कुंवारी बुर में लंड लेने की लालसा- 2

मेरी पहली बार सेक्स की कहानी में पढ़ें कि कैसे मैंने अपनी भाभी को उनके दोस्त के साथ नंगी चुदाई करते देखा. मैं भी चुदना चाहती थी पर डरती थी.

यह कहानी सुनें.

पहली बार सेक्स की कहानी के पहले भाग
मैं अपनी इच्छाओं को दबा के जी रही हूँ
में आपने पढ़ा कि मैं भाभी के साथ उनकी सहेली की शादी में उनके मायके आयी थी.
रास्ते में कार खराब होने के कारण हमें एक बंगले में रुकना पडा.

बीच रात में मैंने देखा कि भाभी के दोस्त के कमरे से भाभी और उनके दोस्त की बातों की आवाज आ रही थी।

मैंने सोचा शायद नींद नहीं आ रही होगी भाभी को … इसलिए इधर आई होंगी.
तो मैंने बिना सोचे दरवाजा धक्का दे के खोल दिया।

दरवाजा थोड़ा अटक के अंदर की तरफ खुल गया।
अंदर का सीन देख के तो मेरे होश ही उड़ गए।

अब आगे पहली बार सेक्स की कहानी:

भाभी और कुणाल एकदम नग्न अवस्था में एक दूसरे के जिस्म से चिपके हुए थे।
पहली बार तो मेरी चीख ही निकल गयी- अरे भाभी, ये सब क्या है? ये क्या कर रही हो आप?
भाभी एकदम से उठी और कुणाल से अलग होकर खुद को चादर से लपेट लिया।

उधर कुणाल ने भी खुद को चादर से लपेट लिया।

भाभी मुझे समझाने की कोशिश करते हुए बोलने लगी- देख, जैसा तू सोच रही है वैसा कुछ भी नहीं है, तू मेरी बात सुन।

अब तक मेरा पारा सातवें आसमान पर था क्योंकि भाभी का भांडा फूट चुका था।
मैं बोली- तो क्या कर रही हो यहाँ नंगी हो के कुणाल के साथ? आप मेरे भैया को धोखा दे के यहाँ मजे कर रही हो। मैं अभी भैया को बताती हूँ सब फोन कर के।

मैंने अपना फोन निकाला पर तुरंत ही पीछे से किसी ने मेरा फोन छीन लिया।
तो मैंने मुड़ के देखा.

अजय मेरा फोन हाथ में ले के खड़ा था।
मैंने चिल्ला के कहा- मेरा फोन दो यार अजय प्लीज।
अजय बोला- नहीं, पहले तुम इनकी बात सुन लो. वरना फोन नहीं मिलेगा।

मुझे अब और ज्यादा गुस्सा आ गया तो मैं पैर पटकते हुए बाहर जाने लगी.

जैसे ही मैं बाहर निकली तो और हैरान हो गयी क्योंकि बहार चारों तरफ जंगल था.
मैं भाग के वापिस अंदर आ गयी।

भाभी, कुणाल और अजय सब हाल में आ चुके थे और उन दोनों ने कपड़े भी पहन लिए थे।

अब मेरे पास कोई चारा नहीं था इसलिए मैं भी वहीं बैठ गयी और बोली- बताओ, क्या बताना है?

भाभी ने बताया कि भाभी और कुणाल कॉलेज के टाइम से ही गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड थे.
पर भाभी के माँ बाप ने उनकी मर्ज़ी के खिलाफ उनकी शादी मेरे भाई से करा दी.
भाभी अब भी कुणाल से ही प्यार करती थी।

आगे भाभी ने बताया कि वो अपनी सहेली की शादी में अकेले ही आना चाहती थी. पर मैंने ज़िद की साथ चलने की इसलिए मजबूरन मुझे भी लाना पड़ा।
फिर मेरे साथ लगाने के लिए अजय को बुलाया ताकि भाभी और कुणाल को अलग टाइम मिल सके और अजय मेरे साथ लगा रहे।

