फौजी चाचा का लंड चूसा

मेन गे सेक्स की कहानी में पढ़ें कि मुझे पुरुषों के प्रति आकर्षण महसूस होने लगा था. मेरे चाचा का कसरती जिस्म मुझे लुभाता था. मैंने चाचा का लंड कैसे चूसा?

मेरा नाम रविराज चौधरी है. मैं हरियाणा के बहादुरगढ़ से हूं. जब मैं 12 वीं क्लास में था, तो मुझे पुरुषों के प्रति आकर्षण महसूस होने लगा था.
पहले तो मैंने इसे नजरअंदाज किया लेकिन बाद में मैंने इसे अपनी जिंदगी का एक हिस्सा बना लिया.

आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपने बारे में बता देता हूँ.

मैं दिल्ली में एक सरकारी कर्मचारी हूँ. मेरी 5 फुट 8 इंच की हाइट है और 75 किलोग्राम वजन है.

यह मेन गे सेक्स कहानी मेरी ओर मेरे चाचा के बीच की एक गे सेक्स कहानी है.
मेरे चाचा 35 साल के 6 फीट लंबे एक कामुक मर्द हैं.

मैं शुरू से ही उनके शरीर को देखकर आपा खो देता था.
उनकी काले बालों से भरी हुई छाती, पहलवानों जैसा शरीर, मुझे उनकी ओर आकर्षित करता था.
मेरे चाचा आर्मी में हैं, तो उनकी बॉडी एकदम मेंटेन है.

यह उस समय की बात है, जब एक बार चाचा छुट्टी लेकर घर आए हुए थे.

मेरी मां और चाची दोनों अपने मायके गई हुई थीं. पापा बिजनेस के सिलसिले में दिल्ली गए हुए थे.
घर पर मैं और चाचा ही थे.

उस वक्त मेरी उम्र 20 साल थी तथा चाचा 32 के थे.
चाचा ने रात का खाना बनाया और हम दोनों ने एक साथ खाया.

फिर मैंने चाचा को गुड नाईट बोला और अपने रूम में आकर सो गया.
कुछ देर बाद मेरे रूम का एसी अचानक बंद हो गया.

हमारा घर पूरा बंद सा है, जिसकी वजह से काफी उमस सी हो जाती है.

मेरे पापा के रूम में एसी नहीं है क्यूंकि उन्हें नजले की शिकायत है.

अब मेरे पास एक ही ऑप्शन बचा था कि चाचा के साथ रूम शेयर किया जाए.
कहीं ना कहीं मैं भी यही चाहता था. उनके साथ लेटने में मुझे उनके शरीर को देखने का मौका मिलता.

मैंने चाचा के रूम का दरवाजा खटखटाया लेकिन उन्होंने दरवाजा नहीं खोला.
फिर मैंने उनको अपने फोन से कॉल किया और सब कुछ बताया.

तब उन्होंने दरवाजा खोला.
वो नींद में थे.
जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं.

मैंने आज तक चाचा को सिर्फ शॉर्ट्स और बनियान में देखा था. उस वक्त वो मेरे सामने जॉकी के ब्रीफ अंडरवियर में खड़े थे.
हालांकि उन्होंने कंधे पर चादर डाल रखी थी लेकिन तब भी उनका लंड साफ उठा हुआ दिख रहा था.

उनकी छाती के घने काले बाल और पूरे शरीर के मर्दाना बाल देखकर मैं जैसे एक मूर्ति की तरह खड़ा ही रह गया.
फिर मैंने होश संभाला और रूम में दाखिल हो गया.

चाचा ने रूम बंद कर दिया और चुपचाप उल्टा लेट कर सो गए.
मुझे कहां नींद आने वाली थी.

पूरी रात में लैंप की हल्की रोशनी से मैं चाचा के शरीर को निहारता रहा.
कुछ देर बाद चाचा सीधे हो गए और उन्होंने अपने पैर खोल दिए.

वो गहरी नींद में सो रहे थे. उनका लंड तनाव में था जो मुझे साफ दिख रहा था.
चाचा की अंडरआर्म्स बिल्कुल साफ थीं.

अब मुझसे रहा ना गया.
मैंने सोते हुए चाचा के लंड को उंगली से छुआ.
लेकिन डर था कि कहीं वो उठ ना जाएं.

मैंने हिम्मत करके उनके लंड को दो तीन बार छुआ.
इससे आगे मेरी हिम्मत ना हुई और मैं जैसे तैसे मुठ मारके सो गया.

जब मैं सुबह उठा तो चाचा रूम में नहीं थे.
मैंने देखा वो छत पर एक्सर्साइज कर रहे थे.
उनका पूरा शरीर पसीने से भरा हुआ था.

कुछ देर बाद चाचा की एक्सरसाइज पूरी हो गई थी.
मैं उनके रूम में खिड़की से ही उन्हें देख रहा था लेकिन वो मुझे नहीं देख सकते थे.

कुछ टाइम बाद कुछ ऐसा हुआ, जो मैं देखना चाहता था.

