जयपुर की मस्त चालू भाभी की चुदाई यात्रा- 1

हॉट भाभी सेक्स कहानी जयपुर की रहने वाली एक मस्त चालू भाभी की है जिसे हर वक्त नए नए लंड की तलाश रहती है. इस बार उस राजस्थानी भाभी ने क्या किया?

यह कहानी सुन कर मजा लें.

मेरे प्यारे चाहने वालो, आप सभी को शालू का प्यार भरा और आपका लण्ड चूम कर नमस्कार!

मेरी हाल की कहानी
चूत का क्वॉरेंटाइन लण्ड से मिटाया
को पढ़कर हजारों लोगों की मेल और मैसेज आये और मैं बता नहीं सकती कि मैं कितना खुश हूं.
आप लोगों ने मेरी कहानी को इतना सराहा और इतना मुझे प्यार दिया उसके लिए मैं आप सभी का शुक्रिया अदा करती हूं.

और मेरे कहने के मुताबिक सैकड़ों लोगों ने अपने हथियार की फोटो मुझे मेल किए और उनको देख देख कर कई दिनों तक चूत में उंगली की और अपना पानी निकाला.

मैंने हजारों लोगों के मेल सभी मेल का रिप्लाई भी दिया है और जिनको रिप्लाई मिला है वे जानते हैं कि अबकी बार मैंने सबको रिप्लाई दिया है.
अबकी बार कहानी के बाद मेरी चूत के चाहने वालों ने मुझे कई नए नाम भी दे दिए अपनी मेल के जरिये …
जैसे गदराई घोड़ी, मदमस्त हथिनी, चूत की मल्लिका, काम की महादेवी वगैरा वगैर नए नामों से मुझे नवाजा!

आप सभी को ज्यादा इंतजार नहीं करवा कर सीधे आज की हॉट भाभी सेक्स कहानी पर आती हूँ.

जब से लॉकडाउन के दौरान अपनी भाभी के भाई विजय का लौड़ा खाया हर समय केवल उसी की याद और उसका लण्ड ही नज़र आ रहा था.
घर के किसी काम में मेरा मन नहीं लग रहा था.

विजय ने मेरी पलंगतोड़ चुदाई करके मेरे तन बदन में लगी हुई आग शांत कर दी थी अच्छी तरह … लेकिन उसके साथ बिताए उन चुदाई के दिनों के थोड़े दिन बाद ही मेरा शरीर पुनः उसके लण्ड का भूखा हो गया.

अब पति के साथ जब भी चुदाई करती अपनी आंखें बंद कर लेती थी ताकि विजय को महसूस कर सकूं!
पति के साथ अब चुदाई का वो मज़ा नहीं रह गया, पति से मुझे चुदाई जरूर मिल जाती लेकिन मेरे बदन को कोई विजय की तरह अच्छी तरह मसलने वाला और हड्डियों को कड़काने वाला चाहिए था.

मेरे पति के ऑफिस जाने के बाद घर पर मैं और विजय घंटों फोन पर बातें करते रहते, पूरे नंगे होकर एक दूसरे के अंगों को निहारते सेक्स चैट करते.
लेकिन मेरा बदन अब भट्टी की तरह जल रहा था लण्ड के लिए!

कभी कभी विजय के साथ वीडियो कॉल पर नंगी होती तो वो सेक्स चैट में इतनी पागल कर देता कि अगर उस समय कोई दरवाजा तोड़ कर अंदर घुस जाता तो विजय के सामने ही किसी से भी चुद जाती.

पति का लण्ड तो थोड़े थोड़े अंतराल में मिल ही रहा था लेकिन कोई मोटा, ताजा और लगड़ा लण्ड लिए हुए 6 महीनों से ज्यादा हो गया था.
और इसी बीच विजय ने भी नई जॉब ढूंढ ली.

उसकी नई जॉब बंगलूरू में किसी मल्टीनेशनल कंपनी में लग गई थी.
तो वो भी बंगलुरु चला गया और नई जॉब की वजह से काफ़ी बिजी रहने लग गया था.

मैं जब भी कॉल करती, वो ‘अभी थोड़ा बिजी हूँ, शाम को करता हूँ बात!’
ऐसा बोल कर फ़ोन रख देता.

इस कारण अब हमारी बात भी कम होने लग गई थी.

इसी दरमियान मेरे मामाजी का निधन हो गया जो मुझे मेरे माता-पिता से भी ज्यादा प्यार करते थे.
यह मेरे लिए बहुत ही गहरा सदमा था.

