मौसी की जवान लड़की को रात में चोदा

मैं उसे धकाधक पेल रहा था। अब उसकी भोसड़ी अपना सफ़ेद मक्खन छोड़ने लगी। मैं चूत की तरफ देखा तो जब जब लंड चूत से बाहर आता था सफ़ेद मक्खन उसपर लगा होता था। मुझे इस बात की खुसी हुई की मैं उसे परम और चरम सुख दे रहा था। वो बड़ी शांति से चुदवा रही थी। आज मैं उसे चोदकर बहनचोद बन गया था। 15 मिनट अब बीत चुके थे। चूत रवा हो गयी थी। उसका छेद अच्छे से खुल गया था। मैं जल्दी जल्दी पेल रहा था। मेरा लंड उसकी कसी चूत का भर्ता बना रहा था। उसके दूध को पकड़कर मैं दबा दबाकर सेक्स कर रहा था।
“पुष्कर भैया!! एक मिनट रुको!!” गुडिया बोली
मैं रुक गया और लंड उसकी भोसड़ी से निकाल लिया। गुडिया ने एक मोटा तकिया बगल से खींचा और अपनी गांड के नीचे लगा लिया। फिर आराम से लेट गयी।
“आओ भैया!! चोदो आकर” वो बोली
उसकी फटी चूत के दर्शन करके मुंह में पानी आ गया। मैंने उसके पैर खोल दिए और चूत को जल्दी जल्दी चाटने लगा। उसका सफ़ेद मक्खन मेरे मुंह में आ गया। उसे मैं प्रसाद समझकर पी गया। मैंने ऊँगली से गुडिया की खोल दी। बिलकुल गुलाबी और गजब की खूबसूरत। मैं भी कामुकता से भर गया और जल्दी जल्दी मुंह लगाकर चूसने लगा। गुड़िया “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….भैया आराम से पियो” बोलने लगी
मैंने ऊँगली से उसकी गुलाबी चूत खोलकर और अंदर वाली असली चूत पीने लगा। मौसी की लड़की तो अब जैसे पागल हुई जा रही थी। अपना पेट और गांड आसमान में उठा रही थी। उसका भोसड़ा (चूत का मोटा सुराख) देखकर मैं कामुकता से भर गया था। जल्दी जल्दी छेद को पी रहा था। उसके साथ मुख मैथुन कर रहा था। इस तरह से गरमा गर्म बुर चुसाई से गुड़िया झड़ गयी और उसने पानी छोड़ दिया। 4 5 बार उसकी चूत ने पानी पिच्च पिच्च छोड़ दिया। दोस्तों मेरा तो मुंह ही भीग गया। गुड़िया अंगराई लेते हुए अपने पैर समेटने लगी।
“खोल छिनार!!! अपनी दिखा” मैंने कहा और उसके पैर पर एक चांटा मार दिया
गुड़िया ने फिर से अपने पैर किसी रंडी की तरह खोल दिए। उसके भोसड़े का दीदार फिर से करने लगा। जितना जादा दीदार करता था उतना ही सुख पाता था। फिर से मुंह चूत पर लगा दिया और चूसने लगा। जैसे आज मैं वासना से पागल हो गया था। फिर से लंड उसकी चूत में दे दिया और 10 मिनट चोदा। फिर मैं अंदर ही झड़ गया। मेरे हाथों और घुटनों में दर्द हो रहा था क्यूंकि बहुत साला वीर्य मैंने स्खलित कर दिया था। गुडिया के बगल की लेट गया।

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“आई लव यू!! पुष्कर भैया!! आई लव यू!!” गुड़िया बोली और मेरे गालो पर किस करने लगी।
आज की रात मेरी जिन्दगी की यादगार रात थी। मैं भी चोदकर शांत हो गया था और सरला मौसी की लड़की गुड़िया भी चुदवाकर शांत हो गयी थी। हम दोनों को जल्दी ही नींद आ गयी। रात के 4 बजे हम दोनों की नींद टूटी।
“क्यों पुष्कर भैया!! रात में कितना मजा आया??” गुड़िया मुस्कान के साथ बोली
मैंने उसे फिर से पकड़ लिया। अब भी मेरी तरह से नंगी थी। हम दोनों ने कपड़े नही पहले थे। उसके दूध गोल गोल कितने खूबसूरत थे। भरे हुए मम्मे थे। मेरी वासना फिर से उसका गदराया जिस्म देखकर जाग गयी। मैं गुड़िया के उपर लेट गया और दूध मुंह में लगाकर जल्दी जल्दी चूसने लगा। फिर से उसे गर्म करने लगा। वो “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….”करने लगी। मैं बारी बारी से उसकी रसीली चूचियां 10 10 मिनट चूसी।
“चल बहन!! घोड़ी बन जा” मैंने कहा
गुडिया घोड़ी बन गयी। मैं उसकी गांड को चाटने लगा। उसने अभी तक एक बार भी गांड नही मरवाई थी। उसकी गांड कुवारी थी। किसी ने अभी तक उसकी गांड नही चोदी थी। मैं जल्दी जल्दी गांड का छेद चाटने लगा। गुडिया कांपने लगी। चाट चाटकर मैंने गीला कर दिया। फिर अपने लंड पर तेल लगा दिया। अब उसकी गांड के छेद में डालने लगा पर कुवारी होने की वजह से अंदर ही नही जा रहा था। मैं भी चोदू टाइप भाई था। जबरन अंदर धक्का देने लगा और फिर सफलता मिल गयी। मेरा 5” लंड अंदर घुस गया। गुड़िया रोने लगी। मैं धीरे धीरे उसकी गांड मारने लगा। उसके दोनों पुट्ठे सहला सहलाकर उसकी गांड चोदने लगा। 20 मिनट बाद मैंने लंड बाहर निकाल लिया और जल्दी जल्दी मुठ मारकर उसकी गांड के छेद पर माल गिरा दिया। अब गुड़िया मुझसे पट गयी है और अक्सर ही चुदवा लेती है।

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