पापा के गेस्ट अंकल ने मेरी कुंवारी चूत में बड़ा लंड घुसा के चोदा

मेरी उम्र उस वक्त 18 की ही रही होगी. चुलबुली, नटखट और बहुत ही शरारती थी. पापा का डाइ की फेक्ट्री थी. और बहुत सब लोग हमारे घर पर आते थे. दरअसल शहर में वो अकेले ही व्यापारी थे जिसके पास कुछ ख़ास रंग की डाई मिलती थी. और दिल्ली से ले के देहरादून और साउथ से ले के ईस्ट इंडिया तक के बहुत सब लोग पापा के पास आते थे.  कभी किसी किसी को पापा हमारे घर के सामने गार्डेन में बने हुए गेस्ट हाउस में ठहरा देते थे. मम्मी अक्सर नाराज होती थी लेकिन पापा को जैसे उसकी आदत हो गई थी. वैसे पापा का तर्क ये थे की वो लोग बड़े व्यापारी होते थे जिन्हें वो हमारे घर के गेस्ट हाउस में ठहराते थे और हमारा शहर छोटा होने की वजह से ढंग के होटल नहीं थे यहाँ. मम्मी की नाराजगी की एक नहीं चलती थी पापा के सामने. उन दिनों मेरा फिगर 34 30 34 का था और मैं अपनी बायोटेक की डिग्री की पढ़ाई कर रही थी. एक बॉयफ्रेंड था मेरा उसका नाम नवीन था लेकिन हम दोनों किस से आगे अभी तक बढे नहीं थे.

सन २०१३ की वो ठंडी की रातें थी. पापा शाम के करीब 7 बजे एक आदमी को घर ले के आये. वो पहले भी हमारे यहाँ आया था. उसका नाम अनवर खान था जो बनारस में बनारसी साडी का बहुत बड़ा व्यापारी था. पापा ने मम्मी को कहा की इनके लिए भी खाना बना देना. मम्मी का मुहं बिगड़ा तो था लेकिन अनवर खान के सामने उसने अपना बिगड़ा हुआ चहरा ठीक कर के उसे स्माइल ही दी. अनवर को गेस्ट हाउस में सेट कर के पापा आये तो मम्मी उनके ऊपर बिगड़ गई. क्यूंकि हमारे घर में जो कपल काम करता है इंदू और कमल वो अपने गाँव गए थे किसी रिश्तेदार की डेथ की वजह से. शाम को मम्मी ने खाना बनाया और मुझे बोला की जाओ गेस्ट रूम में अंकल को दे के आओ. मैं दो थाली में सब खाना ले के गई. दरवाजा लात से खोला तो वो खुल गया और मैं बिना ननोक किये ही अंदर चली गई. मैंने देखा की अनवर अंकल सोफे पर ही लुंगी पहन के सोये हुए थे. मैंने खाना निचे रखा और वहां से वापस ही निकलने वाली थी. लेकिन तभी मेरी नजर उनकी उठी हुई लुंगी के ऊपर पड़ी. उन्होने अंदर चड्डी नहीं पहनी थी और लुंगी एक साइड पंखे की वजह से उठ गई थी शायद अभी अभी ही. और उनका काला लंड और गोल टट्टे दिख रहे थे. ना चाहते हुए भी मैं उस लंड को देखती ही रही.

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तब तक मैंने लंड सिर्फ पोर्न में ही देखा था. इसलिए आज लाइव लंड देखने को मिला तो मैं खुद को रोक नहीं पाई. लंड को देख के पता नहीं मेरे बदन में भी एकदम से क्या हुआ. मेरे अंदर के होर्मोंस जैसे खुद ही झर गए और मेरी चूत की चमड़ी अपनेआप ही चिकनी होने लगी. मेरे निपल्स में अकड आ गई और मेरा मन बार बार उस देसी लोडे को देखने को हो रहा था. मेरे मुहं में भी पानी आने लगा था. लेकिन ये सब थोडा अजीब भी था इसलिए मैंने सोचा की चलो यहाँ से खिसक जाती हूँ. उसके पहले की अनवर अंकल उठ के मुझे देखे मैंने निकलने के लिए सोचा. तभी मेरा पाँव सोफे को लगा जब मैं घुमने को हुई और उनकी आँखे खुल गई. साली मेरी निगाहें तब भी उनके लंड पर ही थी! बाप रे मैं तो पकड़ी गई थी! अंकल ने अपनी लुंगी को ठीक किया.

मैंने कहा आप के लिए खाना ले के आई हूँ अंकल.

उन्होंने कहा, थेंक यु.

और ये कह के उन्होंने लुंगी के ऊपर से अपने लंड को हाथ से दबा दिया.

मैं वहां से स्माइल के साथ निकल गई. मम्मी ने पूछा खाना दे आई. मैंने कहा हां.

और फिर मम्मी ने कहा देख मैं और तेरे पापा रीतेन अंकल के वहां पार्टी के लिए जा रहे है. पापा को वैसे मैंने बोला है ड्रिंक ना करने के लिए इसलिए जल्दी ही आ जायेंगे. मैंने कहा ठीक है मम्मी.

और फिर मम्मी पापा कार ले के चले गए. मैंने हॉल में ही बैठी टीवी देख रही थी. तभी दरवाजे के ऊपर हलकी सी दस्तक हुई. मैंने पूछा कौन तो वहां पर से अनवर अंकल की आवाज आई मैं.

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मैंने दरवाजा खोला वो अंदर आये और बोले, पापा पार्टी के लिए गए क्या?

मैंने कहा हां, आप को पता था की वो जाने वाले है.

वो बोले हां मुझे बोला था उन्होंने.

फिर वो हंस के बोले मुझे लगा की तुम घर में अकेली कहीं डरो ना इसके लिए मैं कम्पनी देने के लिए आ गया.

मैंने हंस के कहा, अरे अंकल मैं नहीं डरती वरती.

वो बोले हाँ वो तो मैं देखा की तुम अब बड़ी हो गई हो!

और ये कहते हुए उन्होंने मुझे बूब्स के ऊपर देख के अपने होंठो के पर जीभ को फेर दिया. इस अंकल की वहसी नजरों से मेरा चोदन हो रहा था शायद. और पता नहीं मुझे भी ये सब अच्छा लग रहा था की वो मेरा चक्षु चोदन कर रहे थे. मैंने तब एक पतली नाईट ड्रेस पहनी थी जिसके अंदर ब्रा नहीं थी. इसलिए मेरी कडक निपल्स आकार बना रही थी टॉप के उपर जिसको अनवर अंकल बार बार देख रहे थे.

वो मेरे साथ ही सोफे में बैठ गए और टीवी देखने लगे. टीवी पर मूवी चल रही थी. जिसमे एक किस का सिन आया, कसम से मेरा अपने आप पर कंट्रोल नहीं हो रहा था. और तभी मेरी जांघ पर अंकल ने हाथ रखा और सहला के बोले तो पढाई कैसी जा रही थी.

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