वक़्त से पहले और किस्मत से ज्यादा

हॉट सेक्स विद गर्लफ्रेंड का मजा लिया मैंने … पर उसकी शादी के बाद. हम पहले भी चुदाई करना चाहते थे पर कर नहीं पाए थे. उसने मुझे एक दिन अपने घर बुलाया.

हेलो फ्रेंड्स, मैं अर्नव आज आपके बीच अपनी ज़िन्दगी में बिताये कुछ बेहतरीन अंतरंग पलों को … हॉट सेक्स विद गर्लफ्रेंड … अपनी कहानी के माध्यम से आप सबके साथ साझा कर रहा हूँ।

इस कहानी का शीर्षक मैंने इतना पेचीदा क्यूँ रखा है, यह आप पूरी कहानी पढ़ने के बाद खुद ही समझ जायेंगें।
आशा करता हूँ कि मेरी बाकी कहानियों की तरह आपको यह कहानी भी जरूर पसंद आयेगी।

मेरी पिछली कहानी थी: कोई मिला अपना सा तो दे दी खुशी

यह कहानी मेरे कॉलेज के दिनों से शुरू हुई थी जो सबकी ज़िन्दगी के सबसे हंसी-ख़ुशी और मौज़ मस्ती वाले दिन होते हैं।

कॉलेज के दिनों में मैं काफी अंतर्मुखी स्वभाव का था, जिसके कारण मुझे किसी से ज्यादा मेल-जोल बढ़ाने की आदत नहीं थी।

वैसे तो किसी भी कॉलेज में लड़कियों की कोई कमी नहीं होती, पर आपकी पसंद वाली लड़की से आपका टांका भिड़ जाए ऐसा भी तो संभव नहीं हो पाता।

कॉलेज का मेरा पहला साल यार दोस्तों के साथ मौज मस्ती में कब निकल गया पता ही नहीं चला।

दूसरे साल में मेरी मुलाकात मेरे ही क्लास की एक लड़की से हुई जिसका नाम सोनाली था।

सोनाली का कद 5’4″ था और उसके बड़े-बड़े रसीले चूचे और भरे हुये बदन के कारण वो अपनी उम्र की लड़कियों से कहीं ज्यादा हसीन लगती थी।

कॉलेज में हर कोई उसका दीवाना था, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि लड़के तो लड़के, कई टीचर्स भी उससे अपनी नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश में लगे रहते थे।

आप सोच रहे होंगे मैं कुछ ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ा कर उसकी तारीफ कर रहा हूँ।
पर दोस्तो, आँखों में जो हवस लेकर घूम रहा हो न, उसे पहचानना ज्यादा मुश्किल नहीं होता।

जब वह कॉलेज के कॉरिडोर से निकल कर जाती थी तो सबकी नज़र उसके उछलते हुए चूचों, बलखाती कमर और बड़े बड़े नितम्बों पर ही टिकी होती थी।

खैर ये तो एक अनार और सौ बीमार वाली बात थी।
पर बादल वहीं बरसते हैं जहाँ उनकी सच्ची प्यास होती है।

एक दिन हमारी क्लास का टाइम हो गया पर क्लास लेने कोई नहीं आया।

इसी दौरान हमारे पास काफी समय था आपस में बात करने का … और बातों ही बातों में जान पहचान बढ़ी और नम्बर वगैरह एक्सचेंज हो गए.
और बातों का सिलसिला यूँ ही चल पड़ा।

धीरे-धीरे यह सिलसिला हमारी निजी ज़िन्दगी से जुड़ गया।
मेरा मतलब डबल मीनिंग बातों से लेकर हम सेक्स चैट तक पहुँच गये।

हम फ़ोन सेक्स और वीडियो कॉल के जरिये एक दूसरे को नंगा करते और अपनी काम वासना की पूर्ति कर लेते क्योंकि हमारे रास्ते की सबसे बड़ी अड़चन यह थी कि हमारे पास कोई जगह ही नहीं थी जो उसको सेफ फील कराये और हम अपनी जवानी के रंग एक दूसरे में भर सकें।

समय यूँ ही निकलता गया और उसी के साथ हमारे कॉलेज के दिन भी …

और अन्ततः जो हर लड़की के साथ होता है उसके साथ भी हो गया … आप सब समझ ही गये होंगे कि मैं किस बारे में बात कर रहा हूँ।
जी हां!
वो है शादी!

