जवान भतीजी की चुदाई

जब मुझे पक्का यकीं हो गया की इसे लौड़ा पकड़ने में मजा आ रहा है तब मैंने धीरे से अपनी हथेली उसकी जांघों के बीच में डाल दी और उसकी बुर धीरे से दबायी वो चिहुंक उठी उसने धीरे से आह। .कहा ,उसकी पकड़ मेरे लौड़े पर और सख्त हो गयी थी मेरा लौड़ा कड़क और मोटा हो गया था मेरे लौड़े का अगला गुलाबी हिस्सा बाहर आ कर खिल गया था ,
अब तक सवा दो बज चुके थे मैंने प्रिय को अपनी छाती से चिपका लिया और उसकी बुर सहलाने लगा उसने तभी कहा मौसा जी मम्मी को पता तो नहीं लगेगा न ? मैंने कहा पगली हम दोनों के सिवाय यहाँ कौन है और वैसे भी तेरी मम्मी और मौसी शाम को छह बजे से पहले नहीं आएँगी।
तू चिंता मत कर।
और ये कह कर मैंने अपना अंडर वियर पूरा उतार कर बैड पर फेंक दिया और प्रिया को अपने कंधे पर उठा कर उसे एक बंद पड़े स्टोर की तरफ ले गया उसने कहा मौसा जी मुझ डर लग रहा है मैंने कहा पगली मैं हूँ न और तुझे जीन्स भी तो दूंगा न ?
मैंने उसे शिकार की तरह दायें कंधे पर उठाया उसकी मोटी मोटी गोरी जांघें मेरे दायें हाथ के घेरे में कैद हो गयी थी वो अपनी टाँगें हिलाते हुए कहने लगी मौसा जी मुझे कहाँ ले जा रहे हो आप ?और मैंने उसकी बात का जवाब दिए बिना ही स्टोर का लैच बाएं हाथ से खोला और अंदर पड़े सिंगल बैड पर लिटा दिया ,फिर मैं भी बैड पर उसके साथ लेट गया और उसे अपनी बाँहों चूमने लगा मैंने उसके सुंदर गुलाबी कुंवारे होंठ चूमने शुरू कर दिए.मैंने प्रिया का टॉप बिलकुल ऊपर कर दिया और अपनी बनियान भी उठा दी ,मैंने उसकी गोरी गोरी दुद्धियाँ हलके से अपने मुँह में ली और चूसी ,और फिर अपनी हथेलियों में लेकर धीरे धीरे सहलाई और दबायी आह। . उसकी दुद्धियाँ काफी सख्त हो गयी थीं ,और उनके निप्पल तन गए थे ,फिर मैंने उसके कानों के पीछे चूमा और अपनी छाती का पूरा भर उसके सीने पर डाल दिया ,उसकी छातियों की गर्मी मेरे सीने में समा रही थी उसकी दुद्धियाँ थोड़ी सी फ्लैट हो गयी थी ,

इसके बाद मैंने ज्यादा देर करना उचित नहीं समझा और उसकी कच्छी उतार दी। मैं उसकी जांघों के बीच में उकडू बैठ गया और उसके दोनों चुत्तड़ उठा दिए मैंने अपना मुंह उसकी बुर पर टिका दिया और चुम्मी ली उसने अपने दोनों कोमल हाथ मेरी जांघों पर टिका दिए मैं उसकी चूत कुत्ते की तरह चाटने लगा ,वो लम्बे लम्बे साँस लेने लगी। मैंने उसकी बुर को दोनों अंगूठों से चौड़ा करा आह ,…… साली का खुला हुआ हिस्सा सिर्फ पौन इंच रहा होगा उसका मूत का छेद साफ दिख रहा था और नीचे एक छोटा सा माँस का बटन जो की करीब तीन मिलीमीटर व्यास का रहा होगा। ऐसी सुन्दर कुंवारी चूत देख कर मेरा लौड़ा फुफकारने लगा ,उसकी चूत चिकने पानी से लबालब भर गयी थी ,
