दोस्त ने गर्लफ्रेंड की सहेली की चुत दिलाई- 3

देसी हॉट गर्ल्स कहानी दो सहेलियों की चुदाई की है. एक पहली बार चुद रही थी और उसकी कामवासना उसके काबू से बाहर हो रही थी. मजा लें सील तोड़ चुदाई का.

हैलो फ्रेंड्स, मैं गुड्डू एक बार फिर से अपनी सेक्स कहानी में चुदाई का रस बिखेरने के लिए हाजिर हूँ.
देसी हॉट गर्ल्स कहानी के पिछले भाग
गाँव की गर्म लड़की से पहली मुलाक़ात
में अब तक आपने पढ़ा कि शब्बो ने कुच्ची को चुदाई के लिए बुलाया था.
शब्बो ने कुच्ची से कहा था कि वो मुझे भी साथ ले आए आज उसे जमीला की चुत चोदने के लिए मिलेगी.
मगर पूरी बात क्या थी, ये कुच्ची ने मुझे बाद में बताई.

अब आगे देसी हॉट गर्ल्स कहानी:

जब मैं कुच्ची के साथ शब्बो के गांव की तरफ चल पड़ा तब मैंने कुच्ची से पूछा- अब तो बता मादरचोद. ये सब हुआ कैसे?
कुच्ची- सुन बे भोसड़ी के … हुआ ये कि जब मेरी छमियां ने फोन करके मुझे सारी बात बताई और मुझे मिलने को बोली, तो मेरे दिमाग में आया कि यही सही समय है कि गुड्डू भी जमीला की चूत रस का स्वाद चख ले. तो मैंने अपनी छमिया को बोला कि अगर तुम चाहती हो कि मैं आकर तुम्हारी चूत को चाटूं, उसे चोदूँ … तो तुम्हें इस खेल में गुड्डू और जमीला को भी शामिल करना होगा. उसने बोला कि ये कैसे हो सकता है, जमीला रात में कैसे आ पाएगी. तो मैंने उससे कहा कि तुम अभी जाओ और जमीला को बोलो. अगर वो मान जाती है तो तुम उसकी अम्मी को बोलो कि मेरे घर में कोई नहीं है, मैं अकेली हूँ मुझे डर लगता है, इसलिए आज जमीला को मेरे पास मेरे घर जाने दो.

मैं कुच्ची की बात समझने की कोशिश कर रहा था.

तभी कुच्ची ने आगे बताया कि पहले तो शब्बो ने नाटक किया मगर मैंने साफ साफ कह दिया कि चुदना है, तो जमीला को भी बुला लो, वरना चूत में उंगली करके सो जाओ.
मैंने कहा- फिर?

कुच्ची- फिर आखिर में ये तय हुआ कि आज हम दोनों उन दोनों की चूत को चोदने वाले हैं.
मैंने कुच्ची से कहा- ये पक्का कर लेना भोसड़ी के कि तुम बस शब्बो को चोदोगे … और मैं जमीला को. कोई अदला-बदली का कार्यक्रम नहीं होगा.

कुच्ची ने कहा- क्यों हम एक ही कमरे होंगे तो बदल बदल के चोदेंगे, उसमें क्या है!
मैंने समझाया कि इसके लिए उन्हें राज़ी करना होगा, जो इतना आसान नहीं लगता. जल्दबाजी करना ठीक नहीं. ये सब अभी नहीं … अपनी अपनी चुत में लंड पेलो और बस वापस आ जाओ.

वो सर हिलाते हुए कुछ सोचने लगा मगर कुछ बोला नहीं.
फिर हम दोनों शब्बो के घर के पास पहुंच गए.

उधर एक खेत में साइकिल को गिराकर छिपा दी और वहां से पैदल ही शब्बो के घर के आ गए.

कुच्ची ने फोन किया और शब्बो को दरवाज़ा खोलने बोला. दरवाज़ा खुलते ही हम दोनों अन्दर हो गए.

अन्दर बहुत अंधेरा था, उजाले के नाम पर एक लालटेन जल रही थी जो बस खुद ही को रौशन किए हुई थी.

कमरे में दो खाट पड़ी थीं, जिसमें एक पर बिस्तर लगा था और रजाई खाट पर किनारे रखी हुई थी.
दूसरी खाट पर जमीला पहले से ही रजाई ओढ़ कर लेटी थी.

शब्बो पीछे से आई और मुझे हल्के से धक्का देकर और खुद जाकर खाट पर बैठ गई.

