मौसी और उनकी जेठानी का लेस्बियन सेक्स- 1

लड़की लड़की का सेक्स कैसे करवाया मैंने … इस कहानी में पढ़ें. मैं मौसी और उनकी जेठानी को सेक्स के खेल में दोनों एक दूसरी के सामने सहज करना चाहता था.

पिछली कहानीमौसी की जेठानी की प्यास बुझाई
में आपने पढ़ा कि
>मैं मौसी और उनकी जेठानी के साथ सेक्स के इस खेल में कुछ नया करने की सोचता रहा जिससे दोनों एक दूसरी के सामने हमेशा के लिए सहज हो जायें.

तभी मेरे दिमाग में लेस्बियन सेक्स का ख्याल आया जिससे दोनों देवरानी जेठानी एक दूसरी से जितना ज्यादा हो सके, खुल जायें।

मैं जल्दी से नहाकर अपने कमरे में जा कर तैयार हो गया।

रसोई में जाकर मैंने देखा तो दोनों खाने की तैयारी कर रही थी।
मैं वहीं दरवाजे के पास खड़ा हो गया और दोनों को निहारने लगा।<
अब आगे लड़की लड़की का सेक्स:
मौसी और उनकी जेठानी दोनों ने ढीली ढाली नाइटी पहन रखी थी। इस वक़्त रूपाली मौसी आटा गूंथ रही थी.
वो मेरे सबसे करीब थी तो मैं उससे सट कर खड़ा हो गया।
मैंने रूपाली की कमर में हाथ डाल कर उसे खुद से चिपका लिया। मैंने अपनी एक उंगली रूपाली के मुंह डाली और उसे चुसाने लगा।
मेरी उंगली उसकी लार से गीली हो गई.
मैंने अपनी उंगली उसके मुंह से निकाली और गर्दन पर बिखरे बालों को एक तरफ करके उसके नर्म, गुदाज, और कोमल गर्दन की त्वचा पर अपनी उंगली घुमाने लगा।
जब मेरी उंगली की नमी उसके बदन की तपिश से खत्म हो जाती तो मैं उसकी गर्दन को चाट कर फिर से गीला कर देता और फिर से उंगलियाँ घुमाने लगता।
रूपाली अभी भी आटा गूंथने में लगी हुई थी।
मैंने अपने दोनों हाथ उसके हाथों के ऊपर जमा दिये और धीरे- धीरे उसके साथ आटा गूंथने लगा।
जब भी रूपाली अपनी मुट्ठियों पर जोर लगाते हुए अपनी कमर को आगे तरफ झुकाती तो मैं उसके चूतड़ों से अपनी जांघें सटा देता।
थोड़ी देर बाद मैंने अपने एक हाथ को उसके नाइटी के गले के अंदर डाल दिया। मैं अपने हाथ उसके गले और सीने के उभारों के आस पास घुमाने लगा।
रूपाली के बदन की बढ़ती गर्मी के साथ अब उसके बदन पर पसीना आने लगा था।
उसके सीने पर उभरी कई सारी पसीने की बूँदें आपस में मिलकर एक छोटी सी धार बन जाती जो उसके दूध की पहाड़ियों के बीच से लुढ़क कर उसकी नाभि से होते हुए उसकी चूत तक पहुँच जाती।
ऐसी ही कुछ बूंदों को मैंने अपनी हथेलियों पर एकत्र किया और उसकी दूधों पर मल दिया।
मौसी के दोनों दूध पसीने से तरबतर हो गये थे जिन पर मेरे हाथ इतनी आसानी से फिसल रहे थे जैसे उन पर तेल लगा हो।
समय के साथ हो रही इस क्रिया ने रूपाली के शरीर पर असर डालना शुरू किया।
रूपाली अब सारे काम छोड़ कर रसोई की स्लैब पर थोड़ा झुक कर खड़ी हो गई।
मैं उसकी दोनों चूचियां बारी- बारी दबाने लगा।
हर बार जब मेरा हाथ उसकी चूचियों पर अपनी पकड़ मजबूत करता तो रूपाली के आअह्ह … उम्म्म जैसी सिसकियाँ निकल जाती।
अब रूपाली गर्म होने लगी थी जितना रूपाली गर्म होती उतना ही मैं भी उसके ताप से गर्म हो जाता।
उसके बदन की गर्म की सीधे मेरे लंड पर असर कर रही थी, हर गुजरते पल के साथ मेरा लंड तन रहा था।
मेरा आधा तना हुआ लंड उसकी चूत को आंसू बहाने पर मजबूर करने के लिया काफी था जब भी मैं उसकी पीठ पर झुकता तो मेरा लंड उसकी नाइटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चूम कर लौट आता।
हम दोनों अपने खेल में इस कदर मग्न थे कि हम दोनों यह भी भूल गये कि इस समय यहाँ पर हम दो नहीं, तीन हैं और तीसरा शख्स हमारे सामने खड़ा है।
हर बीत रहे क्षण के साथ मैं आगे बढ़ता ही जा रहा था।
