लॉकडाउन में मेरी गांड की ओपनिंग

हिंदी गांड चुदाई कहानी एक लड़के की है जो पोर्न फिल्म देखते हुए सोचता था कि लड़की की जगह पर वो होता. उसका यह ख्याल एक दिन सच हो गया.

नमस्कार दोस्तो, मैं अन्तर्वासना का एक पुराना पाठक हूँ और यहां की सभी सेक्स कहानियां बड़े चाव से पढ़ता हूँ.
इधर प्रकाशित सभी सेक्स कहानियां काफी उत्तेजक होती हैं.

यूं तो मेरे अन्दर लड़कियों वाले लक्षण नहीं हैं पर कभी कभी मैं पोर्न मूवी देखते समय मैं लड़की की जगह खुद को देखता हूँ और सोचता हूं कि काश उस लड़की की तरह कोई मेरी भी ले लेता.

ये लक्षण अभी साल भर से मुझमें कुछ ज्यादा आने लगे थे.
मुझे लग रहा था कि शायद मैं ज्यादा पोर्न देखने लगा हूँ … ये उसका असर है.

फिर लॉकडाउन में मेरी एक बार गांड ठुकाई होने के बाद मेरा इस सबसे मन हट सा गया था.
मैंने सोच लिया था कि अब ये सब नहीं करूंगा.

दूसरी बार में मैं ऐसा नहीं चाहता था पर मौका और मूड का क्या कहा जा सकता है.

दोस्तो, गांड की खुजली चुत से ज्यादा होती है तो मेरी गांड में अभी भी कुलबुली मचती रहती है.

पहली बार गांड ओपनिंग कैसे हुई थी, वो हिंदी गांड चुदाई कहानी सुनिए.

ये बात दूसरे लॉकडाउन की है. इस बार रुक रुक कर लॉकडाउन लगाया जा रहा था.

उसी समय मेरे एग्जाम शुरू होने को थे.

चूंकि मेरे गांव से शहर बहुत दूर था, पर कोरोना संकट की वजह से कोई हॉस्टल नहीं खुला था.
मैंने कोई कमरा किराए पर लेने की सोची.

काफी ढूँढा, पर कोई भी रूम देने को तैयार नहीं हुआ.

आखिर मुझे एक शेयरिंग रूम मिला, जिसमें दो स्टूडेंट्स के सामान पड़े हुए थे और वो लोग छुट्टी पर गए थे.
वो दोनों दस दिन बाद आने वाले थे.

मैं उधर रहने लगा और इस बीच मेरे एग्जाम अच्छे से खत्म हो गए.

जिस दिन एग्जाम खत्म हुए, उसी दिन वो दोनों आ गए.

मैं कमरा छोड़ कर जाने को तैयार हुआ पर उसी दिन शहर में फिर से तीन दिन का लॉकडाउन लग गया.
मुझे मजबूरी में तीन दिन वहीं रुकना पड़ा.

वो दोनों काफी हट्टे कट्टे थे.
उनका नाम मदन और नरपत था.

वो दोनों थोड़े सांवले थे और दोनों की शादी हो चुकी थी. उनकी पत्नियां गांव में ही रहती थीं.

उन दोनों की मुझसे जान पहचान हुई.
मेरे रुकने के बारे में जानकारी होने के बाद मैंने उनसे कहा कि मेरे एग्जाम हो चुके हैं और अब मैं एक दो दिन में चला जाऊंगा.

इस पर एक भैया बोले- कोई दिक्कत नहीं है, तुम जितने चाहो, हमारे साथ रह सकते हो.

फिर रात हुई. हम सब बातें करने लगे.

नरपत बोला- यार घर जाकर चोदने की ऐसी आदत लगी है कि ग्यारह बजते ही लौड़ा कड़क हो जाता है.
मदन बोला- हां यार, मेरा भी कुछ यही हाल है.

थोड़ी देर बाद वो बोला- चल कोई रंडी बुला लेते हैं, उसके मज़े लेंगे.

नरपत मान गया. उसने मेरी तरफ देखा.
मैं धीरे से बोला- मैं भी देख लूंगा.