उसकी शादी हो गयी और मेरा उस से संपर्क टूट गया और मैंने भी सोच लिया कि अब तो हमारे रस्ते लग गये.
मेरा मतलब अलग हो गये.

और ऐसे ही दो साल बीत गये।

फिर एक दिन अचानक फेसबुक में उसका मेसेज आया।
हमनें एक दूसरे के हाल-चाल लिये और भी बहुत सारी बातें हुई।

उसने बताया कि उसकी शादी लखनऊ में हुई है और जिन्दगी एकदम बढ़िया चल रही है।
मैंने कहा- यह तो बहुत अच्छी बात है कि तुम खुश हो।

तब मैंने उसके परिवार के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसके पति के अलावा एक देवर और देवरानी है और बाकी फैमिली गाँव में रहती है।
पति गवर्नमेंट जॉब में हैं और देवर इंजीनियर है और गुड़गांव में जॉब करता है।

मैंने बोला- वेल सेटल्ड फैमिली है और क्या चाहिये!
उसने बोला- चाहिये तो बहुत कुछ होता है … पर जो है ठीक ही है।
कुछ समय ऐसे ही बीत गया और हमारी बातें होती रहीं।

एक दिन मैंने उससे बोला- मैं लखनऊ आ रहा हूँ, मुझे वहां से प्रोफेशनल कोर्स का डिप्लोमा लेना है और साथ ही जॉब के लिये तैयारी भी हो जायेगी।
उसने कहा- अच्छा! पर रहोगे कहाँ?
मैंने बोला- मेरा एक दोस्त वहां जॉब करता है उसी का फ्लैट शेयर कर लूंगा।

उसने बोला- बहुत अच्छी बात है, पर जब भी लखनऊ आना मुझसे मिलने जरूर आना।
मैंने बोला- ओके देखते हैं।

लगभग हफ्ते भर बाद मैं लखनऊ के लिये निकल गया और वहाँ पहुँच कर अपने काम में लग गया।

हमारी बातें तो लगातार होती ही थीं।
तो एक दिन उसने कहा- बहुत हो गया, अब तो तुम्हें मेरे घर आना ही पड़ेगा।
मैंने कहा- ठीक है बाबा, बताओ कब आऊं?
उसने बोला- अगले शुक्रवार को आ जाओ!
मैंने कहा- ठीक है मैं आ जाऊंगा।

और वो दिन भी आ गया।
उसने मुझे कॉल की और पूछा- आ रहे हो न?
मैंने कहा- हाँ आ रहा हूँ।

उसने व्हाट्सएप पर अपनी लाइव लोकेशन शेयर की और मैं भी अच्छे से तैयार होकर उससे मिलने चल दिया।

जब मैं उसके घर पहुंचा तो उसकी देवरानी काज़ल ने दरवाज़ा खोला और बोली- आप अंदर बैठिये, दीदी बस आ रहीं हैं।
मैं अंदर जाकर सोफे में बैठ गया।

सोनाली से मैं इतने समय बाद मिल रहा था पर मेरे दिमाग़ में उसकी वही पुरानी तस्वीर घूम रही थी।

करीब पाँच मिनट बाद सोनाली कमरे में आयी।
उसके आते ही मन तो किया कि उसे गले लगा लूँ पर मैं अभी उसके घर में था, इसलिये मैंने सिर्फ हाथ मिलाया और हम बैठ कर बातें करने लगे।

