पड़ोसन बनी दुल्हन-3

बात जारी रखते हुए सुषमाजी ने टीना को कहा की एक साल तक तो वह फॅमिली प्लानिंग करते रहे। एक साल बाद उन्होंने बच्चे का प्लान बनाया। करीब तीन साल तक बिना गर्भ निरोधक के वह मैथुन करते रहे। पर गर्भ तो दूर सुषमाजी का पीरियड में भी कोई देरी नहीं हुई।

कई डॉक्टर को दिखाने के बाद जब सब डॉक्टरों ने एक ही सुर में कहा की सुषमाजी और सेठी साहब दोनों में से किसी में कोई कमी नहीं है। पर बच्चा क्यों नहीं हो रहा इसका जवाब कोई नहीं दे पा रहा था।

कई डॉक्टर, वैद, हकिम और साधू संतों को दिखाने के बाद एक स्पेशलिस्ट गाइनोकोलॉजिस्ट डॉक्टर जिसने इस मामले में काफी रिसर्च की थी, सेठी साहब को कहा की कई लाखों में कोई एक केस ऐसा होता है जब पुरुष के शुक्राणु किसी एक स्त्री के बीज से मेल नहीं खाते और स्त्री का बीज उस पुरुष के शुक्राणु से फलीभूत नहीं होता। हो सकता है किसी और स्त्री से संगम करने से वह फलीभूत हो। या फिर किसी और पुरुष के शुक्राणु से सुषमाजी का बीज फलीभूत हो।

लाखों में से एकाद केस ऐसा होता है की कोई ख़ास मर्द के वीर्य का बीज (क्रॉसमोज़ोम) किसी ख़ास औरत के बीज को फलीभूत नहीं कर पाता है। ऐसा क्यों होता है यह शारीरिक विज्ञान समझ नहीं पाया है। पर ऐसा कभी कभी होता है। वह डॉक्टर के अनुसार सेठी साहब और सुषमा के केस में भी ऐसा ही हुआ था।

अगर सेठी साहब किसी और औरत से सम्भोग करे तो उस औरत को या सुषमाजी किसी और मर्द से सम्भोग करे तो सुषमाजी को माँ बनने में कोई दिक्क्त नहीं होगी ऐसा उस स्पेशलिस्ट डॉक्टर का ओपिनियन था। इसका मतलब तो यह हुआ की सेठी साहब के वीर्य से सुषमाजी गर्भ धारण नहीं कर सकती। जब से सेठी साहब और सुषमाजी को यह पता चला तब से जैसे उनके जीवन में एक अँधेरा सा छा गया। या यूँ कहो की उनके दाम्पत्य जीवन में एक उदासीनता आ गयी।

वैसे ही शादी के कुछ सालों बाद पति पत्नी के बिच सेक्स की नवीनता कम हो जाती है। परन्तु डॉक्टर की बात सुन कर जैसे दोनों में एक दूसरे से सेक्स करने की इच्छा ख़तम सी हो गयी। सेठी साहब और सुषमाजी दोनों ही बच्चे पाने के लिए बड़े बेकरार थे पर भाग्य को कुछ और ही मंजूर था।

सुषमाजी ने कहा की वह दोनों किसी भी बच्चे को गोद लेने के पक्ष में नहीं थे। सुषमा जी का कहना था की जबतक या तो सुषमाजी का या सेठी अपना खुद का बच्चा ना हो तो वह प्यार आ ही नहीं सकता। जब से उनको समस्या इस बात का पता चला तब से सुषमा जी बड़ी गहराई से सोच में डूब गयी की इस को कैसे सुलझाया जाए।

सेठी साहब की दूसरी शादी का सवाल ही पैदा नहीं होता। एक रास्ता यह था की सेठी साहब किसी और औरत से बच्चा पैदा करे और वह बच्चा वह दोनों गोद ले ले। पर वह औरत कौन होगी और क्या वह ऐसी सौदेबाजी के लिए राजी होगी? यह बड़ा मुश्किल सवाल था। दुसरा रास्ता यह था की सुषमाजी किसी और मर्द से सम्भोग करे और फिर जो बच्चा हो वह उसे रख ले।