मैं जब भी मेरे पीहर जोधपुर जाती थी तो माता पिता के घर जाने से पहले उनके घर पर जाती थे और 1-2 दिन वहीं रुकती, उसके बाद माता-पिता के पास जाती!
मामाजी का स्नेह मेरे लिए अपनी खुद की बेटी से भी ज्यादा था.

उनके निधन पर मुझे भी जोधपुर जाना पड़ा और 10-15 दिन वहीं रुकी रही उनके घर मामीजी के पास!

अब मैं अपने पीहर मेरे माता पिता के घर पर आ गई और भाभी से पूछा- विजय आया हुआ है या अभी बेंगलुरु ही है?
भाभी बोली- अभी तो आया नहीं है, वहीं है.

मैं बोली- लगता है आपके भाई को मेरी चूत की याद नहीं आती अब! जब भी फ़ोन करती हूं बिजी ही रहता है.
भाभी- अरे नहीं, ऐसी बात नहीं है. मैं जब भी मैं फोन करती हूं तो पूछती हूं कि शालिनी से बात हुई या नही? तो वह हमेशा यही जवाब देता है ‘दीदी सच कहूं तो बहुत ही बिजी हूँ, बात ही नहीं हो पा रही है किसी से भी! नई जॉब में बहुत ही वर्कलोड बढ़ गया है मेरा, शालिनी भी शायद नाराज हो गई है लेकिन क्या करूँ काम बहुत है.’

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मैं बोली- लेकिन यार भाभी, इस चूत को अब कैसे समझाऊं … इसको तो लण्ड चाहिए ही ना!
भाभी मेरी सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत पर हाथ लगाकर बोली- देखूँ तो जरा मेरी ननद बाईसा की चूत में कितनी आग लगी हुई है? अच्छा जरा ये तो बता ननदोई जी चोदते हैं या नहीं?
मैं बोली- अरे भाभी, अगर उनका लौड़ा मुझे हर रोज संतुष्ट कर पाता तो इसकी आग इस तरह दिन पर दिन नहीं बढ़ती! एक तो 10-15 दिन में एक बार करते हैं और वो भी पता नहीं क्या दिक्कत है, 5-7 मिनट में टाँय टाँय फिस हो जाते हैं.

भाभी से मैं बोली- भाभी, कैसे भी करके अपने भाई को यहां बुलाओ. जब तक मैं यहां हूं तब तक. नहीं तो फिर मुझे किसी और से चुदना पड़ेगा क्योंकि मेरी आग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है अब सहन नहीं हो रहा मुझसे! काफी समय हो गया है, मेरा शरीर भी कड़क पड़ गया है, इसको भी अब बहुत जबरदस्त वाली रगड़ाई चाहिये!

दिन में भाभी ने विजय को कॉल किया, मैं पास में ही खड़ी थी.
तो विजय का वही रटा रटाया जबाब आया- दीदी, नया नया जॉब लगा है अभी बहुत ही बिजी हूं नहीं आ सकता, समझा करो!

विजय की यह बात सुनकर मुझे गुस्सा तो बहुत आया कि अभी भाभी के हाथ से फ़ोन लेकर बोल दूँ कि- जब तक मैं एक बार भी नहीं चुदी, तब तक तो दिन रात मेरे पीछे ही लण्ड हाथ में लेकर घूम रहे थे और अब मेरे लिए एक भी दिन नहीं निकाल सकते.
लेकिन मैं मन की बात मन में ही दबाकर रह गई.

अगले दो-तीन दिन मैं ऐसे ही दिन और रात तड़पती रही.
दिन तो कैसे भी करके मम्मी-पापा, भैया-भाभी और बच्चों के साथ निकाल लेती थी लेकिन रात में मेरी चूत की तड़प चार गुना बढ़ जाती थी.
रह रहकर विजय के साथ बिताए हुए वह लम्हे याद आ रहे थे.

तीन दिन बाद मैंने पति को फोन किया और बोली- मुझे लेने आना पड़ेगा तुम्हें … मैं अकेली नहीं आ पाऊंगी जयपुर तक!
लेकिन पति ने यह बोलकर मना कर दिया- मुझे कल ही अहमदाबाद के लिए निकलना पड़ेगा क्योंकि दिल्ली से कोई बैंक के बड़े अधिकारी आ रहे हैं. तो वहाँ गुजरात राजस्थान और महाराष्ट्र के सभी बड़े बैंक कर्मचारियों की मीटिंग है. अहमदबाद में लेंगे. तो मुझे अहमदाबाद जाना जरूरी है, तुम अपने भाई को बोलो वो छोड़ देगा तुम्हें!