मैंने पूछा- तुम्हारे हस्बैंड नहीं दिख रहे?
तो वो बोली- वो एक जरूरी काम से 3 दिन के लिये गाँव गये हैं, सोमवार तक आएंगे।

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फिर उसने कहा- चलो मेरे कमरे में चलते हैं.
तो मैंने इशारे से पूछा कि तुम्हारी देवरानी का क्या?
उसने जवाब दिया- तुम उसकी चिंता न करो वो सब मैं बाद में बताऊंगी।

मैं उसके साथ उसके कमरे में चला गया।
उसने अंदर आते ही अपना रूम अंदर से लॉक कर दिया और मुझे पकड़ कर सीधे अपने बेड पर गिरा दिया।

उसके इरादे तो साफ़ थे पर मुझे बस यह समझ नहीं आ रहा था कि इसकी देवरानी को पता चल जायेगा तो वो क्या कहेगी?
वगैरह वगैरह…

खैर अभी तो मेरे सामने हुस्न की परी थी तो मैंने उस पर ही फोकस करना जरूरी समझा और उस पर टूट पड़ा।

उसने कुर्ती और लेगी पहनी हुई थी।
मैं उसके कपड़ों के ऊपर से ही उसके पूरे बदन को मसलने लगा।

और फिर मैंने एक एक करके उसके और अपने सारे कपड़े उतार फेंके।

चूँकि हमने पहले भी बहुत बार फ़ोन सेक्स किया था तो हमें न तो एक दूसरे से कोई शर्म थी न ही कोई हिचक!

हमारे नंगे जिस्म एक दूसरे से रगड़ खा रहे थे और हम एक दूसरे के अंगों को कभी चाटते तो कभी चूम रहे थे।

ऐसा करते-करते हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गये और वो मेरे लंड को अपने मुँह में भर कर जोर-जोर से चूसने लगी।
मैं भी उसकी चूत के दाने को अपनी खुरदरी झीभ से भंभोड़ रहा था.

और हम तब तक नहीं रुके जब तक हमने एक दूसरे का पानी नहीं निकाल दिया।

कुछ देर बाद उसने फिर से मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया.
मेरा लंड फिर खड़ा हो गया और चुनौती देने लगा।

मैंने बिना देर करते हुए उसे घोड़ी बनाया और अपने लंड को उसकी चूत में डालकर घपाघप चुदाई शुरू कर दी।

उसका दो बार पानी छूट गया था और अब मेरा भी निकलने वाला था तो मैंने उस से पूछा- कहाँ निकालूँ?
तो उसने बोला- अंदर ही निकाल दो।

मैंने कुछ झटकों बाद अपना सारा माल उसकी चूत में भर दिया और उसी के ऊपर लेट गया।

हमने कुछ देर आराम किया.

फिर मैं उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए बोला- मुझे तुम्हारी गांड मारनी है।
पहले तो उसने मना कर दिया पर थोड़ा मनाने के बाद वह मान गयी।

एक बात मैं आपसे बता देना चाहता हूँ कि गांड मारना इतना आसान नहीं होता जितना हम कहानियों में पढ़ते हैं और पोर्न फिल्मों में देखते हैं।
इसमें बहुत सा समय और सब्र चाहिये होता है।

खैर मैं कहानी में वापस आता हूँ।

वैसे तो गांड मारने में बहुत ताम-झाम करना पड़ता है पर मैंने तो इरादा बना लिया था इसलिये मैंने सोनाली को अपने हिसाब से तैयार किया।

मैंने उससे बोला- तुम्हारे पास जैतून का तेल है?
उसने कहा- हाँ है तो, पर तुम्हें क्यूँ चाहिये?
मैंने कहा- बस चाहिए तुम ले आओ।