किसी और मर्द से सम्भोग करना यह एक बड़ी दुविधा थी जिसके लिए सुषमाजी राजी नहीं थी। हाँ, अप्राकृतिक गर्भधारण से किसी और मर्द का वीर्य सुषमाजी के गर्भ में स्थापित कर वह सुषमाजी गर्भ धारण कर सकती थी। यह एक विषय था जिस पर सेठी साहब और सुषमाजी विचार कर रहे थे। पर सेठी साहब किसी भी अनजाने मर्द के वीर्य से बच्चा हो यह नहीं चाहते थे। मामला काफी जटिल बनता जा रहा था। अब किया जाए तो क्या किया जाए?

जहां तक की सेठी साहब का टीना को छेड़ने और लाइन मारने का सवाल था तो सुषमाजी ने टीना को शादी और विवाहेतर सेक्स के बारे में कुछ बातें खुलकर बतायीं।

सुषमाजी ने कहा, “देखो टीना, यह जिंदगी छोटी सी है। उसमें भी अपनापन महसूस हो, ऐसे कपल कहाँ मिलते हैं? बड़ी मुश्किल से आप दोनों हमें मिले हैं जिनसे हम खुले दिल से मिल सकते हैं, सारी बातें शेयर कर सकते हैं। जब हमारी शादी हुई थी तब सेठी साहब को मैंने अपनी शादी से पहले हुए अफेयर्स के बारे में बताना चाहा। तब सेठी साहब ने मुझे एक बात कही..

उन्होंने कहा की मर्द और औरत किसी नाजुक घडी में जोश में आकर एक दूसरे से अगर सेक्स कर बैठे तो उसे बुरा नहीं मानना चाहिए। जरुरी सवाल यह है की क्या आप एक मर्द से जिन्दगी भर सुखदुख में साथ रहने का वादा करने के लिए तैयार हो? सेठी साहब ने शादी के समय मुझसे शादी करने के लिए एक शर्त रखी थी। उन्होंने मुझसे वचन लिया था की हम जिंदगी भर एक दूसरे पर पूरा विश्वास रखेंगे और एक दूसरे को कभी नहीं छोड़ेंगे..

अगर कभी ऐसा हुआ की मेरा किसी गैर मर्द से या उनका किसी गैर औरत से कोई शारीरिक सम्बन्ध हो भी गया तो हम एक दूसरे को ताना टोका नहीं करेंगे, ना ही रोकेंगे और ना ही कोई सवाल करेंगे। सेठी साहब ने मुझे वचन दिया की वह कभी भी किसी गैर औरत को घर में नहीं घुसाएँगे और अपनी पत्नी का ओहदा किसी गैर औरत को नहीं देंगे। उसी तरह से उन्होंने मुझसे भी वचन लिया की मैं भी किसी गैर मर्द से किसी भी हद तक जाऊं, पर मैं सेठी साहब को छोड़ उसके साथ नहीं जाउंगी और सेठी साहब को नहीं छोडूंगी।”

सुषमाजी की बात सुनकर टीना के होश उड़ गए। सेठी साहब और सुषमा में इतना तालमेल? टीना ने कभी सोचा भी नहीं था की पति और पत्नी के बिच इतनी स्पष्ट अंडरस्टैंडिंग हो सकती है। सुषमाजी टीना को जैसे शादीशुदा जीवन का फलसफा समझा रही थी। टीना ने सुषमा जी की बात ध्यान से सुन रही थी।

सुषमाजी ने बात जारी रखते हुए कहा, “मुझे नहीं पता की तुम चुदाई को कितना एन्जॉय करती हो। मैं तो बहुत एन्जॉय करती हूँ। जब मैं और सेठी साहब चुदाई करते हैं तो खुल कर सब कुछ करते हैं। कोई पाबंदी नहीं होती। क्या तुम लोग भी खुल कर चुदाई एन्जॉय करते हो?”