मैंने रूपाली की नाइटी फाड़ने के लिए उसे गले के पास लिया था लेकिन इससे पहले कि मैं रूपाली के कपड़े फाड़कर उसे वहीं रसोई की फर्श में लिटाकर चोदना शुरू कर देता, नीतू ने अलमारी से एक गिलास निकाला और उसे जोर से जमीन पर पटक दिया।
अचानक हुए इस शोर ने रूपाली की सिसकारियों को कहीं दबा दिया।
हमारा ध्यान टूट गया और ऐसा लगा जैसे किसी ने हमें वासना से असल जिन्दगी में लाकर जोर से पटक दिया हो।
मेरी नजर नीतू से मिलते ही मैं शर्म से झेम्प गया.
तभी नीतू बोल पड़ी- कुछ तो शर्म कर लो तुम दोनों हवस के पुजारियो … यहाँ मैं खड़ी हूँ और तुम्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है. राहुल, तू इसे लेकर कमरे में जा .वैसे भी इसकी चूत की सेवा नहीं हुई; इसके हिस्से की सारी मेहनत तो तू मुझ पर कर रहा है.
मैं रूपाली को लेकर कमरे में आ गया.
मैंने रूपाली को अपने दिमाग में चल रहे आगे के प्लान के बारे में बताया।
पहले तो रूपाली लेस्बियन सेक्स के बारे में सुनकर स्तब्ध रह गई और सीधे मना करने लगी।
तब मैंने उसे समझाया कि लेस्बियन सेक्स से तुम दोनों इज्जत हमेशा एक दूसरे की नजरों में बनी रहेगी।
रूपाली कहने लगी- मुझे तो लेस्बियन सेक्स के बारे में कुछ पता भी नहीं है. बस नाम सुना है.
तब मैंने उसे अपने फोन पर कुछ लेस्बियन सेक्स की विडियो दिखाए.
तो रूपाली कहने लगी- ये तो देखने में ही इतना अजीब है. भला कोई औरत किसी दूसरी औरत के साथ वो सारी हरकतें कैसे कर सकती है जो एक मर्द के साथ की जाती हैं?
तब मैंने ये आश्वासन देकर रूपाली को मना लिया कि तुम एक बार कोशिश तो करके देखो. तुम्हें अच्छा लगेगा. और वैसे भी मैं तो तुम्हारे साथ हूँ ही!
रूपाली बुझे मन से मान गई।
मैंने कमरे के दरवाजे को पूरा खोल दिया क्योंकि मैं जानता था कि थोड़ी देर बाद नीतू हमें देखने जरूर आएगी।
मैं रूपाली को अपने शरीर से चिपकाकर चूमने लगा उसके और मेरे शरीर के बीच में इतनी भी जगह नहीं थी कि हवा भी हमारे बीच से होकर गुजर सके।
हम दोनों एक दूसरे के होंठ को बुरी तरह से चूम रहे थे।
मैंने अपने होंठ से रूपाली के ऊपर वाले होंठ को बुरी तरह पकड़ लिया और खींचते हुए चूसने लगा।
रूपाली ने मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ घुसा दी और बालों को सहलाते हुए मेरा साथ देने लगी।
फिर मैंने उसके दोनों चूतड़ों पर अपने हाथ रख दिए और जोर से उसके चूतड़ों को अपनी मुट्ठियों में भरकर मसलने लगा।
मैं कभी ज्यादा जोर से उसके चूतड़ दबा देता तो उसके मुंह घुटी हुई चीख निकल कर मेरे मुंह दब जाती।
मैंने उसकी नाइटी को कमर से पकड़ लिया और धीरे से सरकाते हुए उसके बदन से अलग करने लगा।
जैसे ही नाइटी उसके चूचों तक पहुँची तो रूपाली ने खुद ही अपने हाथ हवा में उठा कर निकालने में मदद की।
आज रूपाली ने फिर ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी जैसा वो अक्सर करती है जब वो सेक्स के लिए ज्यादा आतुर होती।
उसका नंगा बदन मुझे आमंत्रण दे रहा था और मैंने भी उसका आमंत्रण स्वीकार कर लिया।
मैंने खड़े- खड़े ही उसकी एक चूची को मुंह में भर लिया और चूसने लगा।
मैं रूपाली की दोनों चूचियां बारी- बारी चूसता रहा और वो मेरे लंड को मुट्ठी में भर के सहलाती रही और आहें भरती रही।
थोड़ी देर बाद मैंने देखा नीतू दीवार के एक कोने में खड़ी हो कर हमें देख रही है।
मुझे अपनी तरफ देखता हुआ देख कर नीतू हड़बड़ा कर बोली- खाना बन गया है, आकर खा लो।
नीतू को मैंने अंदर बुलाया और रूपाली के कान में धीरे से कहा- अब सब तुम्हारे हाथ में है।
मैंने इतना कहा और कमरे में पड़ी कुर्सी में बैठ गया।
रूपाली ने नीतू का हाथ पकड़ा और उसे अपने सामने ले लिया.