फिर मदन ने काफी जगह फ़ोन लगाए, पर कोई रांड नहीं मिली. आखिर में वो नरपत से बोला- कोई चुत नहीं मिली, मुठ मारके सो जाओ.

हम सब सो गए.

रात 3 बजे मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि मदन अपनी वाइफ से न्यूड वीडियो कॉल में लगा हुआ था.
मैं भी देखता रहा.

उसकी बीवी थोड़ी गोरी और उम्र में छोटी थी पर नंगी थी तो काफी मालदार आइटम लग रही थी.
उसकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे.

मैं देखता रहा.

थोड़ी देर में वो दोनों पति पत्नी झड़ कर सो गए.

मगर मुझे अब नींद नहीं आ रही थी.

सुबह होने वाली ही थी कि नरपत ने अपना लौड़ा मेरी गांड से सटा दिया. वो अपनी बीवी समझ मेरी छाती पर हाथ चलाने लगा.

मैं मदहोश होने लगा था.

आखिर उसने मेरा बॉक्सर नीचे कर दिया. मैंने भी उसे नहीं रोका.

फिर उसकी आंखें खुल गईं, उसने मुझे देखा तो मैं नींद में होने का नाटक करने लगा.

उसने पता नहीं क्या सोचा कि थोड़ी देर सहला कर उसने सारा माल मेरी नंगी गांड पर गिरा दिया.

मैं इससे बहुत गर्म हो गया था … पर मैं अपनी उत्तेजना को छिपा रहा था.

मदन ने ये होते देख लिया और नरपत से पूछा- ये क्या कर रहा है बे?
उसने बोला- मैं नींद में इसे अपनी बीवी समझ लिपट गया. टाइम पर आंख खुली नहीं तो अभी इसकी गांड ठुक गई होती.

ये सुन मेरी सांसें तेज़ हो गईं.

मदन बोला- ये भी साली रंडी है, सोने का नाटक कर रही है, लेकिन लौड़ा लेने के लिए रेडी दिख रही है. मैंने देख लिया था, जब तू इस पर अपना माल डाल रहा था, तब ये बड़े मजे ले रहा था.

ये सुन मैंने आंखें खोल दीं, पर कुछ बोला नहीं.

नरपत ने मुझसे कहा- अबे गंडमरी के … कल बोलता न कि तू रंडी है. मेरा इतना खतरनाक मूड था और ऐसे ही सोना पड़ा.
मदन बोला- कुछ नहीं हुआ बे … इसे तो अभी भी चोद ही सकते हैं.

इतना सुन कर नरपत ने अपना लौड़ा मेरे चेहरे पर दे मारा.
मैं हैरान रह गया.
उसका लंड बहुत लम्बा और काफी मोटा था. उसे देख मेरे मुँह से पानी गिर रहा था.

मैंने फाटक से उसका लौड़ा लपक लिया और बड़े मजे से चूसने लगा.

उसका लंड पूरा मेरे मुँह में भी नहीं आ रहा था.
फिर भी मैं चाहता था कि वो पूरा मेरे मुँह में समा जाए.

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नरपत बोला- मदन तू लंड से फ्री हो ले, तब तक मैं शौच से निवृत होकर आ जाता हूँ.
मदन मेरे मुँह में लंड लगा कर लग गया और जोर जोर से धक्के लगाने लगा.

वो लंड चुसवाते हुए बोला- तुझे देख कर मुझे अपनी दसवीं क्लास की मैडम की याद आ गई. उसे मैंने चोदने की बहुत कोशिश की थी, पर साली हाथ नहीं आई थी. आज तुझे चोदकर मेरी ये इच्छा पूरी हो गई.
मैंने पूछा- मैडम का क्या नाम था?

वो बोला- उसका नाम कंचन था, आज मेरे लिए तू ही कंचन है.
मैं पूरे मज़े में था.

वो बोला- चूस चूस मेरा लवड़ा चूस भैन की लौड़ी कंचन … आह मेरी रंडी लंड चूस.
मैं भी होश खो चुका था.

तभी वो मेरे मुँह में ही पूरा झड़ गया, उसने सारा माल मुझे पिला दिया.

फिर वो थक कर लेट गया और मैंने उसके कपड़े खोलने शुरू कर दिए.

उसका रंग थोड़ा सांवला और शरीर पर काफी बाल थे.