मैं अपनी जीभ को उसके दाने से लेकर नीचे उसकी गांड के छेद तक फेरने लगा उसने अपनी फ़्राक उठा दी और खुद ही अपनी चूचियां भींचने लगी,मैंने जल्दी से उसके चुत्तड़ बैड से बाहर की तरफ निकाले और तेजी से तीन उँगलियों से उसकी कोमल और तनी हुई बुर को हिलाया ,ऐसा मैं तब किया करता था जब मुझे शादी से पहले मेरी माँ कहती थी कि राहुल जा गाय का गौंत ठेक कर ला ,और मैं गाय की पूँछ के नीचे तेजी से हिलाता था तो गाय गौंत देती थी ,उसका मांस का दाना फूल गया था वो आह आह कर रही थी और तभी प्रिया ने मूत की मोटी गरम मेरे चेहरे पर मार दी ,लेकिन मैंने उसकी बुर को मसलना नहीं छोड़ा ,और अपना मुंह खोल दिया ,प्रिया ने रुक रुक कर दो धारें और मारी जिन्हें मैं गटक गया ,यही उसकी कमसिन जवानी का प्रसाद था ,उसे मैंने बहुत उत्तेजित कर दिया था इसलिए वो अपना मूत नहीं रोक सकी ,अब मैंने अपनी गीली बनियान भी निकाल दी।

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मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा उसके गालों पर शर्म की लाली आ गयी थी ,क्योंकि मैंने उसकी वो हरकत देख ली थी जो लड़कियाँ अकेले में करती हैं सबकी नजरों से बच कर पेशाब करना ,
बस यही उचित समय था जब उसके लण्ड घुसेड़ना था ,प्रिया ने अपना एक हाथ अपनी बुर पर रख लिया था और छोटे से दाने को सहलाने लगी उसने अपना दूसरा हाथ से मेरे सिर के बाल कास कर पकड़ लिए थे ,ऐसा लड़की तब करती है जब उसकी लण्ड लेने की बेहद इच्छा हो।

मैंने धीरे से उसे बैड पर टिकाया और अपना मोटा लण्ड उसकी चूत पर घिसने लगा जब मुझे पूरा यकीं हो गया की लण्ड का सूपड़ा एक दम सही जगह है तो ५-6 बार घिसने के बाद मैंने एक हाथ में लौड़ा पकड़ा और दूसरे से उसकी जांघ चौड़ी करी और फिर जैसे ही अपने चुत्तड़ भींच कर कस के धक्का मारा प्रिया की चीख निकल गयी।उसकी आँखों से आँसूं टपक पड़े ,उसके मुंह से बस ये ही शब्द निकले आह मौसा जी मर गयी मैं। …….. पर ये समय उस पर दया करने का नहीं था
सुपाड़ा उसकी बुर में धंस गया था ,उसके चेहरे पर दर्द साफ दिख रहा था पर मैंने जल्दी से उसके गाल थपथपाये। मैंने झुक कर उसकी दनादन चार पांच चुम्मिया ली और कहा बस बस अब दर्द नहीं होगा और फिर धीरे से दुबारा धक्का मारा उसके मुंह से फिर आह निकली बस फिर मैंने रुकना ठीक नहीं समझा बस यही मौका था जब उसके लौड़ा धंसता चला गया।
मैंने उसे पूछा कैसा लग रहा है अब ?
