मैं तेरी रांड, तू मेरा रण्डवा

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार! चूत की रानियों को मेरे लण्ड का प्यार भरा चुम्बन. अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है और यह मेरे साथ घटी हुई सच्ची कहानी है, जो 6 महीने पहले मेरे साथ घटी थी।

मैं अपने बारे में बता देता हूं. मेरा नाम तन्मय गुप्ता है और मैं राजस्थान के उदयपुर शहर में रहता हूँ. मेरा लण्ड 6 इंच का है जो किसी भी चूत का पानी निकालने के लिए काफी है. मैं सेक्स का बहुत शौकीन हूँ और मुझे चूत चाटना बहुत ज्यादा पसंद है. लण्ड चटवाना भी बहुत पसंद है मगर कभी इसका मौका नहीं मिला. खैर मेरी ये इच्छा भी उदयपुर में आकर पूरी हुई।

मैं एक साल पहले यहां पढ़ाई करने आया था और एक रूम लेकर रहने लग गया। मैं जिस रूम में रहता था वहीं पास में एक कपल भी रह रहा था. उन भैया भाभी का नाम क्रमश: दीपक और ज्योति था (बदला हुआ नाम).

ज्योति के बारे में बताऊं तो वो किसी कयामत से कम नहीं थी. हवस उसकी आँखों से छलकती थी. उसकी कमर नागिन की तरह बलखाती थी. उसकी गांड उभरी हुई थी, उसके बूब्स तो ब्लाउज से बाहर निकलने को रहते थे और मैं जब भी उसको देखता तो मेरा लण्ड फूल कर 6 इंच का हो जाता था और ज्योति ये सब भांप लेती थी।

औरतें होती ही चालाक हैं. ज्योति भी ऐसी ही औरतों में से थी क्योंकि वो एक चुदासी रांड थी और उसका हस्बैंड कमजोर दुबला-पतला था जिसके कारण वो उसे ढंग से चोद नहीं पाता था. इसी कारण ज्योति के बॉयफ्रेंड भी थे. मगर उसके पति को जॉब के कारण समय नहीं मिल पाता था। काफी समय वहां रहने के बाद मेरी ज्योति से पहचान हो गई व बात भी होने लग गई।
ज्योति को मैं भाभी कहता था मगर ज्योति को ये अच्छा नहीं लगता था, वो बोलती थी- मुझे भाभी मत बोला करो. सिर्फ ज्योति कहा करो.

मैंने उसको सिर्फ नाम से पुकारा तो वह खुश हो गई. उस दिन के बाद से मुझे वो ज्यादा ही भा गई और जब भी मेरे सामने आती तो मैं उसे हवस की नज़र से घूरता था ताकि ज्योति को भी लगने लगे कि मैं उसे पसंद करता हूँ।

एक दिन की बात है कि ज्योति का पति दिन में उसे चोद रहा था। मैं उसी वक़्त कॉलेज से आ रहा था तो मुझे उनकी आवाज सुनाई दी. मैंने कान उनके कमरे के पास लगा लिए और उनकी चुदाई की बातें सुनने लगा.
ज्योति बोल रही थी- जोर से चोदो, मजा नहीं आ रहा. प्लीज़ जल्दी-जल्दी चोदो न … यस फ़क, चोदो ना!
और पंकज का पानी निकल गया.

बस फिर क्या था. ज्योति पंकज पर गुस्सा करने लग गई कि रोज वो जल्दी आउट हो जाता है और वह प्यासी रह जाती है.
फिर पंकज बोला- रात को गोली खाकर करूँगा.
ज्योति गुस्सा करते हुए बाहर निकली.

मैं फटाक से अपने रूम की तरफ चलने लगा मगर ज्योति ने देख लिया कि मैं उसके रूम की तरफ से ही चल कर जा रहा था. उसने देख तो लिया मुझे मगर कुछ बोली नहीं.

फिर 5 बजे के लगभग मैं बाथरूम में ज्योति की याद में ब्लू मूवी देखने लगा और मुट्ठ मारने लगा। मैं बाथरूम का दरवाजा बंद करना भूल गया था जिस वजह से ज्योति ने मुझे मुट्ठ मारते हुए देख लिया.

