मॉम की पैंटी चुराने वाले ठरकी बेटे को सिखाया सबक

मॉम पैंटी लवर बॉय सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि मैं अपनी सीनियर के घर जा रही थी। रास्ते में एक यंग लड़के ने मुझे छेड़ा और मेरे बूब्स दबाकर भाग गया। फिर मैंने क्या किया?

हैलो फ्रेंड्स, मैं सिमरन (सेक्सी डोमिनेंट गर्ल)! मेरी नजर में जो ज्यादा चोदू जवान लड़के होते हैं वो आपकी चूत को हर टाइम गीली रख सकते हैं।

मगर एक औरत के पास इस तरह से जोशीले और वहशी मर्द का कंट्रोल होना चाहिए।

आज मैं आपको बताऊंगी कि कैसे मैंने एक 23 साल के नौजवान लड़के को सेक्सुअल डिसीप्लिन सिखाया।
बल्कि मेरे लेटेस्ट डॉमिनेशन ने उस बिगड़ैल का सबसे गंदा राज खोला।

अब मॉम पैंटी लवर बॉय सेक्स स्टोरी में बताती हूं कि यह कैसे हुआ था:

मैं उस वक्त अपनी कंपनी की चंडीगढ़ ब्रांच में काम कर रही थी और वो गर्मियों के दिन थे।
वहां मैं दो हफ्ते के लिए थी और जब मुझे पता चला कि आखिरी दिन मुझे हाफ डे में ही काम करना है तो मैं बहुत एक्साइटेड हो गई।

अपने घर लौटने से पहले मैंने तय किया कि मैं एक होटल में अपने बॉयफ्रेंड के साथ बचे हुए पूरे हफ्ते तक रहूंगी।

मुझे दिया हुआ काम पूरा हो चुका था। मेरे पास बस एक ही काम बचा था जो मुझे मेरे बॉयफ्रेंड से चुदाई के लिए मिलने से पहले पूरा करना था।

काम ये था कि मुझे अपनी टीम की सीनियर मेंबर के पास हार्ड कॉपी देकर आनी थी क्योंकि उस दिन वह छुट्टी पर थी।

वह चंडीगढ़ के बाहरी इलाके में रहती थी। उसके घर पहुंचने से पहले ही रास्ते में मुझे एक बिगड़ैल लड़का मिल गया।

वैसे तो मैंने कैब बुक की थी।
मगर उसके बाद भी मुझे 15-10 मिनट पैदल चलकर जाना था।

दोपहरी का समय था और गर्मी बहुत ज्यादा थी। कैब ड्राइवर ने चढ़ाई पर ऊपर गाड़ी ले जाने से मना कर दिया। वो कहने लगा कि उसकी गाड़ी में फ्यूल नहीं बचा है और वह वहीं बीच रोड़ पर फंसकर नहीं खड़ा होना चाहता है।

इसलिए मैं पैदल ही चल पड़ी।

मैं अपनी मोटी गांड लिए उस चढ़ाई पर चढ़ती जा रही थी।
तभी पीछे से एक पतला सा लड़का बाइक लेकर आया और मेरे बराबर में धीरे धीरे चलने लगा।

उसके मुंह में सिगरेट थी और वो अजीब नजरों से मेरे बदन को घूर रहा था।

मैंने उसे एक दो बार देखा और जब मैं उससे दूर जाने लगी तो उसने फिर अपनी चाल चली।

लड़का- कितना है (साइज)? (कहने के बाद मेरे बदन को वो घूर रहा था)
मैं- एक्सक्यूज़ मी?
मैं जानती थी कि उसको गलतफहमी हो गयी थी कि मैं कोई रंडी हूं, मगर मैं फिर भी इस बात को पक्का करना चाहती थी कि क्या वो सच में ऐसा ही सोच रहा था?

लड़का- बाइक पर बैठो, मुझे एक अच्छी जगह पता है!
उसने अपने होंठों से धुंआ बाहर फेंकते हुए कहा, जिससे वो कूल दिखने की कोशिश कर रहा था.

मैं- जा … अपनी मम्मी को चोद, हरामी!
मैंने उसे गाल पर चांटा मारने की कोशिश कि लेकिन वो बचा ले गया.