कुच्ची भी पीछे से आकर मेरे कान में बुदबुदाया- अबे जा भोसड़ी के … चोद दे साली को, वो तेरे ही इंतज़ार में लेटी है.

इतना बोलकर कुच्ची शब्बो को लेकर दूसरी खाट पर लेट गया.

मेरा लंड अभी से अकड़ने लगा था. मैंने देर न करते हुए रजाई उठाई और जमीला के पास लेटने लगा.

मुझे पास आते देख जमीला ने मजाकिया लहजे में कहा- अरे अरे … तुम कहां घुस रहे हो?
मैंने कहा- अभी तो बस बिस्तर में घुस रहा हूँ … आगे देखती जाओ कहां कहां घुसाता हूँ.

इतना कहते ही मैंने अपना पैर उठाकर जमीला के पैर पर रख दिया और उसका सर अपने हाथ पर रखा.
उसने इतने में मुझे गाल पर किस कर दिया.

मुझे किस करने के बाद वो सीधी लेट गई और मैं उसके ऊपर चढ़ गया.

मैंने उसके होंठों पर किस करना चाहा, तो उसने अपनी गर्दन को घुमा लिया जिससे किस उसके गाल पर हुआ.
मैं उसके गाल पर अपने होंठों रगड़ते हुए गर्दन, फिर कंधे तक चूमता चला गया.

अब उसने भी अपनी उंगलियां मेरे बाल में घुसा दीं और हमने होंठों से होंठों सटा दिए.
हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे.

कुछ देर तक होंठों को चूसने के बाद मैंने उसकी चूची पर हाथ रखा.
मेरे हाथ रखते ही वो उछल पड़ी और बोली- यहां गुदगुदी होती है.
मैंने कहा- अच्छा देखूं तो सही कि कितनी गुदगुदी होती है.

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इस बार मैंने उसकी चूची को जोर से मसल दिया जिससे जमीला की हल्की सी चीख भी निकल गई.
उसने फौरन मेरा हाथ हटा दिया. फिर मेरे गले में हाथ डाल कर मेरे होंठों को चूसने लगी.

मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ कर उसे चित कर दिया और मजबूती से पकड़ लिया.
अब उसका इस पकड़ से छूट पाना मुश्किल था.

मैं उसके कपड़ों के ऊपर से उसकी चूची पर ही अपना मुँह रगड़ने लगा और दांतों से निप्पल को काटने लगा.
वो जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी, इधर उधर उछलती और जोर लगाकर छूटने की कोशिश कर रही थी.

मैं उसकी चूचियों पर लगातार हमला किए जा रहा था.
वो बर्दाश्त नहीं कर पाई और खिलखिला कर हंस पड़ी.

शब्बो ने आवाज़ दी- अरे अरे जमीला, क्या कर रही है … मरवाएगी क्या?

मैंने भी मन में कहा कि हां साली मरवाने के लिए ही तो पड़ी है.

प्रत्यक्ष में मैंने जमीला को छोड़ दिया और उसने फिर से मुझे अपनी बांहों में जकड़ कर होंठों से होंठों सटा लिया और चूसने लगी.

शब्बो की बात का न उसने जवाब दिया न मैंने … और चुम्बन की वजह से न ही हम कुछ जवाब देने के मूड में थे.

शब्बो ने फिर से कहा- देख कुतिया, चीरो फाड़ो चोदो चुदवाओ … मगर आवाज बिल्कुल नहीं करना.

इस बार कुच्ची ने कुछ फुसफुसाया, तो शब्बो की हल्की हंसी के बाद गूं गूं की आवाज़ आने लगी. मैं समझ गया कि अब कुच्ची ने शब्बो के मुँह में लंड ठूंस दिया है.

अब मैंने भी जमीला के होंठों को चूसना बंद किया और रजाई के अन्दर ही जमीला के बगल में लेट कर अपनी पैंट और जांघिया को उतार दिया. जमीला का हाथ पकड़ कर लंड उसके हाथ में दे दिया.

फिर उसकी गर्दन से चूमते हुए कान की लौ को चूसा और जमीला के कान में धीरे से बोला- मेरे लंड को चूसो.

जमीला ने साफ मना कर दिया.
उसने कहा- मुझसे नहीं होगा, उल्टी हो जाएगी.

मुझे बुरा तो लगा मगर जमीला ने तुरंत अपनी सलवार की डोरी खोली और मेरा हाथ पकड़ कर अपने गीली चूत पर रख दिया.