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चाचा ने अपनी शॉर्ट्स ओर बनियान निकाल दी.
अब वो सिर्फ लंगोट में थे.
हरियाणा में ज्यादातर लोग लंगोट बांध कर ही एक्सरसाइज करते हैं.

उनकी जांघों के बाल और भीगा हुआ लंगोट देख कर मैं अपने आपको रोक ना सका और अपने लंड को सहलाने लगा.
तभी चाचा एकदम से रूम की तरफ आने लगे.
मैंने अपने आपको ठीक किया और बेड पर बैठ गया.

चाचा अन्दर आए और बेड पैर पड़ी चादर एकदम से अपने ऊपर डाल ली.
फिर मुझे देख कर बोले- रवि उठ गया बेटे.

ये उन्होंने हरयाणवी में कहा था.
मैंने उन्हें गुड मॉर्निंग कहा और अपने रूम में आ गया.

चाचा ने नाश्ता बनाया और मुझसे बोले- आज दोपहर में एसी सुधारने वाला आएगा, ठीक करवा लेना. मुझे बाहर कुछ काम है. मैं नहीं आ पाऊंगा, तुम खाना बाहर से मंगवा लेना.
मैंने बोला- ठीक है चाचा जी.

दोपहर में एसी ठीक करने वाला आया.
वो एक काला बिहारी था. वो एसी ठीक करके चला गया.

मैंने ऑनलाइन खाना मंगवाया और टीवी देखते हुए खाना खाया.

फिर मैं चाचा के रूम में चला गया.
मैंने वॉशरूम में टंगे उनके अंडरवियर को देखा, जो फ्रेंची कट वाला था और उसमें से उनके लंड की शेप अभी भी बनी हुई थी.

मैंने उसको सूंघा तो मुझे बहुत आनन्द आया. मैंने मुठ मारकर उनका नाम लेते हुए उनके अंडरवियर पर अपना पानी निकाल दिया, फिर धोकर वहीं सूखने डाल दी.

कुछ देर बाद मैंने उनके बेड के गद्दे को उठाया. वहां बहुत सारे मैनफोर्स और स्कोर के कंडोम थे.

शायद चाचा चाची को कंडोम लगाकर ही चोदते थे.
उस समय मुझे चाची की याद आ गई.
मैंने झट से चाची की अल्मारी को खोला और उनके कपड़े देखने लगा.

चाची के कपड़ों में उनकी ब्रा पैंटी भी थी.
मुझे न जाने क्यों मुस्कान आ गई. मैंने चाची की अल्मारी से उनकी ब्रा पैंटी और एक घुटनों तक आने वाली मैक्सी निकाली और अपने कमरे में आ गया.

मैं कुछ देर सोचता रहा, फिर मुझे उनके मेकअप की याद आई, तो मैं वापस चाचा के कमरे में गया और उधर से चाची की लिपस्टिक आदि उठा लाया.

मैंने बड़े मनोयोग से अपने कपड़े उतारे और चाची की ब्रा पैंटी पहनी.
फिर मैंने उनकी घुटनों तक आने वाली मैक्सी पहन ली.

मैं चूंकि क्लीन शेव्ड रहता हूँ तो मेरे होंठों पर लिपस्टिक ने मुझे एकदम किसी लौंडिया जैसा रूप दे दिया था.
मैं बस बालों से लौंडा लग रहा था वर्ना एकदम से मस्त माल लग रहा था.

मैंने एक ओढ़नी अपने सर पर डाल ली, तो मैं खुद को देख कर मोहित हो गया.

कुछ देर बाद मैं उसी रूप में गया और चाचा की चड्डी को लाकर उसे अपने लंड पर लपेट कर मुठ मारने लगा.
मुझे बड़ा अच्छा अहसास हो रहा था.
मैं मजे में अपनी आंखें बंद करके चाचा के लंड के बारे में सोचने लगा.

कुछ देर बाद मैंने कपड़े उतारे और अपने कमरे में ही छोड़ कर चाचा की चड्डी को एक बार फिर से धोने लगा.

अब रात होने को आ गई थी.
चाचा आने वाले थे लेकिन वो आज बहुत लेट हो गए थे.

फिर एकदम मुझे उनकी गाड़ी की आवाज आई और मैं बहुत खुश हो गया.
मैं चाचा को देखने नीचे गया तो में हैरान रह गया आज चाचा ने बहुत ज्यादा पी रखी थी.

वो गाड़ी से उतरते समय नीचे गिर गए.
मैंने भाग कर उन्हें उठाया.
उनका वज़न 88 किलो था, जैसे तैसे मैंने उन्हें उठाया.

उनके अंडरआर्म्स से आ रही पसीने की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी.
मेरी नाक बिल्कुल उनकी कांख के पास थी.

मैंने उनको कमर के पीछे से हाथ डाल कर पकड़ा और एक हाथ उनके पेट पर लगा रखा था.
चाचा बार बार रवि बेटे रवि बेटे कह रहे थे.