इससे पहले नीतू रूपाली को नंगी देखकर किसी भी तरह की कोई प्रतिक्रिया देती, रूपाली ने नीतू को अपने गले से लगा लिया।
दोनों कुछ देर तो गले लगी रही लेकिन नीतू न विरोध कर रही थी और न ही सहयोग कर रही थी.
इस समय नीतू शून्य की तरह स्थिर थी तो रूपाली ने पहल करने की सोची।
रूपाली नीतू के बदन को हल्के हाथों से सहला और दबा रही थी।
फिर रूपाली ने धीरे से नीतू की गर्दन को चाट लिया; पहले एक बार, फिर दूसरी बार, फिर तीसरी … और बाद में तो उसे जहाँ खुली जगह मिली वहां वो जीभ फिरती रही।
अब फोरप्ले की शुरुआत हो गई थी बस ये देखना था की ये फोरप्ले कितना कामुक हो सकता है।
फिर रूपाली ने धीरे से नीतू के एक गाल चूम लिया और दूसरे पर अपनी उँगलियाँ घुमाने लगी जैसे वो कुछ लिखने की कोशिश कर रही हो।
रूपाली नीतू के गाल चूमती जा रही थी और नीतू आँखें खोलकर सब देख रही थी।
नीतू की आँखें खुली थी और उसके होंठ बुरी तरह काम्प रहे थे।
रूपाली ने एक बार नीतू के होंठ पर अपनी उंगलियाँ फेरी तो उसकी उंगली पर नीतू के होंठों के लाली के कुछ अंश आ गये; जिसे रूपाली ने बड़ी अदा से अपने मुंह डाल लिया और चूसने लगी.
फिर अपनी लार से गीली उंगली नीतू के मुंह में घुसेड़ दी जिसे नीतू ने एक बार अपनी जीभ से छू लिया।
जैसे ही रूपाली ने अपने होंठ उसके होंठ पर रखे थे वैसे ही नीतू आँखें बंद हो गई और उसकी सांसें रुक गई।
बड़ी हिम्मत करके रूपाली ने उसके होंठ चूमने शुरू किये।
रूपाली नीतू के होंठ चूम तो रही थी लेकिन नीतू किसी भी तरह का कोई सहयोग नहीं कर रही थी.