मैं बिल्कुल किसी लड़की की तरह उसके ऊपर चढ़ गया.

उसने पूछा- तू है तो पूरी रंडी, कितनी बार चुदी है?
मैंने बोला- अभी तक कुंवारी हूँ … तेरी लंड की दीवानी हूँ. चोद साले मुझे … आज तू मुझे रांड बना कर चोद दे. इतने दिन की प्यासी हूँ.

उसने फटाफट मेरे कपड़े निकाल कर मुझे पूरा नंगा कर दिया. मैं लड़की की तरह शर्मा रहा था.

उसने अपना लौड़ा मेरे हाथ में दे दिया और बोला- चल साली खड़ा कर इसे … ये आज तेरी गांड का छेद चोदेगा.
मैं बोला- ठीक है.

मैंने लंड को मसलना शुरू कर दिया.

वो बोला- चल अब चढ़ जा लंड पर!

मैंने उसका लंड मेरी गांड के छेद पर सैट किया और उस पर बैठ गया.
बड़े ही दर्द के साथ उसका लौड़ा धीरे धीरे मेरी गांड में घुसता चला गया.

मैं चीख़ रहा था.
उसने मुझे कमर से पकड़ ऊपर नीचे करने शुरू कर दिया.

भक भक की आवाज़ के साथ मेरी गांड फट गयी और खून से उसका लंड सन गया.
उसने कपड़े से अपना लंड और मुझे साफ कर दिया.

एक बार फिर से उसने मुझे अपने लंड पर चढ़ा दिया.

इस बार मुझे दर्द कम हुआ, पर मुझे लग रहा था कि उसका लंड मेरे पेट को छू रहा है.
मेरी आंखों में आंसू थे, पर चेहरे पर मदहोशी थी.

मैं किसी रंडी की तरह उसके लंड पर उछल रही थी.
उसने मुझे अपनी छाती पर गिर कर जोर जोर से मेरी गांड मारनी शुरू कर दी.
मैं उसका पूरा साथ दे रहा था.

थोड़ी देर में मेरा लंड भी गिरने लगा. मैंने सारा माल अपनी अंडरवियर पर गिरा दिया और उसकी छाती पर चुम्बन करने लगा.

मैं खुद को औरत समझने लगा और उसके कंधे और छाती पर चुम्बन करता रहा. उसका लंड मुझे बहुत सुख दे रहा था.

अब धीरे धीरे मेरे आंखों के आगे अंधेरा छा रहा था. मैं उसका लंड बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था.

एकाएक ढीला होकर मैं उसके ऊपर गिर गया लेकिन वो अभी भी तेज़ गति से मुझे चोदे जा रहा था.

मैं उसे रोकना चाह रहा था पर मेरे मुँह से कुछ नहीं निकल रहा था.

थोड़ी ही देर में मुझे तारे से दिखने लगे थे, मेरी हिम्मत ही ख़त्म सी हो गई थी.

उसकी रफ़्तार कम ही नहीं हो रही थी.

कुछ दस मिनट बाद मेरी गांड मैं गर्म सा फ़व्वारा सा छूट गया.
अब मैं मदहोशी की हालत में था इसलिए सो गया.

कुछ आधे घंटे बाद मुझे थोड़ा होश आया और मैं खड़ा हुआ.

उसने मुझसे पूछा- ठीक है न तू?
मैंने उससे बोला- ठीक तो नहीं हूँ, पर जो मज़ा तूने दिया है … उसके आगे इतनी सी हालत खराब होना बनती है.

वह बोला- ये हुई न बात … बहुत अच्छी रंडी बनेगा तू … चल आजा खाना खाकर तुझे पूरी रंडी औरत बना कर देते हैं. अभी जा, जाकर नहा ले. फिर तुझे आज कंचन बना कर चोदूंगा.

मैं उठा और बाथरूम तक चल कर गया.

मैं जैसे तैसे नहाया और तैयार होकर उन दोनों के साथ चल दिया.

खाना खाकर वो मुझे एक घर में ले गए.

वहां एक नेपाली औरत थी.
मदन ने उससे कहा- इसे एकदम छम्मक छल्लो बना दो.

उसने मुझे एक कमरे में भेज दिया.

