तलाकशुदा लड़की मुझसे शिमला में चुदी

हिमाचल सेक्स कहानी में पढ़ें कि मैं एक घर में किराए पर रहता था. उस घर में एक तलाकशुदा लड़की थी. वो मुझसे कैसे सेट हुई? वो मुझे शिमला ले गयी और होटल में चुदी.

नमस्कार दोस्तो, मैं अन्तर्वासना के सभी पाठको का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ. साथ ही मैं सभी पाठको को धन्यवाद भी देता हूँ कि हर सेक्स कहानी के बाद आपके हजारों मेल मुझे मिलते हैं.

कम समय में सबका रिप्लाई करना संभव नहीं होता है लेकिन मैं कोशिश करता हूँ कि सबको रिप्लाई करूं. आप लोगों के प्यार और मेल के कारण ही मुझे सुख मिलता है.
इसी लिए अपने जीवन के अनुभवों को कहानी का रूप देकर आप सबके साथ साझा करने का मेरा मन करता है.

मैं अन्तर्वासना साइट का भी धन्यवाद करता हूँ, जिस कारण इतने सारे लोग मुझे पसंद कर रहे हैं.

मेरी पिछली कहानी थी: एक शाम गर्लफ्रेंड और उसकी भाभी के साथ

जो पाठक नए हैं या मुझे नहीं जानते हैं, मैं उन्हें अपना परिचय दे दूँ.

मेरा नाम राजदीप सिंह है और मेरी उम्र 29 वर्ष है. मैं एक प्राइवेट बैंक में अकाउंट मैनेजर हूँ.

आज मैं आप सभी के साथ एक और अनुभव हिमाचल सेक्स कहानी के रूप में लेकर आया हूँ.

बात दिसंबर 2020 की है. बैंक ने मेरा ट्रांसफर हरियाणा के पंचकूला से नाहन (हिमाचल) कर दिया था.
मैं धीरे धीरे यहां के वातावरण के अनुसार अपने आपको ढाल रहा था.

जनवरी आते आते मैं यहां के लोगों के साथ अच्छा घुल मिल गया था.
इसी बीच मेरे अपने मकान मालिक की बेटी करिश्मा से भी जान पहचान हो गई थी.

करिश्मा की उम्र 34 साल थी और तीन साल पहले उसका तलाक हो गया था.
उसके पति का किसी और औरत की साथ चक्कर था. करिश्मा अब अपने पिता के घर ही रह रही थी.

करिश्मा एक वकील थी और सिरमौर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में उसका चैम्बर था.

जान पहचान के चलते करिश्मा ने मुझसे अपना क्रेडिट कार्ड अप्लाई करवाया और मैंने कभी उसे बैंक के काम के लिए ब्रांच नहीं आने दिया क्योंकि मैं उसके सारे काम घर से ही कर देता था.

ऐसे हमारी जान पहचान बढ़ने लगी और इंस्टाग्राम के जरिए हम बात करने लगे.
शुरुआत में हमारी बातें बहुत सामान्य थीं.

उसने मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा … और मैंने उसके पति के बारे में.
ऐसे ही हमारे बीच बातों का दौर चलता रहा.

मार्च तक हम अच्छे दोस्त बन गए थे.

एक दिन उसके मम्मी पापा चंडीगढ़ गए हुए थे और उन्हें लौटने में बहुत देर हो गई थी क्योंकि रास्ते मैं उनकी कार खराब हो गई थी.

चूंकि अंकल की उम्र 55 से ऊपर थी और वो रात को कार नहीं चला सकते थे.
उन्होंने करिश्मा को बताया तो करिश्मा ने उन्हें वहीं चंडीगढ़ रुकने के लिए बोला.

जब मुझे करिश्मा ने ये बताया तो मैंने अपने चंडीगढ़ के एक दोस्त को फोन किया और अंकल और आंटी का रात को रुकने और खाने की व्यवस्था करवा दी.

करिश्मा इससे और इम्प्रेस हो गई.
वो मुझसे बोली- वकील मैं हूँ और जुगाड़ तुम्हारे अच्छे हैं.
मैंने हंसते हुए कहा- इतनी खूबसूरत वकील के लिए तो मैं जज तक से पंगा ले लूँ, ये तो बहुत छोटी सी प्रॉब्लम थी.

