दोस्त ने मेरे बड़े लंड से गांड मरवाई- 3

गे फ्रेंड सेक्स कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे दोस्त ने मुझे अपने घर बुलाकर गांड मरवायी. साथ वाले कमरे में उसकी बीवी सो रही थी.

दोस्तो, मैं हर्षद एक बार फिर से आपका अपने सेक्स कहानी में स्वागत करता हूँ.
ख़ास दोस्त को गांड मरवाने का शौक लगा
में अब तक आपने पढ़ा था कि भाभी खाना बनाने किचन में थी और हम दोनों दोस्त कमरे में टीवी देखने लगे थे. विलास मेरी जांघ पर हाथ फेरने लगा था.

अब आगे गे फ्रेंड सेक्स कहानी:

वो बोला- यार हर्षद आज बहुत दिल कर रहा है कि रात को तेरा लंड गांड में ले लूं.
मैंने कहा- हां यार विलास, मेरा भी मन कर रहा है तेरी गांड में अपना लंड डालने का, लेकिन ये कैसे होगा? भाभी तो तेरे पास ही सोएगी. उसे शक हो गया तो बहुत हंगामा खड़ा हो जाएगा.

विलास बोला- उसकी तुम चिंता मत करो. मैं वो सब संभाल लूंगा. तुम एक काम करो, ये बीच का दरवाजा अन्दर से बंद मत करना … मतलब कुंडी मत लगाना. मैं रात को तेरे पास आ जाऊंगा. फिर अपन मजा करेंगे.
मैं भी इस बात से खुश था और मैंने उसे हां बोल दिया.

अब हम दोनों खुश हो गए. हम दोनों ने एक दूसरे को अपनी बांहों में कस लिया और चूम कर अलग हो गए.

विलास मेरा लंड पैंट के ऊपर से ही रगड़ने लगा.
लंड पूरे तनाव में आ गया था.

मैंने विलास से कहा- यार अब बस कर … बाकी का रात को कर लेंगे.
किसी तरह से मैंने उसका हाथ हटाया.

इतने में भाभी ऊपर आ गयी.
दरवाजा खुला ही था.

वो हम दोनों से बोली- चलिए मैंने सबका खाना लगा दिया है.

उसकी नजरें फिर से मेरे तने हुए लंड से पैंट के उभार पर पड़ी.
उसने हंसकर अपने मुँह पर हाथ लगा दिया.

मैं शर्म के मारे पानी पानी हो गया था.

विलास उठकर नीचे चल दिया.
मैं भी उठा, तो भाभी ने मेरे तने हुए लौड़े का पूरा नजारा देखा.

उससे रहा नहीं गया और बोली- हाय राम … कितना बड़ा छुपाए हो.

मैं कुछ समझ पाता कि तभी भाभी ने बेझिझक मेरे नजदीक आकर मेरे पैंट पर हाथ रख दिया.
अभी मैं कुछ समझ पाता कि उसने पैंट के ऊपर से ही लंड दबाकर अंदाजा लगाना शुरू कर दिया.

मैं हक्का बक्का रह गया.
तभी वो शर्मा गई और नीचे चली गयी.

मैं पेशाब करके थोड़ा हल्का होकर नीचे चला गया.

सब लोग मेरा ही इंतजार कर रहे थे.
मैं बैठ गया.

भाभी ने खाना परोसा.
हम सब लोग खाना खाते खाते बातें कर रहे थे.

भाभी की नजर मेरे पर ही ज्यादा लगी रही थी.
वो बार बार मुस्कुराकर अपना निचला होंठ दांतों में दबा लेती थी और बहुत ही सेक्सी नजरों से मुझे देखने लगती थी.

मैं चुपचाप खाना खा रहा था.

थोड़ी ही देर में हम सबका खाना हो गया और हम सभी बाहर आंगन में रखी कुर्सियों पर आराम से बैठकर बातें करने लगे.

समय कैसे गुजरा, पता ही नहीं चला.

रात के दस बज चुके थे.
मैं उठकर विलास और पिताजी से बोला- अब मैं सोने जा रहा हूँ.
विलास बोला- हां हर्षद तुम जाओ. मैं और तेरी भाभी काम खत्म होने के बाद आएंगे.

मैं ऊपर अपने रूम में आया और दरवाजा बंद कर दिया.
मैंने कुंडी नहीं लगायी.

