम्मत सिंह उम्र 51 साल लन्ड-9″ रहते हैं.

मेरे ससुर जी गाँव के बहुत मशहूर पहलवान और जमींदार हैं, मेरे पति शहर में सरकारी नौकरी करते हैं.

जब मेरी शादी हुई तो मेरे पति ने एक महीने की छुट्टी ली थी और जब तक वो यहाँ मेरे पास गाँव में रहे मुझे रोज चोदते रहे.
फिर जब उनकी छुट्टी खत्म हुई तो वो मुझे यहाँ गाँव ही अपने माता पिता के पास उनकी सेवा करने के लिए छोड़ कर चले गए. वे बस रविवार को ही गाँव आते और मुझे चोदते थे.

क्योंकि मुझे अभी जवानी आयी ही थी तो मुझे चुदाई का मन तो बहुत होता!
पर मैं कुछ कर नहीं पाती अपनी उंगलियों से अपने आप को शांत कर रह जाती बस!

मेरे ससुर हिम्मत सिंह रोज कसरत करते थे.

एक बार मेरी नज़र उन पर पड़ी जब वो कसरत कर रहे थे.
उन्होंने बस एक धोती पहन रखी थी, बनियान भी नहीं पहनी थी उन्होंने!
और वो कसरत कर रहे थे, उनका कड़ा बदन और उस पर उनका पसीना उनके बदन को ओर आकर्षक बना रहा था.

उस दिन से मेरी नज़र मेरे ससुर जी पर डगमगा गयी.

रात में अब मैं ससुरजी के बारे में सोच अपनी चूत गीली करने लगी थी.

एक रात मुझे नींद नहीं आ रही थी तो छत पर टहलने के लिए निकल गयी.

मेरा कमरा नीचे था और ऊपर मेरे सास ससुर का कमरा था.

जब मैं अपने सास ससुर के कमरे के पास से गुजरी तो उनके कमरे से कुछ आवाज आई.

खिड़की से अंदर को झांक कर देखा तो पाया कि ससुर जी सासु जी की चुदाई कर रहे थे.

दोनों पूरे नंगे थे, मैं ससुर जी का लन्ड तो सही से देख नहीं पा रही थी.
पर जैसे सासु जी जोर जोर से आवाजें निकाल रही थी, उससे समझ में आ रहा था कि ससुर जी का कितना बड़ा और मोटा होगा.

मैं वहीं खिड़की पर खड़ी अपनी चूत में उंगलियाँ डालने लगी.
सासु जी की चूत ने बहुत जल्दी ही अपना पानी छोड़ दिया और वो ससुर जी को अपने ऊपर से हटाने लगी.

पर ससुर जी का अभी हुआ नहीं था, उनको अभी और चुदाई करनी थी- क्यों री शांति, क्या हुआ तुझे?
सासु जी- अजी वो मेरा पानी निकल गया है।

ससुर जी- तेरा तो रोज का यही रंडी रोना है, तेरा हो गया पर मेरा क्या?
सासु जी- रोज की तरह चूस कर आपको शांत कर दूँगी मैं! थोड़ी देर से अभी मेरी सांस भर आयी है आपकी चुदाई से!

ससुर जी- हट मादरचोद कहीं की! साली छिनाल लगता है अब मुझे बाहर ही अपनी प्यास बुझानी पड़ेगी, तुझसे तो कुछ नहीं होगा।
सासु जी आँखों में आँसू भरे हुई- आप ऐसा क्यों बोल रहे है जी?

ससुर जी- छिनाल कहीं की … अगर तुझसे नहीं हो रहा है तो बोल दे मैं बाहर अपना इंतजार कर लूंगा।

यह बोल ससुर जी ने सासु जी के बाल पकड़ अपना लन्ड उनके मुँह में दे दिया और उनके मुँह को चोदने लगे.
सासु जी उनसे छूटने की कोशिश करने लगी.
पर ससुर जी का पहलवानी बदन सासु जी को छोड़ ही नहीं रहा था.

