जवाँ मर्द का आण्ड-रस-1

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जिन्दगी की किताब के पन्ने भी बड़ी पक्की स्याही से लिखे जाते हैं. एक बार वक्त ने जो छाप दिया उसको सालों साल संजोकर रखते हैं.
एक दिन अपनी तन्हाई को अपने साथ बैठाकर मैं उसे अपनी गुज़री जिन्दगी की एल्बम पलटकर दिखा रहा था.

पन्ने पलटते पलटते दिमाग के कैमरे द्वारा ली गई एक ब्लैक एंड व्हाइट फोटो एक बार फिर से मानसपटल पर रंगीन घटना में तबदील हो गयी. उसी घटना को अपने चहेते पाठकों के साथ साझा करने का मन किया तो अन्तर्वासना की याद आ गई.

अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज के माध्यम से मुझे कुछ मित्रगण ऐसे मिले हैं, जो न केवल मेरी कहानियों की हर दिन प्रतीक्षा करते हैं बल्कि उसके साथ ही इन्सान होने के नाते एक अपनी मित्रता का अहसास भी करवाते हैं. उन मित्रों तथा पाठकों के स्नेह व गुरूजी के सहयोग के लिए हृदय हमेशा आभारी रहता है.

स्कूल, कॉलेज, नौकरी, कार्यक्षेत्र के अलावा बचपन, जवानी, जज़्बात और जिम्मेदारियों के बीच झूलती जिन्दगी के हर पड़ाव पर हमें कुछ नये दोस्त मिलते हैं. उनमें से कुछ तो वक्त के दरिया में पीछे छूट जाते हैं, मगर कुछ अंत तक साथ तैरते चले जाते हैं, फिर चाहे अंजाम डूबना ही क्यों न हो.

उन चाहने वाले वालों में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो तन से हमारे साथ नहीं होते, मगर उनके आस-पास होने का अहसास हमेशा बना रहता है. रवि भी उनमें से ही एक था.

शादी में चूसा कज़न के दोस्त का लंड
से लेकर
मेरे गांडू जीवन की कहानी
तक कई गे सेक्स कहानियों की शृंखला अन्तर्वासना की कृपा से मैंने अपने समलैंगिक भाइयों तक पहुंचाई.

मगर मेरी कहानी अधूरी रह गई. रवि के आने से पहले और उसके जाने के बाद अगर जिन्दगी में कुछ नहीं बदला है तो वो है मेरा अधूरापन. खैर, वो इश्क ही क्या जिसको मंजिल मिल जाये!

समाज के एक तबके को लगता है कि गांडू केवल गांड मरवाने के शौकीन होते हैं. किंतु गांडू की जिन्दगी की उलझनों का सागर इतना गहरा है कि उसकी तलहटी में कोई झांकने की कोशिश भी करे तो घनघोर अंधेरे के अलावा कुछ दिखाई ही नहीं देगा.

सभ्य समाज, जो गांडुओं को मनोरंजन का साधन समझकर उनके मजे तो लेता है किंतु उनको अपनाकर अपने समकक्ष जगह देने की बात जब आती है तो इस दोगले समाज को अपनी संस्कृति और सभ्यता की याद आ जाती है. उस समाज को अब मैं दूर से ही नमस्ते कर देता हूं. वैसे भी अकेला चना भाड़ तो नहीं फोड़ सकता!

रवि के मेरी जिन्दगी में आने से पहले मैं भी आम गांडुओं की तरह जगह-जगह मुंह मारता रहता था. उन किस्सों को अगर लिखने लगूं तो गे-कामसूत्र की रचना हो जाये. आज का किस्सा भी मेरे अतीत की गांडूमाला का एक मोती है.
पाठकों की मांग पर अपनी जिन्दगी के एक और पन्ने से पर्दा उठा रहा हूं.

बात तब की है जब मैंने स्कूल खत्म किया था. घर में खाली बैठा हुआ था इसलिए टाइमपास नहीं हो रहा था. गर्मियों के लम्बे दिन काटे नहीं कट रहे थे. टीवी पर फिल्में देख-देख कर भी बोर होने लगा था.

फिर एक दिन शाम को मेरा दोस्त सुमित मेरे घर पर आ गया. वो कहने लगा- अंश यार, कोई प्रोटीन सप्लीमेंट बता दे.
मैंने पूछा- क्या करेगा सप्लीमेंट का? ये सब अच्छी चीजें नहीं होतीं. खामख्वाह लिवर की बहन चुदवा बैठेगा.
वो बोला- नहीं यार, बॉडी बनानी है. लड़की पटानी है और चूत चोदनी है.

