मौसी की जेठानी की प्यास बुझाई- 1

हॉट लेडी सेक्स कहानी मेरी मौसी की जेठानी की है जो अपने पति की शराब की लत के कारण सेक्स से वंचित थी. मैंने कैसे उसे उत्तेजित करके चुदाई के लिए तैयार किया?

प्रिय पाठको,
आपने मेरी पिछली कहानी
मौसी की जेठानी को दिखाकर मौसी को चोदा
में अब तक आपने पढ़ा कि
नीतू को हमारे सम्बन्धों से कोई ऐतराज नहीं था इसलिए मैं रूपाली को उसके कमरे में चोद रहा था. तभी मैंने देखा कि नीतू हमें छिप कर देख रही है।
नीतू की देह देखकर मैं उसके बदन को भोगने के लिए आतुर हो रहा था इसलिए रात को मैं नीतू कि कल्पना में रूपाली कि चुदाई कर रहा था।

अब आगे हॉट लेडी सेक्स कहानी:

सुबह छ: बजे मैं बाथरूम जाने के लिए उठा।
बाथरूम से लौटते वक़्त मैंने नीतू के कमरे की लाइट जलती हुई देखी तो मुझसे रुका नहीं गया और मैं उसके कमरे की तरफ चला गया।

दरवाजे को हल्का सा धक्का दिया तो जरा सा दरवाजा खुल गया।
अंदर देखा तो नीतू कमरे में कुछ परेशान सी यहाँ वहाँ टहल रही है। उसकी आँखें लाल हो रही थी जैसे उसने सारी रात बिना सोये बितायी हो।

मैं बिना पूछे उसके कमरे घुस गया।

नीतू- अरे राहुल, तुम कब आए?
मैं- जब आप अपनी सोच में खोई हुई थी। लगता है आप सारी रात सोई नहीं!
नीतू- बस ऐसे ही नींद नहीं आ रही थी।
मैं- एक बात पूछूँ आप से?
नीतू- हाँ!

मैं- क्या आपके पति आप को प्यार नहीं करते?
नीतू- यह कैसा सवाल है?
मैं- अरे मैं आपसे एक दोस्त की तरह पूछ रहा हूँ। तभी आपकी परेशानी दूर करने में मदद कर पाऊंगा।

नीतू- नहीं, उन्हें तो बस अपनी शराब ही प्यारी लगती है, मैं नहीं!
मैं- तभी आप मेरी और रूपाली की चुदाई देख रही थी।

इस बात पर नीतू ने मुझे घूर कर देखा- ये क्या कह रहे हो? मैंने तुम दोनों को नहीं देखा।
मैं- नहीं, जब मैं दोपहर को रूपाली को चोद रहा था। तब आप हमें खिड़की से छिप कर देख रही थी।
मैं जान बुझ कर नीतू के सामने इस तरह के अश्लील शब्दों का प्रयोग कर रहा था.

नीतू कुछ बोली नहीं क्योंकि उसकी चोरी पकड़ ली गई थी।
इसलिये वो दीवार की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई।

उसकी गोल उठी हुई ठोस गांड को देख कर मेरे लिए खुद को रोक पाना मुश्किल हो रहा था।
मैं आगे बढ़ा और नीतू के पीछे जाकर खड़ा हो गया।

इससे पहले नीतू मेरे आने की आहट सुनती, पहले ही मैंने नीतू के बदन पर हमला करते हुए अचानक से उसकी दोनों चूचियों को हाथों में जकड़ लिया और उसकी गर्दन पर यहां वहां चूमने लगा।
नीतू इस अचानक हुए हमले के लिए तैयार नहीं थी इसलिये उसने मुझे धक्का देकर खुद से दूर कर दिया लेकिन तब तक मेरे हाथ में उसकी साड़ी का पल्लू आ गया था।

जब तक नीतू कुछ समझ पाती उससे पहले ही मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को जोर से खींचा और अगले ही पल उसकी पूरी साड़ी मेरे हाथों में आ गयी।
नीतू अब मेरे सामने ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी।

उसने अपने दोनों मम्मो को हाथों से ढक लिया और मेरी तरफ देखने लगी- यह क्या किया तुमने, तुमको शर्म नहीं आती क्या ऐसा करते हुए? मेरे साड़ी वापस दो नहीं तो रूपाली आ जाएगी. और उसने मुझे ऐसे देख लिया तो क्या सोचेगी!
मैं- अच्छा! आप हमें बिना कपड़ों के देख रही थी तब आपको शर्म नहीं आ रही थी।

अचानक से नीतू अपनी साड़ी लेने के लिए मेरे तरफ लपकी तो मैंने साड़ी को ऊपर हवा में उठा लिया।
जब नीतू मेरे बेहद करीब थी तब मैं उसकी चिकनी कमर पर हाथ फेरने लगा।

फिर मैंने उसकी साड़ी को जमीन पर गिरा दिया और उसकी चिकनी कमर को एक हाथ से रगड़ते हुए दूसरे हाथ से उसकी चूची दबाते हुए गर्दन पर चूमने लगा।
अपने बदन पर तीन तरफा हमला होने से नीतू भी वासना से कुछ कलप गई।