करिश्मा हंसने लगी और बोली- चलो आज डिनर एक साथ करते हैं. टिफिन मत मंगवाना.
मैंने उससे हां कर दी और करिश्मा से कहा- मेरी एक शर्त है, अगर तुम मुझे खाना बनाने में हेल्प करने दो तो ही मई तुम्हारे साथ डिनर करूंगा.

करिश्मा ने चौंकते हुए पूछा- अरे तुम्हें खाना बनाना भी आता है?
मैंने कहा- वकील साहिबा, हम ब्वॉयज हॉस्टल में रह कर जवान हुए हैं. हमें सब आता है.

वो हंसने लगी.

फिर खाना बना कर हम दोनों खाने बैठ गए.

करिश्मा ने मुझे छेड़ते हुए कहा- तुम्हारी होने वाली बीवी बहुत भाग्यवान होगी. तुम एक सर्वगुण सम्पन्न पति बनोगे.

बातों बातों में करिश्मा ने ये भी पूछ लिया कि अभी तक कितनी गर्ल फ्रेंड बनाई हैं.
मैंने अपने पुराने दिनों के बारे में और डेज़ी के बारे में उसे सब कुछ बताया.

उसने थोड़ा दुःख जताया और बोली- कोई बात नहीं. बीती ताहि बिसार देय और आगे की सुधि लेय. तुम अपनी जिन्दगी में सब कुछ भूल कर आगे बढ़ो.

मैंने करिश्मा से पूछा- कभी तुम्हें फिजिकल रिलेशन की जरूरत फील नहीं होती?
इस पर करिश्मा ने जवाब दिया- कभी कभी लगता है, लेकिन सोसाइटी का भय … और ऊपर से तलाकशुदा होने का धब्बा होने से हर कोई ये सोचता कि बस ये औरत तो खिलौना है, इससे खेल लो.

ये कह कर वो रोने लगी.
मैंने उसे संभालते हुए मौके का फायदा उठाया और उसे गले से लगा लिया.
मैं उसे चुप करवाने लगा.

मैंने उससे कहा- तुम मुझे अपना वो दोस्त समझ सकती हो, जो तुम्हारी ख़ुशी के लिए सब कुछ कर सकता है.
ये कह कर मैंने करिश्मा के माथे पर किस कर दिया.

फिर मैं अपने कमरे में जाने लगा.
मैंने करिश्मा से कहा- घर के सभी दरवाजे अच्छे से बंद कर लेना और किसी चीज की जरूरत हो, तो कॉल कर लेना.

मैं अपने कमरे में जाकर लेट गया और करवट बदल रहा था. मैं अपनी मोहब्बत डेज़ी को याद कर रहा था.

रात का एक बज गया था और मुझे नींद नहीं आ रही थी जबकि मुझे सुबह जल्दी उठना क्योंकि मुझे टाइम पर ऑफिस भी जाना होता है.

कुछ देर बाद मेरे दरवाजे पर कुछ हरकत हुई तो मैंने उठ कर देखा कि दरवाजे के बाहर करिश्मा टहल रही थी.

मैंने उससे पूछा- क्या हुआ, सब ठीक है ना?
वो बोली कि नींद नहीं आ रही.
मैंने कहा- हां मुझे भी नहीं आ रही है लेकिन सुबह ऑफिस भी तो जाना है.
करिश्मा बोली- मेरे साथ यहां बैठ जाओ.

हम दोनों आराम कुर्सियों पर बैठ गए.

करिश्मा की नाईटी से उसके भारी भारी चूचे दिख रहे थे.
मेरा मन उन्हें दबाने का कर रहा था लेकिन डर था कि साली वकील है, किसी तरह का केस ठोक दिया तो नौकरी भी जाएगी और इज्जत भी.

करिश्मा मेरे कंधे पर सर रख कर सो गई और मैं उसके चूचे देखते देखरे सो गया.
सुबह 4 बजे मेरी आंख खुली तो मैंने करिश्मा को गोदी में उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया.

वो बहुत गहरी नींद में थी.

मैं साढ़े छह का अलार्म लगा कर दोनों चेयर को जोड़ कर चेयर पर ही सो गया.

सुबह जब अलार्म बजा तो करिश्मा भी उठ गई.
वो भी अपने आपको ऐसे बिस्तर पर लेटी देख कर हैरान थी लेकिन मुस्कुरा रही थी.