मैंने भी सोचा कि चलो कोई बात नहीं अब इसकी चूत रस पीते हैं.

मैं झट से उसकी टांगों के बीच में हो गया और उसकी सलवार उतार दी.
उसने भी गांड उठा कर अपनी सलवार उतरवाने में मेरी मदद की.

अब मैंने उसकी चूत को पहले सहलाया, उस पर हाथ फेरा.
गीली चूत रस से भरी हुई थी.

मैंने अपना मुँह उसकी चूत में लगाना चाहा, तो उसने फौरन एक हाथ से अपनी चूत को ढक लिया.

मैंने उसके हाथ को हटाने की कोशिश की मगर जमीला ने मेरे चेहरे को पकड़ कर अपने मुँह के पास आने का इशारा किया.

मैं उसके ऊपर हो गया, पास आकर मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो उसने कहा- मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता.

मैं कुछ बोलता, इससे पहले जमीला ने मेरा लंड अपनी चूत में रगड़ना शुरू कर दिया था.

वो धीरे से बोली- अन्दर डाल दो.

उधर कुच्ची ने भी शब्बो की चुदाई शुरू कर दी थी, चूत से फट फच और खाट से चुरुर मुरुर की आवाज़ आ रही थी.
अंधेरे में मैं उन दोनों की चुदाई देख तो नहीं पा रहा था, बस आवाज से अंदाज़ा लग रहा था.

इधर जमीला भी अपनी चूत फड़वाने को मचल रही थी. लंड को चूत में ऐसे रगड़ रही थी कि जैसे खुद ही घुसा लेगी.
वो नीचे से कमर उठा कर लंड को उकसा रही थी.

मुझे उस पर गुस्सा आ रहा था क्योंकि उसने न अपनी चूची चूसने दी और न ही चूत चाटने दी.

फिर मैंने भी उसकी ताल से ताल मिलाना शुरू कर दी.

जैसे ही उसने लंड को चूत में सैट करके कमर को उठाया, उसी पल मैंने भी जोर का झटका दे दिया.
मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ आधा से ज्यादा चूत में समा गया.

‘ऊम्ममम आअअअ मर गई अम्मी रे …’
वो चीख पड़ी, फिर अपने ही हाथ से अपना मुँह दबा लिया, आंखें बड़ी करके माथे को सिकोड़ लिया.

उसके चेहरे पर दर्द साफ नजर आ रहा था.
मैं झुक कर उसके चेहरे के पास आ गया. उसका हाथ पकड़ कर हटाया और जमीला के होंठों से होंठ सटा दिए.
उसने मेरे होंठों मुँह में भरे और जोर से दांत गड़ा दिए.

साली ने दांत इतनी जोर से गड़ाए कि मेरे आंख में आंसू भर गए.

मैंने दर्द से कहा- ये क्या है?
जमीला- और तुमने नीचे क्या किया … तुम्हारा दर्द मेरे इस दर्द से कहीं कम है.

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ये कहते हुए वो अपनी चूत पर रखे एक हाथ को, जिसकी वजह से ही लंड चूत में पूरा न जा सका, हरकत में ले आई.

मैंने उसकी चूत से उसका हाथ हटाया और उसकी बाजू में हाथ डालकर कंधे के नीचे से हाथ घुमाकर उसके सर को हथेली पर रख लिया.
अब वो पूरी तरह से मेरी गिरफ्त में थी.

तभी मैंने ध्यान दिया कि कुच्ची और शब्बो का मामला शांत हो गया है … मतलब उनका पहला दौर अपनी चरम सीमा को पार कर चुका था.

मैंने भी अब देर न करते हुए अपने लंड को लगभग बाहर निकाला और झटके में पूरा लंड चूत में गाड़ दिया.
जमीला की दुबारा चीख निकल गई, उसने अपने दोनों पैर से मेरी कमर को जकड़ लिया.

मैं भी उसके होंठों को चूसने लगा.
जमीला अपनी सांस खींचे हुई एकदम शांत पड़ी थी.
शायद वो अपने दर्द पर क़ाबू पाने की कोशिश कर रही थी.

कुछ देर बाद जमीला अपने नाखून मेरे पीठ में चुभाते हुए होंठों की चुसाई में मेरा साथ देने लगी.
लंड पूरी तरह चूत घुसा हुआ था.