“हा हा हा …” यह बात सुनते ही मेरी हंसी छूट गयी.
मैंने कहा- साले चूतिया, अगर प्रोटीन खाकर बॉडी बनायेगा तो लंड भी खड़ा होना बंद हो जायेगा. तेरी गर्लफ्रेंड तो क्या तेरी बीवी भी फिर पड़ोसियों से चुदवाती फिरेगी.

वो बोला- बहनचोद, मैं सीरीयस हूं.
मैंने कहा- मैं भी सीरीयस हूं. प्रोटीन सप्लीमेंट्स के साइड इफेक्ट बहुत होते हैं. तेरा थोबड़ा बिगड़ेगा सो बिगड़ेगा. गंजा होकर ‘बाला’ का आयुष्मान खुराना बन जायेगा. मेरी बात मान, दूध-दही खा और डेली एक्सरसाइज़ किया कर.

उसने कहा- यार सुबह 9 बजे से पहले खाट में से उठा नहीं जाता. एक्सरसाइज़ क्या घंटा करूंगा!
मैंने कहा- तो फिर जिम ज्वाइन कर ले.
उसने मेरे गाल को खींचते हुए कहा- वाह मेरी छमिया, मेरे दिमाग में ये बात क्यों नहीं आई?

मैंने कहा- दिमाग तो तेरा चूत में लगा रहता है. बात कहां से आयेगी.
“चल अभी चल!” वो मुझे खींच कर उठाने लगा.
मैंने पूछा- मगर कहां?
वो बोला- साले उठ तो सही!
“अच्छा रुक, मां से तो पूछ लूं!”
उसने कहा- मैं ही पूछ लेता हूं.

सुमित सीधा मेरी मां के पास गया और बोला- आंटी, मैं और अंश एक बार बाहर जा रहे हैं.
मां बोली- कहां जा रहे हो.
वो बोला- आंटी, बस बाजार तक जा रहे हैं.

मैंने अपनी चप्पलें पहनीं और सुमित की बाइक पर बैठ कर हम निकल लिये. वो सीधा मार्केट में गया. एक फूड सप्लीमेंट शॉप के सामने उसने बाइक रोक दी.
दुकान का नाम था- दहिया न्यूट्रीशन्स!
शीशे के मेन डोर पर ही जॉन अब्राहिम की मस्क्यूलर बॉडी वाली हॉट शर्टलेस फोटो लगी हुई थी.

दोस्ताना फिल्म में जॉन की अंडरवियर वाली वीडियो को देख कर मैं कई बार मुठ मार लिया करता था. दरअसल समंदर के पानी में से निकलते हुए उसकी सेक्सी मस्क्यूलर बॉडी, स्पीडो को सरकाते हुए दिखने वाले उसके आंधे नंगे चूतड़ और आगे की ओर उसके लंड का उभार देखने के लिए ही मैं वो गाना बार-बार देखा करता था.

शीशे का दरवाजा खोल कर हम दोनों अंदर चले गये. अंदर सामने टेबल के दूसरी तरफ एक हैंडसम सा लड़का बैठा हुआ था. उसके बाल भूरे से थे. फेस कट कुछ कुछ कार्तिक आर्यन से मिलता जुलता था. मगर शरीर से वही देसी जाट था.

लम्बा सा चेहरा. काली आंखें. लम्बी सी नाक. लाल लाल से होंठ और चेहरे पर क्यूट सेक्सी सी स्माइल. उसके चेहरे को देखते ही उसको ख्यालों में ही नंगा कर डाला मैंने तो.

उफ्फ … इसकी छाती कैसी होगी, छाती पर बाल होंगे या नहीं, इसकी ब़ॉडी कितनी मस्त होगी, इसका लंड कैसा होगा, शायद लम्बा और मोटा सा होना चाहिए सांवले से रंग का, कौन सी फ्रेंची पहनता होगा, फ्रेंची के पास इसकी जांघें कैसी होंगी, वगैरह-वगैरह.

सुमित और मैं दोनों काउंटर के सामने रखी चेयर पर बैठ गये.
सुमित बोला- भाई, प्रोटीन सप्लीमेंट लेना है.
उसने पूछा- पहली बार ले रहे हो?
सुमित- हां भाई.

