कमसिन स्कूल गर्ल की व्याकुल चूत-5

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अगली सुबह देर से आँख खुली; सात बज चुके थे और दिन चढ़ आया था तो अब मोर्निंग वाक पर जाने का तो प्रश्न ही नहीं था अतः यूं ही अलसाई सी लेटी रही और मन में उधेड़बुन चलती रही, सोचती रही कि सुरेश अंकल के यहां जाना है; अंकल जी ने मेरे ही कारण आंटी जी को मायके भेजा होगा और अब खुद ऑफिस से छुट्टी लेकर घर पर मेरे इंतज़ार में बैठे होंगे.

पहले मैं खुद चुदने को मरी जा रही थी अब जबकि सब कुछ सेट हो चुका था तो मेरी हिम्मत जवाब देने लगी थी. अंततः मैंने मन पक्का कर लिया और अंकल जी से मिलने जाने का फैसला कर लिया.

अतः सबसे पहले मैंने अपनी झांटें हेयर रिमूवर से सफाचट कर लीं और चूत को चिकनी करके अच्छी तरह से रगड़ मसल कर नहाई और फिर जितना खुद को सजा संवार सकती थी, सजा लिया और स्कूल की ड्रेस पहन कर स्कूल जाने को तैयार हो गयी और जल्दी जल्दी नाश्ता करके अपनी साइकिल लेकर कर निकल ली.

स्कूल पहुंची तो मन पढ़ाई में तो लगना ही नहीं था अतः शुरू के दो पीरियड जैसे तैसे काटे और फिर टीचर से पेटदर्द का बहाना बना कर स्कूल से निकल ली और सुरेश अंकल के घर के पास पहुँच कर सावधानी से छुपते छुपाते अंकल जी के गेट के भीतर जा पहुंची.

अंकल जी तो मेरा ही इंतज़ार कर रहे थे तो उन्होंने झट से मुझे घर के भीतर कर लिया और मेरी साइकिल भी अन्दर रख दी. मेरा दिल तो जोर जोर से धक धक कर रहा था और डर के मारे मुंह सूख रहा था साथ ही मेरी टांगें कांप रहीं थीं जैसे मैं अब गिरी कि अब गिरी.

अंकल जी ने मेरी हालत समझ प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरा और मेरा गाल चूम के मुझे अन्दर लिवा ले गए और ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठा दिया और मेरी बगल में बैठ कर यूं ही हल्की फुल्की बातें करने लगे.
फिर अंकल जी ने मुझे पानी पिलाया और मैंगो वाली कोल्ड ड्रिंक ला कर दी. कोल्डड्रिंक पीकर मैं नार्मल फील करने लगी और मेरा आत्मविश्वास, सेल्फ कॉन्फिडेंस वापस लौट आया.

अंकल जी का ड्राइंग रूम बहुत ही सुरुचि पूर्ण ढंग से सजा हुआ था. दीवारों पर प्रसिद्ध चित्रकारों की आयल पेंटिंग्स लगी हुयीं थीं और फर्श पर महंगा कालीन बिछा था. वातानुकूलित वातावरण में मुझे अच्छा फील होने लगा और मुझे स्मरण हुआ कि मैं वहां क्यों गई थी.

“सोनम बेटा, तू ठीक तो है न? इस घर को तुम अपना ही घर समझो और कोई भी किसी तरह की भी परेशानी महसूस हो तो तुरन्त बता देना बेटा. तुम्हारे साथ किसी बात की कोई जबरदस्ती नहीं है. ओके?” अंकल जी ने प्यार से कहा.
“ठीक है अंकल जी, आपके साथ मुझे कोई चिंता नहीं है.” मैंने सहमति जताई.

फिर अंकल जी नीचे कालीन पर बैठ गए और मेरे दोनों पांव उठा कर अपने सीने से लगा उन्हें चूमने लगे. मेरे पैरों पर जमी धूल की उन्होंने जरा भी परवाह नहीं की और पांवों की उंगलियां मुंह में लेकर चूसने लगे.
एक अजब सी सनसनाहट मेरे पांवों से होते हुए ऊपर मेरी जाँघों तक चढ़ने लगी. मेरी आँखें मुंद गयीं और मैंने अपने जिस्म को ढीला छोड़कर अंकल जी के हवाले कर दिया.

मेरे पांव चूमने और उंगलियां चूसने के बाद अंकल जी ऊपर की ओर बढ़ चले और जांघों तक चूमते चले गए. मेरी चूत में चीटियां सीं रेंगने लगीं थीं और मेरे पैर कंपकंपाने लगे थे.