मैं अपने पूरे कपड़े निकालकर नंगा हो गया और लुंगी लगाकर लाईट बंद कर दी, सिर्फ नाईट लैंप ऑन करके बेड पर लेट गया.

मुझे नींद कहां आने वाली थी. मैं सेक्सी भाभी के ही बारे में सोच रहा था.

थोड़ी देर पहले उसने मेरे लंड को अपने नाजुक हाथों से दबाया था, वो सुनहरा पल सोचकर ही मेरे लंड में तनाव आने लगा था.

भाभी की सेक्सी फिगर 34-30-36 की और एकदम गोरी … कड़क चूचियां और बाहर निकली हुई गोल मटोल गांड, यही सब याद आ रहा था.
जब वो चलती है, तो लंड खड़ा कर देती है.

मेरा दिल कर रहा था कि कैसे भी करके उसे चोद दूँ. लेकिन मुझे ये गलत भी लग रहा था. वो मेरे अच्छे दोस्त की पत्नी थी.

थोड़ी ही देर के बाद विलास और भाभी के ऊपर आने की आवाज आ रही थी.

भाभी बोल रही थी कि देवर जी शायद सो गए होंगे. उनके रूम की लाईट बंद है.

दोनों रूम के बीच एक स्लाइडिंग विंडो भी थी. वो आधी खुली और पर्दे से ढकी थी. उसमें से लाईट चालू है या बंद है … समझ आ जाती थी.

विलास बोला- अरे वो थक गया होगा सफर करके आया है. चलो हम भी सो जाते हैं.

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फिर दरवाजा लॉक करने की आवाज आयी. मैंने आंखें खोलकर देखा तो उनके रूम की लाईट भी बंद हो गयी थी.

मैं नींद आने की राह देख रहा था लेकिन भाभी ने मेरी नींद चुरा ली थी.
ये सब सोचते सोचते मैंने घड़ी देखी, तो साढ़े बारह बज गए थे.

इतने में मेरे रूम का दरवाजा खुलने की आहट आयी.
मैंने देखा तो ये विलास ही था.

उसने हल्के से दरवाजा बंद कर दिया.

मैं पीठ के बल आंखें बंद करके सोने का नाटक कर रहा था.

विलास बेड के पास आया और नीचे झुककर उसने मेरी लुंगी में हाथ डालकर मेरा लंड बाहर निकाल लिया.
वो अपने दोनों हाथों से मेरा लंड सहलाने लगा.

मुझे बहुत मजा आ रहा था. अब मेरा लंड तनाव में आता जा रहा था.
मैंने हाथ पांव हिलाकर जागने का नाटक किया.

विलास दबी आवाज में बोला- मैं हूँ.
मैंने कहा- अरे यार विलास, भाभी ने देख लिया, तो लेने के देने पड़ जाएंगे.

विलास बोला- तुम भाभी की चिंता मत करो. वो आराम से सो रही है. दिन भर काम करके थक जो गयी है.

फिर उसने मेरी लुंगी निकाल कर साइड में रख दी और मेरा लंड अपने मुँह में भर लिया.

वो जोर जोर से लंड चूसने लगा. थोड़ी ही देर में मेरा लंड पूरे जोश में लोहे जैसा कड़क हो गया.

फिर विलास ने उसे अपने थूक से पूरा गीला कर दिया और मुझे नीचे आने को बोला.

मैं नीचे उतरकर खड़ा हो गया और अपना लंड हिलाने लगा.

विलास ने अपनी लुंगी निकाल कर फेंक दी और मेरी ओर गांड करके बेड पर सर रखकर अपनी पोजीशन में आ गया.

वो बोला- हर्षद अब जल्दी से अपना लंड डाल दे, मैं और नहीं रुक सकता.
मैंने भी लंड की नोक को गांड पर घिसा और कहा- हां यार विलास … अब मैं भी नहीं रुक सकता. बहुत दिनों बाद तेरी गांड मिली है.

ये कह कर मैंने विलास की गांड को दोनों हाथों तानकर गांड का छेद खुला कर दिया और ढेर सारा थूक अपने मुँह से छेद पर थूक दिया.

मैंने एक हाथ से लंड पकड़ा और उसका सुपारा विलास की गांड के छेद पर रख कर जोर का धक्का दे दिया. मेरा पूरा सुपारा अन्दर चला गया.