दुकान वाले ने कहा- भाई सप्लीमेंट तो मैं दे दूंगा मगर खाली सप्लीमेंट लेने से शरीर नहीं बनेगा. साथ में एक्सरसाइज़ या जिम भी करना होगा.
सुमित बोला- ठीक है. एक महीने का कितने में पड़ेगा.
वो बोला- भाई अलग-अलग रेट हैं. कंपनी के हिसाब से.

सुमित ने कहा- यार, कोई ऐसा बताओ जिसके साइड इफेक्ट ना हों.
दुकान वाले ने कहा- भाई सबकी बॉडी अलग-अलग होती है. वैसे तो मैं ऐसा माल रखता ही नहीं, फिर भी कई बन्दों की बॉडी रिएक्शन कर जाती है.

अगर अच्छी कंपनी का लोगे तो उसमें चान्स कम होते हैं साइड इफेक्ट के.
सुमित ने पूछा- अच्छी कंपनी का कितने में पड़ेगा.
दुकाने वाले सेक्सी माल ने कहा- 4000 रूपये में.
सुमित बोला- कितने दिन के लिए?
सामने से जवाब मिला- महीना भर तो चल जायेगा भाई तेरा.

सुमित ने मेरी तरफ देखा और मैंने सुमित की तरफ.
दोनों के मन में एक ही बात चल रही थी ‘बहनचोद, 4000 रुपये महीना का प्रोटीन खाएगा तो घर वाले गांड पर लात मार कर बाहर निकाल देंगे.’

इससे पहले हम दोनों उठ कर वहां से चलते वो पूछने लगा- कुछ काम करते हो या पढ़ाई कर रहे हो?
दोनों के मुंह से एक साथ निकला- पढ़ाई.

दुकान वाले ने मेरी तरफ देखा. मैं तो जैसे उसको आंखों ही आंखों में पटाने की कोशिश कर रहा था. बिना बात के भी उसको स्माइल पास किये जा रहा था. मगर वो साला लाइन को समझ नहीं रहा था.

फिर वो बोला- तो फिर पहले जिम शुरू कर लो. जब एक दो महीने के बाद बॉडी की कैपेसिटी बढ़ जाये तो प्रोटीन शुरू कर लेना. शुरू में ही प्रोटीन खाओगे लिवर और किडनी पर ज्यादा लोड आयेगा.

बंदा वैसे सही बता रहा था. नॉलेज वाला लग रहा था. मेरे दिमाग में तो उसको देख कर यही ख्याल आया- ब्यूटी विद ब्रेन. (सेक्सी भी और दिमाग वाला भी)
सुमित ने कहा- भाई, वैसे आप पर्सनली खुद कौन सा प्रोटीन लेते हो.
वो बोला- यार ऐसा कुछ नहीं होता कि मैं क्या लेता हूं. सबकी बॉडी अलग-अलग होती है. सबकी बॉडी की रिक्वायरमेंट अलग होती है.

फिर उसने एक डिब्बे की तरफ हाथ कर दिया और बोला- ये वाला.
सुमित बोला- ये कितने का है?
वो बोला- ये 3000 का डिब्बा है. इसके साथ एक्सरसाइज़ कम भी करो तो चलता है. अब तो मैं लेता भी नहीं, बस एक्सरसाइज कर लेता हूं हफ्ते में दो-तीन बार. बगल में ही जिम है. वो अपना ही है.

मैंने उसकी ब़ॉडी की तरफ ध्यान से देखा. उसने एक लाल रंग की हाफ बाजू वाली टीशर्ट पहनी हुई थी जिसका ऊपर वाला बटन खोल रखा था उसने. उसके डोले भी मीडियम साइज के थे. लगभग 12 या 13 इंच के थे.

हां मगर आगे वाली फोर-आर्म का काफी मजबूत लग रही थी. जिन पर बाल भी थे लेकिन ज्यादा घने नहीं लेकिन सेक्सी लग रहे थे. मोटी मोटी उंगलियों को आपस में मिलाकर उसने हाथों के बीच में फोन पकड़ा हुआ था. कुल मिलाकर सेक्स बम लग रहा था साला.

सुमित बोला- तो फिर पहले जिम से ही शुरू कर लेते हैं. प्रोटीन बाद में शुरू कर लेंगे.
दुकान वाले ने कहा- भाई वो तुम्हारी मर्जी है. मेरा काम था बताना. क्या करना है, क्या नहीं करना वो तुम देख लो.

सुमित बोला- जिम आपका खुद का है क्या?
वो बोला- नहीं, दोस्त का है. मैं तो दुकान में सेल का काम देखता हूं.
सुमित ने पूछा- कितनी फीस है!
वो बोला- भाई अंदर जाकर पता कर ले.

