हवस की कहानी जवान लड़की की

अगले दिन संडे था और घर पर हम दोनो ही थे. तब मैने दी से पूछा की क्या हुआ था. दी मुझे बेडरूम मे ले गयी और दरवाज़ा बंद कर लिया. तब उन्होने बताया की क्यूंकी घर की माली हालत ठीक नहीं है वो कुछ बड़े घरों के बिगड़े हुए लड़को के साथ मस्ती करती है और घूमती हैं . जिसके उन्हे पैसे मिलते है. कल दिन मे स्कूल के बाद किसी लड़के के साथ मस्ती करते हुए पोलीस ने पकड़ लिया था.

इसीलिए मम्मी पापा को ठाने बुलाना पड़ा. कहने लगी की क्या करे. ये सब करना पड़ता है. आज दी की शादी हो चुकी है. नौकरी करती हैं और उनका अछा चल रहा है. पर इस आछे टाइम के पीछे उन्होने कितनी बार मूह काला करवाया है वो ही जानती हैं.

लेकिन तब उस कची उमर मे मुझे लगा की मुझे भी दी की हेल्प करनी चाहिए. मैं एक झन को जानती थी जो मेरे स्कूल और कॉलोनी के बाहर चक्कर लगाता रहता था. बंदर जैसा दिखता था. पर कई बार मैने बड़ी बड़ी कार चलाते हुए देखा था.

सुना है उसका बाप बहुत मालदार था. इसलिए मैने दीपक. उसका नाम दीपक था. को थोड़ी लाइन देनी शुरू कर दी. वो साला तो खुशी से पागल हो गया. जब उसने साथ मे घूमने का ऑफर दिया तो मैं कुछ ना नुकर करके तैय्यार हो गयी. लेकिन साले को छूने नहीं दिया.

उस दिन उसने मुझे गोल्ड की रिंग गिफ्ट करी. मैं भी उसको धीरे धीरे पास आने देने लगी. हर बार गिफ्ट तो मिलता ही था. लेकिन अब मुझे भी उसके साथ लिपटने छिपटने में मज़ा आने लगा था. जब वो बाहों में भर के किस करता था तो उसका लंड उसकी पैंट मे खड़ा होकर चुबने लगता था. मैं भी 2-3 महीने में उससे काफ़ी कुछ सोना और गिफ्ट्स ले चुकी थी.

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एक रात मैं घर पर अकेली थी तो मैने उसे घर पर बुला लिया. बिल्कुल पागल सा हो गया था. मेरे बदन को चूमता रहा और मम्मो को चूस्ता रहा. शायद उसने इससे पहेले कोई नंगी लड़की नहीं देखी थी. हा. जब उसने मेरी बुर मे अपना लंड डाला तो दर्द बहुत हुआ.

पर वो झड़ भी बहुत जल्दी गया था इसीलिए मज़ा भी नहीं आया. उसके बाद मैने उसे कई बार चोदने दिया . पैसे भी लेती रही पर वो मुझे कभी भी सॅटिस्फाइ नहीं कर पाया. ऐसे ही कई साल निकल गये और मैं इंजिनियरिंग करने गाज़ियाबाद आ गयी.

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यहाँ का माहौल तो और खुल्ला हुआ था. और जल्दी ही मैने एक नया बाय्फ्रेंड बना लिया. बहुत मालदार आसामी था..हॉस्टिल मे कार रखता था. माल बहुत देता था पर साला पिछली लाइन का खिलाड़ी था. इसीलिए मैं बच के रहती थी. नहीं तो सुबह बड़ा दर्द होता था. इन्फेक्षन का भी ख़तरा रहता था.

उसके बाद कॉलेज पूरा करते करते और जॉब मे आने के बाद कितने आए और कितने गये पर मेरी हवस को कोई नहीं मिटा पाया. माल तो बहुत बटोरा पर ना पक्का प्यार करने वाला मिला ना कोई अछा दोस्त.

लेकिन वैसे मज़े मे हूँ. आजकल तो डेटिंग अप आ गये है . कोई ना कोई मुर्गा तो मिल ही जाता है. पर सच कहूँ. उस प्यार की तलाश है जो मेरी आग बुझा सके.. आजकल गुरूगाओं मे हूँ.. आप मे से है कोई मेरा हात थमानेवाला….?? हिन्दी सेक्सी स्टोरी पहली चुदाई

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