हलवाई ने चोदी मेरी मॉं

हेलो दोस्तो, मेरा नाम प्रताप है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मैं आज आपको अपनी एक सच्ची इंडियन ग्रूप सेक्स कहानी बताने जा रहा हूँ जो की मेरी मम्मी की है. मैं अपनी मम्मी से बहोत प्यार करता हूँ और वो मुझसे बहोत प्यार करती है इसलिए मैं उनकी बहोत रेस्पेक्ट भी करता हूँ पर दोस्तो आज मैं अपनी मा के बारे मे कहानी ले कर आया हूँ जो की बहोत ही मस्त है और सच्ची है क्योकि मैने ये खुद अपनी आँखो से देखा है.

दोस्तो, मेरी मा दिखने मे बहोत मस्त है एक दम पटाका है यानी की जो भी कोई उसे देखता है तो उसका ही हो कर रह जाता है क्योकि मेरी मा का रंग एकदम गोरा और उनका फिगर 34-32-38 है जिसको देख कर अच्छे अच्चो के लंड खड़े हो जाते है और सच कहु तो मेरी मा भी एक नंबर की चुदक्कड़ है क्योकि उन्हे तो हर रात चूत मे लंड लेने की आदत है और अगर एक ना मिले लंड तो वो अपनी हद से पार हो जाती है.

दोस्तो इसी तरह एक बार मैने अपनी मा को चुदते हुए देख लिया वो कब, कैसे और कहा हुआ उसके लिए अब मेरी आगे की कहानी पड़ते हुए अपने पानी को निकालने के लिए तैयार होजाए.

तो चलो शुरू करते है.

दोस्तो, सबसे पहले तो मैं अपनी मा का नाम बता दू, उनका नाम उमा है और ये कहानी तब की है जब मैं ** साल का था. मेरे पापा और मम्मी एक दूसरे से खूब प्यार करते है और मैं अपने मम्मी पापा के साथ रह कर बहोत खुश होता हूँ और हूँ भी क्यो ना आख़िर वो मेरे मा-बाप है और दोस्तो मेरी मा मेरे पापा से डेली रात को चुदति है और ये बात मुझे कैसे पता है क्योकि मेरा रूम साथ मे ही है और जब मा चुदति है तो बड़ी ही ज़ोर ज़ोर से सिसकारिया भरती है जिसकी आवाज़े मेरे कमरे मे आती है.

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दोस्तो, ऐसे ही कुछ समये बाद पापा को बिज़्नेस से रिलेटेड कुछ दिन के लिए बाहर जाना पड़ा तो मेरी मा के मूह पर उदासी छा गई और छाए भी क्यो ना आख़िर उनका पति कुछ दिन के लिए बाहर जा रहा था और उनके जाने से मा की चूत की तड़प जवाला मुखी का रूप लेने वाली थी इसलिए अब ना चाहते हुए भी मा को अकेले रहना पड़ रहा था पर मेरी मा भी किसी से कम नही थी क्योकि जब भी दूध वाले का आने का समये होता था.

तो वो तब नाइटी मे ही होती थी और मेरी मा हमेशा पेंटी नही पेहेन्ति थी इसलिए जब भी दूध वाला आता था तो मेरी मा उसके आगे खुद के जिस्म को ऐसे दिखती थी जिससे दूधवाले को मा की चूत दिखाई दे और दूधवाला भी ये सब देख कर अपनी धोती से लंड निकाल कर उन्हे दिखाता था और तब सीन देखने वाला होता था जब मा इधर उधर देख कर दूधवाले का लंड हाथ मे पकड़ लेती थी और फिर घर आ कर सीधा बाथरूम मे नहाने का कह कर बैठ जाती थी और चूत मे उंगलिया डाल कर अपना पानी निकालती थी और फिर करीब आधे घंटे बाद बाहर निकलती थी.

ऐसे ही कुछ दिन बाद हमारे पड़ोस मे एक कीर्तन था जो की हमारे घर के साथ वाले घर मे था और वाहा सिर्फ़ अंकल आंटी रहते थे जिनके साथ हमारी काफ़ी बनती थी और हमारी घर की छत भी जॉइंट थी इसलिए उन्होने हमे भी बुला रखा था और सुबह के वक़्त उन्होने हलवाई भी बिठा दिए थे.

सुबह जब हम उठे ही थे की अभी नहाए तक भी नही थे की घर के डोर पर नॉक हुआ और मम्मी ने उठ कर दरवाजा खोला तो देखा की साथ वाली आंटी थी तो उन्हे अंदर आने को कहा और फिर जब वो अंदर आई तो उन्होने मेरी मा से कहा – उमा ज़रा मैं काम से बाहर जा रही हूँ तो तुम क्या हलवाई पास वेट कर नज़र रख सकती हो उन पर क्योकि वो प्रशाद के लड्डू बना रहे है.

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मा – कोई बात नही आप जाओ मैं नहा कर उनके पास चली जाती हूँ.

आंटी- नही तुम ऐसे ही चली जाओ आ कर नहा लेना.

मा – ठीक है.

अब आंटी काम से बाहर चली गई और मा भी नाइटी मे ही हलवाइयों के पास उप्पर बैठ गई और मैं भी उप्पर जा कर पतंग उड़ाने लग गया पर जहा मैं था वाहा एक जाली लगी हुई थी जिस पर कुछ समान रखा हुआ था. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

पर मैं फिर भी नीचे देख सकता था इसलिए मैं अपनी मा को बार – बार देखा जा रहा था और मा भी उन हटते कटते हलवाइयों के सामने एक दम छोड़ी हो कर बैठी थी जिससे उनकी चूत के हल्के हल्के दर्शन उन हलवाइयों को हो रहे थे और वो इस दर्शन को पा कर पागल हो रहे थे.

तभी कुछ समये बाद मा किसी काम से कुछ देर के लिए बाहर आई तो उन्होने एक दूसरे से मा को चोदने का प्लान बनाया और बाथरूम मे जा कर पता नही कहा से कोई एक कीड़ा हाथ मे ले आए और जब मा वापिस आ कर उनके पास बैठी तो उन्होने ड्रामा करते हुए कीड़ा कीड़ा कहना शुरू कर दिया जिससे मा डर गई और फिर उन्होने मोके का फयडा उठाते हुए कीड़े को उनकी नाइटी मे डाल दिया जिससे मा को काफ़ी अजीब महसूस हुआ और उनकी बैठे-बैठे ही हालत खराब होने लग गई तो हलवाई ने उनसे कहा की नाइटी उतार कर कीड़ा निकाल लो कही वो काट ही ना जाए.

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