वहां एक और नेपाली औरत ने मुझे नंगा कर दिया और मेरी बॉडी के सारे बाल हेयर रेमूविंग क्रीम लगाकर निकाल दिए.

फिर मेरी गांड पर कई क्रीम लगाकर उसे लड़कियों सी चिकनी बना दी.
उस पर रबर स्किन लगा कर उसे थोड़ा और मोटा कर दिया.

मेरे सीने के सारे बाल साफ़ करके वहां पर एक एयर बैलून जैसा कुछ चिपका दिया जिससे बिल्कुल चूचे जैसे उभार बन गए.

उसने उन उभारों पर स्किन प्लास्टिक लगा कर बिल्कुल बूब्स से बना दिए और मेकअप और विग लगा मुझे लौंडियों वाले कपड़े पहना दिए.

इसके बाद जब उसने मुझे मिरर दिखाया तो मैं खुद को ही नहीं पहचान पा रहा था.
मैं बिल्कुल किसी नाइट स्टेज की नचनियां सी लग रही थी.

जब मैं बाहर आया तो वे दोनों भी मुझे देख कर बोले- अब लग रही है तू कंचन कामिनी सी माल. चल आ जा, आज तुझे पूरे मज़े देते हैं.

उन्होंने उसको पार्लर वाली को पैसे दिए और हम सभी अपने कमरे की तरफ चल दिए.

कमरे में आकर मदन ने रूम बंद किया.

तभी मुझे बेड पर गिरा नरपत मेरे ऊपर आ गया.
मैंने भी उसे पकड़ लिया.

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उसने धीरे धीरे मेरे बूब्स दबाने शुरू किए.

मुझे भी बिल्कुल रंडी जैसा लग रहा था.
मैंने उसके कपड़े उतारे और उसका लंड निकाल लिया.

नरपत ने मेरे मुँह पर आकर अपना लंड हिलाया, एकदम कड़क और शेव्ड लौड़ा था.

मैंने उसे लपक लिया और सीधा मुँह में डाल कर चूसने लगी.

मदन ने आकर मेरे नीचे के कपड़े उतार मुझे नंगा कर दिया.
उसने मुझे बोला- चल टेढ़ा हो जा.

अब नरपत नीचे उतर गया और उसका लंड मैं चूसता रहा और उसकी गोटियां सहलाता रहा.

मदन ने मेरी गांड पर हाथ लगा कर बोला- क्या जादू कर दिया उस नेपालिन ने … तुझे तो औरत बना डाला. क्या मालदार गांड बना दी. आज तो तुझे चोद कर पूरे मज़े लूंगा.

इतना बोल कर उसने थूक लगा कर अपना लंड मेरी गांड पर रखा और धक्का दे दिया.

मेरी गांड चिर सी गई … मगर मदन रुका ही नहीं.
उसने तीन धक्कों में अपना लंड मेरी गांड में उतार दिया.

मैं चीखना चाहता था, पर नरपत का लंड मेरे मुँह में था और नरपत ने मेरे सर को पकड़ रखा था, जिससे मैं लंड बाहर भी नहीं निकाल सकता था.

मदन ने धक्कों के साथ मेरी गांड फाड़ना चालू कर दिया.
वो पीछे से मेरे मम्मों को दबाता रहा.

कुछ देर बाद मुझे मज़े आने लगे.
मैं मदहोश होकर नरपत का लंड चूसता रहा.

पीछे मेरी गांड चुद रही थी और इधर नरपत ने सारा माल मेरे मुँह में खाली कर दिया.
मैंने वीर्य को रबड़ी समझ कर पी लिया.

अब मदन ने मुझे उल्टा कर दिया और वो मेरे ऊपर झड़ गया और चोदने लगा.

मैं अब भी उसके लंड को सहन नहीं कर पा रहा था.
मुझे अब भी तारे से दिखने लगे थे और लग रहा था कि उसका लंड गांड से होते हुए मेरे मुँह से निकल जाएगा.

आखिरकार उसने अपने लंड का गर्म माल मेरी गांड में खाली कर दिया.

उसके बाद उसके धक्के रुक गए और वो बोला- वाह री रंडी, तुझे चोद कर लगता ही नहीं कि तू लड़का है … बिल्कुल कोठे वाली रंडियों जितने मज़े देता है तू!