फिर सुमित बोला- तू ही बता दे ना यार?
उसने कहा- भाई मैं तो कभी कभार वैसे ही चला जाता हूं, मैं फीस-वीस नहीं देता. अगर तुम्हें जिम ज्वाइन करना है तो बस इतना कर सकता हूं कि वो तुमसे 100-200 रुपये कम ले लेगा. इससे ज्यादा कुछ नहीं.

सुमित बोला- ठीक है भाई, एक बार बात करवा दे.
वो बोला- ठीक है, चलो.
जब वो अपनी कुर्सी से उठने लगा तो मेरी नजर वहीं पर जा टिकी. मैंने उसकी छाती तक का हिस्सा तो देख लिया था मगर वो नीचे से कैसा उसकी भी लालसा सी थी देखने कि ताकि घर जाकर उसके नाम की मुठ मार सकूं.

कुर्सी से उठते हुए जब उसके पेट से नीचे वाला हिस्सा ऊपर आया तो बैठने के कारण उसकी लाइट ग्रे जीन्स, जो कि जांघों के पास इकट्ठा हो रही थी, उसकी जिप को उसके लौड़े ने बीच में से उठा रखा था. उसने अपनी जीन्स की चेन के नीचे वाले हिस्से को खींचते हुए लौड़े को एडजस्ट सा किया और कुर्सी पीछे करके टेबल की दूसरी तरफ आने लगा.

उसकी मस्त शेप वाली गोल मटोल जांघों में फंसी जीन्स की जिप के अगल-बगल लौड़े के करीब बनी पैंट की सिलवटें देख कर मेरी सांसें भारी होने लगीं.
बहनचोद, ये तो चोदू माल लग रहा है. स्सस … हाय… अगर इसके लंड के दर्शन भर भी हो जायें तो मैं 51 रुपये का प्रसाद बांट दूं मंगलवार के दिन.

मैं और सुमित दरवाजा खोलकर दुकान से बाहर निकल आये. फिर पीछे-पीछे वो भी आ गया. दरवाजा बंद करके वो लॉक करने लगा. उसने अपनी टीशर्ट को जीन्स में दबा रखा था.

उसकी गांड को देख कर तो मेरे अंदर एक टीस सी उठने लगी. उसकी गांड में पीछे से जीन्स बिल्कुल परफेक्ट फंसी हुई थी. चूतड़ ऐसे गोल थे कि लग रहा था ये जीन्स इसी के चूतड़ों के लिए बनाई गयी हो.

दुकान को लॉक करके वो नीचे आया और आगे आगे चलने लगा. मैं और सुमित उसके पीछे थे. बगल वाली बिल्डिंग में ही ग्राउंड फ्लोर पर जिम था. वो हमारे आगे आगे चल रहा था. मैं तो उसकी गांड को ही देखे जा रहा था. ऊपर से नीचे से उसकी बॉ़डी का नाप ले रहा था.

अपनी गोल गोल गांड को मटकाते हुए वो ऐसे चल रहा था जैसे तेंदुआ मस्ती में झूमता हुआ जा रहा हो. मन तो कर रहा था इसकी जीन्स को खोल कर अभी नीचे से नंगा करके इसके चूतड़ों में मुंह दे दूं. ऐसी गजब शेप वाले फिट चूतड़ कम ही लड़कों के देखे थे मैंने.

हम उसके पीछे पीछे जिम के मन डोर में घुस गये. अंदर म्यूज़िक बज रहा था. कोई पंजाबी गाना था. सुनने में नया सा लग रहा था लेकिन अच्छा लग रहा था. एनर्जेटिक फील दे रहा था कानों में.

सामने काउंटर पर एक सांवला सा लड़का बैठा हुआ था. उसने स्लीवलेस टीशर्ट पहनी हुई थी. उसके डोलों का साइज कम से कम 16-17 इंच का तो जरूर होगा. डोलों में अच्छे खासे कट पड़े हुए थे. चेस्ट में टीशर्ट ऐसे फंसा हुआ था जैसे टीशर्ट को उसकी छाती अंदर से बाहर धकेल रही हो.

बगल में ही म्यूजिक कंट्रोल करने वाला सिस्टम लगा था. वो अपने रजिस्टर में कुछ देख रहा था.
दुकान वाले को देख कर उस सांवले से बॉडीबिल्डर ने कहा- आ जा पहलवान … सुणा दे.