मैं गुड मॉर्निंग बोल कर फ्रेश होने गया और नहा कर रेडी होने लगा.

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तब तक करिश्मा अपने रूम में जा चुकी थी.
मुझे घर से निकलते निकलते 8 बज चुके थे और मैं अब लेट होने वाला था.

करिश्मा बोली- खाना बना दिया है, खाकर जाना.
मैंने मना किया- मैं लेट हो जाऊंगा.

वो बोली- नहीं, खाकर जाओ.
मैंने एक परांठा खा लिया और निकल लिया.

रास्ते मैं ड्राइव करते हुए देखा कि करिश्मा के 7 मैसेज आए हुए थे.
मैंने सोचा कि ब्रांच जाकर पढ़ लूंगा.

ब्रांच पहुंच कर अपने जरूरी काम करके मैंने उसके मैसेज पढ़े, तो उसमें लिखा था कि राज तुम कल रात मेरे साथ बहुत कुछ कर सकते थे, लेकिन तुमने अपनी दोस्ती निभाई है. शाम को मिलते हैं. तुम बैंक से घर मत जाना, मुझे लेने कोर्ट आ जाना. मैं तुम्हारा इंतजार करूंगी.

अब मुझे थोड़ी सी टेंशन हुई कि पता नहीं क्या होगा. घर ना आने को क्यों मना किया है?
मैं शाम को ब्रांच से थोड़ा जल्दी निकला और सिरमौर पहुंच गया.
वहां करिश्मा को कॉल किया कि मैं बाहर खड़ा हूँ.

वो आ गई और कार में बैठ गई.

घर न जाने के बारे में पूछने पर उसने मुझे बताया कि मैंने मम्मी को फोन करके ये कहा है कि शनिवार और रविवार बैंक की छुट्टी है, तो राज अपने घर हरियाणा गया है. मुझे एक केस के सिलसिले में अपनी दोस्त श्वेता के पास चंडीगढ़ जाना पड़ेगा. मैं दो दिन श्वेता के पास रहूंगी और सोमवार को चंडीगढ़ कोर्ट का काम खत्म करके शाम तक घर आ जाऊंगी.
मैं उसका मुँह देख रहा था.

करिश्मा ने कहा- क्योंकि कल शनिवार है और बैंक और कोर्ट दोनों बंद हैं, तो हम दोनों शिमला चल रहे हैं.
मैंने थोड़ा खुश हुआ लेकिन परेशान भी … क्योंकि साढ़े चार घंटे मुझे ड्राइव करना था और तब तक रात हो जानी थी.

हम दोनों चल पड़े, रास्ते में बात करने लगे.

मैं उसके मैसेज के बारे में बात करने लगा तो करिश्मा ने कहा कि घर में मम्मी पापा के आगे हम नार्मल ही रहेंगे और अब से तुम मेरे दोस्त, ब्वॉयफ्रेंड पार्टनर सब कुछ हो.

मैंने कार रोक कर करिश्मा को गले लगाया और एक किस कर ली.
करिश्मा खुश हो गई और उसने मुझे बताया कि शिमला पहुंच कर एक सरप्राइज भी है.

मैं समझ गया था कि आज ये अपनी आग बुझाने वाली है और मुझे बड़े दिनों बाद एक चूत मिलने वाली है.

हम दोनों 9 बजे शिमला पहुंच गए और जाकर रिट्ज होटल में कार पार्क की और लिफ्ट से होटल चले गए.

होटल रजिस्टर में करिश्मा ने नाम लिखते हुए मुझे और अपने आपको पति और पत्नी लिखा था.
हम दोनों कमरे में पहुंच गए.

मैं पूरी तरह से थका हुआ था. मुझमें खाना खाने की भी हिम्मत नहीं थी लेकिन चूत की आस ने सब कुछ करवा दिया.

हम दोनों ने डिनर किया और डिनर के साथ करिश्मा ने अपने बैग से एक रेड वाइन की बॉटल निकाली.
हम दोनों ने 2-2 पैग भी लगाए.

अब बारी थी असली काम की.
करिश्मा वाशरूम में जाकर अपनी नाईटी पहन कर आ गई और मैं ट्रेकसूट में.

कुछ तो ठण्डक … और ऊपर से थकावट थी.
करिश्मा आकर मेरी गोदी में लेट गई और मैं उसे किस करने लगा.