सुषमाजी का सवाल सुनकर टीना कुछ घबड़ा सी गयी। उसने सोचा नहीं था की सुषमाजी ऐसा कोई सवाल करेंगी। टीना ने कुछ हिचकिचाते हुए कहा, “जी, वैसे हम लोग वैसे ही सेक्स करते हैं जैसे होता है।”

सुषमाजी ने कहा, “अरे चुदाई के नाम से क्यों घबड़ा जाती हो? अंग्रेजी शब्द सेक्स बोल सकती हो तो देसी शब्द चुदाई क्यों नहीं बोल सकती? बात तो एक ही है। चुदाई हर मर्द और औरत के जीवन का एक अहम् हिस्सा होता है। चुदाई करना कोई पाप नहीं, बशर्ते की वह जबरदस्ती ना किया जाए। तुम्हारी बड़ी बहन होने के नाते मैं कह रही हूँ की अगर तुम चुदाई के समय खुल कर पूरा एन्जॉय नहीं करती तो समझो की जिंदगी का एक अद्भुत सुख गँवा रही हो। सेठी साहब तो इस बात में कुछ ज्यादा ही माहिर हैं..

उन्होंने ने ही मुझे यह सब सिखाया है। मेरे सेठी साहब इतने हैंडसम और रोमांटिक हैं। मैं जानती हूँ की तुम सेठी साहब को बहुत पसंद करती हो। सेठी साहब तो तुमको पसंद करते ही हैं। और यार हर मर्द को दूसरे की बीबी अच्छी लगती है। तुम तो वैसे ही इतनी खूबसूरत, समझदार और अगर तुम बुरा ना मानो तो कहूं की सेक्सी हो। तुम मानो या ना मानो, पर हम सब को शादी के एक दो साल के बाद एक दूसरे से चुदाई में वह मजा नहीं आता जो शादी के बाद शुरूशुरू में आता है। और जिंदगी का यही वक्त है लाइफ एन्जॉय करनेका..

तो मुझे तुम एक दूसरे से करीब आओ उसमें कोई बुराई नजर नहीं आती। मुझसे छिपाने या डरने की कोई जरुरत नहीं है। मुझे कुछ कहने की भी जरुरत नहीं है। सेठी साहब मेरे पति हैं और हमेशा रहेंगे। जब तुमसे सेठी साहब कुछ ज्यादा छेड़खानी करते हैं तो घरमें रातको मेरे साथ भी वह ज्यादा रोमांटिक हो जाते हैं। यह मेरे लिए बहुत अच्छी बात है।”

सुषमाजी की बात सुनकर टीना की आँखें चौड़ी फ़ैल गयीं। उसकी आँखों में अचम्भे का भाव देख कर सुषमाजी बोलीं, “देखो टीना। मैंने तुम्हें कहा है ना, की अब जब हम सेक्स के बारे बात कर ही रहे हैं तो बेहतर है हम कोई लागलपेट के बिना एकदूसरे से खुल्लमखुल्ला अपनी सारी सीक्रेट शेयर करें। मेरे साफ़ और खुल्लमखुल्ला चुदाई, लण्ड बगैरह शब्दों का प्रयोग करना और हमारी निजी बातें बताना इस लिए है की मैं और सेठी साहब तुम्हें और राजजी को पराया या दुसरा नहीं मानते। तुम दोनों को हम अपना मानने लगे हैं..