मैं उनको बड़ी मुश्किल से ऊपर लेकर गया और उनके रूम में जाकर उन्हें बेड पर लिटाने लगा.
लेकिन वो न जाने कैसे एकदम से बेड पर धम्म से गिरे तो मैं भी उनके साथ बेड पर गिर गया.

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उस समय मैं उनकी छाती पर गिरा था तो उनका लंड मुझे महसूस हो गया.
मैं उनकी शर्ट से दिख रहे छाती के बाल और पसीने के साथ साथ उनकी पैंट की जिप को भी देख रहा था.

फिर मैंने अलग होकर उनके जूते निकाले.
तभी चाचा ने अपने आप ही अपनी शर्ट के बटन खोल दिया मगर निकाली नहीं.
फिर बेल्ट खोल दी.
लेटे हुए ही उन्होंने पैंट के बटन को भी खोल कर नीचे सरकाने की कोशिश की.

पैंट नीचे करते समय उनकी अंडरवियर कुछ नीचे हो गई थी, जिससे उनके लंड के आस पास के बाल दिखने लगे थे.
सीन देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.

कुछ देर बाद चाचा खर्राटे मारने लगे.
मेरा ध्यान उनके लंड पर ही टिका था.

मैंने उनकी आधी उतरी पैंट पूरी उतार दी.
मेरा मकसद उनका लंड देखना था और साथ ही उनकी अधखुली शर्ट भी निकाल दी लेकिन मैं बनियान नहीं निकाल पाया.

अब मैं चाचा को देखता रहा.
मैंने चाचा को हिलाया.
वो कुछ बड़बड़ा रहे थे लेकिन आंख नहीं खोल रहे थे.

फिर मुझसे रहा ना गया.
मैंने उनके लंड को छुआ जो सो रहा था. मैंने कुछ देर अपने हाथ को उनके अंडरवियर पर रखा और लंड को हल्के से सहलाया.
चाचा का लंड खड़ा होने लगा.

फिर मैंने आराम से उनके अंडरवियर को नीचे करने की कोशिश की तो उनका लंड 8 इंच का लंड दिखने लगा था.

चाचा का लंड बिल्कुल भुजंग काला था. जबकि चाचा बिल्कुल गोरे हैं.
मैं खुद इस बात से हैरान था कि साला लंड काला कैसे हो गया.

मैंने उनका लंड हाथ में ले लिया.
उनका लंड इतना मोटा था कि मेरे हाथ की मुठ्ठी बंद नहीं हो रही थी.
उनका सुपारा बिल्कुल लाल था.

मैंने एक दो लंड बार हिलाया.
तो चाचा एकदम से हम्म बोले.

मैं डर गया लेकिन वो चाची का नाम ले रहे थे और कह रहे थे- चूस ले रीना रानी चूस ले!
मैंने एक पल सोचा और उनके लंड के सुपारे पर जीभ धर दी.
मुझे अच्छा लगा अतो मैंने झट से लंड को मुँह में ले लिया.

मोटा लंड था तो मुँह में घुस ही नहीं रहा था.
फिर मैं पहली बार लंड अपने मुँह में ले रहा था.

मैं लंड चूसने लगा.
उनके लंड से मुझे पसीने के साथ साथ मूत की महक आ रही थी.
मैंने काफी टाइम तक उनके लंड को चूसा, उनके अंडकोष दो मोटी गेंदों जैसे थे, जिनको चूसने में मुझे इतना मजा आया कि मैं बता नहीं सकता.

मेरा मुँह दुखने लगा लेकिन उनका पानी नहीं निकला.

कुछ देर बाद चाचा जोर जोर से सिसकारियां लेने लगे और मेरा सिर दबाने लगे ‘आह चूस रीना चूस …’

लेकिन उन्हें क्या पता कि मैं रीना नहीं, बल्कि उनका गांडू भतीजा हूं.
कुछ 5 मिनट बाद चाचा ने मेरा सिर जोर से पकड़ लिया और बुरी तरह हांफने लगे.

उनके लंड से 10-12 मोटी धार मेरे गले को चीरती हुई जाने लगी थीं.
उनके लंड का स्वाद नमकीन और कसैला सा था.

मैं सारा वीर्य पी गया.
कुछ बूंदें मेरी टी-शर्ट पर भी गिर गईं.
मैंने उन्हें सूंघा तो बहुत तेज़ अजीब सी मदहोश करने वाली महक थी.

चाचा के लंड का वीर्य पीने के बाद मैं खड़ा हुआ तो मैंने देखा कि चाचा जागे तो नहीं थे मगर बंद आंखों से हंस रहे थे.
वो चाची का नाम ले रहे थे.

चाचा का वीर्य पीकर मैं बहुत खुश था लेकिन मुझे उनकी छाती, बगलों और होंठों को भी चूसना था.

ये थी मेरी गांडू वाली गे सेक्स कहानी जो मेरे सगे चाचा और मेरी थी.
ईमेल करके जरूर बताना कि आपको मेन गे सेक्स कहानी कैसी लगी.
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