विलास जोर से चिल्लाया. वो सह नहीं पाया था. डेढ़ साल के बाद वो मेरा लंड ले रहा था.

मैंने झटके से उसके मुँह पर हाथ रख दिया और कहा- अबे चिल्ला मत … भाभी जाग जाएगी, तो सब लफड़ा हो जाएगा.
विलास दर्द से कराहते हुए बोला- यार आहिस्ता आहिस्ता डाल … हर्षद बहुत दर्द हो रहा है.

मैं बोला- हां विलास, मैं आहिस्ता ही डालूंगा … लेकिन थोड़ा दर्द तो तुझे सहना ही पड़ेगा.
विलास बोला- ठीक है.

अब मैंने लंड का दबाव उसकी गांड पर आहिस्ता आहिस्ता बढ़ाकर आधा लंड अन्दर पेल दिया.
फिर मैंने सुपारे तक लंड बाहर निकाला और मुँह से लंड पर थूक छोड़कर हाथ से लंड को लबालब कर दिया.

मैंने विलास को कहा- थोड़ा सहन कर लेना अब!
उसने हां कहा.

मैंने उसकी गांड को दोनों तरफ तानकर जोर का झटका मारा तो आधे से अधिक लंड गांड में घुस गया था.

विलास फिर से चिल्ला दिया.
मैं रुक गया और उसकी गांड को दोनों हाथों से सहलाने लगा.

विलास बोला- यार हर्षद, बहुत मजा आ रहा है.
मैं बोला- अभी तो और मजा आएगा, लेकिन तू अपना मुँह बंद रख!

मैं घबरा रहा था कि अगर भाभी जाग गयी तो क्या होगा.

मैं आहिस्ता आहिस्ता लंड अन्दर बाहर करने लगा और बीच बीच में ही लंड का दबाव बढ़ाकर अन्दर डालता रहा.

अभी भी दो इंच लंड बाहर था. इतने में मेरी नजर खिड़की के पर्दे पर गयी, तो मैंने देखा कि पर्दा हिल रहा था.
मुझे कुछ शक हो गया.
लेकिन मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और अपना काम जारी रखा.

मैं अब पूरा लंड बाहर निकाल कर अन्दर ठोक रहा था.
ऐसा करके मैंने पूरा लंड विलास की गांड में पेल दिया था.

विलास को बहुत मजा आ रहा था. उसके मुँह से सीत्कार निकल रही थी.
इससे मुझे और जोश आ रहा था और मैं लंड को तेजी से गांड में अन्दर बाहर करने लगा.

लंड गीला होने के कारण पचापच की आवाज आने लगी.
अब मुझे भी बहुत मजा आ रहा था.

कुछ देर बाद मैं अपनी चरम सीमा पर पहुंचने वाला था.
मैं जोर जोर से दस पन्द्रह धक्के देकर विलास की गांड में ही झड़ गया.
मैंने विलास की गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर अपने लंड पर दबाव बनाए रखा था.

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विलास भी मेरे लंड पर दबाव बनाए हुए था और गांड सिकोड़ कर लंडरस को अन्दर खींच रहा था.
उसने मेरे लंड को पूरा निचोड़ लिया था.

फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाल दिया.
लंड बाहर आते ही वीर्य गांड से बाहर आकर विलास की जांघों पर बहने लगा.

मेरा लंड भी लबालब हो गया था. जीरो वाट की लाईट में भी लंड चमकने लगा था.

विलास खड़ा हो गया और उसने अपनी लुंगी से गांड और जांघें साफ कर दीं. फिर मेरे लंड को अच्छे से पौंछ दिया और मेरे लंड के सुपारे पर जोर से चुम्बन करके खड़ा हो गया.

वो मेरे गले लग गया.
हम दोनों ने एक दूसरे को अपनी बांहों में कस लिया.
हम दोनों भी नंगे थे.

विलास बोला- यार हर्षद तेरे लंड ने मस्त मजा दे दिया. मेरी गांड की प्यास बुझा दी. तुमने तो मस्त गांड चुदाई की, मैं खुश हो गया हूँ. अब बहुत देर हो गयी है … तू सो जा, मैं भी जाता हूँ. नहीं तो तेरी भाभी जाग जाएगी. मुझे सुबह जल्दी काम से जाना भी है. मुझे आने में देर हो जाएगी.

ये कह कर उसने अपनी लुंगी उठाकर पहन ली और दरवाजा आहिस्ता से खोलकर अपने रूम में चला गया.