उसने अपना ड्रॉर खोला और जैतून का तेल निकाल कर मुझे दे दिया।

मैंने उसके पेट के नीचे एक बड़ा तकिया लगाया और कहा तुम टाँगें चौड़ी करके लेट जाओ।

उसने बिल्कुल वैसा ही किया और उलटी हो कर लेट गयी।
मैंने थोड़ा सा तेल उसकी गांड के छेद पर डाला और बीच वाली उंगली डाल कर धीरे-धीरे जगह बनाने की कोशिश करने लगा।

जब मेरी पूरी उंगली उसकी गांड में आसानी से जाने लगी तो मैं धीरे-धीरे अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगा।

फिर मैंने अपनी दूसरी उंगली भी उसकी गांड में डाल दी और आराम से चोदने लगा।

जब वो सहज हो गयी तब मैंने अपना लंड उसकी गांड के छेद में रखा और धीरे-धीरे अंदर डालने की कोशिश करने लगा।

लंड पक्क की आवाज के साथ उसकी गांड में घुसता चला गया और मैं पूरी मस्ती से उसकी गांड में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा।

दोस्तो, चूत तो जन्नत होती ही है पर गांड मारने का अपना अलग ही मजा है।

धीरे-धीरे उसकी सिसकियाँ आहों में बदल गयी और वो मजे से गांड मरवाती रही।
मैं एक हाथ से उसकी चूत भी सहलाता जा रहा था।

लगभग 5 मिनट बाद मैंने उसकी गांड में ही अपना माल निकल दिया और उसके ऊपर लेट गया।

थोड़ी देर बाद मेरा लंड उसकी गांड से सिकुड़ कर अपने आप बाहर निकल आया और मैं उसे अपनी बांहों में भर कर लेट गया।

मुझे हॉट सेक्स विद गर्लफ्रेंड में इतना समय लग गया कि दोपहर के 3 बज गये।
तो मैंने सोनाली से कहा- काफ़ी टाइम हो गया, अब मुझे चलना चाहिये।

सोनाली ने कहा- आज यहीं रुक जाओ न, वैसे भी घर पर कोई नहीं है।
तो मैंने उससे बोला- पर तुम्हारी देवरानी का क्या?
उसने मेरे लंड पर हाथ फेरते हुए बोला- मेरी देवरानी काज़ल को चोदना चाहोगे?

अचानक मेरे दिमाग में एक साथ कई सवाल आ गये।
मैंने उससे बोला- काज़ल को कैसे … तुम्हारी बात अलग है, पर मैं उसे कैसे …?

तो उसने मुझसे बोला कि मेरा देवर गुड़गांव में जॉब करता है और वो दो-तीन महीने में कभी एक बार ही घर आता है। वो भी सिर्फ़ कुछ दिनों के ही लिये। अब वो भी तो औरत है न आखिर कब तक ऐसे ही रह पायेगी। तुम्हें पता भी है कि एक लड़की को अपने पति से कितनी उम्मीदें होती हैं। काज़ल बेचारी हमेशा उदास रहती है और मैंने कई बार उसे पोर्न वीडियो देख-देख कर अपनी चूत की गर्मी शांत करते देखा है। मैंने इस बारे में उससे बात भी की थी पर अभी तक हमारे पास कोई ऑप्शन ही नहीं था। फिर तुमसे बात हुई और जब मैंने उसे तुम्हारे बारे में बताया तो उसने खुद तुमसे मिलने की इच्छा ज़ाहिर की थी। अब बोलो चोदोगे उसे?

मैंने सोचा हर्ज़ क्या है अगर लंड महाराज को एक और चूत की सेवा करने का अवसर मिल रहा है।

तो मैंने हाँ कर दी पर कहा- अभी तो मैं काफी थक गया हूँ, इसलिये रात का प्रोग्राम रखते हैं।

वो कपड़े पहन कर किचन में गई और थोड़े ड्राई फ्रूट्स और एक गिलास दूध ले आयी और मुस्कुरा कर बोली- काफ़ी एनर्जी खर्च हो गयी है इस से तुम्हें थोड़ी एनर्जी मिलेगी क्योंकि अभी तो तुम्हें काफी मेहनत करनी है।