15 मिनट तक मुँह को चोदने के बाद ससुर जी सासु जी के मुँह में ही झड़ गए.
फिर उन्होंने सासु जी को छोड़ा.

सासु जी का मुंह रोने जैसा हो रहा था और उनके मुँह से ससुर जी का गाढ़ा माल टपक रहा था.

यह देख मेरी भी उत्तेजना बढ़ रही थी और मेरी चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया.

ससुर जी का मुरझाया हुआ लन्ड मेरी आँखों के सामने था. उनका लन्ड मुरझाया हुआ होने के बाद भी मेरे पति के लन्ड से मोटा लग रहा था.

फिर मैंने अपने कपड़े सही किये और अपने कमरे में चली आयी.

आकर मैं ससुर जी के लन्ड के बारे में सोचती रही.
ससुर जी के बारे में सोचते हुए मुझे कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला.

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सुबह मैं उठ कर ससुर जी को पटाने के प्लान बनाने लगी.

मैंने अपनी रात वाली चड्डी बाथरूम में ही छोड़ दी क्योंकि मुझे पता था कि मेरे नहाने के बाद ससुर जी भी नहाने आयेंगे.

ससुर जी बाथरूम से निकलने के बाद मैं वापस बाथरूम में गयी और मैंने वही पाया जो मैंने सोचा था.
मेरी चड्डी पर ससुर जी ने अपने लन्ड का माल गिराया था.

ससुर जी रोज शाम को हमारे नौकर से अपने बदन की मालिश करवाते थे.
पर मैंने आज नौकर को किसी काम से बाहर भेज दिया था.

जब ससुर जी कसरत करके लौटे और नौकर को नहीं पाया तो गुस्सा होने लगे.

तो मैं ससुर जी पास गई और बोली- क्या हुआ ससुर जी, आप इतना गुस्सा क्यों हो रहे हो?
ससुर जी- बहू, जब तुम्हें पता है कि रोज कसरत करने के बाद मैं नौकर से अपनी मालिश करवाता हूँ तो तुमने उसे बाहर क्यों भेजा?

मैं- माफ कीजियेगा ससुर जी, पर आप चाहें तो मैं आपकी मालिश कर दूँ?
पहले तो ससुर जी ने थोड़ा सोचा फिर बाद में हाँ कर दी.

मैं मालिश करती हुई- ससुर जी, क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकती हूँ?
ससुर जी- हाँ बहू, पूछो क्या पूछना है तुम्हें!

मैं- ससुर जी आप इतने हट्टे-कट्टे हो, आपका बदन भी बहुत जोशीला है तो सासु जी आपको खुश कर लेती हैं या नहीं?
ससुर जी- तुम्हारा कहने का क्या मतलब है बहू?
मैं- क्या सासु जी आपको संतुष्ट कर पाती हैं? क्योंकि आपके जैसे मजबूत बदन वाले को तो मेरी उम्र की औरत भी बहुत मुश्किल से संतुष्ट कर पायेगी?

यह बोल मैं ससुर जी के लन्ड पर हाथ फेरने लगी.

ससुर जी मुस्कुराते हुए- ये तो तूने सही बोला बहू, वो तेरी बूढ़ी सास कहाँ मेरे को शांत कर पायेगी। पर तू बता बहू … लल्ला तुझे खुश रखता है या नहीं?
मैं- अब मैं क्या बताऊँ ससुर जी, वो सिर्फ रविवार को ही आते हैं. उसमें भी एक बार ही कर पाते है, अब उनमें आपके जैसा जोश कहाँ ससुर जी।

ससुर जी का लन्ड खड़ा होने लगा था- बहू, अगर तुझे कुछ भी चाहिए तो मुझसे बोलना मैं तुझे दूँगा।
मैं- अब एक जवान औरत को क्या चाहिए होता है, आपको तो पता ही होगा।

यह बोल मैंने ससुर जी का लन्ड धोती के ऊपर से ही पकड़ लिया.