भाभी बताती गयी- पर जब तुम अपना फोन चार्जिंग पे लगाने आयी तो मैं बाल बाल बची पकड़े जाने से … क्योंकि कुणाल भी बाथरूम के अंदर ही था।

अब मुझे समझ आया कि अंदर से अजीब अजीब आवाजें क्यूँ आ रही थी।
आगे भाभी प्रार्थना करते हुए बोली- प्लीज नेहा, अपने भैया को ये सब मत बताना, वरन बहुत गड़बड़ हो जाएगी।

मैंने कहा- नहीं भाभी, जो गलत है वो गलत है. मैं भैया से इतनी बड़ी बात नहीं छुपा सकती।
भाभी थोड़ा रो सी के बोलने लगी पर मैं अपनी ज़िद पे अड़ी रही।

अब भाभी बोली- देख यार नेहा, तू क्यूँ ज़िद कर रही है? चल मैं तुझे आज मौका देती हूँ अपनी दबी इच्छाओं को खुल के जीने का।

मैंने थोड़ा शक भरे लहजे में पूछा- कौनसी इच्छा?
भाभी बोली- मुझसे कुछ नहीं छुपा है नेहा! मैं जानती हूँ कि तेरा भी बहुत मन करता है कि तेरा भी बॉयफ्रेंड हो, तू भी घूमे फिरे, मस्ती करे, अय्याशी करे। पर अपने भाइयों के डर से नहीं कर पाती है।

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मैंने अंजान बनने का नाटक करते हुए कहा- नहीं भाभी, ऐसा नहीं है, मुझे ये सब पसंद नहीं है।
भाभी बोली- मेरे सामने मत बन! मुझे सब पता है. ये भी पता है कि तू छुप छुप के कभी कभी गंदी फिल्में देखती है. और ऐसे ही चुत को रगड़ के खुद को शांत कर लेती है। आज मौका है, तू भी मजे कर और मैं भी! जी भर के … कोई नहीं है यहाँ, किसी को कुछ पता नहीं चलेगा।

अब तक मैं भी भाभी की हालत को समझ पा रही थी इसलिए मेरा गुस्सा कम हो गया था.
क्योंकि वो मेरी भाभी होने के साथ ही मेरी बहुत अच्छी दोस्त भी बन गयी थी.
और वासना की तड़प को मेरे से ज्यादा कौन जानता होगा, जो इतनी बड़ी होने के बावजूद किसी लड़के ने मेरी जिस्म को नहीं छुआ था।

मैंने थोड़ा नर्म आवाज में कहा- नहीं भाभी, ऐसी कोई बात नहीं है. मुझे नहीं करना ये सब! आपको करना है तो कर लो, मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगी।
भाभी बोली- देख ले … फिर ऐसा मौका नहीं मिलेगा।
मैंने कहा- नहीं, मैं सोने जा रही हूँ.
और मैं उठ के चल दी, अपने कमरे में और बेड पे लेट के सोने की कोशिश करने लगी।

पर मेरा ध्यान बार बार इस बात पे जा रहा था कि भाभी क्या कर रही होगी, कितने मजे ले रही होगी।

जब कुछ देर बाद भी मुझे नींद नहीं आई तो मैं उठ के बैठ गयी और धीरे से दरवाजा खोल के झाँका कि नीचे क्या हो रहा है।
नीचे कोई नहीं था, अजय भी अपने कमरे में सोने जा चुका था और कुणाल और भाभी अपने काम में व्यस्त थे।

पता नहीं क्यूँ … पर मुझे उन दोनों को सेक्स करते हुए देखने की बहुत इच्छा हो रही थी।
मैं दबे पाँव घर से बाहर निकाल के उनके कमरे के पीछे चली आयी।

वहाँ काँच की खिड़की लगी हुई थी पर बाहर अंधेरा होने के कारण सिर्फ बाहर से अंदर देखा जा सकता था, अंदर से बाहर नहीं।
मैं धीरे से खिड़की से उन दोनों को देखने लगी।

अंदर कुणाल और भाभी एक दूसरे के जिस्म का पूरा लुत्फ ले रहे थे, उनकी लाइव चुदाई देख के मेरी हवस के अरमान उमड़ उमड़ के आ रहे थे।
मन तो कर रहा था कि अभी भाभी को हटा के उनकी जगह मैं लेट जाऊँ.