हमारी जिंदगी का यह राज़, आज तक मैंने किसी से शेयर नहीं किया। तुम इसका बुरा मत मानना। मैं और सेठी साहब एकदूसरे से खुल्लमखुल्ला बातें ही करते हैं। अब तो आप लोगों से भी यह पर्दा नहीं रहा। अगर तुम भी मुझसे बिना घुमाये फिराए सारी बातें खुल्लमखुल्ला करोगी तो मुझे अच्छा लगेगा।”

टीना ने कुछ झिझकते हुए कहा, “सुषमाजी मैंने कभी इस तरह से किसी से बात नहीं की। पर यह सच है की हम भी आप दोनों को अपना मानते हैं। जहां तक मैं जानती हूँ, मेरे पतिमेरे मुकाबले काफी खुल्लमखुल्ला बातें करते हैं। हम पति पत्नी भी आपस में खुल्लमखुल्ला ही बात करते हैं। मेरे लिए यह अनुभव कुछ नया है इस लिए मुझे मेरी उलझन के लिए क्षमा करना।”

सुषमाजी ने टीना को कहा की वह ज़माना चला गया जब पति और पत्नी सिर्फ एक दूसरे से ही सम्भोग करके खुश रहते हैं। अब जो कपल कुछ एक्सट्रा एन्जॉय करना चाहते हैं, उन पति पत्नी में एक ऐसी अंडरस्टैंडिंग हो रही है की पति और पत्नी एक दूसरे ही सहमति से दूसरे मर्द या औरत के साथ शारीरिक सम्भोग का आनंद लेने के लिए तैयार रहते हैं।

अक्सर ऐसे कपल दूसरे ऐसे कपल को ढूंढते रहते हैं जो एक ही मानसिकता वाले, मीठे स्वभाव के और विश्वास पात्र हों। ऐसे माहौल में एक पति का किसी और की पत्नी से मिलने पर काफी निजी तरीके सम्बोधन करना जैसे की “डिअर, डार्लिंग” बगैरह तो आम बात है। जब एक दूसरे के पति पत्नी से सम्भोग करने की बात हो तब पति के सामने ही उसकी पत्नी की कमर में हाथ डालकर उसे करीब खिंच कर लिपट कर आलिंगन करना कोई अजूबा नहीं गिना जाता।

आज कल मोबाइल और इंटरनेट के कारण पति का पत्नी के अलावा दूसरी औरतों से और पत्नी का पति के अलावा दूसरे मर्दों से करीबी संपर्क काफी बढ़ गया है। इसके कारण परस्पर जातीय आकर्षण हो ही जाता है।

इस हालात में यह आवश्यक हो गया है की शादी के बंधन को बनाये रखने के लिए शादी के नियमों में कुछ आमूल परिवर्तन किये जाएँ। शादी का बंधन किसी साधारण औरत मर्द की चुदाई से कहीं बढ़कर है। औरत मर्द का प्यार साधारण तया शारीरिक भूख के अलावा भावुकता से भी जुड़ा हुआ होता है। पर शादी के बंधन में कई और मसले जुड़ जाते हैं जो शादी के बंधन को बनाये रखने में कारगर साबित होते हैं। बच्चे, समाज, परिवार, लोकलाज, आर्थिक सम्बन्ध इत्यादि इनमें प्रमुख हैं।

इसीलिए सुषमाजी ने कहा की उन्होंने और सेठी साहब ने मिलकर यह तय किया था की दोनों ही एक दूसरे के विजातीय संबंधों के बारे में एक दूसरे से कोई छानबीन नहीं करेंगे और ना ही कोई ज्यादा दिलचश्पी रखेंगे। यदि दोनों में से किसी को भी किसी और से जातीय सम्भोग करने की कामना हो तो वो करे। परन्तु उस व्यक्ति से ऐसे अधिक भावुक सम्बन्ध ना बनाये जिससे की वैवाहिक जीवन में कोई बाधा पैदा हो।

सुषमा ने टीना से कहा की सेठी साहब ने जब से टीना से छेड़खानी करनी शुरू की है तब से सेठी साहब और सुषमा के संबंधों में भी कुछ सुधार होता नजर आ रहा है। जरुरी ना होने पर भी सेठी साहब सुषमाजी से कुछ छिपाते नहीं बल्की सारी बातें बता देते हैं।

