सहेली की मदद को उसके भाई को फंसाया-4

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    सहेली की मदद को उसके भाई को फंसाया-3

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7-8 मिनट में आकाश ‘हम्म … हम्म … उफ़्फ़ … उफ़्फ़ … उन्नहह …’ करते हुए धीरे धीरे धक्के मारने लगा और फिर रुक गया और साइड में फर्श पे ही पालथी मार के बैठ गया।
मुझे ये तो पता था कि उसका वीर्य नहीं झड़ा है, इसका मतलब वो सिर्फ थक गया है और सुस्ता रहा है।

मैं बेड पे हाथ आगे फैला के उसी अवस्था में पड़ी रही और सांस भरती रही। फिर मैं लड़खड़ाती हुई सी बेड पे आ के सीधी लेट गयी और आँखें बंद कर ली, गहरी सांस भरने लगी और आकाश का इंतज़ार करने लगी।

थोड़ी सी देर में ही आकाश मेरी चूत की तरफ आया और मेरी दोनों टाँगें हवा में उठा के सीधी कर दी और मेरे कंधों तक उठा दी। मैंने हल्की सी आह … करी और आकाश ने अपना लंड मेरी चूत के दरवाजे पे सेट किया और बस बोला- अब एक आखिरी बार!
और लंड को पूरा चूत के अंदर धकेल दिया।

मैंने हल्का सा सिर उठा के आह … करी और आकाश मेरी चूत में पटापट धक्के मार के पूरी ताकत से चोदने लगा। मैं बेड पे आगे पीछे होते हुए ज़ोर ज़ोर से ‘आहह … आहह … आहह … आकाश … आहह … नहीं … आकाश … रुक जाओ … प्लीज … आकाश …आहह … आहह …’ बोलती रही और पूरे मजे ले ले के चुदवाती रही.

आकाश भी ज़ोर से ‘हम्म … हम्म … हम्म …’ करते हुए बस चोदे जा रहा था और बोल रहा था- इस दिन का बहुत इंतज़ार किया है. और तू बोलती है रुक जा … अब तो जब तक सारा खाली नहीं हो जाता. तब तक नहीं रुकने वाला मैं! ये ले भेन की लोड़ी और चुद … ये ले!
और वो पूरी ताकत से पट्ट पट्ट धक्के मारते हुए मुझे चोदता रहा.

उसका लंड किसी मोटे केले की तरह था और मेरी चूत में हर जगह आनन्द ही आनन्द दे रहा था।

5-7 मिनट में ही उसने मेरे जी-स्पॉट को दबा दबा के रगड़ रगड़ के उसने मुझे मेरी मंजिल के करीब पहुंचा दिया था। मेरी साँसें और तेज़ हो गयी और मैं सिर हिलाती हुई ‘आहह … ऊन्न्हह … आहह … अन्नहह … अहहह … आहह …. कमऑन बेबी कम ऑन बेबी और तेज़ और तेज़ … बस चोदते रहो रुको मत … और तेज़ और तेज़।

आकाश ने अपनी पूरी ताकत लगा दी मुझे चोदने में और थोड़ी ही देर में मेरी नस नस में आनन्द भर गया। कुछ ही पल बाद मैं हकलाते हुए हुए बोलने लगी- आ … आ … और … तेज़ … और … तेज़ … बस … बस्स … बस्स … आहह … आहह … आआआआ … आहहह!

और ज़ोर से कंपकपाती हुई ऊपर को उचक के फ़चाक फ़चाक कर के झड़ गयी और फिर शांत हो के लेट गयी. मुझे जैसे मोक्ष प्राप्ति हो गयी हो और जोर ज़ोर से साँसें भरने लगी।

आकाश ने दुबारा अपना लंड डाला और आखिरी बार चोदना चालू कर दिया. उसका चिकना लंड मेरी चूत की चिकनी दीवारों से रगड़ खा रहा था और उसे बहुत आनन्द आ रहा था। अब उसको भी ज्यादा देर नहीं लगी और भी ‘आहह आहह … सुहानी आहह … आ … आ … आ … आहह …’ कर के पट्ट पट्ट चोदते हुए 4-5 पिचकारियाँ छोड़ता हुआ झड़ गया। उसका आधा वीर्य चूत में ही गिर गया और आधा मेरे पेट पे आ के गिर गया।

और फिर आकाश भी मेरे बगल में आ के सीधा लेट गया और हाँफने लगा।

हम दोनों को संतुष्टि मिल चुकी थी। और थकान के कारण कब हमारी आँख लग गयी हमें पता ही नहीं चला।

सुबह उठी तो मैंने देखा कि आकाश मेरे बगल में गहरी नींद में नंगा सोया हुआ था और उसका लंड भी मुरझा चुका था. मैं भी नंगी पड़ी हुई थी बगल में!
मैं दबे पाँव उठी और चुपचाप फोन उठा के सोनम को अपने फोन से मैसेज कर दिया कि काम हो गया है, जल्दी आ।
और फिर अपने फोन में मैसेज डिलीट कर दिया और फोन वहीं छोड़ दिया और वापस आ के लेट गयी जैसे थी।

अब होना था धमाका!