बाइक की स्पीड बढ़ाने से पहले उसने मेरे दाएँ चूचे को दबा दिया और मुझे रंडी कहते हुए वहां से भाग गया।

मैं अपनी सीनियर के घर पहुंची।
मैंने देखा तो दरवाजा खुला हुआ था।

जब मैं अंदर गई तो वो नजारा देखकर शॉक हो गई।
वो सीनियर मेंबर जिसका नाम प्रीति (बदला हुआ) था, एक पंजाबी औरत थी। वो काफी लम्बी थी। उसकी चूचियां बहुत बड़ीं और गांड काफी भारी थी। शरीर में भी थोड़ी भारी थी।

वो अपने हस्बैंड के साथ सोफे पर बैठी हुई थी और उसका पति अखबार पढ़ रहा था।
उसका हाथ अपने पति के कॉटन के ट्राउज़र में घुसा हुआ था; वो उसके लंड को सहला रही थी ताकि उसको सेक्स के लिए उकसा सके।

मगर उसके पति का कोई रिएक्शन नहीं मिल रहा था।

इससे पहले कि मैं पलटती, प्रीति ने मुझे देख लिया और झटके से अपना हाथ उसके ट्राउजर से बाहर खींच लिया।

यह काफी शर्मिंदगी वाला पल था, मगर प्रीति नॉर्मल तरीके से खड़ी हुई और मेरी तरफ चलकर आई, जैसे कि कुछ हुआ ही न हो।

उसने मुझे वेलकम कहा और हाथ मिलाया।
वही हाथ जिससे उसने अपने पति का लंड पकड़ा हुआ था!

उसके पति ने मुझे फॉर्मल स्माइल दी और वहां से निकल गया।

मैं सोफे पर बैठ गयी और प्रीति मेरी बगल में बैठी।
तब मैं उसको डॉक्यूमेंट देने लगी और पूछा- मैंने तुम्हारे प्राइवेट टाइम में तुम्हें डिस्टर्ब तो नहीं किया?

प्रीति मुस्कराई और बोली- नहीं स्वीटी! नहीं किया। उसका (लंड) अब किसी काम का ही नहीं है। मुझे उम्मीद थी कि कोई चमत्कार हो जाएगा और इसका खड़ा हो जाएगा क्योंकि मैं डिल्डो और वाइब्रेटरों से अब थक चुकी हूं।

इस पर वो खिलखिलाकर हंस रही थी, जबकि मैं उसकी ओर बस हल्की स्माइल दे रही थी।
हो सकता था कि उसका पति हमारी बातें सुन रहा हो।

मेरा काम तो हो गया था तो मैं उठकर चलने लगी।

मगर प्रीति ने मेरी जांघ से मुझे पकड़ लिया और मुझे फिर से बिठा लिया।
प्रीति- पागल मत बनो डियर! इस गर्म दोपहरी में तुम जैसी खूबसूरत लड़की को मैं कैसे बाहर चलने दे सकती हूं। थोड़ा आराम कर लो, मेरे साथ चाय पी लो, उसके बाद शाम में चली जाना।

उसने इतने प्यार से मुझे पूछा कि मैं मना नहीं कर पायी।
उसने मेरे लिए लंच की भी तैयारियां कर दीं।

फिर हम गेस्ट रूम में बैठीं और खूब मजेदार बातें कीं।

जब हम दोनों गप्पें मार रही थीं तो उसका पति अंदर आ गया और कहने लगा कि उन दोनों को पड़ोसी के यहां भी जाना है।
प्रीति ने उसको थोड़ी देर रुकने के लिए कहा और बाहर इंतजार करने के लिए बोली।

प्रीति धीमी आवाज में बोलते हुए- तुम्हें पता है, मेरे पड़ोसी का बिगड़ैल बेटा मेरी अंडरगार्मेंट्स चुरा ले जाता है। हम उसके पेरेंट्स से इसी बारे में बात करने जा रहे हैं। मैं जल्दी ही वापस आऊंगी, तब तुम एक छोटी सी नींद की झपकी ले लो।