और मैंने अपना लहंगा ऊपर को उठाया और पैंटी नीचे सरका के धीरे धीरे अपनी चूत को सहलाना भी चालू कर दिया था।

मेरे मन में खयाल आ रहे थे कि क्यूँ ना आज मैं अपनी हद से आगे बढ़ जाऊँ। किसी को पता नहीं चलेगा.
पर हल्का हल्का डर भी रही थी, पर डर से ज्यादा हवस थी।

आज मेरे पास मौका था, जगह थी, जबर्दस्त इच्छा थी, और किस्मत से सेक्स करने के लिए लड़का भी था.
मुझे बस थोड़ी से हिम्मत दिखानी थी और सब हो जाता.

ऊपर से भाभी की इतनी जबर्दस्त चुदाई देख के मेरा मन और फिसल रहा था.

मैं 10-15 मिनट तक ऐसे ही उनकी चुदाई देखते हुए अपनी चूत मसल रही थी।

आखिरकार मैंने दुनिया के कायदे कानून भूल कर सिर्फ अपनी दबी हुई इच्छा पूरी करने का फैसला किया।

मैंने अपने कपड़े सही किए और अंदर आ गयी।

इससे पहले मेरा डर फिर हावी होता और मैं अपना इरादा बदल देती … मैं तुरंत भाभी के कमरे के पास गयी और ज़ोर से खटखटाने लगी।
थोड़ी देर में भाभी ने दरवाजा खोला और पूछा- क्या हुआ?
पर मैं फिर थोड़ी हिचकिचा गयी और हकला के बोलने लगी- भाभी वो … ये मैं … वो ये कह रही थी कि उम्म … मैं मैं … भी!

भाभी ने मुसकुराते हुए मेरी बात पूरी करते हुए कहा- चुदवाना चाहती हूँ।
मेरे मुंह से तुरंत निकल गया- हाँ!
और फिर अगले ही पल मैं बोलने लगी- नहीं … वो मैं तो!

भाभी बोली- बस अब ज्यादा बन मत, मैं भी तेरी उम्र से गुज़र चुकी हूँ, मैं तेरे दिल की बात जान सकती हूँ।
मैंने भाभी से पूछा- भाभी, कुछ होगा तो नहीं ना?
भाभी ने कहा- अरे कुछ नहीं होगा, मैं सब संभाल लूँगी. तू जी भर के चुदवा आज पूरी रात।

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मैं थोड़ा शर्मिंदा होते हुए नीचे देख के मुस्कुराने लगी।

भाभी बोली- हाँ है ना?
मैंने बहुत दबी आवाज में कहा- हाँ!
भाभी मुस्कुराई और मेरा हाथ पकड़ के ले जाने लगी।

मैंने कहा- कहाँ ले जा रही हो?
भाभी बोली- बस चुप रह … जैसा मैं कहती हूँ, करती रह, बहुत मजा आयेगा।

और भाभी मुझे अजय के कमरे के पास ले आई और गेट खोल के कहा- अजय ये ले … आखिरकार मान ही गयी नेहा … ये ले सम्भाल ले इसे!
उन्होंने मुझे अजय की तरफ हल्का सा धकेल दिया।

अजय भी मुस्कुराने लगा और मैं भी हल्का हल्का नीचे देख के मुस्कुरा रही थी।

भाभी बोली- नेहा, खुल के मजे ले, कुछ नहीं होगा।
और उन्होंने अजय को बोला- कोई कमी नहीं रहनी चाहिए अजय।
अजय बोला- अरे आप चिंता मत करो, कल सुबह आप खुद पूछ लेना नेहा से।
भाभी ने कहा- ठीक है, मजे करो फिर!
और फिर दरवाजा बंद कर के चली गयी।