इसलिये रूपाली ने नीतू को हाथों को उठा कर अपने उरोजों पर रखवा लिए और अपने हाथों पर दबाव बनाते हुए उसके हाथ से चुचे दबवाने लगी।
नीतू भी आखिर कब तक शांत रहती … उसने रूपाली का साथ देना शुरू किया।
पहले नीतू ने रूपाली के होंठ को एक बार चूमा फिर धीरे से अपने मुंह को खोलकर अपने मुंह में रूपाली की जीभ को प्रवेश की अनुमति दे दी।
दोनों एक दूसरे को चूमने में व्यस्त थी. कभी नीतू रूपाली का ऊपर वाला होंठ पकड़ लेती तो रूपाली उसका निचला होंठ अपने दांतों से दबा देती।
रूपाली ने धीरे से हाथ पीछे ले जा कर नीतू के बालों का जुड़ा खोल और उसके बाल हवा में लहराने लगे।
दोनों धीरे धीरे गर्म होने लगी थी इसलिये दोनों को जहाँ जगह मिलती वहां एक दूसरे के अंगों को सहलाती और रगड़ती।
रूपाली ने नीतू की नाइटी को उसके शरीर से अलग कर मेरी ओर उछाल दिया।
अब मेरी आँखों के सामने दो एक से बढ़ कर एक उन्नत नंगे जिस्म थे।
नीतू का जिस्म रूपाली से थोड़ा ज्यादा गदराया और रूपाली का जिस्म छरहरा था।
इस पर नीतू की अदायें उसे और भी कातिल बना रही थी।
रूपाली नीतू से अलग हुई और कमरे में रखे म्यूजिक सिस्टम पर कोई गाना लगा दिया और खुद संगीत की धुन पर थिरकने लगी।
कुछ देर वो अकेली नाचती रही, फिर उसने नीतू को भी अपने साथ जोड़ लिया।
मेरे सामने दो सुंदर युवतियां एक दूसरे से लिपट कर नाच रही थी।
मैं इस पल को हमेशा के लिए एक स्मृति चिह्न के रूप में रखना चाहता था तो मैंने अपना मोबाइल निकाला और उनकी वीडियो रिकॉर्ड करने लगा।
वो दोनों कभी एक दूसरे की कमर से कमर टकरा कर ठुमका लगती तो कभी एक दूसरे चूचियां चूमने लगती।
दोनों में से कोई अगर किसी की गांड पर चपत लगता तो दूसरी उससे अधिक जोर से उसके चूतड़ों पर हाथ जमा देती।
रूपाली मेरी तरफ देख रही थी तो मैंने उससे आगे बढ़ने का इशारा किया।
नीतू की दोनों चूचियां को रूपाली ने चूमा और फिर क्लीवेज को चाटते हुए नाभि की तरफ बढ़ने लगी।
जैसे ही रूपाली ने नीतू की नाभि को चूमा, नीतू ने रूपाली के सर को अपनी नाभि में घुसा लिया और खुद अपनी कमर घुमाती हुई नाभि चटवाने का मजा लेने लगी।
रूपाली उसकी नाभि चाट रही थी अपनी एक उंगली उसकी चूत की लकीर में फिराने लगी। रूपाली जितना उंगली सहलाती उतना ही नीतू के मुंह से आअह्ह … आअह्ह … अह्ह की सिसकारी निकलती।
अपनी एक उंगली रूपाली उसकी चूत के अंदर डालती और बाहर निकाल लेती।
थोड़ी देर में नीतू की चूत पनिया गई और चूतरस उसकी चूत से टपकने लगा।
रूपाली ने अपनी जीभ उसकी चूत के दाने पर रख दी।
दाने पर जीभ पड़ते ही नीतू ने रूपाली के सर को पूरी ताकत से अपनी चूत के ऊपर दबा लिया.
रूपाली भी अपनी जीभ से चूत के हर कोने को चाटने में लगी हुई थी।
अपनी जेठानी नीतू की चूत रूपाली चाटते हुए उसके चूतड़ों से भी खेल रही थी दोनों को अब अब इस में मजा आने लगा था।
थोड़ी देर बाद दोनों अपनी जगह बदलने की सोची.
नीतू ने रूपाली का हाथ पकड़ा और उसे बेड के करीब ले जा कर उसे धक्का दे दिया।
धक्का लगते ही रूपाली बेड पर धम्म से पसर गई।
नीतू भी बेड पर चढ़ी और घुटनों के बल चलते हुए उसके बदन पर हावी होने लगी।
पहले उसने अपनी देवरानी रूपाली के होंठ को चूम लिया।
वो रूपाली के दोनों हाथ ऊपर किए और पसीने से भीगी उसकी बगलों को नाक लगा कर सूंघने लगी. फिर अपनी जीभ से उसकी एक बगल को चाटने लगी।
जितना वो रूपाली की बगलें चाटती, रूपाली उतनी ही जोर से खिलखिला कर हंस रही थी।
फिर वह रूपाली की चूचियों को दोनों हाथों में लेकर तोलने लगी जैसे वो ये देखना चाह रही थी कि उसकी और रूपाली की चूचियों में से किसकी ज्यादा उन्नत हैं।
जब नीतू पूरी तरह से आश्वस्त हो गई कि उसकी चूचियां रूपाली से ज्यादा बड़ी ज्यादा ठोस और ज्यादा सुडौल हैं तो इस बात पर नीतू मुस्कुरा दी।
फिर नीतू आगे झुकी और उसने रूपाली के एक चूची को मुंह में भर लिया और चूसने लगी।
वो रूपाली के निप्पल ऐसे चूस रही थी जैसे छोटा बच्चा भूख लगने पर अपनी माँ के स्तन चूसता है।
रूपाली ने नीतू के मुंह से अपनी एक चूची निकली और दूसरी वाली उसको दे दी चूसने को!