प्रीति के जाने के बाद मैं उस बिगड़ैल यंग लड़के के बारे में सोचने लगी जो मुझे रोड पर मिला था।
मैंने सोचा कि हो न हो ये वही होगा।

अब आप कल्पना कीजिए, मुझे कैसा धक्का लगा होगा जब प्रीति तुरंत वापस आई और उसने मुझे अपने बेटे से मिलवाया।

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उसका बेटा कोई और नहीं, बल्कि वही शैतान लड़का था जो मुझे रोड पर छेड़ रहा था।
प्रीति- सिमरन, ये मेरा प्यारा बेटा सोनू है। जब तक मैं नहीं आती, तब तक अगर तुम्हें कुछ चाहिए होगा तो सोनू तुम्हारी मदद करेगा।

प्रीति ने सोनू को अजीब तरीके से गले लगाया।
सोनू का मुंह उसकी चूचियों में दब गया था जबकि सोनू ने अपनी मॉम को कमर में से पकड़ा हुआ था।

मैं सोचकर उलझन में पड़ गई थी कि एक दूसरे को प्यार जताने का ये कौन सा तरीका है?
फिर अगले ही पल जो हुआ उससे मेरी उलझन सुलझ गई।

प्रीति जब मुड़कर जाने लगी तो सोनू ने उसे पीछे से हग कर लिया और अपनी जांघों वाला हिस्सा अपनी मॉम की गांड की दरार पर सटा दिया।
और प्रीति को इसमें जरा भी अजीब नहीं लगा मगर मैं सब समझ गई।
उस लड़के के मन में क्या चल रहा था मैं जान गई थी।

वो अपनी मॉम की सेक्स की अधूरी प्यास का फायदा उठा रहा था।

प्रीति के दरवाजे तक पहुंचने तक वो अपने लंड को उसकी गांड पर सटाए हुए ही गया।
उसके जाने के बाद वो अंदर आया और मुझे घूरने लगा।

सोनू- तो, हम दोबारा मिल गए। मैं विश्वास नहीं कर पा रहा हूं कि तुम मेरे सामने बेड पर लेटी हो। उनके आने से पहले एक बार (चुदाई) हो जाए?

पहले तो मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि प्रीति के खुद के ठरकी बेटे के होते हुए कोई और उसकी अंडरगार्मेंट्स कैसे चुरा सकता था।
मगर मैं उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले सकती थी क्योंकि मेरे पास कोई सुबूत नहीं था।
वैसे भी अपनी मॉम की नजरों में वो बहुत अच्छा बेटा था।

मैंने अपने गुस्से को काबू में रखा और उसे वहां से निकल जाने के लिए कहा।
अगर वो उसका बेटा नहीं होता तो मैं दोनों हाथों से पकड़ कर उसे दीवार से तब तक मारती रहती जब तक कि वो माफी नहीं मांग लेता।

सोनू ने एकदम से अपनी पैंट उतार दी और मुझे अपना लंड दिखाने लगा।
उसकी टांगें काफी पतली थीं और जांघों पर मुश्किल से ही कुछ मांस था।

हां मगर, उसका लंड और उसकी गोलियां काफी शेप में थीं।
उसका साइज अच्छा था।

वो मेरी तरफ देखते हुए अपने लंड की मुठ मारने लगा।
मैं- तुम, सूअर कहीं के!!
मैंने अपने आप पर काबू खो दिया।

मैं उठी और सोनू को सबक सिखाने का सोचा।
मुझे आती देख वो रूम से भागने लगा लेकिन उसका पैर उसके अंडरवियर के पतले कपड़े पर फिसल गया और वो गिर पड़ा क्योंकि फर्श पर टाइल बिछी हुई थीं।

मैं- तुम अब फंस चुके हो, मादरचोद!
उसकी गर्दन को जोर से दबोचते हुए मैंने कहा.