फिर अंकल जी ने मेरी यूनिफोर्म की सफ़ेद सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसे उतारने लगे तो मैंने उनका हाथ पकड़ कर उन्हें रोकने का दिखावा किया. पर मैं जानती थी कि नंबर बाई नंबर सलवार पैंटी कुर्ती ब्रा सब को ही उतरना ही था. एक दो मिनट मैं अपने हाथों से अंकल जी से लड़ती रही और अपनी सलवार बचाती रही पर उन्होंने जैसे तैसे करके सलवार मेरे नीचे से खिसका ली और फिर वो मेरी चिकनी टांगों से फिसलती हुई निकल गई.
मैंने घबरा का अपनी हथेलियों से अपनी पैंटी ढक ली क्योंकि पैंटी में से मेरी फूली हुई चूत का उभार, वो त्रिभुज और बीच की लाइन क्लियरली दिखती है.

अब अंकल जी मेरी नंगीं टांगों को नीचे से ऊपर तक चाटने चूमने लगे तो मुझे गुदगुदी होने के साथ ही मेरा बदन झनझना उठा और मुझे इच्छा हुई कि अब जो होना है तो वो अंकल जी जल्दी से कर डालें बस.
पर उन्होंने ऐसा कुछ करने के बजाय मेरा कुर्ता और शमीज उतार डाली और झट से मेरी ब्रा का हुक खोल दिया. हुक खुलते ही मेरी ब्रा के स्ट्रेप्स झटके से खुले और अंकल जी ने मेरे दोनों नंगे मम्में अपनी मुट्ठियों में जकड़ लिए और उन्हें दबाने लगे.

मैं तो एकदम चुदास से भर उठी और मेरी चूत ने टसुये बहाना शुरू कर दिया. बुरा हो इस निगोड़ी चूत का जो घड़ी घड़ी आंसू बहाने लगती है. पैंटी पर से मेरी उंगलियां गीलीं हो उठीं और मैं शर्म से पानी पानी हो उठी कि अभी अंकल जी मेरी गीली बहती चूत देखेंगे तो हाय राम पता नहीं क्या क्या सोचें.

अब अंकल जी सोफे पर मेरे बगल में आकर बैठ गए और बायां बूब चूसने लगे. फिर दायां वाला भी अपने मुंह में ले लिया और बच्चों की तरह चुसकने लगे.
“अंकल जी बस्स … मत कीजिये ऐसे!” मैंने कहा.
पर उन्हें और कस के अपने से लिपटा लिया और दूध चुसाई का आनन्द लेने लगी.

मैं सोच रही थी कि हमारा बदन भी भगवान ने कैसा बनाया है कि कोई मम्में चूसे तो दूध चूत से बहने लगता है, कोई होंठ चूसे और कहीं भी चूमे तो रस चूत बहाने लगती है. मतलब शरीर के हर अंग का डायरेक्ट कनेक्शन चूत से ही होता है.

कुछ देर यूं ही मेरे जिस्म से खेलने के बाद अंकल जी उठ खड़े हुए और अपने कपड़े उतार डाले, बस सिर्फ अंडरवियर ही उतरना रह गया.
अंकल जी का बदन देख मैं उनके चौड़े चकले सीने पर मैं रीझ उठी और मन हुआ कि उनकी छाती से जा लगूं; हम लड़कियों को पुरुष की शक्ल से ज्यादा उनका चौड़ा सीना ज्यादा आकर्षित करता है, पता नहीं क्यों … अंकल जी के सीने से लगने की इच्छा उन्होंने खुद पूरी कर दी और सोफे से उठा कर मुझे अपनी मजबूत बांहों में भर लिया.

मेरे स्तन उनके सीने से दब गए और हमारे होंठ जुड़ गए. कितनी ही देर वो मुझे चूमते चाटते रहे, कभी गाल कभी गर्दन कभी होंठ कभी ये कभी वो!
फिर अंकल जी ने मुझे वापिस सोफे पर बैठा दिया और मेरी पैंटी उतार डाली.

अब मैं 18 साल की कमसिन स्कूल गर्ल बिल्कुल मादरजात नंगी उनके सामने बैठी थी; मेरी नंगी चूत एक गैर मर्द के सामने नुमाया थी और मर्द भी वो जो मेरे पिता की उम्र के थे.
वाह रे … अन्तर्वासना के खेल न्यारे!

फिर उन्होंने अपना अंडरवियर निकाल फेंका और उनका लंड मेरी आँखों के सामने झूलने लगा. गहरे ब्राउन कलर का लंड जिसकी लम्बाई मेरे छः इंच वाले स्केल के बराबर रही होगी और वो किसी बड़ी तोरई जितना मोटा था और उस पर मोटी मोटी फूली हुई सी नसें उनके लण्ड को डरावना लुक दे रहीं थीं. लण्ड का टोपा या सुपारा चमड़ी से ढका हुआ गेंद की तरह जुड़ा हुआ लग रहा था जो मेरे मन में दहशत सी पैदा कर रहा था.

