सम्भोग से आत्मदर्शन-11

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इस कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि तनु की मम्मी मुझे अपने जीवन की कहानी बता रही थी जिसमें उन्होंने अपनी सहेली को तीन मर्दों के साथ सेक्स करके देखा.
अब आगे:

कुंती की आँखों में अब तक शर्म के दर्शन एक बार भी नहीं हुए थे, और मुझे देखो खिड़की के बाहर से भी ये देख कर शरमा रही थी और योनि में पानी आने लगा था।
कुंती ने उसके बदन पर हाथ फिराना शुरू किया फिर उसके पेंट में फनफनाते नाग को कपड़ों के ऊपर से ही दबा दिया, और पेंट का हुक खोल के वो राणा जी के पास आ गई कपड़ो को तन से अलग करने का काम कौशल को खुद करना था, अब तक रमेश भी पास आ गया था और तीनों ही मिल कर कुंती को सहला रहे थे।

कौशल और रमेश दोनों ही केवल अंडरवियर में थे, कौशल का लंड अंडरवियर के अंदर से ही उसके शरीर के जैसा ही विकराल होने का आभास करा रहा था, जबकि रमेश का लंड भी उसके शरीर के हिसाब से ठीक होगा, ऐसा जान पड़ता था।

अब कुंती ने अपनी अदा के साथ राणा जी के कपड़े खोलने शुरू किये, हर एक बटन खुलने के साथ ही माहौल में कामुकता बढ़ती जा रही थी। एक दूसरे को सहलाना, टटोलना निरंतरता में आ गई।
राणा जी ने सफेद रंग की बनियान पहन रखी थी और तोंद निकली हुई थी, सफेद ढीले पजामे में उसका लंड देख या समझ पाना मेरे लिए मुश्किल था, पर मेरे सामने एक और चीज उजागर होने वाली थी, अब राणा ने कुंती के सलवार का नाड़ा खींच दिया और कुंती का सलवार उतरते ही सबके हाथ सीधे उसके कूल्हों जांघों और पिंडलियों पर पड़ने लगी।
अब मेरे भी होश उड़ गये क्योंकि मेरी सहेली इतनी खूबसूरत है मैंने कभी यह सोचा भी ना था।

नीले रंग की ब्रा और नीले रंग की पेंटी में लगभग पाँच फुट चार इंच की हाईट वाली गोरी चिकनी लड़की का बदन किसी अपसरा से कम नहीं लग रहा था, चौंतीस अट्ठाईस चौंतीस की साइज रही होगी उसकी, हर अंग में कटाव था, आँखें भूरी सी और लंबी हिरणी सी गर्दन लंबा चेहरा नाजुक सी पर गदराई हुई जवानी समेटे वो छोरी उनके साथ-साथ मुझे भी अपना दीवाना बना रही थी।

अब राणा जी ने कुंती के ब्रा का हुक भी खोल दिया और कुंती ने उसे शरीर से अलग करने में देर नहीं की, उसने ब्रा उतार कर कौशल के चेहरे पे दे मारी और अपने होठों को दांत से काटते हुए रमेश को आँख मारी।

कुंती के उन्नत उरोज कयामत के खूबसूरत थे, भूरे फैले हुए घेरे के बीच गुलाबी रंग की प्यारी कोमल सी निप्पल जो अभी उत्तेजना में खड़े हुए से प्रतीत हो रहे थे, दोनों स्तनों के बीच की मदहोश कर देने वाली घाटी, और कुंती की किसी भी हरकत के साथ उन स्तनों का थिरक जाना किसी को भी पागल कर सकता था।
पर मैंने एक बात गौर कि कोई भी कुंती के उरोजों को ज्यादा दबा या छू नहीं रहा है।

कौशल कुंती के पैरों की तरफ बैठ कर कुंती के पैर का अंगूठा मुंह में लेकर चूसने लगा, कुंती की बेचैनी बढ़ने लगी, यहाँ मैंने शायद इसलिए नहीं लिखा क्योंकि जब मेरी हालत इस दृश्य को देख कर खराब होने लगी थी तब तो कुंती की चूत ने जरूर रस बहा दिया होगा, उनकी हरकतों के हाथ ही मेरे हाथों का हलचल भी अपने ही शरीर पर बढ़ने लगा था।

अब तक रमेश से सब्र नहीं हुआ और उसने अपना अंडरवियर उतार लिया, उसके गोरे लंड और गुलाबी सुपारे को देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया, लंड ज्यादा बड़ा या मोटा नहीं था लगभग छ: इंच का ही रहा होगा, पर क्लीन शेव था और बहुत ही सुंदर था, हल्का सा मुड़ा हुआ लंड सुपारा खुद ही खुला हुआ, सच कहूँ तो भले ही छोटा मगर दिखने में अमेरिकन लंड जैसा था।