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मैंने ड्राई फ्रूट्स खाकर दूध पिया और सो गया।

जब मैं उठा तो शाम के सात बज रहे थे।
मैं बाथरूम जाकर फ्रेश हुआ और नहा कर डाइनिंग हॉल में आ गया।

थोड़ी देर बाद हम सबने मिलकर खाना खाया और ढेर सारी बातें की।
पर मेरी नज़र बार बार उसकी देवरानी काज़ल पर अटक जाती थी और वह भी शरमा कर धीरे से मुस्कुरा देती।

तभी सोनाली ने काज़ल से बोला- क्या तुम रेडी हो? अगर कोई भी बात हो तो अभी क्लियर कर लो फिर बाद में मुझसे मत बोलना।
काज़ल ने बस इतना ही कहा- अर्नव बहुत अच्छे हैं. बाक़ी सब तो आपने बताया ही हुआ है।
इतना सुन कर हम तीनों हँसने लगे।

खाना खाने के बाद मैंने बोला- अब बताइये हम कहाँ जायें?
दोनों ने इशारों ही इशारों में कुछ बात की और सोनाली मुझे एक कमरे में छोड़ आयी और बोली- तुम टीवी देखो हम दोनों घर का थोड़ा काम निपटा लें फिर आते हैं।

लगभग 1 घंटे बाद सोनाली अपनी देवरानी काज़ल के साथ आयी और उसे मेरे पास छोड़ कर वापस जाने लगी।
मैंने उससे पूछा- तुम कहाँ चली?
तो उसने मुझे आँख मारी और बोली- जब हमारी जरूरत पड़ेगी तो हम हाज़िर हो जाएंगे। तुम फिलहाल काज़ल का ख्याल रखना।

काज़ल ऐसे सजी हुई थी जैसे सुहागरात में कोई दुल्हन सजती हैं और किसी नयी नवेली दुल्हन की तरह खड़े शरमा रही थी।

तो मैंने बड़े प्यार से बोला- या तो आप अभी शरमा लीजिये या थोड़ा कोआपरेटिव हो जाइये। बस फ़र्क़ इतना रहेगा कि अगर आप शरमाती रहीं तो सिर्फ प्रसाद ही मिल पायेगा।
वह फिर से मुस्कुरा दी।

मैंने उसका सिर ऊपर उठाया तो उसने अपनी आँखें बंद कर ली और खुद ही थोड़ा आगे बढ़ गयी जिससे हमारे होंठ आपस में मिल गये.
और हम किस करते-करते इतने मस्त हो गये कि सोनाली कब आकर दरवाज़े पर खड़ी हो गयी हमें पता ही नहीं चला।

उसने जैसे ही आवाज़ लगाई काज़ल थोड़ा पीछे हट गयी।
सोनाली ने मजाकिया लहज़े में बोला- डिस्टर्ब कर दिया क्या?
तभी काज़ल बोली- दीदी आप भी न!

सोनाली बोली- अरे वाह मेरी लाड़ो अभी तक तो तू एकदम छुई मुई बनी थी और अब देखो … चल कोई बात नहीं तू एन्जॉय कर मैं चलती हूँ. बस थोड़ा मेरे लिये बचा देना पूरा मत निचोड़ लेना।
उसकी बात सुनकर काज़ल मुस्कुरा दी।

सोनाली बोली- मैं ये बताने आयी थी कि मैं अपने कमरे में जा रही हूँ। तुम लोगों को किसी चीज़ की जरूरत पड़े तो मुझे कॉल कर लेना और अपना रूम अंदर से लॉक कर लो।

अब सोनाली के जाते ही मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और काज़ल को बेड पर बिठा दिया और पूछा- कैसा लगा?
उसने बोला- मैंने आज से पहले ऐसा किस कभी नहीं किया … देखो सिर्फ एक किस से ही मेरे रोंगटे खड़े हो गये।

मैंने कहा- बस थोड़ा सब्र कीजिये मोहतरमा … फिर बताइयेगा कि और क्या-क्या पहली बार हुआ है.