फिर मैं उसके ऊपर जांघों के सहारे से बैठ गयी।
अगर मैं उसकी कमर पर बैठ जाती तो उसकी रीढ़ की हड्डी ही शायद टूट जाती।
मैं उसकी गांड पर चपेट देने लगी।

वो चिल्लाने लगा और कहने लगा कि थप्पड़ मत मारो।
उसकी गांड मेरे थप्पड़ों से लाल हो गई थी।
मैं- हम्म … आया मजा सूअर कहीं के? चिल्लाओ! मगर ये उम्मीद मत रखना कि तुम्हारी मॉम तुम्हें मुझसे बचाने आएगी।

मैंने उसे उठाया और अपनी छाती से सटाकर ले जाने लगी।
वो छूटने लगा लेकिन उसकी बॉडी में कुछ जान ही नहीं थी।
मैं उसको उसके रूम में ले गई और उसे बेड पर पटक दिया।

उसको बेड से बांधकर मैंने सबक सिखाने का सोचा।

मैंने यहां वहां देखा तो कूदने वाली रस्सी दिखी। मैंने सोनू को पकड़ा और रस्सी लेने चली।

वो लेते हुए मुझे बैग से एक रेड कलर का फेबरिक भी बाहर निकला हुआ दिखा।

उसे चेक करने के मकसद से मैंने उसे बाहर निकाला तो वो एक लाल पैंटी निकली।
मैं सोनू को ऐसे पकड़े हुए थी जैसे उसकी मां ने अपने छोटे बच्चे को उठा रखा हो।

मैंने पैंटी को देखा और सोनू ने भी … फिर हम दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा।

जब मैंने बैग में अंदर झांका तो पाया कि वो ब्रा और पैंटी से भरा हुआ था।

कोई पड़ोसी प्रीति की पैंटी नहीं चुरा रहा था बल्कि ये उसका अपना ही बेटा था।
मैंने उसे छोड़ दिया और वो घबराया हुआ मेरे सामने खड़ा हो गया।

मैं- मुझे कोई ताज्जुब नहीं है, मगर अपनी मॉम के बारे में सोचो कि उसको कैसा लगेगा। तुम उसकी गांड में लंड घुसाना चाह रहे थे मगर अब तुम्हें अपनी गांड की चिंता करनी चाहिए।

सोनू अपने घुटनों पर आ गया और मेरे पैर पकड़ कर माफी के लिए गिड़गिड़ाने लगा।
वो जान गया कि उसकी अच्छे बेटे वाली इमेज अब मिट्टी में मिल जाएगी और साथ ही जो हरकतें वो अपनी मॉम को उकसाने के लिए करता था वो भी बंद हो जाएंगीं।

सोनू- ओह्ह प्लीज … मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूं, इसे किसी को मत बताना। वो मुझे घर से बाहर निकाल देगी अगर उसको इस बारे में पता चल गया।

मैं- वहां बाहर रोड पर बाइक पर जो लड़का सिगरेट फूंक रहा था वो तो तुम नहीं लग रहे, वो कहां गया अब? लूज़र …

सोनू- मेरी तरफ देखो, ये हूं मैं … मैं बिगड़ चुका हूं। बाहर मैं हर औरत को छेड़ता हूं। ये सब भूल जाओ प्लीज और जाओ यहां से!
हालांकि सोनू मुझसे भीख मांग रहा था मगर फिर भी मुझे उसकी नजरों में कुछ अजीब लग रहा था।

जब मैंने ध्यान दिया तो वो मेरी चूत वाले एरिया में सूंघने की कोशिश कर रहा था।

मैं- साले बिगड़ैल, बंद करो ये! मैं तुम्हारी मॉम की तरह नहीं हूं जिसको पता ही न चले कि उसका बेटा उसकी गांड में लंड चढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
सोनू- यस … मारो मुझे … मगर ऐसे ही बात करो … ओह्ह … यस … ऐसे ही करो!

उसने अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया जो उसकी तीसरी टांग के रूप में उसकी बॉडी से काफी अलग था।
वो मेरी टाइट गांड में घुसने के लिए काफी लम्बा और मोटा था।

सोनू- ओह कुछ तो बोलो, रुको मत … बताओ, मैंने अपनी मॉम की गांड के साथ क्या किया? आह्ह … बोलो प्लीज!