अंकल जी पूरे नंगे होकर नीचे कालीन पर बैठ गए और मेरे पांव ऊपर उठा कर सोफे पर रख दिए जिससे मेरी नंगी चूत खुल कर उनके मुंह के सामने हो गयी.
“सोनम बेटी, कितनी प्यारी प्यारी मस्त चूत है तेरी … इसे आज ही चिकना किया है न?” अंकल जी हर्षित स्वर में बोले.
मैं क्या जवाब देती … मैंने लाज के मारे अपना मुंह हथेलियों में छिपा लिया.

तभी मुझे जोर का करेंट सा लगा;
अंकल जी ने अपने होंठ मेरी नंगी चूत पर रख दिए थे और मेरा मोती अपनी जीभ से छेड़ रहे थे.
वासना की तेज लहर मेरे पूरे बदन में दौड़ गयी और मन किया कि मैं अंकल जी के ऊपर चढ़ जाऊं और उनका लण्ड खुद अपनी चूत में घुसा कर जोर जोर से उछलूं.

पर अंकल जी तो अपनी ही धुन में मेरी कोरी कुंवारी चूत से रसपान किये जा रहे थे और बीच बीच में मेरे पूरे नंगे बदन को निहारते हुए सब जगह से चूम रहे थे जिससे मेरी उत्तेजना और भड़क रही थी.
फिर अंकल जी ने मेरी चूत अपनी उँगलियों से खूब चौड़ी खोल दी और भीतर झांकने लगे तथा अपनी एक उंगली का सिरा मेरी चूत में घुसा कर जायजा लिया.

“सोनम बेटा, तेरी चूत तो एकदम सील पैक है; आज तो मज़ा आ जाएगा.” वो खुश होकर बोले.
“अंकल जी, मैंने आपके लिए ही बचा कर रखी है अब तक!” मैंने शरमाते हुए कहा.
“थैंक यू बेटा, तुझे पता नहीं तू कितना अनमोल खजाना मुझे सौंप रही है; शायद मेरे किसी जन्म का पुण्य उदय हुआ है आज!” वे बोले.

“अंकल जी, अब जल्दी करो जो करना हो … नहीं तो घर पहुँचने में देर हो जायेगी तो मम्मी गुस्सा होंगी.”
“ठीक है बेटा!” वो बोले और मुझे सोफे से उठा लिया और मेरा हाथ पकड़ कर बेडरूम में ले चले.

अंकल जी के पीछे नंगी चलते हुए मुझे बहुत शर्म आ रही थी पर मैं करती भी तो क्या. बेडरूम में डबल बेड बिछा हुआ था जिस पर सुन्दर सी बेडशीट बिछी थी साथ में कई सारे तकिये और नैपकिन रखे थे.

अंकल जी ने मुझे बेड पर बैठा दिया और मेरे सामने खड़े हो गए; उनका तना हुआ लण्ड मेरे मुंह के ठीक सामने तोप की तरह मुंह उठाये खड़ा था.
“सोनम बेटा, जरा पकड़ो इसे!” अंकल जी ने मेरे सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा.

मैंने डरते डरते उनके लण्ड की तरफ देखा; उनका लण्ड मुझे देख कर धीरे धीरे उछल सा रहा था और उसकी चमड़ी थोड़ी सी पीछे खिंच गयी थी जिससे उनके सुपारे का छेद दिख रहा था. मेरी हिम्मत नहीं हुई कि मैं उसे छू भी लूं.
“अंकल जी रहने दीजिये, मुझे डर लगता है!” मैंने मरी सी आवाज में कहा.
“अरे बेटा, डरो मत …ये काटेगा थोड़े ही!” वे बोले और मेरा हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया और मेरी उंगलियां लण्ड के लपेट दीं.
मुझे लगा जैसे मैंने कोई गर्म डंडा पकड़ लिया हो; मेरी मुट्ठी में उनका लण्ड और फूलने लगा था और अब वो पत्थर की तरह सख्त और गर्म हो रहा था जैसे बुखार में तप रहा हो.

“बेटा, इसे आगे पीछे करो धीरे धीरे!” अंकल जी बोले.
तो मैंने डरते डरते लण्ड की स्किन पीछे की ओर की तो बड़ा सारा गुलाबी रंग का चमकदार सुपारा बाहर निकल आया जैसे कोई छोटा वाला टमाटर हो. फिर मैंने लण्ड को चार छः बार आगे पीछे करके मुठियाया और छोड़ दिया. लण्ड ने तमतमा कर दो तीन जम्प लगाईं और रुक गया.

“सोनम बेटा, इसे एक बार चूस कर गीला तो कर दो; फिर देखना इसका कमाल!” अंकल जी ने मुझसे कहा.
“नहीं अंकल जी, मैं इसे मुंह में नहीं लूंगी … छीः …” मैंने कह दिया.
“चलो कोई बात नहीं गुड़िया रानी, जैसी तुम्हारी मर्जी!” अंकल जी बोले और मुझे बेड पर लिटा कर मुझसे लिपट गए.

कहानी जारी रहेगी.
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