इतना बोल वह मुझ पर गिर कर हांफने लगा और सो गया.

कुछ देर में मेरी भी आंख लग गई.

मुझमें अब और लंड लेने की हिम्मत नहीं थी पर गांड में अब खुजली सी मची हुई थी.

करीब 5 बजे नरपत ने मुझे उठाया और बोला- अब मुझे भी तेरी गांड लेनी है.

मेरी हिम्मत तो नहीं हो रही थी पर उसका लंड जब बाहर आया तो गांड खुद ब खुद उसकी तरफ हो गई.
उसने बोला- मदन से ज्यादा बुरा चोदता हूँ मैं!

मैं सोच में पड़ गया कि मदन के लंड से मेरी आंखें फट रही थीं. इसके लंड को लेने के बाद मेरा क्या होगा!

मैंने उसके लंड पर तेल लगा कर थोड़ी मालिश की.
उसका लंड मदन से काफी मोटा था और मुझे अफसोस हो रहा था कि मैं औरत नहीं हूँ.

वह लेट गया और मुझे उसने अपने ऊपर चढ़ा दिया और बोला- चल लंड पर बैठ जा!

मैं चढ़ गया और उसने अपना लंड मेरी गांड पर लगाकर ज़ोरदार धक्के के साथ अपना समूचा लवड़ा मेरी गांड में घुसा दिया.

मेरी मुँह से ज़ोरदार चीख निकली जिससे मदन उठ गया.

नरपत ने मुझे कमर से पकड़ा और ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया.

मदन बोला- रंडी की तरह बन जा साले … इतना मत चिल्ला.

नरपत का लंड बिल्कुल किसी गर्म सरिए की तरह मेरी गांड में घुस गया था.

उसका गर्म अहसास मुझे अच्छा तो लग रहा था पर असहनीय दर्द भी दे रहा था.
नरपत का मोटा लंड मेरी गांड की दीवारों को चौड़ा करके अन्दर घुसता जा रहा था.

कुछ टाइम बाद नरपत के लंड को सहन करने की ताकत मिल गई और मैं भी उसके पेट पर हाथ रख कर उछलने लगा.

उसने मेरे बूब्स पकड़ लिए और मैं ऊपर नीचे होता रहा.

वो मेरा लंड भी सहला रहा था, जिससे मेरा माल निकलने वाला था.

मैंने सामने पड़ा अपना ब्लाउज उठा लिया और सारा उस पर गिरा दिया.

इधर नरपत के धक्कों की स्पीड बढ़ गई थी.

मुझे थोड़ा दर्द फिर से होने लगा.
मैंने उसकी छाती को चूमना चाटना शुरू कर दिया.

मैं इस वक्त खुद को औरत महसूस कर रहा था जो मुझे बहुत आनन्द दे रहा था.

मेरा पूरा शरीर नरपत के काबू में था. मुझे उसका लंड बहुत पसंद आ गया था. मैं उसके सीने पर जकड़ सा गया था.

अब उसने धार के साथ सारा वीर्य मेरी गांड में छोड़ दिया.
मैं निढाल होकर उस पर गिर गया.

उसने मुझे नीचे ले लिया और मुझे मसलने लगा.

थोड़ी देर बाद वो बाथरूम में चला गया.
मैं सो गया और शाम तक उठ नहीं पाया.

रात में मदन ने फिर से बोला, पर मेरी हिम्मत जवाब दे चुकी थी.

सबने मुझे नंगी पड़े रहने दिया और सो गए.

अगली सुबह उठते ही मदन ने मेरी गांड पर अपना लंड सटा दिया और मुझे खींच कर अन्दर घुसा दिया.

वो बोला- तू जब तक यहां है. तुझे हर रोज़ ऐसे ही अपनी गांड देनी है.

मैं तीन दिन तक वहां नंगा ही रहा.

नरपत और मदन ने मुझे रण्डी होने की पूरी ट्यूशन दी.
मेरी गांड उनका लंड हर रोज़ चाहने लगी थी.

दोस्तो, आपको मेरी हिंदी गांड चुदाई कहानी कैसी लगी, प्लीज़ मेल जरूर करें.
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