नीतू चूचियां चूसने में मग्न थी और रूपाली उसकी पीठ पर हाथ फेर रही थी।
रूपाली मदहोशी में अपने पैर यहाँ वहां पटक रही थी।
फिर नीतू ने रूपाली की कमर को अच्छे से पकड़ लिया और उसकी नाभि चूमने लगी।
थोड़ी देर बाद नीतू ने रूपाली की टांगें जितनी खुल सकती थी उतनी खोल दी और अपनी चूत को रूपाली की चूत से रगड़ने लगी।
कभी रूपाली के चूत के होंठ खोल देती और ऊपर अपना दाना रगड़ने लगती।
नीतू ने रूपाली की चूत के अंदर एक उंगली डाली और बाहर निकालकर चाटने लगी।
ऐसा उसने कई बार किया.
फिर उसने उंगली का सहारा छोड़ सीधे अपना मुंह रूपाली की चूत से जोड़ दिया और उसकी चूत चाटने लगी।
नीतू रूपाली की चूत में अपनी उंगली अंदर बाहर कर रही थी और उसके दाने को जीभ से सहला रही थी।
रूपाली अपनी चूत पर हो रही इस दोहरी मार को झेल न सकी और नीतू के सर को अपनी चूत पर दबाने लगी।
नीतू रूपाली की चूत चाटने में लगी हुई थी जिससे रूपाली के मुंह से कामुक तरंगे आअह्ह्ह … उम्म्म … हस्स्स … उईईई … फूटने लगी।
वो दोनों अब पूरी तरह से चोदने लायक गर्म हो गई थी, उन दोनों लड़की लड़की का सेक्स देख कर मैं भी गर्म हो गया था. आखिर कब तक उनका खेल देख खुद को रोकता!
मेरा लंड भी अब चड्डी में प्रीकम छोड़ने लगा था तो मैं उठा और जल्दी से अपने सारे कपड़े उतारे और उनके खेल में शामिल होने चला गया।
कमरे की रोशनी में नीतू का जिस्म दूध से नहाया हुआ लग रहा था।
मैंने जैसे ही नीतू की पीठ को चूमा तो नीतू ने पीछे मुड़कर देखा और वापस से रूपाली की चूत चाटने लगी।
मैं नीतू की पीठ चूमने के साथ उसे चाट भी रहा था।
अब स्थिति इस प्रकार थी रूपाली अपनी चूचियां खुद दबा रही थी, नीतू रूपाली की चूत चाट रही थी और मैं नीतू की पीठ।
फिर मैं नीतू से अलग हुआ और उसकी चूत को निहारने लगा उसके टांगों के बीच में छोटी सी कमसिन चूत ऐसी लग रही थी जैसे कि चूत न हो बल्कि रस से भरी छोटी सी गुझिया, दोनों तरफ थोड़े से फूले हुए होंठ बीच में बारीक से लकीर और अंदर से आता हुआ रस!
मैंने अपनी नाक उसकी चूत के करीब कर दी और खुशबू को सूंघने लगा।
वही कल वाली खुशबू जिसका कायल तो मैं कल ही हो गया था।
मैंने जीभ से उसकी चूत से टपकते रस को चाट लिया.
चूत पर जीभ पड़ते ही नीतू के बदन में झुरझुरी दौड़ गई।
मैंने दोनों चूतड़ों पर एक के बाद एक कई चांटे मार कर फिर से उसके चूतड़ लाल कर दिये।
जब भी मैं उसके चूतड़ों पर चांटे मारता तो नीतू मुझसे और जोर से मारने को कह कर मेरा जोश बढ़ाती।
मैं अपने घुटनों पर झुका अपनी कमर और नीतू की चूत को सीध में कर लिया।
आपको मेरी लड़की लड़की का सेक्स कहानी में खूब मजा आ रहा होगा, ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है. आप सभी मुझे अपने प्यार भरे सन्देश भेजें.
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