मैं उसकी बॉल्स में लात मारते हुए- तुम्हें अभी भी जोश चढ़ा है? हो क्या गया है तुम्हें?
सोनू खड़ा हो गया और मुझे अपना लम्बा मोटा तना हुआ लंड पकड़ा दिया जो तनाव में ढीला पड़ने लगा था।

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इससे पहले कि मैं उसके लंड से हाथ हटाती और उसे थप्पड़ मारती, उसने अपने दोनों हाथों से मेरे हाथ को पकड़ लिया और अपने लंड पर दबा लिया।

सोनू- मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करूंगा। मगर मुझे ऐसे सूखा मत छोडो़। मेरे जैसे लड़कों को आसानी से तुम्हारे जैसे सुडौल बदन वाली लड़कियां नहीं मिलतीं।

उसकी बातें सुनते हुए मैंने ध्यान नहीं दिया कि उसने मेरी गांड को पकड़ लिया था और अपने लंड की मुठ मारने लगा था।

हालांकि वो एक पागल था लेकिन उसके मोटे लंड में मुझे भी रूचि हो गई थी।
मैंने धीरे से उसके लंड को सहलाया और उसकी बॉल्स को मसाज किया ताकि लंड फिर से पूरा टाइट हो जाए।

सोनू- यस … ऐसे ही … करती रहो … आह्ह!
मैं- मैं इतनी आसानी से तुम्हें मजा नहीं दूंगी सोनू, बल्कि तुम्हें अपने मजे के लिए मुझे खुश करना होगा।

उसने फिर से कहा कि वो कुछ भी करने के लिए तैयार है।

तो मैंने उसे बेड पर लेट जाने के लिए कहा।

उसके लेटने के बाद मैं बेड पर खड़ी हो गई और अपनी ऑफिस स्कर्ट को उतारने लगी।
जब सोनू को मेरी सफेद पैंटी दिखी तो उसके लंड में झटका लगा।

मैंने सोनू के मुंह पर से पेशाब करना शुरू किया और नीचे की ओर जाने लगी।
वो अपने लंड की मुठ मारने लगा जैसे ही उसे लंड पर मेरा गर्म पेशाब महसूस हुआ।

मैंने उससे कहा कि अपनी मालकिन को रिझाओ ताकि वो उसको मजा दे।

सोनू- येस … मैं अपनी सेक्सी मालकिन के पेशाब के लायक हूं। प्लीज मुझे अपनी चूत चटवाकर इसे अच्छे से साफ करने दो।

मैं- क्या तुम इसे अपनी मॉम की चूत समझकर चाटना पसंद करोगे? क्या उसकी चूत पर बाल हैं? क्या तुम उसकी पैंटी में से उसके झांट के बाल निकालते हो? क्या उसकी पैंटी पर हमेशा उसकी चूत के पानी के धब्बे होते हैं?

ये सारे सवाल सुनकर सोनू इतना उत्तेजित हो गया कि वो मेरी चूत को ऐसे चाटने लगा जैसे कोई कुत्ता अपने मालिक को चाटता है।

वो बहुत ज्यादा गर्म हो गया था और मेरी चूत को अंदर तक अपनी जीभ से खोद रहा था।

मैं- अपनी मॉम को पीछे से टाइट हग करने की कोशिश करो। उसकी गांड तुम्हारे बड़े लंड को महसूस करना चाहती है। तुम्हें उसकी पैंटी चुराने की जरूरत नहीं है, जब वो उनको धो रही हो तो उसी वक्त उनको इस्तेमाल किया करो। तुम बिना उम्मीद के मम्मा बॉय हो, अपनी मॉम के साथ सेक्स करने की कोशिश करो, इससे पहले कि कोई और उसकी चूत और गांड में अपना मोटा लंड घुसा दे।

सोनू- हां … मालकिन … मैं उम्मीद खो चुका हूं। मैं वैसा ही करूंगा जैसा आपने कहा। अब मुझे अपनी गांड चाटने दो। मुझे ऐसा ही पसीने भरा और बिना साफ किया गांड का छेद चाहिए जिसे मैं अपनी जीभ से चाटकर साफ कर दूं।

मैं घूम गई और सोनू के मुंह पर बैठ गई।
उसने मेरी टाइट गांड के अंदर अपनी जीभ दे दी और उसको अंदर बाहर करने लगा।

वो इतनी जोर से कर रहा था कि मुझे अपनी चुदास पर काबू पाने के लिए अपनी चूत को ही रगड़ना शुरू करना पड़ा।

मैं- क्या तुम मेरी चूत को अपने लंड से साफ करने के लिए तैयार हो?