लगभग आधे घंटे बाद मुझे घर के लॉक खुलने की आवाज आई तो मैं समझ गयी कि सोनम आ चुकी है। मैं आँखें खोल के लेटी हुई थी और उसका इंतज़ार कर रही थी और आकाश अभी भी सो ही रहा था।

जैसे ही वो कमरे में आई, मैंने उसको आँख मार के इशारा किया कि शुरू करे आगे का ड्रामा।

वो वापस बाहर चली गयी और मैं आँख बंद कर के लेट गयी। फिर सोनम मेरी ब्रा हाथ में ले के एकदम से धड़ड़ड़ड़ … से ज़ोर से दरवाजा खोला और कमरे में आ गयी और हम दोनों को इस आपत्तिजनक हालत में देख के ज़ोर से ‘आअअअअ …’ कर के चिल्लाई।

आकाश हड़बड़ा के एकदम से उठा और उसे देख के चौंक गया।
सोनम बोली- भैया ये सब क्या है? सुहानी क्या कर रही है यहाँ? क्या हो रहा है यहाँ पे?

आकाश इस सब के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था, उसके पास कोई जवाब नहीं था, वो बस घबराहट में चादर से अपने को ढकने की कोशिश कर रहा था और मैं सोने का ड्रामा कर रही थी। आकाश बोला- सोनम, ऐसा कुछ नहीं है जैसा तू समझ रही है।
सोनम चिल्लाती हुई बोली- तो मैं क्या समझूँ ये सब देख के?

उसने मुझे झझोड़ के उठाया- सुहानी उठ … उठ सुहानी … सुहानी … सुहानी … सुहानी!
मैं सिर पकड़ के झूमती हुई उठी और लड़खड़ाती हुई आवाज में बोलने लगी- आहह … मेरा सर बहुत दुख रहा है, चक्कर आ रहे …
मैं ऐसे एक्टिंग कर रही थी कि जैसे मुझे पता ही नहीं कि क्या हुआ है।

सोनम तुरंत मेरे पास आई और बोली- सुहानी तू ठीक तो है ना?
मैंने कहा- आह … सोनम मेरा सर घूम रहा है.
और मैं झूमती हुई उठ गयी।

सोनम ने कहा- क्या हुआ तुझे? तू बिल्कुल होश में नहीं है.
उधर आकाश डर और घबराहट से ये सब देख रहा था।

सोनम ने पास में रखे पानी के जग से मेरे मुंह पे पानी मारा तो मैंने एकदम से होश में आने का नाटक किया।
मैंने होश में आते ही कहा- मैं कहाँ हूँ? आहह मेरा सर … और मेरे कपड़े कहा है, ये सब क्या हो रहा है।

सोनम ने मुझे चादर औढ़ाते हुए आकाश से कहा- भैया क्या हुआ है यहाँ पे, मुझे अभी बताओ?
आकाश के मुंह से एक भी बोल नहीं निकल रहा थे और वो बस गर्दन झुकाये गुनहगारों की तरह नीचे देख रहा था।

सोनम ने सख्त लहजे में कहा- तुम बाहर जाओ अभी, मैं इसे वहीं लाती हूँ.

और आकाश चादर लपेटे नीचे चला गया अपने कपड़े उठा के।

जैसे ही वो गया सोनम ने दरवाजा बंद कर दिया और कहा- जा जल्दी से खुद को साफ कर ले, अभी बहुत ड्रामा करना है।

मैं खुद को साफ करके बाथरूम से बाहर आयी तो सोनम ने फिलहाल के लिए अपने कपड़े दिए पहनने को। फिर हम दोनों हाल में आ गए। आकाश सर पकड़ के अपनी गलती पर पकड़े जाने से शर्मिंदा होते हुए सर झुकाये बैठा था।

कमरे में आ के मैं और सोनम भी बैठ गयी।
सोनम बोली- तू ठीक है सुहानी अब?
मैंने कहा- हाँ।

