जब मुझे मिली मामी की चूत

मेरी मामी की हरकतें भी ऐसी थी कि क्या बताऊँ!
एक दिन तो उन्होंने मेरे बगल बैठ कर मुझसे बाते करते हुए मेरी जांघों पट अपना हाथ रख दिया और अपना हाथ फिराने लगी. मेरे लंड में तो जैसे सैलाब आ जायेगा, ऐसा लग रहा था. मेरा लंड एकदम सख्त होकर तंबू बन गया.

मामी की हवस भरी नज़रों ने यह बात नोटिस कर ली थी और वो थोड़ा सा मुस्कुराई भी!

उस दिन मैं यह बात समझ गया कि आग दोनों ही तरफ लगी है, मेरी कामुक मामी पहले से ही मेरा शिकार करना चाहती हैं पर उनको यह नहीं पता था कि मैं भी बहुत बड़ा शिकारी हूँ, मुझे तो तलाश ही रहती थी चूतों की… जो कि अब मुझे मिल चुकी थी, वो भी ऐसी कि जहाँ मैं जब चाहूं तब शिकार कर सकता हूँ. सही बोलूं तो मुझे फैज़ाबाद में एक अड्डा मिल गया था।
बस अब इस बात पे मोहर लगानी कि मेरा सोचना सही है, मामी भी चुदासी है.

मैं रूम पे आकर अपने दोस्त दीपक से भी यह डिसकस करता था. वो भी साला कहने लगा कि मेरे लिए तो यह लॉटरी है मुझे मौका चूकना नहीं चाहिए।
मेरा दोस्त दीपक भी बहुत कमीना था, उसने भी फैज़ाबाद में एक लड़की फंसा ली थी, उससे वो रात रात भर बातें भी करता था, मेरे दोस्त दीपक को पोर्न फिल्मों का भी बहुत शौक था, वह कभी-कभी तो पूरी पूरी रात पोर्न फिल्में ही देखकर बिताता था।

फिर एक दिन वह हुआ जिसकी मुझे बहुत दिनों से तलाश थी.
मैं अपनी मामी के घर मिलने गया, मामा कहीं गए हुए थे तीन-चार दिनों के लिए, मामी हमेशा की तरह मेरे लिए चाय बना कर लाई और मेरे बगल में बैठी, उसके बाद फिर थोड़ा सा झुक कर के बैठ गई. एक बार फिर से उनका क्लीवेज मुझे दिखने लगा, इस बार उन्होंने शायद ब्रा भी नहीं पहन रखी थी. मेरी नजर सीधे उनकी चुचियों की दरार पर पड़ी जो एकदम अनंत गहराई प्रतीत हो रही थी.

More Sexy Stories  विधवा आंटी का प्यार

मेरा लंड एक बार फिर से हिलोरें मारने लगा और मामी ने भी मेरी उत्तेजना को पहचान लिया था. फिर मामी ने मुझे अपने पीछे-पीछे अपने बेडरूम में बुला लिया, वहाँ पर लाने के बाद उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया और बिस्तर पर लेट कर मुझे अपने ऊपर लिटा लिया.

उन्हें अब मेरा लण्ड चाहिए था, यह मैं समझ चुका था. और मेरे अंदर का भी हैवान और हवस दोनों ही जागकर बाहर आ गये, मुझसे भी अब रहा नहीं गया और मैं भी उन पर टूट पड़ा, उनकी चूचियों को धीरे-धीरे दबाने लगा, उनको भी मजा आ रहा था, वे तो पहले से ही इसकी तलाश में थी.

मामी ने भी मुझे चूमना शुरू कर दिया, हम दोनों ने एक दूसरे को एक लंबा किस किया. उसके बाद मैंने उनका गाउन उतार दिया. मेरे सामने जो नजारा था वह मेरे अनुमान क्षमता के बाहर था, क्या मोटी मोटी चूची थी उनकी… और चूत तो उनकी ऐसी फूली हुई थी जैसे कि डबल रोटी!

मैंने तो बस अपना काम शुरू कर दिया, मैं अपना होश खो बैठा और मैं मामी की चुचियों की गहराई में उतर गया, उनको मन भर कर दबाने लगा, चूसने लगा.
और कुछ देर के बाद मैं मामी की चूत की तरफ बढ़ा, मैं मामी डबल रोटी जैसी चूत को चूसने लगा, अपनी जीभ से चाटने लगा.

फिर मैंने अपनी जीभ मामी की चूत में डाल दी, वो एकदम से तड़प उठी और उनकी चूत से मानो सैलाब आने लगा. हालांकि उनका पानी बहुत मीठा था.

इसके बाद अब मामी की बारी थी, मेरी मामी ने मुझ को नीचे पटक दिया और मेरे ऊपर चढ़ गई और अपनी मोटी मोटी चूची से मेरे मुंह पर मारने लगी उनका बस चलता तो अपनी पूरी पूरी चूची मेरे मुंह के अंदर ही समा देती.

उसके बाद मामी ने मेरे लण्ड को चूसना शुरू किया और पूरा पूरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया. मुझे तो परम आनंद आ रहा था.

More Sexy Stories  कुंवारी गर्लफ्रेंड की पहली देसी चुदाई

कुछ देर तक ऐसा होने के बाद एक बार फिर से अब मेरी बारी थी और मैं अपनी नंगी मामी के बदन के ऊपर था. इस बार मैंने अपना लंड निकाला और सीधा मामी की चूत में डाल दिया जो कि चूत के रस से एकदम गीली हो चुकी थी. मेरा लंड भी बिना देरी करते हुए मामी की चूत में दनदनाता हुआ अंदर पूरा का पूरा घुस गया।

अब मैं अपनी मामी की चूत को चोदने लगा, मैं शॉट पर शॉट लगा रहा था और मामी मेरे मुंह को पकड़कर अपनी चुचियों की तरफ खींच रही थी और कह रही थी- ओह ऋषभ बेटे, मेरी चूचियों का सारा रस निकाल दो, बहुत तड़पती हूं मैं… तुम्हारे मामा से तो कुछ हो ही नहीं पाता! मेरी आग अब तुम्हें ही बुझानी है! चोदो मुझे ऋषभ… चोदो अपनी रानी को!

उनके मुँह से आवाजें निकल रही थी- आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह उह ओह… अम्म… और चोदो यस… चोदो मुझे… फाड़ दो मेरी चूत… आज बहुत प्यासी है ये… फाड़ दो इसे!
लेकिन मैं कुछ ही देर में झड़ चुका था शायद ये मेरी बचपन से की गई मुठ की गलतियों का परिणाम था.

लेकिन मामी को इस बात अंदाज़ा नहीं हुआ था कि मैं झड़ चुका हूँ और मैंने भी अपनी पंडित बुद्धि का इस्तेमाल किया और मैं झूठ ही उनकी चूत पे कूदने लगा फिर मैंने अपनी उंगली डाल दी और उसी से मामी को झड़वा दिया.

उस दिन मुझे अपनी मर्दाना कमज़ोरी का भी एहसास हुआ, शायद यही मेरे मामा के साथ भी होगा जो मामी को मुझमें एक ताकतवर लंड की तलाश करनी पड़ी. लेकिन यहाँ भी उन्हें वो नहीं मिल सका.
पर मेरी किस्मत खुल गयी, उस दिन से मैं मामी से जल्दी जल्दी मिलने लगा और जब जब मिलने जाता तब मामी को चोद के आता. कभी कभी मैं मामी के यहाँ ही रुक जाया करता था.

Pages: 1 2 3