सोनू- येस, मिस्ट्रेस … प्लीज मुझे अपना लंड आपकी चूत में डालकर इसे साफ करने दो।
मैं बेड से नीचे गई और प्रीति की पैंटी ले आई।

फिर मैंने अपनी गांड को सोनू के मुंह पर रखा और उसे चाटने के लिए कहा।

मैं- अब तुम मेरी चूत में उंगली भी कर सकते हो। मुझे तुम्हारा लंड लेने के लिए चूत को थोड़ी और गर्म करना है।

अब सोनू एक बार फिर से मेरी गांड को चाटने लगा।

वो मस्त अंदाज में मेरी चूत में उंगली भी करने लगा।

दूसरी ओर मैंने पैंटी को अपनी हथेली पर पहन लिया और उसके लंड को पकड़ लिया।

वह पहले से ही टाइट था तो मैंने पैंटी पहनी हुई हथेली से उसकी मुठ मारनी शुरू कर दी।

मैं- क्या तुम अपनी मॉम की चूत में अपने कड़क लंड को डॉगी स्टाइल में घुसाना चाहोगे? क्या तुम उसकी गांड पर चांटें मारते हुए उसको गंदी गंदी गालियां देना चाहोगे?

सोनू- हां … हां … मैं बिल्कुल करूंगा मालकिन! मैं उसे चोदूंगा और गालियां दूंगा। अब और मत तड़पाओ, मेरा छूटने से पहले मुझे अपनी चूत चोदने दो।

मैंने उसके लंड पर थप्पड़ मारा और इस वाक्य को थोड़ी इज्जत से बोलने के लिए कहा।
सोनू- सॉरी मिस्ट्रेस, मेरा मतलब था मुझे मेरे लंड से आपकी चूत की सेवा करने दो, प्लीज मुझे इसकी सेवा करने दो।

मैं- कोई जल्दी नहीं है सोनू! अब मुझे बताओ क्या तुम अपनी मॉम को अपने लंड पर बिठाकर उछालोगे? क्या तुम उसकी गांड में उंगली देकर जोर जोर से उसकी सिसकारियां निकलवाओगे? उसकी गांड में अपना लंड पूरा अंदर तक घुसाने के बारे में क्या ख्याल है?

सोनू- नहीं … प्लीज … मिस्ट्रेस … ऐसे मत तड़पाओ। मेरे लंड को अपनी चूत का स्वाद लेने दो। मेरे लंड को और मत हिलाओ।
मैं- अब बहुत देर हो चुकी है मादरचोद!

कुछ ही देर के बाद सोनू के लंड ने जवाब दे दिया और एकाएक उसके गर्म माल ने पूरी पैंटी को भिगो दिया।

मैंने पैंटी को लंड से हटाया और वो वीर्य में सनी हुई पैंटी उसके मुंह पर लगा दी।

मैं- अब जाओ, और अपनी मॉम को चोदने की कोशिश करो … लूज़र! मैं शर्त लगा सकती हूं कि तुम केवल उसके सोते समय उसके मुंह पर ही माल छोड़ सकते हो मादरचोद!

सोनू के साथ इस कामुक सेशन के बाद मैंने उसे वहीं छोड़ दिया।
मेरा मूड फ्रेश हो चुका था।

उसके घर से जाने से पहले मैंने प्रीति को बोल दिया कि सोनू के रूम में शेल्फ पर रखा हुआ एक काला बैग चेक कर ले!
ये मेरा सोनू से आखिरी बदला था।

मुझे उम्मीद है मेरी मॉम पैंटी लवर बॉय सेक्स स्टोरी पढ़कर आप लोगों का माल छूट गया होगा।

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मुझे बंगाली, हिन्दी, इंग्लिश और बिहारी भाषा भी बोलनी आती है।