फ्री की चूत यानी फ्री के मज़े

हेलो दोस्तो, मेरा नाम अजय है और मेरी उमर 22 साल है. मैं भी दिखने मे काफ़ी हैंडसम हूँ और मुझ पर काफ़ी लड़कियाँ मरती है. आज मैं आपके लिए एक स्टोरी लेकर आया हूँ जो की बहोत अच्छी है और सच्ची कहानी है. मुझे ये जान कर भी बहोत खुशी मिलेगी की आप मेरी स्टोरी को अप्प्रेसिअट करोगे.

ये कहानी बताने से पहले थोड़ा मैं आपको अपने बारे मे भी बता देता हूँ. मैं हैंडसम हूँ और ये बात मैं इसलिए नही बता रहा की कही तुम ये सोचने लग जाओ की अपने मूह मिया मिट्टू बन रहा है. पर हाँ ये सच है की मैं बहोत ही हैंडसम हूँ. मेरा रंग एक दम गोरा है और सिर पर ब्राउन बाल भी है.

मेरे लंड का साइज़ बहोत अच्छा है और एक चूत को अच्छे से सॅटिस्फाइड करने के लिए बहोत है. और ये भी मुझे लड़कियो ने ही बताया है जिनको मैं चोद चुका हूँ. और वो मुझसे दुबारा चुदने के लिए भी तड़पति रहती है. पर मैं एक ऐसा आदमी हूँ जो की किसी को एक बार चोद देता है तो उसे दुबारा नही चोदता हूँ.

चलो ये सब तो मैने स्टोरी बताने से पहले थोड़ा बहोत कुछ आपको बता दिया है और अब मैं आपको अपनी कहानी पर ले कर चलता हूँ. ये बात तब की है जब मैं स्टडी के लिए आया था और मैं किराए पर घर की तलाश कर रहा था. मैं उस शहर मे सिर्फ़ पढ़ाई के लिए आया था तो मुझे बस रहने के लिए एक कमरा ही चाहिए था जो की सस्ता भी हो और अच्छा भी हो.

इसलिए अब मैं स्टडी के बाद शाम को एक कमरा देखने के लिए निकल पड़ता था. मैं डेली ऐसे ही जा रहा था और हर जगह अपने लिए एक पर्फेक्ट कमरा देख रहा था. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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फिर एक दिन मैं किसी के घर गया और वाहा पर डोर बेल बजाई. मेरे डोर बेल बजाते ही एक आंटी बाहर को आई और मुझसे यहा आने की वजह पूछने लग गयी. इससे पहले की मैं कुछ बोलता इतने मे अंदर से एक बहुत ही खूबसूरत लड़की बाहर आई. मैं तो जेसे उसे देखते ही उस पर लट्टू हो गया.

जैसे ही उस आंटी ने अपनी बेटी को देखा तो उन्होने उसे उसके नाम से पुकारा और अपने पास आने को कहा. उनके ऐसे कहने पर मुझे उनका नाम पता चल गया. उनका नाम ममता था और वो दिखने मे बहुत ही ज़्यादा खूबसूरत थी. मैने जेसे ही उन्हे देखा था तो मेरा दिल तो उन पर लट्टू हो गया. वो दिखने मे कोई 25 साल तक लग रही थी.

खैर ये सब तो बाद की बाते है. अब उन्होने मुझे अंदर आने को कहा और मुझे बैठा कर मेरे बारे मे तोड़ा बहोत कुछ पूछने लग गये. वो जैसे जैसे पूछ रहे थे मैं भी वैसे ही उनकी बात का जवाब दे रहा था. फिर ममता भी हम सब के लिए चाय बना कर ले आई और हम सब चाय पीने लग गये.

पर मेरा ध्यान तो ममता पर ही था और उसका फिगर देख देख कर मेरा मूड खराब होते जा रहा था. तभी मैने आंटी से कहा की कमरा दिखा दो तो जैसे की मैं चाहता था की ममता मुझे दिखाए तो वैसा ही हुआ. आंटी ने ममता को कहा मुझे कमरा दिखाने को और फिर हम दोनो आगे चल पड़े.

मैं और ममता एक एक करके आगे बढते जा रहे थे और मेरा मन तो उसका फिगर देख कर उसको चोदने का कर रहा था पर मुझे डर भी लग रहा था की अगर मैने जल्दी कर दी और उन्होने अपनी मम्मी को बता दिया तो मेरा क्या होगा.

मैं इसी बात से डर के उनके साथ कमरा देखने लग गया और बस उनको ऐसे ही देखता रहा. मेरी नज़र बार बार उनके बूब्स पर जा कर रुक रही थी और मेरा मन तो कर रहा था की अभी के अभी उसके बूब्स को आज़ाद करके इसका सारा दूध पीलु.

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ममता शायद मेरी नज़र को पड़ चुकी थी और उसे भी साँझ आ गया था की मैं क्या चाहता हूँ पर करने और बोलने से डर रहा था. अब ऐसे ही वो एक एक करके सब दिखाने लग गयी और फिर बाद मे वो मुझसे पूछने लग गयी की कैसा लगा. तब मैने उससे कहा की ये बहोत ही अच्छा है.

तभी उसने मुझसे कहा की मेरी एक फ्रेंड का घर भी है जो की खाली रहता था अगर आपको ठीक लगता है तो मैं आपको वो भी दिखा दूँगी. मैं उसकी बात सुन कर तोड़ा खुश हो गया क्योकि मुझे लग रहा था की शायद अब जो मैं चाहता था वो होने वाला था. पर उस समये मैने ये कह दिया की अभी मेरे पास टाइम नही है आप फोन नंबर दे दीजिए ताकि मैं जब भी टाइम निकल पाया तो आपको फोन कर दूँगा.

मेरी बात सुन कर ममता ने लैंडलाइन नंबर दे दिया तो मैने उनका पर्सनल नंबर भी ले लिया और फिर ममता को स्माइल पास करके और आंटी को नमस्ते कह कर वाहा से निकल लिया.

फिर एक दिन मैने ममता के फोन पर फोन किया और उससे कहा की कल मिलते है और तुम कल मुझे वो घर दिखा देना. मेरी बात सुन कर वो भी मान गयी और फिर मैने फोन कट कर दिया. अब रात हो चुकी थी और मेरे माइंड मे बहोत कुछ चल रहा था की आख़िर क्या होगा, कैसे होगा, वो मना तो नही करेगी और यही सब सोचते हुए मेरी आँख लग गयी और मुझे सिदा सुबह ही आँख खुली.

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