जब उसने मुझे लंड हिलाते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया तो मैं शर्म के मारे मरा जा रहा था कि अब क्या होगा. मगर शायद ज्योति को मेरा लण्ड ही लेना था, तभी उसने कुछ नहीं बोला. यही सब सोच कर मैं आराम करने लगा।

शाम को उसने मुझे चाय पीने के लिए बुला लिया. हम तीनों साथ में बैठ कर चाय पी रहे थे. ज्योति मुझे हवस भरी नजरों से देख रही थी. तभी उसके पति का फोन बजने लगा. उसके बॉस ने उसे नाइट ड्यूटी के लिए बुला लिया था.
ज्योति के चेहरे से तो लग रहा था कि जैसे वह बहुत उदास हो गई है मगर मैं जानता था कि वह मन ही मन खुश हो रही होगी. वह तो मेरे लंड से चुदने के सपने देख रही थी. उसका पति नाइट ड्यूटी के लिए चला गया.

रात को आठ बजे के करीब वो खाना लेकर मेरे रूम में आई और मुझे गुस्से भरी नजरों से देखने लगी. मैं तो सोच रहा था कि वो अपनी चूत चुदवाने के लिए आई है मगर वह ऐसे देख रही थी जैसे मुझे खा ही जायेगी.
वो बोली- अपना फोन दो मुझे.
मैंने फोन निकाल कर उसे दे दिया और ज्योति ने उसमें नंगी फिल्में चला कर मुझे दिखाने लगी.

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फिर वह मुझे डांटने लगी, बोली- तुम बाथरूम में यही सब करते रहते हो न? बहुत ज्यादा सेक्स चढ़ा रहता है न तुम्हें?
मैंने कहा- हाँ.
ज्योति बोली- मगर अब तुम्हें ये सब करने की जरूरत नहीं।

जब मैं उसकी बात समझ नहीं पाया तो वह कहने लगी- तुमने दिन में जो सुना था वह सब सच है. मैं 6 महीने से प्यासी हूँ और अपनी प्यासी चूत को लेकर बैठी रहती हूं. तन्मय मेरी प्यास बुझा दो प्लीज!
मैंने कहा- मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूँ?

ज्योति ने मुझे एक चांटा मारा और हवस की नज़र से देखते हुए अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए और बोली- अब समझे?
मैं समझ गया कि आज की रात चुदाई वाली रात है। मैंने ज्योति को किस करते हुए बिस्तर पर गिरा दिया. ज्योति उस वक्त साड़ी में थी. मैंने उसकी गर्दन को चूमा, उसकी नाभि पर जीभ से चाटा, उसके चूचों को साड़ी के ऊपर से ही किस किया. फिर मैंने उसका ब्लाउज उतार दिया.

उसने ब्लैक कलर की ब्रा पहनी हुई थी. मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स चूसना शुरू कर दिए तो उसकी ब्रा गीली हो गई. ज्योति बोली- भड़वे … मादरचोद … कितना सताएगा?
मैंने बोला- रंडी, अभी तो पार्टी शुरू हुई है. मैंने उसकी ब्रा को फाड़ दिया तो ज्योति बोली कि ये हुई मर्दों वाली बात!

मैंने उसकी ब्रा, पेटीकोट, पैंटी सब फाड़ दिया और उसको पूरी की पूरी नंगी कर दिया. ज्योति के नंगे बदन और उसकी चिकनी गुलाबी चूत को देख कर मेरे लण्ड ने चड्डी के अंदर से ही सलामी दे दी. मैंने अपने कपड़े पहले ही उतार दिए थे।
फिर मैं ज्योति के पेट को चूमते हुए नीचे जांघों की तरफ आया और जांघों को चूमने लगा. मैं उसकी जांघों को थूक लगा लगा के चूस रहा था और ज्योति का पूरा बदन अकड़ रहा था. वह मुझे गंदी गालियां दे रही थी।

मैं उसकी जांघों को चूमते हुए नीचे आता गया और उसके पैरों की उंगलियां भी चूमीं जिससे ज्योति मचलने लगी और बोल रही थी कि चोदो, चोदो प्लीज़ … तन्मय आज मेरी चूत पूरी रात भर चोदो। अपने लण्ड के पानी से भर दो मेरी चूत.
मैंने उसकी चूत पर अपना नाक रखा और सूंघने लगा. ज्योति की चूत की खुशबू से मेरा लण्ड और ज्यादा सख्त हो गया।