कमरे की एक छोटी लाइट जला रखी थी, बाकी सब बंद था.

करिश्मा को किस करते करते करते मैंने उसकी नाईटी और ब्रा उतार दी और करिश्मा के चूचे अपने हाथों में लेकर चूसने लगा.
उसके चूचे का साइज 36 बी था. उसके हल्के काले रंग के निप्पल मस्त थे.
मुझे चूसने में पूरा मजा आ रहा था.

मैं छोटे बच्चे की तरह उसके दूध चूसे जा रहा था.

चूचियां चूसते चूसते मैंने करिश्मा के लोअर में हाथ डाल कर उसके चूतड़ों को दबाना शुरू कर दिया. फिर पैंटी और लोअर नीचे करने लगा.

जब पैंटी उतरी और मैंने करिश्मा को नंगी किया, तो देखा उसकी चूत पर हल्के ब्राउन बाल हैं और चूत एकदम कसी हुई है.

मैंने करिश्मा से उसकी चूत चाटने के लिए पूछा.
तो करिश्मा ने जवाब दिया कि सिर्फ एक छेद क्यों … मेरे सारे छेद चाट लो. मुझे खुश करो, कितने ही महीनों से मुझे कुछ मिला नहीं. सिर्फ अपनी उंगली से काम चला रही थी. राज तुम मुझे बहुत अच्छे लगे हो.

इसी के साथ करिश्मा ने अपनी टांगें फैला दीं और मैं उसकी टांगों के बीच बैठ कर उसकी चूत को चूसने लगा.
बीच बीच में मैं अपनी जीभ और उंगलियों से उसकी चूत को चोदने लगा.

मैं कभी उसकी नाभि को चूमता, तो कभी उसके गले पर चुटकियां काट रहा था.

थोड़ी देर बाद मैंने उसे उल्टा लेटा कर उसके बड़े बड़े चूतड़ और उसकी पीठ को चूमना शुरू कर दिया.
इस बीच मैंने उसके चूतड़ों को अपने दांतों से काट भी लिया था.

फिर थोड़ी देर बाद उसे कुतिया बना कर मैंने अपना मुँह उसकी गांड में घुसाया और उसकी गांड को चाटना और पीटना शुरू कर दिया.
मैं चाहता था कि चुदाई के दौरान करिश्मा तड़फने लगे और खुद ही कहे कि अब अपना लंड अन्दर पेल दो.

मेरा लंड पूरी तरह तन चुका था लेकिन मैं चाहता था कि करिश्मा के मुँह में लंड देकर लॉलीपॉप के तरह चुसवा लूं.
मैंने उससे कहा तो उसने मना कर दिया.

वो बोली- मैंने आज तक किसी मर्द का लंड नहीं चूसा है.
मैंने भी पहली बार का ख्याल करते हुए ज्यादा जोर नहीं दिया और उसके होंठों को चूमने लगा, अपने हाथों से उसकी चूची जोर जोर से दबाने लगा.

मेरा लंड उसकी चूत पर रगड़ खा रहा था और अब करिश्मा से इंतजार नहीं हो रहा था.
वो बार बार मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ रही थी और ‘अह्ह्ह अहहहआ …’ की सिसकारियां भर रही थी.

मैं अपना लंड अपने हाथ में पकड़ कर उसकी चूत पर पीटने लगा, थोड़ा थोड़ा अन्दर डाल कर बाहर निकाल लेता.
करिश्मा की चूत गीली हो चुकी थी और अब चुदाई शुरू करनी थी.

मैंने करिश्मा से कहा- मैं बाथरूम से कंडोम लगा कर आता हूँ.
वो बोली- यहीं लगा लो न!
मैंने कहा- मुझे सुसु भी आई है.

मैं बाथरूम में गया और अपनी बनाई हुई एक दवाई को लंड पर लगा लिया. फिर लौड़े पर कंडोम पहन लिया और आकर करिश्मा से पूछा कि किस पोजीशन में शुरू करना है?

करिश्मा ने जवाब दिया- तुम चेयर पर बैठो, मैं तुम्हारे ऊपर बैठूंगी.
हम दोनों ने कुर्सी का सहारा लिया. वो मेरी तरफ मुँह करके मेरी गोद में बैठ गई.
हमने इस पोजीशन से अपना चुदाई समारोह शुरू किया.