उसने कह मौसा जी अच्छा तो लग रहा है पर आपका बहुत मोटा है। प्लीज धीरे धीरे करो ,और मैंने उसकी बात मानते हुए धीरे धीरे अपने चुत्तड़ हिलाने शुरू कर दिए बस अब कमरे में हम दोनों की ही आवाजें थी मैंने अपने लौड़े पर एक नजर डाली उस पर खून लगा हुआ था प्रिय ने भी देख लिया था उसने मुझे कहा मौसा जी खून निकल रहा है मेरे मैंने कहा अरे घबरा नहीं कुछ नहीं होगा बस मजा ले पहले और फिर हम दोनों के मांस की रगड़ने की आवाज आने लगी जैसे किसी गीले फर्श पर चप्पल रपटती है करीब मेरा लौड़ा दो इंच ही घुसा था मुझे लगा की आगे कोई सख्त गाँठ है मैंने उस पर जोर से धक्का मारा ,प्रिया की आवाज आयी उईई मम्मी ……. असल में उसकी बच्चेदानी के मुँह पर धक्का लगा था ऐसे में लड़की हो या औरत उसे बहुत मजा आता है ,क्योंकि बच्चेदानी अच्छी छितायी मांगती है ,बस फिर तो मैंने उसकी बुर को अपने मोटे कड़क लण्ड से रोंदना शुरू कर दिया ,
मैं अपने मोटे लण्ड को पूरी ताकत से घुसाने में लगा था उसकी चूत के छल्ले खुलते चले जा रहे थे मेरा लौड़ा जबरदस्त मार कर रहा था लौड़ा करीब ५ इंच समा गया था और आधा इंच जो बाहर बचा हुआ था वो और ज्यादा मोटा हो गया था उस पर नसें उभर कर आ गयी थी ,
उसकी चूत मेरा पांच इंच लौड़ा निगल चुकी थी मेरे आंड काफी सख्त हो गए थे और गोलियां ऊपर चढ़ गयी थी ,
,मेरा लौड़ा आधे से ज्यादा घुस चूका था और मैंने भी पूरी ताकत से लौड़ा पेलना शुरू कर दिया था अब प्रिय की आँखें लगभग बंद थी और उसका मुंह हर धक्के में खुल रहा था वो कभी अपने होंठ काट रही थी कभी मेरे बाल जोर से पकड़ रही थी और कभी मेरे सर पर हाथ फेर रही थी। उसकी टाइट चूत की पकड़ इतनी मजबूत थी की मैं बता नहीं सकता। हम दोनों जानवरों की तरह चुदाई करने में लगे थे उसने अपनी टाँगें हवा में ऊपर उठा ली थी उसकी ये अदा देख कर मजा गया और मैंने उसकी दोनों टाँगें पकड़ ली और चुदाई करते करते हुए उसके तलुवे चाटने लगा ,उसकी भूरी गांड का छेद खुलने लगा था और सिकुड़ने लगा ,करीब 12 मिनट हो गए था मेरे लौड़े पर मलाई के चीथड़े जैसे कुछ इकठ्ठा होने लगा था ,और फिर मुझे लगा की बस। …अब नहीं मेरे लौड़ा फिर से फूलने लगा और फिर….फिर…मेरे लौड़े ने अपना मुंह खोल ही दिया ,
मेरे लौड़े ने करीब नौ दस बार उसकी बुर में धारें मारी मेरे चुत्तड़ अभी भी हिल रहे थे पर मेरे लौड़े ने मेरा साथ छोड़ दिया था वो ढीला पड़ गया था। मैं भी थक गया था ,मेरा लौड़ा बुर के दबाव से बाहर आने लगा था क्योंकि अब मेरे लौड़े में कड़क पन नहीं रह गया था पर सुपाड़ा अभी भी बुर के अंदर ही फंसा था मेरा सुपाड़ा सिंघाड़े की तरह था इसलिए मैंने थोड़ा जोर लगाया और घुप्प से जैसे अंदर गया था ऐसे ही बाहर आ गया ,