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जैसे ही वो साड़ी लेने के लिए झुकी, मैंने उसके ब्लाउज की डोरी को खींचकर खोल दिया जिससे उसका ब्लाउज ढीला होकर उसके कंधों में अटक कर रह गया।
ब्लाउज को गिरने से बचाने के लिए उसने एक बार फिर अपनी चूचियों को हाथों से ढक लिया।

मेरी नज़र कब से उसकी चिकनी टांगें देखने के लिए मचल रही थी इसलिए मैंने झटके से उसके पेटीकोट की गांठ खोल दी।

नीतू ने सरकते हुए पेटीकोट को रोकने के लिए जैसे ही अपने सीने से हाथ हटाकर पेटीकोट रोकना चाहा वैसे ही उसका ब्लाऊज उसकी बांहों से सरकते हुए जमीन की तरफ आ गया जिससे मुझे उसकी गोल गोल सुंदर चूचियां दिखाई देने लगी।

पेटीकोट उसकी चिकनी टांगों से लिपटता हुआ जमीन पर जा गिरा।

ब्लाऊज और पेटीकोट को बचाने की उहा पोह में नीतू दोनो में से किसी को अपने शरीर पर रोकने में कामयाब न हो सकी।
अब नीतू के बदन पर केवल एक छोटी सी पैंटी शेष रह गई थी।

नीतू मेरे सामने लगभग नंगी ही खड़ी थी और में जानता था कि अगर नीतू ने अभी एक भी कपड़ा पहन लिया तो मुझे ऐसा मौका मुझे दोबारा नहीं मिलेगा।

सफेद संगमरमर के दो स्तंभों की तरह की दूधिया टांगें देख कर खुद को काबू न कर सका इसलिए मैंने लपक के नीतू को अपनी गोद में उठा लिया।
नीतू का वजन रूपाली से कुछ ज्यादा था।

मैंने नीतू को बेड पर पटक दिया और उसके पेट के दोनों तरफ टांगें करके बैठ गया।
नीतू अभी भी छुटने की पूरी कोशिश कर रही थी इसलिये मैंने उसके दोनों हाथों को अपने घुटने के नीचे दबा लिए और अपने एक हाथ से उसका मुंह बंद कर लिया।

“देखो नीतू, मेरी जान मैं जानता हूँ कि तुम्हारा भी मन करता है चुदाई करवाने का, तुम भी चाहती हो कि कोई तुम्हरी बदन की गर्मी को शांत कर दे। लेकिन तुम्हारा पति एक नंबर का शराबी है. तुमको छूना तो दूर … वो तो तुम्हारी तरफ देखता भी नहीं है. उसे तो बस अपनी शराब से ही मतलब रहता है. तो क्यों उस इंसान के लिए अपनी जवानी को बर्बाद कर रही हो. मैं जानता हूँ कि तुम भी रूपाली की तरह परिवार की इज्जत की वजह से कुछ कह नहीं सकती. लेकिन दूसरों की वजह से तुम अपनी इच्छाओं को क्यों और कब तक मारती रहोगी। मुझे अपना दोस्त समझो और जिंदगी मजा लो.”
इतना सब मैंने एक बार में नीतू से कह डाला।

मेरी बातों का नीतू पर कितना असर हुआ यह देखने के लिए मैंने नीतू के मुंह पर से धीरे-धीरे हाथ हटाया।
नीतू अब पहले के जितना छुटने की कोशिश नहीं कर रही थी।

मैंने नीतू से कहा- मैं तुमको एक बार पाना चाहता हूँ। तुम्हारे बदन के हर हिस्से को चूमना चाहता हूँ। अब तक तुम जिस प्यार से दूर थी वो मैं तुमको देना चाहता हूँ। तुम्हारे इस मादक जिस्म का भोग करना चाहता हूँ। क्या मुझे हक़ है?
नीतू ने कहा तो कुछ नहीं बस छत की तरफ देखे जा रही थी।

आप सभी तो जानते ही हैं कि औरतें इस सब बातों पर अपनी इच्छायें बेबाकी से गैर मर्द के सामने नहीं रखती लेकिन उसकी मूक सहमति से मैंने आगे बढ़ने का फैसला किया।

मेरी नजर उसके होंठों पर जा कर रुक गई।
उसका निचला होंठ ऊपर वाले होंठ से कुछ हद तक ज्यादा रस से भरा हुआ था। उसके होंठ रूपाली के होंठों की तुलना में काफी हद तक उन्नत थे।

मैंने पहले उसके माथे पर एक प्यार भरा छोटा सा स्नेहपूर्ण चुम्बन अंकित किया फिर उसके गालों को चाटने लगा।
फिर उसके होंठों पर अपने होंठों से एक जल्दी से किस करके उसकी आँखों में देखने लगा।