मैंने अपने भाई को, जो सरकारी जॉब में है, बोला- मुझे जयपुर तक छोड़ दे!
लेकिन उसने भी ये बोलकर मना कर दिया कि अभी चुनाव की ड्यूटी है तो मैं नहीं चल सकता तुम्हारे साथ, लेकिन मैं कुछ व्यवस्था करता हूँ तुम्हारे लिए!

शाम को मेरे भाई का कॉल आया और मुझे बोला- मेरा एक फ्रेंड है जिसकी टूरिस्ट बसें चलती हैं पूरे राजस्थान में. उसकी एक बस रात में जयपुर के लिए जाएगी कुछ विदेशी टूरिस्ट को लेकर. उससे मैंने बात कर ली है, वो तुम्हें ले जाएगा, तुम अपना सामान वगैरह पैक कर लो.

शाम तक मैंने सामान पैक कर लिया और तब तक भाई भी घर पर आ गया और बोला- जल्दी चलो, मुझे वापस ड्यूटी पर जाना है.
मैंने मम्मी-पापा और भाभी से विदा ली और भाई ने मुझे जल्दी ही अपने दोस्त के घर पर छोड़ दिया और खुद ड्यूटी पर चला गया.

मेरे भाई के दोस्त का नाम उर्जित है, वो दिखने में बहुत स्मार्ट है. उसने अपनी बॉडी भी काफी अच्छे से मेंटेन की हुई है.
उर्जित ने मेरा स्वागत किया और अपने घर के अंदर ले गया.
वहां उसकी पत्नी और बच्चे भी थे.
उसकी पत्नी नॉर्मल हाउसवाइफ है दिखने में ठीक-ठाक है.

वह और उसकी पत्नी और बच्चे मुझसे मिलकर काफी खुश हुए.
उसकी पत्नी और मैंने काफी देर तक बातें की.

तब तक उर्जित भी तैयार हो गया था, हम दोनों उसकी कार में किसी होटल की तरफ चल पड़े.

वहां पहले से ही उसकी लग्जरी टूरिस्ट बस होटल के गेट के आगे लगी हुई थी जिसमें काफी विदेशी पर्यटक अपना सामान रख रहे थे और होटल से चेक आउट कर रहे थे.

उर्जित ने मेरा बैग कार से निकाला और बस में ड्राइवर सीट के पीछे रख दिया.
मैं कार में ही बैठी रही.

जब सब विदेशी टूरिस्ट होटल से चेक आउट करके बस में बैठ गए तो उसने मुझे कहा- तुम भी बस में जाकर बैठो, मैं कार पार्किंग में लगा कर आ रहा हूं.
मैं बस में जाकर बैठ गई, वो कार पार्किंग में लगा कर बस के पास आया और बस के ड्राइवर और एक अन्य स्टाफ को मेरे बारे में बताया और बोला- ये शालिनी हैं, ये जयपुर जायेंगी. रास्ते में इन्हें किसी भी चीज की कोई जरूरत हो तो लाकर दे देना.

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और मुझे भी सब समझा दिया.
फिर बस के ड्राइवर ने बस रवाना कर दी.

थोड़ी देर में आगे ही बस के केबिन में ही बैठी रही.
फिर थोड़ी देर बाद मुझे वही फिर झपकी आने लगी तो ड्राइवर ने अपने साथ के स्टाफ़ को बोला कि मेडम के लिए पीछे कोई सीट की व्यवस्था कर दो अगर हो सके तो!

जैसा कि मैंने आपको बताया था कि उस बस में सभी विदेशी ही थे तो सबकी सीट रिजर्व थी, सीट मिलना मुश्किल था.
लेकिन उस बस की एक बात यह थी कि उसमें सीटिंग के अलावा स्लीपर की भी सुविधा थी.