मैंने भी अपनी लुंगी लपेटकर ऊपर चादर ओढ़ ली और सो गया.

सुबह नौ बजे भाभी ने मुझे जगाया- उठो देवरजी, कितना सोते हो. रात भर नींद नहीं आयी क्या?

मैंने आंखें खोलकर देखा तो भाभी को देखकर शर्मा गया.
भाभी ने गाउन पहना था.

वो अभी अभी नहा कर आयी थी शायद … मस्त खुशबू आ रही थी.
उसके तने हुए स्तन और निपल्स को मैं गाउन के ऊपर से ही देख पा रहा था. उसके लंबे और काले बाल खुले हुए थे.
भाभी बहुत ही सेक्सी दिख रही थी.

भाभी इठला कर बोली- कहां खो गए देवर जी … और इस तरह से घूर कर क्या देख रहे हो. उठो जल्दी से.

वो मेरी चादर पकड़ कर खींचने ही वाली थी कि मैंने चादर को पकड़ कर रखा- भाभी तुम जाओ, मैं उठता हूँ.
भाभी बोली- नहीं अभी उठो.

वो चादर खींचने लगी.

इसी हाथापाई में भाभी मेरे ऊपर गिर गयी और उसके कड़क चूचे मेरी नंगी छाती पर दब गए.
साथ ही उसके गुलाबी होंठ मेरे होंठों पर लग गए.

भाभी ने ये सब अनजाने में या जानबूझ कर किया था, ये तो पता नहीं लगा.
लेकिन मैं बहुत रोमांचित हो गया था.

मैंने भी भाभी को अपनी बांहों में कस लिया.
भाभी कसमसाने लगी.
उसने भी हल्के से मेरे होंठों को चुम्बन कर दिया और अपने दोनों पांव ऊपर लेकर मेरे ऊपर लेट गयी.

मेरे लंड पर भाभी की चुत रगड़ खाने लगी थी. इसी वजह से मेरा लंड पूरे तनाव में आ गया था.

भाभी बहुत गर्म हो गयी थी और वो मुझे लगातार चुम्बन कर रही थी.

मैंने भाभी से कहा- उठो भाभी, विलास आएगा तो मुझे बहुत गालियां देगा. … प्लीज भाभी छोड़ो न!
भाभी बोली- वो तो सुबह ही बाहर गए हैं. अब कोई नहीं है देखने वाला. अपने दोस्त का बहुत ख्याल रखते हो ना … जरा अपनी भाभी का भी ख्याल रख लो.

मैंने कहा- भाभी मैं समझा नहीं, आप क्या कह रही हो?
भाभी बोली- अच्छा तो अब अनजान बनने का नाटक कर रहे हो देवरजी. मुझे सब पता है.

मैंने कहा- क्या पता है आपको?
तो भाभी बोली- रात में मैंने सब देखा है.

मैंने अनजान बनकर भाभी से कहा- क्या देखा भाभी आपने?
भाभी ने कहा- बहुत भोले बनने का नाटक कर रहे हो देवरजी.

भाभी ने मेरे लंड पर अपनी चुत जोरों से इधर उधर रगड़ी और बोली- इस निगोड़ी ने देखा है कि आपके मूसल ने अपने दोस्त की गांड चुदाई की है. मैंने पूरा सिनेमा देखा है.

वो हंसकर बोल रही थी.

मैंने शर्माते हुए भाभी से कहा- आप तो सो गयी थी ना?
भाभी बोली- क्यों नाटक सिर्फ तुम लोग ही कर सकते हो?

मैंने कहा- भाभी माफ करो मुझे. लेकिन अब उठो मुझे बहुत भूख लगी है और नहाना भी है. आप तो नहाकर आयी हो. ये सब अच्छा लगता है क्या?

तब जाकर भाभी उठकर नीचे खड़ी हो गयी. फिर भी उसने मेरी चादर खींचकर अलग कर दी.
मेरी लुंगी से लंड तनाव की वजह से वो बाहर आ गया था.

भाभी मेरा खड़ा लंड देख कर गर्म होने लगी.

अगले भाग में लिखूंगा कि मैं भाभी को किस तरह से चोदा. आप गे फ्रेंड सेक्स कहानी पर मेल जरूर करें.

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गे फ्रेंड सेक्स कहानी का अगला भाग:

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