अब राणा जी से भी सब्र ना हुआ, उन्होंने अपना पजामा निकाल दिया जिसके अंदर उन्होंने कुछ नहीं पहना था, सांवला सा बहुत मोटा और गंदा सा लंड देख कर मैं तो एक पल के लिए डर ही गई, उसके लंड की लंबाई पांच इंच ही रही होगी पर मोटाई.. बाप..रे बाप… लगभग चार इंच ज्यादा ही रही होगी, ऊपर से उसकी नसें स्पष्ट नजर आ रही थी और उसकी जड़ों पर बिखरे बाल बड़ा सा अंडकोष… हाय राम, क्या लंड ऐसा भी होता है।

और कुंती को तो देखो… कुतिया ऐसे गंदे लंड को भी चूसने के लिए टूट पड़ी, मैं तो ऐसे लंड कभी ना चूसूं, कुंती के मुंह में भी लंड पूरा नहीं आ सकता था इसलिए वो गोलियों को चाटने सहलाने लगी और लंड पर जीभ फेर रही थी, और फिर अपने मम्मों के बीच लंड रख कर रगड़ने लगी.

सभी मर्द एक साथ हंस पड़े- देखो कुतिया को अपने मम्में दबवाने का ऐसा शौक है कि कुछ देर ना दबाओ तो खुद ही पगला जाती है।
बात सच थी, कुंती पागलपन की हद पार कर जाती अगर कौशल ने उसके मम्में जोरों से ना दबाये होते!

कुंती को दर्द के बजाये राहत मिली और वो पागल होकर कामुक आवाजें निकालने लगी और सबको पागल बनाने भी लगी। अब मुझे समझ आया कि अब तक सबने कुंती के उन्नत और आकर्षक उभारों को अनदेखा क्यों कर दिया था, दर असल वो जानबूझ कर उसे तड़पा रहे थे।

कुंती अपने उभार खुद ही मसलने लगी और शानदार स्तन को मसलवाने के लिए बेचैन होने लगी थी. तभी तो शायद राणा जी भी पागल हो चुके थे, उन्होंने कुंती के स्तनों को बहुत जोर से दबाया, और हाथों में भरने के नाकाम कोशिश के साथ उसे गोल गोल घुमाने लगे।

कुंती दर्द और मजे के मिले जुले स्वर में कराह उठी, यह देख कर कौशल कुंती के पैरों तले आ गया, मर्द होते ही ऐसे हैं चाहे कितनी ही मर्दानगी दिखा ले, चुदाई की बात आते ही घुटनों पर आ जाते हैं, यह बात मैंने पहले भी कही है।

कुछ देर ही अंगूठा चूस कर कौशल अपने अंडरवियर को निकालने लगा, इधर राणा और रमेश ने मिल कर कुंती की पेंटी शरीर से अलग कर दी, और जिनके शरीर में जो भी कपड़ा बचा था, सबने वो निकाल दिया, अब सभी पूर्ण रूप से नंगे थे।
अब पहली बार मेरी नजरों के सामने कौशल का तगड़ा लंड और मेरी सहेली की गोरी नंगी चूत सामने थी।

अब उनके मन में जो हुआ सो हुआ, पर अब तक मेरे शरीर में एक कंपकंपी की लहर दौड़ आई, मेरी उंगली पहले से ही चूत को सहला रही थी, मैंने अचानक ही स्पीड बढ़ाई और मेरी चूत ने रस बहा दिया, दो पल ही मैंने आँखों को बंद करके झड़ने का आनन्द लिया और दुबारा उनके इस कामुक चुदाई दृश्य को देखने लगी।

कौशल का लंड सच में उसके शरीर जैसा ही काला लेकिन चिकना और साफ था, उसका सुपारा एकदम गाढ़े लाल रंग का था, साईज विकराल, मुड़ा हुआ और मोटा भी अच्छा खासा था, गोलियाँ भी बड़ी बड़ी थी। वो किसी अफ्रीकन लंड से कम बिल्कुल ना था।

और फिर मेरी नजर हुस्न की मलिका मेरी कामुक खुशनसीब सहेली जो आज तीन अलग अलग तरह के लंड का अकेले ही मजा ले रही थी, पर जाकर अटक गई।
चिकना गोरा बदन… बस दाईं कमर और बायें कंधे पे खूबसूरत तिल के निशान के अलावा शरीर पे कहीं भी कटे फटे जले या किसी तरह के दाग धब्बे के निशान नहीं थे। शरीर के हर अंग में कटाव था, ज्यादा चर्बी या हड्डी दिखने लायक कमजोरी भी नहीं थी।