फिर मैंने उसकी चूत के दोनों होंठों को अलग किया और हल्के हल्के फूँक मारने लगा तो ज्योति छटपटाने लगी. वह बहुत ही ज्यादा गर्म हो गई और बोली- प्लीज़ जान … फक मी (चोदो मुझे)।
फिर मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत के दाने को धीरे धीरे चाटना शुरू किया. उसने अपने दोनों हाथों से मेरा सिर सहलाना शुरू कर दिया.

वह कह रही थी- काश तुम मेरे पति होते … मैं तो रात भर तुमको सोने नहीं देती मेरे राजा … रात भर तुम्हारा लंड लेती रहती.

मैंने ज्योति की चूत को जोर से चूसना शुरू किया. ज्योति के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… प्लीज … तन्मय मेरी जान … मेरे बॉयफ्रेंड ने या मेरे पति ने कभी मेरी चूत नहीं चाटी. तुमने तो आज मेरी चूत चाट कर इसको गीली कर दिया. हाय मेरी जान … आह्ह् … वो बड़बड़ाती रही और मैं ज्योति की चूत की चूसता रहा।
ज्योति बोली- तुम भी कुछ बोलो न जान!
मैंने कहा- मेरा लण्ड चूसो!

मेरे कहते ही फिर ज्योति ने मेरा लण्ड अपने हाथ में लिया और मेरा लण्ड देख कर उसके मुंह से लार टपक पड़ी और झपट कर उसने मेरा लण्ड मुंह में ले लिया. उसके मुंह में जाते ही मुझे ऐसा लगा जैसे किसी गर्म खोपचे में मेरा लण्ड घुस गया हो।
मेरा लण्ड पहली बार कोई चूस रहा था. उस वक्त जो मजा मुझे आ रहा था उसको मैं नहीं बता सकता. मगर जिसने भी लंड मुंह में देकर चुसवाया है वो जान पाएगा कि मुझे उस वक्त कैसा लग रहा होगा. करीब दस मिनट मेरा लण्ड ज्योति ने चूसा और साथ में वो अपनी एक उंगली चूत में डालती जा रही थी.

फिर मैंने ज्योति से कहा- 69 की पोजीशन में आते हैं।
69 की पोजीशन में आते ही हम दोनों जैसे जन्नत की सैर करने लगे. वो मुझे पागलों की तरह खा जाना चाहती थी और मैं उसकी चूत में घुस जाना चाहता था. इतना मजा मुझे कभी मुट्ठ मारने तो आया ही नहीं. एक तरफ तो लंड ज्योति के मुंह में था और ऊपर से उसकी चुसाई भी वो जोरदार तरीके से कर रही थी. मैं उसकी चूत को काट-काट कर खा रहा था.

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उसके बाद ज्योति उठी और बोली- बस, अब अंदर डालो, मैं और नहीं रुक सकती.
मैंने ज्योति की चूत पर अपना लंड सेट किया और उसको चूत के मुंह पर रख कर रगड़ने लगा.
ज्योति- तुम्हारा बहुत बड़ा लण्ड है, मुझे काफी पसंद आया ये!
मैं- आज इसी लण्ड से तुम्हें चोद-चोद के जन्नत की सैर करवाऊंगा।
ज्योति- शुभ काम में देरी किस बात की जान!

मैंने ज्योति की गर्म चूत की दोनों फांकों को अलग किया और अपना पत्थर सा लण्ड धीरे-धीरे उसकी चूत में डालने लगा. जैसे ही पूरा लण्ड अंदर गया मुझे ऐसा लगा जैसे किसी तपती भट्टी में मेरा लण्ड चला गया हो।
ज्योति ने मुझे कस कर पकड़ लिया और बोली- अब जितना तुम्हारी गांड में दम है, उतना दम लगा के चोदो, मैं भी तो देखूं कि एक मर्द की ताकत कैसी होती है.
जब बात मर्द वाली आ जाती है तो कोई भी मर्द अपनी बेइज़्ज़ती नहीं करवा सकता.