मैंने कमर को हिलाकर जमीला की पैक चुत चोदने की कोशिश की तो उसने भी अपनी पैरों की जकड़ से मुझे आजाद कर दिया.

बस फिर क्या था … मैंने लंड को चुत से सुपारे तक पूरा बाहर किया, थोड़ा सा लंड उसकी चूत की छेद में अटकाए रखा.
इस बार मैंने आराम से धीरे धीरे करके लंड को चूत में डाला.

जमीला ने भी पैर फैलाकर चूतड़ उठाते हुए लंड का स्वागत किया. अब उसकी उंगलियां मेरे सर के बालों को सहलाने लगी थीं.

मैंने धीरे धीरे चुदाई चालू कर दी.

करीब एक या दो मिनट इस तरह चुदने के बाद जमीला ने मुझे भी खींचा और खुद भी सर उठाकर किस करने लगी.

मैं उसका इशारा समझ गया था. मैंने चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी, तो उसने प्यार से मेरे गाल पर हाथ फेरे और गले में हाथ डाल दिया.
वो अपने चूतड़ उठा कर चुदाई का आनन्द लेने लगी.

इन सबसे मैं और उत्तेजित हो गया. अब मैंने पूरे जोश और रफ्तार में जमीला को चोदना शुरू कर दिया.

जमीला मादक सीत्कार के साथ हां हां हां ऊम्म ऊम्म करने लगी इधर खाट से भी चुर चर्र चुचू चर्र चर्र की आवाज़ आने लगी.

कुछ ही मिनट बाद जमीला अकड़ गई और उसकी चूत झड़ने लगी.
अब गीलापन होने से धक्का पेल ताबड़तोड़ चुदाई चालू हो गई.

हम दोनों की चुदाई से भी चट चट फक फक की आवाज़ आने लगी. सभी आवाजें एक साथ उस कमरे में अलग ही ध्वनियां उत्पन्न कर रही थीं.

मैंने भी अपना सर जमीला के बगल में तकिया पर सटा दिया था और उसे धकापेल चोदने में लगा था.

‘जियो मेरे शेर …’ कुच्ची की आवाज़ से मेरा ध्यान टूटा.
मैं रुक गया.

कमरे में शांति फैल गई थी, अब बस कुच्ची और शब्बो की हल्की हंसी सुनाई दे रही थी.

जमीला ने मुझे बांहों में भर लिया और धीरे से मेरे कान में बोली- उन पर ध्यान मत दो.
‘तुम सही कह रही हो.’
इतना बोलकर मैंने फिर से चुदाई शुरू कर दी.

जमीला की चूत अब कुछ सूखी सी लग रही थी, जिससे लंड को चूत में आगे पीछे करना थोड़ा मुश्किल हो रहा था.

मैंने धीरे धीरे चोदना जारी रखा.
कुछ ही देर में जमीला की चूत दुबारा गीली होने लगी.

इसी के साथ एक बार फिर घमासान तरीके से चुदाई शुरू हो गई.
इस बार जमीला भी मजे में टांगें फैला कर चुदने लगी थी.

कुछ देर तक ऐसे ही चोदने के बाद मेरे लंड ने जमीला की चूत को रस मलाई से लबालब कर दिया.
झड़ने के बाद भी मैंने लंड को चूत में ही रहने दिया.

इस घमासान चूत चोदने से मेरी सांस भी तेज चल रही थी.
मैं जमीला के ऊपर ही लेट गया.

जमीला ने भी मुझे अपनी आगोश में ले लिया. मैं कुछ देर तक ऐसे ही लेटा रहा.

लंड ने भी अब चूत से मुँह फेर लिया, मतलब सिकुड़ कर बाहर हो गया.

मैं भी अब जमीला के बगल में लेट गया हमने प्यार भरी बातें की.

मैंने जमीला को दुबारा चोदना चाहा तो उसने मना कर दिया.

वो बोली- आज के लिए बस इतना ही … लेकिन बाद में तुम कहोगे ‘बस’ … मैं बस नहीं कहूँगी.
मैंने कहा- देखेंगे, कौन क्या कहता है.

कुछ देर बाद फिर मैं और कुच्ची घर आ गए.

दोस्तो, अभी के लिए अन्तर्वासना से विदा चाहूंगा, हम फिर यहीं मिलेंगे.
और हां वो ईमेल के जरिए मेरी इस देसी हॉट गर्ल्स कहानी को अपना प्यार देना न भूलना.
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