ऐसा लग रहा था कि मैं बीए पास फिल्म की सूटिंग कर रहा हूँ और करिश्मा मेरे साथ खूब आनन्द ले रही थी.

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मैं करिश्मा की चूचियों को दुधमुहे की तरह चूस रहा था.
दस मिनट बाद मैंने करिश्मा को वहीं कुर्सी पर ही घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत में अपना लंड पेल कर अन्दर बाहर करने लगा.

मैं आगे हाथ करके करिश्मा की चूचियों को दबा रहा था और बीच बीच में करिश्मा के चूतड़ों पर चमाट भी मार रहा था.

हर चमाट के बाद मेरे झटकों की रफ्तार बढ़ रही थी और करिश्मा ‘आह्हः आहहहा …’ की आवाजें निकाल रही थी.

दस मिनट और हो गए थे, मेरी कमर और पैर दुखने लगे थे.
अब मैं करिश्मा को लेकर बिस्तर पर लेट गया. करिश्मा नीचे थी और मैं उसके ऊपर चढ़ा था.

करिश्मा ने अपने हाथ से पकड़ कर मेरा लंड अपनी चूत में सैट किया और कमर उठा उठा कर चुदाई का मजा लेने लगी.
कुछ मिनट बाद करिश्मा ने कहा कि मेरा हो गया … मैं अब झड़ने वाली हूँ.

मगर दवा के कारण मेरा अभी लंड ऐसे ही तना हुआ था.
एक तो मैं बहुत लम्बे टाइम के बाद किसी के साथ सेक्स कर रह था और ऊपर से वाइन का नशा भी मजा दे रहा था.
ठण्ड और मेरे बनाई दवाई का कमाल मेरा लंड अभी एक और औरत को शांत कर सकता था.

मैंने करिश्मा को कहा कि मोहतरमा मेरा अभी कुछ भी नहीं हुआ.
करिश्मा ने गुस्सा होते हुए जवाब दिया- तुम आदमी हो या अफ्रीकन … जो अभी तक झड़े नहीं. इस हिसाब से तुम्हारे लिए मुझे अपनी एक और फ्रेंड को बुलाना पड़ेगा.

मैं हंस दिया.
करिश्मा और गुस्सा हो गई.
वो गुस्से में बाथरूम चली गई और पांच मिनट बाद चुत धोकर और नाईटी पहन कर बाहर आ गई.

मेरा लंड थोड़ा ढीला जरूर हुआ था क्योंकि उसने अपनी डार्लिंग के गुस्से में डांट खाई थी. मगर लंड शांत नहीं हुआ था.
मैं परेशान होकर कमरे में नंगा घूम रहा था.

करिश्मा मुझे यूं देख कर बोली- क्या हुआ?
मैंने उसे बताया कि लंड शांत नहीं हो रहा … मुझे अभी और करना है.

करिश्मा ने जवाब दिया कि तुम्हारे मोटे और लम्बे लंड ने अन्दर तक चुदाई कर दी है. मैं और ज्यादा नहीं ले सकती. मुझे दर्द हो रहा है, ऊपर से डॉटेड कंडोम मुझे रगड़ रहा था. अब जो करना है सुबह करना.

मगर मेरा लंड शांत होने का नाम नहीं ले रहा था तो मैंने करिश्मा को मनाया और उसे किस किया.

मैंने उससे कहा- ठीक है अन्दर मत लो … मुझे अपनी चूचियाँ पिलाओ और मेरे लंड को हाथ से हिला दो.
थोड़ा गुस्सा करने की बाद वो मान गई.

करिश्मा ने मेरा लौड़ा हाथ से हिलाना शुरू कर दिया और कुछ मिनट में उसके दोनों हाथ दुखने लगे.
मेरा बहुत सारा वीर्य निकला तो कंडोम ए आगे से उसका बड़ा सा गुब्बारा फूल गया.

कंडोम की गुब्बारे को देख कर करिश्मा बोली कि अगर तुमने मुझे बिना कंडोम के चोद़ दिया होता और एक बून्द भी अन्दर चली जाती तो मैं तो प्रेग्नेंट हो सकती थी. आगे से ध्यान रखूंगी कि तुम्हारे साथ कभी बिना कंडोम के सेक्स ना करूं. नहीं तुम तो मुझे माँ बना दोगे.
मैं हंसने लगा.

इसके बाद मैं बाथरूम गया.
वहां जाकर लंड साफ किया और गर्म पानी से नहा कर आ गया.