दुकान वाला बोला- ये दो नये लड़के हैं. जिम शुरू करना है इनको. पहली बार कर रहे हैं. थोड़ा सा देख लिये.
वो बॉडीबिल्डर बोला- बैठ जाओ भाई.

हम दोनों कुर्सी लेकर काउंटर टेबल के सामने बैठ गये.
दुकान वाला सेक्सी देसी माल वापस मेन गेट की तरफ जाने लगा. मेरी नजर तो उसी की गांड पर लगी हुई थी. जिम वाले को देख कर अफसोस के साथ निराशा भी हो रही थी.
काश … जिम ट्रेनर ये दुकान वाला मिल जाता. इसके लंड को किसी न किसी तरह चूस ही लेता.

लेकिन जिम तो सुमित को ज्वाइन करना था. मैं तो खामख्वाह परेशान हो रहा था. जिस राह जाना ही नहीं उसके कोस गिनकर क्या करता. सोचा कि इसके नाम की तो मुठ मारकर ही काम चलाना पड़ेगा.

मैं सोच ही रहा था कि इतने में जिम वाले ने पूछा- कब से शुरू करना है भाई?
सुमित बोला- कल से ही.
जिम वाला बोला- ठीक है. भाई 700 रुपये फीस है. अगर तीन महीने के एक साथ दोगे तो 2000 हैं.

सुमित बोला- ये सप्लीमेंट वाले भैया ने तो कहा था कि आप डिस्काउंट दे दोगे.
वो हम दोनों को देख कर मुस्कराने लगा और बोला- चल ठीक है. तुम पहले तीन महीने के 600 के हिसाब से दे देना.
सुमित ने कहा- ठीक है भाई, थैंक्यू. टाइमिंग क्या रहेगी?

जिम वाले ने कहा- भाई मंगलवार को छुट्टी रहती है. सुबह 5 से 9 बजे और शाम को 6 से 9.30 बजे का टाइम है.
सुमित बोला- ओके भाई. ट्रेनर आप ही हो क्या?
वो बोला- हां भाई, मैं ही करवाता हूं.

सुमित बोला- ओके.
जिम वाला बोला- दोनों को ज्वाइन करना है या एक को?
मैं तुरंत बोल पड़ा- नहीं, मुझे नहीं करना. इसको ही करना है भाई.

जिम वाला बोला- देख लो, अगर दोनों करते हो तो 550 रुपये पर हेड दे देना.
सुमित ने कहा- हां ठीक है. दोनों कर लेंगे.
मैं मन ही मन सुमित को गालियां दे रहा था. (साला चूतिया है क्या ये! मुझे क्यों घसीट रहा है साथ में)

फिर हम उठ कर बाहर आ गये. सप्लीमेंट वाला दुकान के अंदर बैठा था. उसको एक नज़र भर देखने की चाह में मैं दुकान में झांकता हुआ जा रहा था. मगर वो कुत्ता भी अपने फोन में लगा हुआ था.
बहनचोद था ही इतना हैंडसम, कई चूतों को पटा कर रखा होगा इसने गारंटी के साथ. इसके सपने देखना तो मेरे जैसी लोमड़ी के लिए अंगूर खट्टे होने वाली बात थी.

मैं दुकान वाले को ताड़ ही रहा था कि बाइक पर बैठ कर इतने में ही सुमित ने मेरे पेट में कोहनी मारते हुए पूछा- तू भी आ रहा है ना?
मैंने कहा- साले चूतिया है क्या. मैं नहीं आ रहा. मैं क्यों आऊंगा.

वो बोला- क्यों गांडू, तू भी शुरू कर ले. यहां तो तेरी पसंद के लौड़े भी मिल जायेंगे.
(दरअसल सुमित मेरे बचपन का दोस्त था और उसको मैंने बताया हुआ था कि मुझे लड़के पसंद हैं. मगर हम दोनों में गहरी दोस्ती के अलावा किसी तरह का जिस्मानी रिश्ता नहीं था. वैसे भी सुमित मेरे टाइप का नहीं था. हां मगर मेरा सबसे अच्छा दोस्त जरूर था.)

मैंने बाइक पर उसके पीछे बैठते हुए कहा- चल ना लंडर, मैं नहीं आने वाला इस सड़े से जिम में. एक भी ढंग का लड़का नहीं दिखा यहां पर. ट्रेनर को देख कर तो खड़ा हुआ लंड भी सो जाये. तू ही कर ले ज्वाइन.
इतने में ही सुमित ने बाइक स्टार्ट की और हम घर के लिए निकल गये.

कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.
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