बस का दूसरा स्टाफ लड़का पीछे गया और लगभग 3-4 मिनट बाद वापस बाहर बस के केबिन में आया और बोला- सबसे पीछे का ऊपर का डबल स्लीपर पूरा खाली पड़ा है. क्योंकि नीचे जो गोरे बैठे हैं उनको मैंने पूछा कि अगर आप ऊपर सोना चाहते हैं तो क्या नीचे वाली आपकी सीट पर किसी को बैठा सकता हूँ? तो उस गोरे ने पूछा कि किसको बैठना है. तो मैंने झूठ बोल दिया कि इस बस के मालिक की पत्नी है तो वो मान गया. लेकिन वो बोल रहा है कि हम नीचे सीट पर ही बैठे रहेंगे काफी देर! उनको बोलो ऊपर वाले खाली डबल स्लीपर में सो जाए!

ड्राईवर बोला- मैडम जी, आप अपना सामान यही पड़े रहने दीजिए. आप इसके साथ पीछे चले जाओ और आराम करो स्लीपर में जाकर!

मेरे पास कोई ज्यादा सामान नहीं था, केवल एक छोटा बैग था जो पहले से ही ड्राइवर की सीट के पीछे ही रखा हुआ था.
मैंने अपना बैग वही पड़े रहने दिया और उस लड़के के पीछे-पीछे बस के केबिन से बस के पीछे की तरफ आई तो बस में कुछ लाइट्स को छोड़ कर सभी लाइट्स ऑन थी जिससे बस के अंदर काफी उजाला भी था.

मैंने देखा कि उस बस के सभी यात्री लगभग 60 के ऊपर के थे जिनमें से आधी तो औरतें थी, केवल कुछ अंग्रेज ऐसे थे जो 35 से 45 साल के बीच में थे.
मेरे अंदर आने पर काफी फॉरेनर्स ने मुस्कुराकर और सर हिलाकर मेरा अभिवादन किया और मैंने भी मुस्कुरा कर उनका अभिवादन स्वीकार किया और जहाँ मुझे बैठना था उस सीट के पास मुझे वह लड़का लेकर आ गया,

मुझे जिस स्लीपर में बैठना था उसके जस्ट नीचे की डबल सीट पर दो अंग्रेज मर्द बैठे थे.
लड़के ने उनसे पूछा- जब भी आप ऊपर सोना चाहें तो आप बता दीजिएगा, मेडम नीचे आ जायेंगी.

मैंने भी उस लड़के की बात में हां में हां मिलाते हुए गर्दन हिलाई.
क्योंकि यह बस तो उन्हीं यात्रियों की ही थी मेरे लिए कोई सीट रिजर्व नहीं थी. तो जब वह चाहते तो मुझे तो नीचे आना ही पड़ता वापस!

उनमें से एक अंग्रेज बोला- नहीं, हमें कोई दिक्कत नहीं है आप आराम करिए. जब हमें ऊपर आना होगा तो मैं बता दूंगा!
बातचीत सब इंग्लिश में हो रही थी में उसको हिंदी में लिख रही हूँ. आगे भी जितनी भी बातचीत हुई, उसका हिंदी में अनुवाद करके लिख रही हूँ.

मैंने उनको थैंक्स बोला तो वे दोनों मेरे सामने देखकर मुस्कुराए.
और फिर मैं ऊपर स्लीपर में चढ़ गई.

स्लीपर में चढ़कर मैंने उसके पर्दे को ढक दिया और लेट गई.
मैं अपने मोबाइल को लेकर और अंतर्वासना की साइट खोल कर लेटेस्ट कहानियां पढ़ने लग गई.

अंतर्वासना पर कहानियां पढ़ रही थी और साथ-साथ अपनी सलवार के ऊपर से ही अपनी चूत को हल्के हल्के रब कर रही थी.
मैं थोड़ा ज्यादा ही गर्म हो गई. मैं अपनी उंगलियों को तेज तेज सलवार के ऊपर से ही चूत पर रब करने लगी.

अचानक एक झटके के साथ मेरे स्लीपर का पर्दा किसी ने हटा दिया.
जैसे ही पर्दा हटा, मैं हड़बड़ा गई और अचानक मेरा फोन मेरे हाथ से नीचे गिर गया.

मैंने देखा कि पर्दा नीचे बैठे उन दो अंग्रेज में से एक ने हटाया है और उसने मुझे अपनी चूत पर उंगली रगड़ते हुए भी देख लिया.

इस हॉट भाभी सेक्स कहानी के 5 भाग है, हर भाग में मजा बढ़ता जाएगा.
आप अपने विचार मुझे हर भाग पर कमेंट्स में भेजें.

हॉट भाभी सेक्स कहानी का अगला भाग: जयपुर की मस्त चालू भाभी की चुदाई यात्रा- 2