हम दोनों एक दूसरे को गले लगा कर सो गए.

दोनों सुबह 7 बजे उठे.
करिश्मा ने मुझे गुड मॉर्निंग विश करते हुए किस किया और पूछा- नींद कैसी आई?
मैंने जवाब दिया कि ऐसा लगा कि मैं जन्नत में हूँ और एक हूर मेरे साथ है.

करिश्मा अपनी तारीफ सुन कर खुश हो गई और मेरे होंठों पर किस दे कर बोली- मैं नहाने जा रही हूँ.
मैंने कहा- ठीक है.

मेरे दिमाग में खुराफत आई कि साथ में नहाया जाए.
करिश्मा के बाथरूम जाने के दो मिनट बाद मैंने उसके दरवाजे को पीटना शुरू किया और इमरजेंसी का बहाना बनाया कि मेरे पेट में दर्द हो रहा है.

करिश्मा ने दरवाजा खोला तो मैंने तुरंत उसे गले लगा लिया.
वो बोली- ये क्या बदमाशी है?

मैंने उसे बताया कि मैं डेज़ी के साथ बाथरूम में नहाया करता था. कल तुम्हारे साथ ऐसी ही फीलिंग आ रही थी कि मेरी डेज़ी वापिस आ गई है. अब तुम्हारे साथ मुझे गर्म पानी का आनन्द लेना है.
उसने हामी भर दी.

हम दोनों ने नहाते हुए एक दूसरे को साबुन लगाया और फव्वारे की नीचे भीगते हुए मजा लेने लगे.

मैंने उसकी चूत में लंड पेल दिया और एक बार फिर से चोदना शुरू कर दिया.

गीला बदन और कसी हुई चूत चोदते मेरा मन कर रहा था कि ये लम्हा कभी खत्म न हो और हमारी ये रास लीला ऐसी ही चलती रहे.

लेकिन खड़े खड़े सेक्स करना इतना आरामदायक नहीं था.

करिश्मा और मैं जल्दी नहा कर निकल आए और इसके बाद बिस्तर पर पूरी चुदाई करके हम दोनों ने होटल से चैक आउट कर लिया.

अब हम चंडीगढ़ करिश्मा की सहेली श्वेता पंडित के घर चले गए.
वो भी बड़ी जबरदस्त औरत थी. उसका 5 फुट 11 इंच का कद और फिगर तो बहुत ही ज्यादा मादक … एकदम कहर ढाती हुई श्वेता को देख कर लंड फिर से सलामी देने लगा.

मालूमात हुई कि श्वेता एक प्रोफेशनल इंटरेनट कंटेंट क्रिएटर है और मॉडलिंग करती है.
उस देख कर मन किया कि इस बला की तो जीवन में एक बार चुदाई जरूर की जानी चाहिए. लेकिन आज पहली मुलाकात में तो ठरकी नहीं हो सकता था.

मैं शरीफ बंदे की तरह पेश आ रहा था. मैं करिश्मा को श्वेता के घर छोड़ कर अपने फ्रेंड के पास चला गया और रात को वहीं रुका.

सारी रात हम दोनों ने फोन पर बात की. पता नहीं कितनी बार लव यू बोल चुके थे.
हमें सुबह जल्दी निकलना था और हम दोनों सो ही नहीं सके थे.

अगली सुबह हम अपने अपने ऑफिस आ गए और शाम को घर पर मिले.

अंकल आंटी के सामने बिल्कुल पहले की तरह ही सब कुछ दिखावा किया.
रात को हम दोनों छत पर मिले और एक दूसरे को गले लगाया.

करिश्मा ने बताया कि अगले शनिवार श्वेता नाहन आएगी. हम सभी मतलब मैं, करिश्मा श्वेता और उसका पति कहीं बाहर चलेंगे.

अब मुझे अगले शनिवार का इंतजार है क्योंकि कोशिश करूंगा कि किसी तरह से श्वेता को अपनी गोद में लेकर चोद पाऊं.
यदि ऐसा हुआ तो आपको जरूर अगली सेक्स कहानी में लिखूंगा.

आप सभी पाठकों से उम्मीद करता हूँ कि मेरी हिमाचल सेक्स कहानी आपको पसंद आई होगी.
आप सभी के मेल का मुझे इंतजार रहेगा.
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