जब मुझे मिली मामी की चूत

एक दिन तो मैंने उनकी गांड भी मारी पर जैसे ही मैंने अपना लंड मामी की गांड में डाला, वो दर्द से चिहुँक उठी और मना करने लगी, कहने लगी- नहीं ऋषभ, गांड फट जाएगी, रहने दो प्लीज!
उनको पाइल्स की बीमारी थी जो कि अब मुझे भी है तो उन्होंने गांड चोदने दी नहीं.
पर फिर भी मैंने उनके गांड के गोलों पे के थप्पड़ बरसाये।

मेरी ज़िन्दगी के मजे देख के जलन भी हो रही थी दीपक को… कि मैं पूरे मज़े ले रहा हूँ जीवन के… वो भी फ्री में!
लेकिन मैं तो मज़े में था मुझे क्या करना था।

लेकिन एक दिन मेरे दोस्त दीपक की बददुआ काम कर गयी, एक दिन मैं और मामी बेडरूम में चुदाई का खेल शुरू ही करने वाले थे कि उनकी बेटी आ गयी उसने हमको देख लिया और नाराज़ हो के अपनी सहेली के घर चली गयी.
उस दिन भी मैंने और मामी ने खूब चुदाई करी, मेरी तो जान ही निकल जाती थी, मामी में बहुत दम था।

जब उनकी बेटी वापिस आयी तो मैंने उसे समझाने की कोशिश की क्योंकि मैं उसे भी चोदना चाहता था. पर मैं ये भी नहीं चाहता था कि मामी को इसका पता चले और काम बन भी जाता!
पर मामी की हवस ने सब बिगाड़ दिया.

उसके बाद भी मैं अपनी मामी की बेटी के पीछे लगा रहा. पर मामी को इस बात का पता चला गया और फिर एक दिन मैंने उनसे अपनी जरूरत के चलते कुछ पैसे की मांग की तो वो भड़क गई और मुझे लात मार के अपने घर से निकाल दिया और कहा- अब कभी मत आना यहाँ!
शायद मामी ने अपने लिए कोई नया लंड खोज लिया था।

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तो प्रिय पाठको, आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी आप मुझे ईमेल के जरिये जरूर बताएं।
आपका
ऋषभ द्विवेदी

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