ससुर जी- तेरी सास कहाँ है दिख नहीं रही है?
मैं- वो पड़ोसी के यहाँ पर गयी है।

यह सुन ससुर जी ने अपने मजबूत हाथों से मुझे पकड़ा और मुझे अपने पास ले आये और मुझे चूमने लगे.
मैं भी उनका साथ दे रही थी.

उसके बाद उन्होंने मेरे दूध को ब्लाउज़ के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया.

फिर उन्होंने मेरे ब्लाउज़ और ब्रा को खोला और मेरा दूध पीने लगे.

ससुर जी- बहू, तेरे दूध तो बहुत रसीले हैं, मन कर रहा है बस इन्हें पीता ही रहूँ।
मैं- अब तो मैं आपकी ही हूँ ससुर जी, जब आपको पीना हो या जाइयेगा।

फिर ससुर जी ने मेरा पेटीकोट भी खोल दिया और मेरी चड्डी उतार मेरी चूत को चाटने लगे.

मैं मदहोश हो चुकी थी- ससुर जी, अब और मत तड़पाइये, आपका लन्ड अंदर डाल दीजिये ना!

ससुर जी ने अपनी धोती ओर चड्डी खोली और मेरी आँखों के सामने उनका विशालकाय और मोटा लन्ड आ गया.

मैंने ससुर जी का लन्ड देख बिना देरी के उसे अपने मुँह में ले लिया.
ससुर जी का लंड इतना मोटा था कि मेरे मुँह में भी नहीं समा रहा था.

फिर ससुर जी ने मेरी चूत पर तेल लगाया और थोड़ा तेल अपने लन्ड पर लगाया और मेरी चूत के ऊपर रख उसे रगड़ने लगे.

मैं- ससुर जी, तड़पाइये मत मुझे … अब अंदर डाल भी दीजिये।
ससुर जी- जैसा तुम चाहो बहू!

ससुर जी के लन्ड का सुपारा जैसे ही मेरी चूत में गया, मेरी चीख निकल गयी.
तो ससुर जी ने मेरी ब्रा मेरे मुँह में डाल दी और धीरे धीरे अपना लन्ड मेरी चूत में डाल दिया.

पहले पहले तो मेरी दर्द के मारे हालत खराब हुई पर जब दर्द कम हुआ तो मैं भी चुदाई का पूरा मजा लेने लगी.

ससुर जी और मेरी चुदाई 25 मिनट तक चली. हम दोनों का बदन पसीने में भीग चुका था.

इतने में सासु जी पड़ोसी के यहाँ से आ गयी.
पर मैंने घर का दरवाजा पहले ही बंद कर रखा था तो वो अंदर नहीं आ पाई और बाहर से ही आवाज देने लगी.

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पर हम चुदाई में इतने मगन थे कि उनकी आवाज हमें सुनाई ही नहीं दी.
फिर 5 मिनट बाद हम दोनों झड़ने लगे और ससुर जी ने अपना माल मेरी चूत में ही गिरा दिया.

जब हम शांत हुए तब मुझे सासु जी की आवाज सुनाई दी और मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने ओर दरवाजा खोलने भागी.

दरवाजा खोलने के बाद सासु जी ने मुझे देखा और बोली- इतना टाइम कहा लगा दिया बहू, मैं कब से दरवाजा खटखटा रही हूँ, ओर ये तुझे क्या हुआ है मेरे बाल और लिपस्टिक क्यों बिगड़ी हुई है?

इतने में ही ससुर जी अपने धोती पहनते हुए आये और बोले- बहू पर क्यों चिल्ला रही है छिनाल कहीं की … बहू मेरे पास थी मेरी मालिश कर रही थी।

सासु जी को ये सब कुछ ठीक नहीं लगा पर ससुर जी के डर के मारे वो कुछ ज्यादा बोल नहीं पायी और अपने कमरे में चली गयी।

रात में:

सासु जी- अजी आप इस समय कहाँ जा रहे हो?
ससुर जी- रंडी साली, तुझे कितनी बार समझाया है जब मैं कहीं जाऊं तो टोका मत कर, समझ नहीं आता क्या तुझे?