मैं थक कर पप्रिया के ऊपर लेट गया ,करीब एक मिनट तक हम दोनों अपनी सांसे कण्ट्रोल करते रहे फिर अचानक प्रिया ने मुझे धक्का दिया और कहा मौसा जी अब जल्दी से कपडे पहन लो मम्मी आने वाली होगी ,
मेरी भी जैसे एकदम से नींद खुली मैंने तुरंत उसकी चुम्मियाँ ली और उसे प्यार किया ,मैं जैसे ही उठा उसने कहा मौसा जी खून साफ कर लो पहले मैंने स्टोर के ख़राब कपड़ों में से एक मोटा रुमाल जैसा उठाया और पहले अपना लौड़ा साफ करा फिर उसकी चूत साफ करी।
मैंने उसकी चूतड़ों के नीचे वो ही कपडा लगाया और उसे कहा की जोर लगा उसने जैसे से ही जोर लगाए मेरा गाढ़ा सफ़ेद सफ़ेद मॉल बाहर आने लगा ,उसके साथ कड़ कड़ की आवाज के साथ गाढ़ा वीर्य बाहर निकल रहा था मैंने उसे बताया की ये कुछ नहीं बस मेरा प्यार था जो बाहर आ गया है ,मैंने उसे कहा की प्रिया मूत कर आ जल्दी क्योंकि मैं नहीं चाहता था की उसके पेट में मेरा बच्चा ठहर जाये ,वो पेशाब के लिए जैसे ही सीट के ऊपर बैठी मई भी अपने झूलते हुए लौड़े को लेकर पहुँच गया ,वो मूतने लगी उसकी मोटी धार देख कर मेरा मन खुश हो गया की मेरे लौड़े ने उसका फांकें चौड़ी कर दी हैं ,मूतने के बाद प्रिय उठी और मैं भी उसके पीछे पीछे बैड रूम में ा गया मैंने उसे कच्छी पहनाने से पहलेउसके सुन्दर गोरे चूतड़ों पर एक बार फिर हाथ फेरा तब कच्छी पहनाई ,
मेरा लौड़ा थोड़ा सा सिकुड़ गया था पर मोटाई लगभग वही थी ,और उसकी खाल सुपाड़े के पास आकर अटक गयी थी ,
प्रिय ने मेरे झूलते हुए लौड़े को एक बार फिर देखा और अपनी दोनों आँखें हथेलियों से ढक कर कहा ,छी : आप तो बहुत गंदे हो। मैंने उसे कहा अरे प्रिय क्या हुआ ? वो मेरे सीने से लिपट गयी और बोली ,नाप लेने के बहाने आपने मेरे अंदर पानी छोड़ा न ? असल में वो इतरा रही थी क्योंकि उसकी आग ठंडी जो हो गयी थी मैंने उसके गाल चुम कर प्यार से कहा साली जब तेरी चुदाई हो रही थी तो तब मुझे मना क्यों नहीं किया तूने ?
वो तुरंत मेरी बाँहों से निकल कर किचन की तरफ भाग गयी लेकिन मैंने उसे जाकर पीछे से पकड़ लिया। मैंने उसे कहा प्रिय तू मुझे बहुत अच्छी लगती है उसने भी कहा मौसा जी आप भी मुझे बहुत अच्छे लगते हो। मैंने उसे कहा तू चिंता मत कर मैं तेरे लिए जीन्स जरूर लूंगा कल शाम को उसने कहा अभी मत लेना जब मैं कहूँगी तब लेना ,मैंने उसे कहा अच्छा ठीक है लेकिन आज हम दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ किसी को भूल कर भी मत बताना। उसने कहा आप चिंता मत करो मम्मी को या किसी को भी कुछ नहीं बताउंगी ,उसने पूछा की आप मौसी के साथ भी करते हो मैंने कहा उसके साथ मुझे मजा नहीं आता अब ,उसने फिर पूछा की आपने मेरी मम्मी के साथ तो नहीं किया न ऐसा कुछ ? मैंने कहा अरे पगली नहीं ऐस कुछ नहीं किया तेरी मम्मी के साथ।

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