भाभी तो चली गयी पर मैं वही खड़ी रही और नीचे फर्श को देखती रही.
मुझे बहुत अजीब लग रहा था और शर्म भी आ रही थी। मुझे लगा था मैं अपना पहला सेक्स अपने पति के साथ ही कर पाऊँगी, पर इतनी जल्दी करने को मिल जाएगा ये कभी नहीं सोचा था।

थोड़ी देर तक तो अजय भी ऐसे ही बेड पे बैठा रहा पर फिर बोला- वहीं खड़े रहने का इरादा है क्या मैडम? इधर तो आओ ज़रा, अब क्या शरमाना!
मैं भी फिर धीरे धीरे अजय के पास बेड के किनारे बैठ गयी।

अजय बोला- हाँ तो नेहा जी, बताओ यहाँ क्यूँ आई हो?
मैंने हकलाते हुए कहा- वो … मैं … मेरा वो मन कर रहा है।
अजय बोला- ऐसे नहीं नेहा जी, खुल के बोलो. मुझे समझ नहीं आ रहा।

मैं फिर बोली- वही जो भाभी कर रही हैं नीचे।
अजय बोला- ऐसे नहीं यार, थोड़ा तो खुलो, खुल के बोलो।

मैंने बहुत हल्की आवाज में कहा- सेक्स।
अजय मुस्कुराने लगा और बोला- तुम रहने दो. जाओ सो जाओ, ऐसे मजा नहीं आ रहा मुझे!

मैंने कहा- अरे क्यूँ मजे ले रहे हो, पता तो है तुम्हें कि मुझे क्या करना है।
अजय बोला- मजे ले रहा हूँ तो तुम्हें भी तो मजे दूंगा पूरे! चलो फटाफट बोलो क्यूँ आई हो, और वो भी हिन्दी में!

मैंने थोड़ा झुँझलाते हुए कहा- अरे यार, बुर चुदवाने आई हूँ तुमसे, बस!
अब अजय हंसने लगा और मेरे पास आकर बैठ गया और मुझे देखने लगा।

मैं अब नीचे देखने लगी थी फर्श पे!
फिर अजय मेरे सामने आ के खड़ा हो गया और उसको देखते हुए मैं भी खड़ी हो गयी।

अजय ने मुझे देख के एक शैतानी भरी मुस्कान दी.

और इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती, उसने मेरा सिर पीछे से पकड़ा और मेरे गुलाबी होंठों पे अपने होंठ रख के ज़ोर से दबा दिये।

मैं इस पल के लिए जरा भी तैयार नहीं थी।
मेरी आँखें आश्चर्य से फैल गयी थी और हमारे होंठ मिले हुए थे।

इसके बाद अजय मेरे ऊपर गिरता चला गया और हम दोनों बेड पे गिर गए।

अजय मेरे ऊपर था और हमारे होंठ अब भी मिले हुए थे।

फिर धीरे धीरे हम एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे। धीरे धीरे हम पूरे होंठ खोल खोल के एक दूसरे को किस यानि चुंबन कर रहे थे।

उस वक़्त तो मैं कुछ भी नहीं सोच रही थी और बस उस पल में बह रही थी।

लगभग दो मिनट किस कर के अजय मेरे ऊपर से उठ गया और साइड में लेट गया।

मैं अचानक से बहुत खुश हो गयी थी। मेरी बरसों की हवस की भूख जो पूरी होती दिख रही थी।
अजय बोला- कैसा लगा नेहा?
मैंने उत्सुक होते हुए बोला- बहुत मजा आया.

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पहली बार सेक्स की कहानी का अगला भाग: मेरी बहू रानी को पुनः भोगने की लालसा- 3