जोश में आकर मैंने उस रांड को चोदना शुरू किया. पहले धीरे-धीरे, फिर अपने धक्कों की स्पीड तेज की तो ज्योति अपनी दोनों आँखें बंद करके मुझे चूमने लगी. वह आनंद में डूबती जा रही थी और बोल रही थी- हाय जान, फ़क मी, आज मेरी चूत में वास्तव में कोई लण्ड गया है. इतने दिनों से तो मैं लुल्ली से ही चुद रही थी. आह … आह … फ़क मी बेबी … और तेज चोदो तन्मय जान!

दस मिनट होने को आये और मैं लगातार उसे चोदे जा रहा था. ज्योति नीचे से चूतड़ उठा-उठा के मेरा साथ दे रही थी और बोल रही थी- इस चुदाई को तब तक मत रोकना जब तक मेरा पानी न निकल जाये.

मैं पसीने से भीग गया तो ज्योति मेरे ऊपर आ गई और अपनी गांड हिला कर लण्ड अपनी चूत में लेने लगी और गालियां देने लगी- भोसड़ी के … तेरे लण्ड को खा जाऊंगी आज, आह आह … उम्म्म … हाय मेरी प्यासी चूत और उसमें तेरा ये हथौड़े जैसा गर्म लौड़ा … आह चोद बहन के लौड़े … ऐसा लण्ड मिले तो मैं तेरे साथ भागने को भी तैयार हूं मेरे सेक्सी लंड के राजा … आह्ह … कितना मजा आ रहा है तेरा लण्ड लेने में. आज से तू ही मेरा पति!

इतना कहते हुए ज्योति भी पसीने में भीग गई और बोली- रण्डवे तुझे शर्म नहीं आ रही मादरचोद! एक लड़की तेरे ऊपर कूद रही है. तुझे मजा दे रही है. तू बस मजे लेता जा रहा है. ये नहीं सोच रहा कि मैं भी थक गई होऊँगी.
इतना सुनते ही मैं उसके ऊपर आकर ज्योति को जोर जोर से चोदने लगा.

ज्योति नीचे से मेरा साथ दे रही थी, बोली- आह जान … अब जरा किस भी कर लो. सिर्फ चूत ही नहीं है मेरे पास और भी बहुत कुछ है साले!
मैं- रंडी है तू मदरचोद! ले मेरा लण्ड।
ज्योती- ला दे हरामी … आह्ह डाल जोर से।
मैंने स्पीड तेज कर दी और ज्योति झड़ने वाली थी.
बोली- जानू जोर से … मैं झड़ने वाली हूँ!
इतना कहकर वह मुझे पागलों की तरह चूमने लगी. कभी होंठों को तो कभी मेरे कंधों को. अब मैं भी झड़ने की कगार पर था. ज्योति की चूत कुछ ज्यादा ही गर्म हो चुकी थी.

लगभग 25 से 30 मिनट की चुदाई के बाद मेरा सारा पानी ज्योति की चूत में ही निकल गया। चुदाई रुकी तो हम दोनों कुत्तों की तरह हांफ रहे थे और पसीने से पूरे भीग चुके थे। फिर हम दोनों एक साथ नहाये और फिर शाम को उसका पति आ गया।

इस तरह से पांच महीने लगातार मैंने उसकी चूत मारी. मगर हमारी इस चुदाई के बारे में उसके पति को शक हो गया. उसने रूम वहां से बदल दिया. उसका रूम मेरे रूम से एक किलोमीटर दूर था. मगर ज्योति जैसी रांड कहां रुकने वाली थी. मैं वहाँ भी उसकी चूत चोदने पहुंच गया. जब भी मौका मिलता है हम चुदाई कर ही लेते हैं.

एक कहावत है कि अगर औरत संतुष्ट है तो कितनी भी भीड़ में छोड़ दो वो कुछ नहीं करेगी. लेकिन अगर वो अपने पति से संतुष्ट नहीं है तो भले ही चार दिवारी में बंद कर दो वो कुछ भी करके लण्ड ले ही लेगी।

दोस्तो, आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी मुझे बताना जरूर. मैं ज्योति के साथ हुई अगली चुदाई के बारे में दूसरी कहानी लेकर जल्दी ही वापस आऊंगा.
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