जैसे ही नीतू की आँखें मेरी आँखों से मिली, उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई।
मैंने फिर से उसके होंठ पर होंठ रखे और उन्हें चूमने लगा। कभी उसके होंठ को अपनी जीभ से चाटता तो कभी उसके निचले होंठ को अपने होंठों में दबा के खींचने लगता।
कभी अपनी जीभ उसके मुंह के अंदर डाल कर उसकी लार का स्वाद लेने लगता।

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नीतू ने अब विरोध करना बंद कर दिया था लेकिन अभी तक वो मेरा साथ नहीं दे रही थी जो मुझे थोड़ा बुरा लग रहा था।

मैं बोला- नीतू, अगर तुम्हारा मन नहीं है तो कोई बात नहीं. मैं ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहता हूँ जिसमे हम दोनों की सहमति न हो!
इतना कह कर मैं उठने लगा.

जैसे ही मैं उठने को हुआ तो नीतू ने अपने दोनों हाथों का घेरा मेरा कमर पर बना दिया और आगे झुक कर अपने होंठ को मेरे होंठों से मिला दिया।
पहली बार मुझे इस मिलन में नीतू की सहमति दिखाई दी।

अब हॉट लेडी सेक्स के लिए तैयार थी. नीतू कभी मेरे होंठों को अपने दांतों से खींचती तो कभी मैं उसके!

कुछ देर बाद मैंने उसकी दोनों चूचियों को हाथों से मसलते हुए अपने होंठ उसकी गर्दन पर जमा दिए।
जितना जोर से मैं उसकी गर्दन को चूमते हुए उसके गले पर दांतों से हल्के से काट लेता तो वहां पर लाल निशान पड़ जाता।

लगातार उसकी चूचियां दबाने से उसकी चूचियां ठोस हो गई थी।

उसके कड़क हो चुके निप्पलों को देखकर मैंने उसकी गर्दन को छोड़ दिया और उसके एक चूचे को जीभ से चाटने लगा।
उसके निप्पलों से खेलते हुए जैसे ही मैंने उसके एक चूचे को मुंह में भर कर चूसना शुरू किया तो नीतू की आँखें अपने आप ही बंद होंने लगी।
बीच-बीच में मैं उसके दोनों चूचो से खेलता और उन्हें सहलाता रहा।

कुछ देर बाद मैंने आगे बढ़ने की सोची इसलिये मैंने उसकी कमर की ओर रुख किया और उसके कमर की शान बढ़ाती उसकी नाभि में अपनी जीभ घुसा दी।
जब मैं उसकी चिकनी कमर पर जीभ घुमाते हुए उसकी नाभि में जीभ को नुकीला कर के घूमा देता तो नीतू खिलखिला कर हंस देती।

अब तक मेरा लंड अकड़ कर लोहे का सरिया बन चुका था।
मैं बेड से उठा और अपने सारे कपड़े उतार कर नीतू के दोनों पैरों के बीच में बैठ गया।

मैंने नीतू की टांगों को मोड़ कर उसकी जाँघों को फैला दिया।
अब मेरे सामने पैंटी में कैद थी नीतू की चूत जो मुझसे बस एक पड़ाव दूर थी।

जैसे ही मैंने आगे झुक कर उसकी चूत को चूमना चाहा तो नीतू ने हाथों से अपनी चूत छुपा ली।
बहुत कोशिश के बाद भी वो हाथ हटाने को तैयार नहीं थी।

यहाँ मैं उसकी चूत के स्वाद को अपनी जीभ पर महसूस करने के लिए मरा जा रहा था और वो थी की हाथ हटाने को राज़ी नहीं थी।
इसलिये मैं उसके कान में जीभ घुसा के उन्हें चाटने और चूसने लगा।

नीतू वासना के वशीभूत होकर मेरी पीठ पर हाथ घुमाने लगी।
मैं नीतू को और गर्म करना चाह रहा था इसलिये मैं कुछ और देर तक बारी बारी से उसकी दोनों कानों की लौ को चूसता रहा और उसकी चूचियों को हाथों से मसलता रहा।

कुछ देर बाद सही मौका देख कर मैंने अपने हाथों के दोनों अंगूठे को उसकी पैंटी की इलास्टिक में फंसाया और एक झटके में पैंटी को उसकी टांगों से अलग कर दिया।

पैंटी के निकलते ही नीतू की चूत मेरे सामने अनावृत हो गई जिसे नीतू ने एक बार फिर अपने हाथों से छुपा लिया।

मेरे बहुत मनाने पर नीतू अपनी चूत से हाथ हटाने को इस शर्त पर राज़ी हुई कि मैं उसकी चूत को चाटूंगा नहीं।
जिसे मैंने मान लिया क्योंकि मुझे पता था कि थोड़ी देर में नीतू खुद ही अपनी चूत के होंठ खोल कर चूत चाटने को बोलेगी।

अब मेरे सामने मेरी मेहनत का फल था नीतू की चूत!
लेकिन नीतू की चूत इस समय बालों के गुच्छे से ढकी हुई थी।

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