मैं फिर उसे चूमने लगा और एक के बाद एक उसके सारे कपड़े उतार दिये।

उसने नेट वाली पारदर्शी पिंक ब्रा और पैंटी पहनी थी, जिसमें वो बेहद खूबसूरत लग रही थी।

मैंने बड़े प्यार से उसके बदन से आखिरी कपड़े को जुदा कर दिया और उसके बदन के कतरे-कतरे को मुँह में भर कर चूसने लगा।

हमने काफी देर तक फोरप्ले किया जिससे वो बहुत ज्यादा गर्म हो गई और मुझ पर ऐसे टूट पड़ी जैसे कोई भूखी शेरनी अपने शिकार पर टूटती है।

उसने इतनी जल्दबाज़ी में मेरे कपडे उतारे की मेरी शर्ट के एक-दो बटन भी तोड़ दिये।

पल भर में ही काजल ने मेरे सारे कपड़े उतार दिये और मेरे सारे बदन में किसी जंगली बिल्ली की तरह काटने लगी.
ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझसे किसी बात का बदला ले रही हो।

उसने मेरा लंड पकड़ा और कार के गियर की तरह जोर-जोर से हिलाने लगी।
मैंने तो उसे शर्मीली गुड़िया समझा था पर वो तो खूंखार शेरनी निकली।

उसे मैंने पूरा समय दिया ताकि वो अपने मन की हर इच्छा पूरी कर ले फिर पकड़ कर अपने नीचे ले लिया और अपना लंड उसकी चूत में जोर जोर से रगड़ने लगा।
वो तो मानों पागल सी हो गयी और मेरी कमर पकड़ कर दबाने लगी।

मैंने उसकी बेबसी समझी और लंड को उसके चूत के छेद में रखा और धीरे-धीरे लंड उसकी चूत की गहराई में उतार दिया।

बेशक उसकी चूत पहले से काफ़ी गीली थी पर काफी टाइट थी जैसे वो पहली बार चुद रही हो।

मैंने उसकी धकापेल चुदाई शुरू कर दी तो जवाब में वो भी नीचे से अपनी कमर उठा उठा कर लंड ले रही थी और लगातार मुझे किस किये जा रही थी।
उसकी सिसकियां मादक सीत्कार में बदल गयीं थीं।

कुछ देर चोदने के बाद मैंने उसे अपनी पसंदीदा डॉगी पोजीशन में आने को कहा तो वह तुरंत ही बेड पकड़ कर आगे की तरफ झुक गयी और और अपनी चिकनी गांड मेरी तरफ कर दी।

मैंने भी बिना देर करते हुए अपने लंड का सुपारा उसकी चूत पर रखा और लंड अंदर डाल दिया।

उसकी चूत तीन बार कामरस छोड़ चुकी थी।
उसने मुझे कस कर जकड़ लिया और मैने भी अपने धक्के तेज़ कर दिये और उसकी चूत में ही ढेर हो गया।
हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे से गुंथे पड़े रहे।

उसके चेहरे में संपूर्ण संतुष्टि के भाव देखकर मुझे भी बहुत ख़ुशी हुई कि आख़िर कर मैं इसकी उम्मीदों पर खरा उतरा.

और हम ऐसे ही सो गये।

सुबह उठ कर मैंने फिर एक बार उसको अलग-अलग आसनों में चोदा।

फिर नहा धोकर सोनाली को भी एक बार चोदा और अपने फ्लैट में आ गया।

अब जब कभी भी सोनाली या काज़ल का चुदाई का मन होता तो वो मुझे बुला लेती हैं और हम तीनों खूब मज़े करते हैं।

आपको हॉट सेक्स विद गर्लफ्रेंड कैसा लगा? मुझे मेल करके जरूर बताइयेगा। मुझे आपके सुझाव और प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार रहेगा।
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