सोनम ने पूछा- अब सच सच बता क्या हुआ यहाँ पे?
मैंने मायूस और रोती हुई सी उसे हॉस्टल से निकालने से लेकर आकाश के द्वारा बनाई चाय पीने तक की सारी बातें बता दी।
और फिर बताया- फिर जब चाय पी तो उसके बाद सर सा घूमने लगा फिर याद नहीं क्या हुआ. और सुबह जब तूने मुंह पे पानी मारा तो होश आया। होश आने पे देखा कि मेरे कपड़े गायब हैं और तेरा भाई मेरे बगल में अधनंगी हालत में बैठा है और तू चिल्ला रही है। मेरे प्राइवेट पार्ट्स भी दर्द कर रहे है और चिप चिप हुए पड़े थे।

आकाश ने अपना बचाव करते हुए कहा- ये झूठ बोल रही है, ऐसा कुछ नहीं हुआ।
मैंने रोते हुए सी कहा- मैं सच बोल रही हूँ, मैंने शायद मोबाइल में आवाज रिकॉर्डिंग पे लगाई थी।

मैंने मोबाइल पे रिकॉर्डिंग प्ले कर दी तो आकाश के सारे गुनाहों का कुबूलनामा उसमें रिकॉर्ड था। मैंने ज़ोर ज़ोर से रोने की एक्टिंग शुरू कर दी।

सोनम ने उससे गुस्से में कहा- कुछ और कहना है भैया? तुम ऐसा कैसे कर सकते हो मेरी सहेली के साथ? कैसे इंसान हो तुम? मुझे तो बड़ा ज्ञान देते थे कि लड़कों से दोस्ती मत कर, अच्छे नहीं होते लड़के! अगर पता चला तो टाँगे तोड़ दूंगा, अब खुद ही मेरी सहेली की इज्ज़त लूट के बैठे हो?

आकाश चुपचाप सर झुकाये बैठा था बस।
मैं बोली- सोनम, मुझे पुलिस स्टेशन जाना है, कम्पलेंट लिखानी है कि मेरे साथ क्या क्या किया तेरे भाई ने।

आकाश की सिट्टीपिट्टी गुम हो गयी। वो मेरे घुटनों में आ गया और पैर पकड़ के बोलने लगा- सुहानी प्लीज मुझे माफ कर दो, मेरी ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी।
मैंने उसका हाथ झटकते हुए कहा- और जो तुमने मेरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी उसका क्या?
आकाश सोनम से खुद को बचाने की मिन्नतें करने लगा।

पहले तो सोनम भी कठोर बनी रही कि सही का साथ दूँगी.
फिर जब आकाश रोने लगा तो बोली- तू एक काम कर … थोड़ी देर छत पे जा, मैं देखती हूँ क्या कर सकती हूँ।

उसके जाते ही हम धीरे धीरे हंसने लली और मैं बोली- तेरा भाई तो रोने लगा।
उसने बोला- यही तो अपना प्लान था।

थोड़ी देर बाद सोनम ने आकाश को आवाज लगा के नीचे बुलाया और बोली- मैंने फिलहाल सुहानी को बड़ी मुश्किल से समझाया है, पर वादा करो की आज के बाद उसके आसपास भी नहीं दिखाई दोगे और ना ही मेरे किसी पर्सनल मामले में दखल दोगे. मैं कुछ भी करूँ किसी के साथ भी घूमूँ … तुम नहीं रोकोगे, वरना तुम्हारी काली करतूतों का सबूत सीधा चाचा चाची को और पुलिस को भेज दूँगी।

आज आकाश के पास कोई रास्ता नहीं था, उसने बोला- ठीक है बहन, जैसा तू कहेगी वैसा ही करूंगा।

फिर मैंने अपने कपड़े वापस पहने और सोनम ने मेरे लिए कैब बुलवा दी। फिर वो मुझे हॉस्टल छोड़ने आ गयी।

हॉस्टल आ के हमने अपनी सारी कहानी तन्वी को बताई तो वो बोली- वाह मेरी सहेलियों एक तीर से दो दो निशाने लगा आई। अब सोनम भी गुलछर्रे उड़ाने को आज़ाद है और सुहानी तू तो उड़ा के आई ही है गुलछर्रे।
मैंने बस यही कहा- हाँ यार, कुछ भी हो इसका भाई चोदता बहुत बढ़िया है।

तन्वी ने कहा- अरे वाह … मेरा भी करवा दे फिर काम सोनम! चल एक बार और गेम खेलते हैं।
सोनम बोली- कमीनियो … भाई है मेरा वो … चचेरा भाई ही सही … पर भाई तो है।
फिर मैं और तन्वी ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी।

तो दोस्तो, आप सबको मेरी यह कहानी कैसी लगी? ज़रूर बताइएगा कमेंट्स में या मेल में! और अच्छी लगी हो तो लाइक जरूर करे ताकि मुझे भी पता चले आपको पसंद आई।
मिलते है अगली कहानी में … तब तक मजे करते रहें।
धन्यवाद
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