सुषमाजी की बात सुनकर टीना को एक तगड़ा झटका लगा। सुषमाजी और सेठी साहब के सम्बन्ध इतने खुले और घनिष्ठ होंगे उसकी टीना ने कल्पना तक नहीं की थी।

सुषमाजी से बात कर टीना को काफी अच्छा लगा। वह काफी तनावमुक्त महसूस कर रही थी। टीना ने मुझे इस चर्चा के बारे में जब बताया तो मैं भी अचंभित सा सोचता ही रह गया। सुषमाजी ने टीना को जो शादीशुदा कपल का फलसफा सिखाया था वह सब टीना ने मुझे अक्षरसः कहा। सुषमाजी के स्पष्ट विचारों के बारे में सुनकर तो मैंने भी दांतों तले उंगलीयाँ दबालीं।

हकीकत में तो सुषमाजी को सेठी साहब और टीना का एक दूसरे के करीब आना अच्छा लगा। उनके मन में आस जगी की अगर टीना और सेठी साहब के सम्बन्ध और गहरे हुए तो हो सकता है की टीना को मनाया जा सके और शायद कुछ बात बन जाए। टीना और सेठी साहब का एक दूसरे के प्रति जो आकर्षण पैदा हो रहा था वह मुझसे भी अछूता नहीं था।

पर जलन होने के बजाय मुझे भी सेठी साहब और टीना का इस तरह करीब आना अच्छा लगने लगा। एक कारण यह भी था की शादी की पांच सालों के बाद की पति और पत्नी के नीच में विजातीय आकर्षण की नीरसता से शायद टीना ऊब चुकी थी। चुदाई के समय वह पहले जैसी सक्रियता नहीं ला पा रही थी जो शादी के बाद होती थी।

मुझे लगा की शायद टीना के लिए भी सेठी साहब का उसकी जिंदगी में आना और इस तरह टीना के लिए उसकी सुंदरता, सेक्सीपन और कमनीयता की सराहना पाना एक अच्छा सौपान था जिसे टीना कहीं न कहीं एन्जॉय कर रही थी। मेरे मन में एक आस जगी की शायद हमारी यह घनिष्ठता आगे चल कर कुछ रंग ला सकती थी। काश ऐसा हो की सेठी साहब मौक़ा पाकर टीना की चुदाई करे और टीना भी उनसे सहर्ष चुदवाये।

अगर ऐसा हो तो टीना की चुदाई सेठी साहब साहब कैसे करते हैं, टीना के मन के भाव सेठी साहब से चुदवाते समय कैसे होंगे, टीना चुदाई को कैसे एन्जॉय करेगी यह सब सोच कर मेरा लण्ड भी मेरे पायजामे ने खड़ा हो गया। मैं टीना और सेठी साहब की चुदाई के बारे में सोचने लगा। अब विधाता को क्या मंजूर था वह तो विधाता ही जाने।

उधर टीना और सेठी साहब की कहानी पनप रही थी तो मुझे सुषमा के बदन को हासिल करने की लालसा सता रही थी। सुषमा का चेहरा बेबी फेस कहते हैं, वैसा था। सुषमा की छाती उनकी कमर के नाप को चुनौती देने वाली थी। उनकी गाँड़ भी बड़ी सुआकार थी। मेरी रातों की नींद सुषमा की गाँड़ के बारे में सोच कर गायब हो जाती थी।

सुषमाजी के बदन की खुशबु पाने के लिए मैं हरदम बेचैन रहता था। हर बार जब भी सुषमा मेरी नज़रों से नजरें मिलाकर देखती थी तो पता नहीं मुझे ऐसा लगता था जैसे उनकी आँखें मुझे चुनौती दे रही हो की “आओ और मुझे अपनी बाँहों में ले लो।” हो सकता है की वह मेरे मन की लालसा ही थी या फिर हकीकत में वह ऐसा कुछ चाह रही थी।

पढ़ते रखिये.. कहानी आगे जारी रहेगी!

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