यह बोल ससुर जी कमरे से चले गए और मेरे कमरे में आ गए.
मैं ससुर जी को देख बहुत खुश हो गयी.

मैं- ससुर जी, सासु जी अभी घर में ही हैं।
ससुर जी- बहू तू उसकी चिंता मत कर! उसे मैं सम्भाल लूंगा. अभी तो बस तू मुझे प्यार कर!

उस रात 3 बार ससुर ने बहू को पेला.
चुदाई के बाद ससुर जी वहीं मेरे ही कमरे में ही सो गये.

जब सुबह हुई तो ससुर जी ने मुझे जोरदार चुम्मा दिया और फिर अपने कपड़े पहन जाने लगे.

मैं बिस्तर पर नंगी ही पड़ी थी.

जैसे ही ससुर जी ने कमरे का दरवाजा खोला तो बाहर सासु जी खड़ी थी.
वो मुझे इस हालत में देख समझ चुकी थी कि रात भर क्या हुआ होगा.
उनकी आंखों से आँसू आने लगे और मुँह नीचे करके रसोई में चली गयी.

ससुर जी भी अपने रूम में चले गये.

दिन में जब ससुर जी बाहर गये तो सासु जी मेरे पास आई और बोली- बहू, जो भी घर में हो रहा है, बहुत गलत हो रहा है. वो तेरे ससुर हैं, पिता समान हैं वो तेरे!

क्योंकि मुझे पता था कि सासु जी ससुर जी से बहुत डरती थी और उनको कुछ भी बोल सकती थी इस लिए वो मुझे समझा रही थी तो मैंने भी उन्हें जवाब दे दिया.
मैं- सासु जी, आप नाराज़ क्यों हो रही हो. अब आप तो ससुर जी को खुश नहीं रख पा रही हो तो किसी को तो उनकी खुशी का ध्यान रखना होगा।

यह बोल मैं वहाँ से चली गयी.

रात में हम जब खाना खाने बैठे तो खाने की मेज पर ससुर जी ने सासु जी उनकी जगह से उठा कर मुझे उनके पास बिठा लिया.
फिर सासु जी को कहा- अब से बहू ही इस जगह ओर बैठेगी.

खाना खाने के बाद ससुर जी अपने कमरे में ना जाकर सीधे ही मेरे कमरे में चले गए.

सासु जी इससे बहुत गुस्सा होने लगी पर वो कुछ नहीं सकती थी.

मैं भी ससुर जी के पास चली गयी पर मैंने रूम का दरवाजा नहीं लगाया और उसे खुला ही छोड़ दिया.
ससुर जी और मेरी चुदाई की आवाज बाहर तब आ रही थी और सासु जी उसे सुनकर तड़पने लग गयी थी.

वो मेरे रूम के पास आई और रूम का दरवाजा बंद करने लगी.
सासु जी ने हमें चुदाई करते हुए देख लिया पर कुछ बोल नहीं पायी.

उसके बाद तो रोज ही ऐसा होने लगा था, मुझे जो चुदाई का सुख पति नहीं दे पा रहा था वो मुझे मेरे ससुर जी ने दे दिया था.

यह रही मेरी कहानी जिसमें ससुर ने बहू को पेला!

पर अब मैं आपको अगली कहानी में बताऊंगी कि आगे क्या हुआ था, कैसे मेरी सास ने मुझसे बदला लिया.
चलिये बता ही देती हूँ.

मेरी चुदाई से परेशान सासु जी ने अपने बेटे यानि मेरे पति से अपनी चुदाई करवाई और जैसे मैंने सासु जी को अपनी चुदाई दिखाई, उन्होंने भी मुझे अपनी दिखाई.

ये सब कैसे हुआ अगर आप ये जानना चाहते है तो मुझे मेल कीजिये अगर मेरे पास ज्यादा रिकवेस्ट आयी ये कहानी सुनाने की … तो मैं आपको जरूर बताऊँगी कि ये सब कैसे हुआ।

ससुर ने बहू को पेला … आपने पढ़ा. मजा आया या नहीं?
मेरी मेल आई डी है [email protected]