कुंती गोरी तो थी पर सफेद नहीं थी, गेहुँये रंग के शरीर में उसके लटकते बाल गजब ढा रहे थे, उसकी चूत बहुत ही प्यारी लग रही थी, दिखने से ही कोमल अहसास करा रही थी, वो अब तक गीली भी हो चुकी थी इसलिए उसकी फांकें लिपस्टिक लगाये जैसी चमक रही थी, बहुत ज्यादा चुद चुकी चूत होने की वजह से उसकी परतें अगल बगल भी फैली नजर आ रही थी इसलिए वो बहुत प्यारे से गुलाब फूल का आभास करा रही थी।
पूरे योनि प्रदेश को कुंती ने बहुत ही अच्छे से साफ कर रखा था, उसकी चूत फूली हुई तो थी ही पर कामुकता की वजह से फूल कर और बाहर की ओर निकली हुई नजर आ रही थी।

अब सबसे पहले रमेश उसकी चूत चाटने को बैठ गया और उसके योनि प्रदेश को मतलब चूत के आसपास को सहलाने और चाटने लगा, साथ ही जांघों पर भी निरंतर हाथ फेर रहा था। कुंती को पीठ के बल लेटाये जैसी मुद्रा में रखा गया था, और वो अब खुद के आपे से बाहर होकर राणा जी का लंड चूसने में लगी थी, और एक हाथ से कौशल का लंड सहलाने और आगे पीछे करने लगी थी। तीनों मर्दों के हाथ कुंती के शरीर पर लगातार चल रहे थे।
यह कहने की जरूरत नहीं है कि माहौल कामुकता के चरम पर था।

फिर राणा ने वहीं जगह बना कर लेट गया और कुंती को अपने ऊपर आकर चुदाई करने को कहा, मैं दम साधे देखने लगी कि ‘हे भगवान… मेरी सहेली की चूत कहीं फट तो नहीं जायेगी।’
पर ध्यान आया कि ये पहली बार तो है नहीं जो चूत फट जायेगी।

उधर कुंती ने आदेश का पालन करते हुए उसके लंड के ऊपर आकर अपने दोनों पैर उसके दोनों ओर ले जाके लंड को हाथ में लेकर अपने चूत पर रगड़ने लगी।
उसकी इस हरकत पर मेरा हाथ फिर अपनी चूत को सहलाने में लग गया, और मैंने अपना दाना छुआ ही था कि उधर कुंती ने एक हल्की चीख के साथ राणा जी का लंड अपनी चूत में पूरा गटक लिया, दूसरे ही पल कौशल ने कुंती के मुंह में अपना लंड दे दिया और कुंती जितना मुंह में आया लेकर मजे से चूसने लगी, और रमेश के लंड को भी एक हाथ में पकड़ कर सहलाने लगी।

कुंती कुछ ही देर में अपने रंग में आने लगी और बहुत ही मजे से उछल उछल कर चुदवाने लगी। सभी के मुंह से आहहह ऊहहह जैसी सिसकारियाँ निरंतर निकलने लगी। मेरे मन में भी लंड की प्यास बढ़ने लगी।
पर मैं खिड़की से ये सब देखकर ही मन को संतुष्ट कर रही थी।

थोड़ी देर रमेश ने भी कुंती से लंड चुसवाया और फिर उसने पास रखी एक क्रीम की ट्यूब उठाई और कुंती के गांड की छेद में लगाने लगा, जाहिर था कि वो कुंती की गांड मारने वाला था, कुंती थोड़ा कसमसाई और थोड़ी ही कसमसाहट एक चीख और एक झटके के साथ रमेश का लंड अपनी गांड में सह गई।

दो लंड एक साथ लेने के बावजूद उसके चेहरे पर दर्द के भाव कम और मजे के भाव ज्यादा नजर आ रहे थे।

कामुकता में कौशल कुंती का मुख चोदन जोरों से करने लगा और कहने लगा- आज तो मैं भी इस कुतिया की गांड चोदूंगा, साली अपने आशिक को ही गांड मारने देती है, मुझे और राणा जी को लंड बड़ा और मोटा होने का बहाना बताती है. आज तो हम तेरी गांड मार कर ही रहेंगे।

यह सुनते ही कुंती के चेहरे पर तनाव के भाव आ गये पर लंड मुंह में होने की वजह से वो कुछ बोल नहीं पाई और बस ना में सर हिलाने की कोशिश करती रही।

पर अब तीनों मर्द उस अप्सरा जैसी सुंदर बाला पर बेरहमी से टूट पड़े थे।

कहानी जारी रहेगी.
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