साली ने जीजाजी का प्यार पा ही लिया

जब दीदी जाने के लिए तैयार नहीं हुई तो मैंने कहा- मैं भी 4 दिन से घर पर हूं इसलिए मेरा भी कहीं बाहर जाने का मन है.
पर दीदी ने कहा- तुम अपने जीजा जी के साथ चली जाओ, मैं नहीं जाऊंगी।
मैं मान गई और जीजाजी के साथ मॉल में घूमने के लिए चली गई।

जीजा जी ने अपनी बाइक निकाली और मैं उनके पीछे बैठ गई. रास्ते में जब भी जीजाजी ब्रेक लगाते थे तो मेरी चूचियां उनके पीठ के साथ में लग जाती थी, इस पर मुझे बहुत मजा आ रहा था, मेरा मन कर रहा था कि मैं उनको अच्छे से पीछे से जकड़ लूं और अपनी चूचियां उनकी पीठ में गड़ा दूं… पर वे क्या सोचेंगे मेरे बारे में… यह सोच कर मैं बैठी रही और थोड़ी-थोड़ी चूचियां टकराकर ही मजे लेते रही।

उन्होंने मॉल में मुझे खूब घुमाया, खिलाया-पिलाया, हमने खूब इंजॉय किया। हम वापस घर के लिए चलें तो इस बार मैं जीजाजी से अच्छे से सट कर बैठ गई थी और अपनी चुचियों को मजा दे रही थी. मुझे लगा कि जीजाजी भी इसको इंजॉय कर रहे हैं. यह सोचकर मेरी चूत गीली हो गयी।

घर पहुंचने के बाद भी दीदी जीजा जी से बात नहीं कर रही थी.

रात को खाना खाने के बाद हम सोने को चले गए. मेरे को नींद नहीं आ रही थी लेकिन मैं आंखें बंद करके लेटी थी। मैंने सुना कि जीजाजी दीदी को अपने पास बुलाकर प्यार करना चाह रहे थे लेकिन दीदी मुंह घुमा कर सो गई।
थोड़ी देर जागने के बाद जीजाजी भी सो गए.

आज मेरे को नींद नहीं आ रही थी, मेरी चूत में आग लगी हुई थी, फिर जीजा जी भी प्यासे थे, यह सोच कर मेरी चूत और ज्यादा पानी छोड़ रही थी।

जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो उठकर मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और जीजाजी को देखा तो वे बेड के किनारे पर सीधे लेटे हुए थे और उनका लंड पजामे में से उभरा हुआ दिख रहा था. मैं वहीं बेड के पास घुटनों पर बैठ गई और उनके पजामे को थोड़ा नीचे करके उनके लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे प्यार से चूसने लगी.

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तभी जीजा जी की आंख खुल गई और वे हैरानी से मेरे नंगे बदन को देखने लगे। उन्होंने अपना लंड मेरे मुंह से निकालने की कोशिश की लेकिन मैंने अपना दबाव थोड़ा बढ़ाकर उन्हें ऐसा करने से रोक दिया.
उन्होंने कुछ बोलने के लिए अपने लब खोले तो मैंने अपनी उंगली उनके होठों पर रख दी. फिर मैंने उन्हें आंखों से वह कमरे से बाहर चलने का इशारा किया.

वे समझ गए और हम दोनों उठ कर कमरे से बाहर आ गए.

जैसे ही वे बाहर आये, मैं उनसे लिपट गई और हौले से फुसफुसाकर उन्हें कहा- आज मुझे मना ना करें… नहीं तो मेरी जान चली जाएगी!

अब तक लंड चूसने से उनका लंड भी खड़ा हो गया था, उन्हें भी चूत की जरूरत महसूस होने लगी थी. वे मुझे ड्राइंग रूम में ले गए और वहां पर सोफे पर लेटा दिया.
उन्होंने कहा कि वे मेरी हर इच्छा पूरी कर देंगे.
यह कहकर उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए, हम दोनों की जिह्वा आपस में मिली और दोनों को ही मज़ा आने लगा, उनके हाथ मेरी चुचियों पर दबाव डालने लगे. उन्होंने अपने अंगूठे और उंगली के बीच मेरी चूची को लेकर मसल दिया मैं सिसकारी भर उठी।

उन्होंने दूसरी चूची को अपने मुंह में ले लिया और प्यार से चूसने लगे, उनका हाथ अब मेरे पेट और नाभि के ऊपर से होकर मेरी चूत तक पहुंच गया था, उन्होंने प्यार से मेरी चूत को सहलाया और एक उंगली मेरी चूत में डाल दी.

मैं तो जैसे जन्नत में पहुंच गई इतना आनंद कभी मुझे अपनी उंगली से नहीं मिला था. उनके सिर के ऊपर हाथ रखकर मैं उसे चूची पर जोर से दबाने लगी.

थोड़ी देर बाद उन्होंने उठकर अपने सारे कपड़े निकाल दिए मैंने उनके लंड को फिर से मुंह में ले लिया उसको खूब चूसा, चूमा. उसके बाद उनके बलिष्ट शरीर को हर जगह पर चूमा, उनकी छातियों में अपनी चुचियाँ गड़ा दी और जोर से उनको अपने साथ सटा लिया. उनका लंड मेरी चूत के पास में टकरा रहा था, मैं तड़प रही थी उसे अपनी चूत के अंदर लेने के लिए!

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मैंने जीजा जी को कहा कि अब और देर ना करें और मेरी कुंवारी चूत का बरसों पुराना ख्वाब पूरा कर दें!
उन्होंने फिर से मुझे सोफे पर लिटाया और मेरी टांगों के बीच में आकर अपना लंड मेरी चूत से सटा दिया। उन्होंने आगे झुक कर अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और साथ ही साथ अपने लंड को एक झटके में मेरी चूत के अंदर डाल दिया.

मैं दर्द से चीख पड़ी लेकिन मेरी चीख उनके मुंह में ही दब गई कुछ देर ऐसे ही रुकने के बाद मुझे दर्द कम हो गया और मज़ा आने लगा. अब उन्होंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए और मुझे ऐसा आनंद मिला ऐसा कभी नहीं मिला था.

इस तरह उन्होंने मुझे आधे घंटे तक लगातार चोदा और इस दौरान में दो बार झड़ चुकी थी. फिर उन्होंने अपने धक्कों की रफ़्तार तेज कर दी और अपना पानी मेरी चूत में छोड़ दिया.

इसके बाद फिर से उन्होंने मुझे प्यार से चूमा और ऊपर से हट गए.

जब हमारी धड़कन कुछ संयत हुई तो उन्होंने मुझसे पूछा- तुम यह कब से चाहती थी?
मैंने कहा- मैं आप से बहुत पहले से प्यार करती हूं और हमेशा आपको पाने की चाहत रखती थी लेकिन खुद को काबू में रखा लेकिन आज दीदी के आपसे खराब व्यवहार के बाद खुद को काबू में नहीं रख पाई। आप मुझसे वादा कीजिए कि दीदी के साथ-साथ आप मुझे भी इसी तरह से प्यार करते रहेंगे.

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