दोस्त की दीदी ने मुझे पटा कर चूत चुदाई

मेरा चड्डी को भी दीदी ने निकाल दिया. मेरे टनटनाते लंड देख कर दीदी ने कहा- इतना लंबा मोटा लंड… इससे तो मेरी चूत का बुरा हाल हो जाएगा.
दीदी ने जल्दी से मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और लपक के चूसने लगीं. बहुत देर तक लंड चूसने के बाद मेरा वीर्य दीदी के मुँह में झड़ गया.
अनीता दीदी ने देर न करते हुए सारा वीर्य गटक लिया और पी गईं. मेरा लंड सुस्त हो गया.

मैंने दीदी की चड्डी निकाली. उनकी चूत पे हल्के हल्के बाल थे. वो बाल दीदी की चूत पे मस्त लग रहे थे. मैं उनकी चूत को चाटने लगा. दीदी के मुँह से ‘आह आह सीईईई सीई आओओओ इस्स हम्म चोओओओद चोद दो मुझे.. मेरी चूत को चोद दो.. बहुत दिनों की प्यासी है.. हुउउउ ईस ईस्स…’

बस दीदी झड़ गईं और उनका नमकीन सा पानी मैं गटक गया. थोड़ा बेकार सा लगा, लेकिन मजा आ गया.

अब मैंने अपनी बनियान भी उतार दी और दीदी को पलंग पे लेटा कर उनसे चिपक गया. मेरा लंड उनकी चूत पे रगड़ रहा था.
दीदी बोलीं- संजय अब जल्दी से चोद दे मुझे… बहुत दिनों से तड़प रही हूं.

जैसे ही मैंने अपना लंड दीदी की चूत पे रखा, तभी मेरा फोन बज गया. मैंने कहा- अब कौन मर गया.

मैंने सोचा किसी का फोन होगा तो नहीं उठाऊँगा, लेकिन देखा तो फोन राजू का था. मेरी तो गांड फट गई कि कहीं आ तो नहीं गया. मैंने अनीता दीदी को जल्दी से कपड़े पहनने को बोल दिया दीदी फटाफट कपड़े पहनने लगीं.

क्या बताऊँ दोस्तो, खड़े लंड पे अगर चूत सामने हो और कोई रूकावट हो जाए, तो कैसा महसूस होता है.
मैंने फोन उठाया तो बोला- क्या रे, तूने फोन किया था?
इतना सुनते ही थोड़ी जान में जान आई मैंने कहा- हां कहां मर गया था बे कमीने.. कब का फोन किया था. पत्ते खेलने में ज्यादा बिजी था क्या?

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मैंने कहा- दीदी घर पर आई हैं, उनको पैसे चाहिए.
वो गुस्सा हो गया और बोला- जब देखो पैसे माँगती रहती हैं. उनको बोल कि मेरे पास पैसे नहीं हैं.
उसकी बात सुनकर मैं चुप रहा तो वो फिर से बोला- उनको बोल दे, मुझे टाईम लगेगा, वो वहीं पे रूके.. अभी आकर उन्हें पैसे दे दूँगा.
मैंने कहा- ठीक है.

हम दोनों अपने काम में लग गए. फटाफट से हम दोनों ने अपने कपड़े उतारे और दीदी मेरे लंड को चूसने लगीं. मुझे इतना मजा आ रहा था कि ब्यान नहीं कर सकता. फिर दीदी की चूत में मैंने जीभ डाल दी. दीदी तड़प उठीं और उन्होंने अपनी चूत को मेरे मुँह में दबा दिया.
दीदी चुदासी सी होकर बोलने लगीं- संजय मेरी चूत को फाड़ दो.. इस चूत को इतना चोदो कि इसकी तमन्ना पूरी हो जाए. अब और मत तड़पाओ चोद दो मुझे चोद दो..

अब मैंने भी देर ना करते हुए अपना 7 इंच का लंड दीदी की चूत पर रख कर एक जोरदार धक्का दे मारा. दीदी की चीख निकल गई- उई मां मर गई आ आ इइइ इस्स..

मेरा 3 इंच लंड दीदी की चूत में चला गया था. दीदी बहुत टाइम से चुदी नहीं थीं.. तो उनकी चूत टाइट हो गई थी. मैंने एक और जोर का धक्का मारा. दीदी की फिर से चीख निकल गई. मेरा थोड़ा लंड बाहर रह गया था. दीदी की आंखों से आंसू बहने लगे.
मैंने दीदी से कहा- ज्यादा दर्द हो रहा है तो मैं निकाल लेता हूं.
लेकिन दीदी कहने लगीं- ये खुशी के आंसू हैं. बहुत दिनों के बाद चुदी हूँ, मुझे जोर जोर से चोदो.. आज इस साली चूत को शांत कर दो.. फाड़ दो मेरी चूत को..

मैं जोर जोर से अनीता दीदी को चोदने लगा.
दीदी आहें भरने लगी- आंह अंह अंह अअअम उम्म्ह… अहह… हय… याह… अअअअ चोओओदो मेरी चूत को.. चोद दो चोद दो.. फाड़ दो इस चूत को इतना चोदो कि साली शांत हो जाए.. आह उइइ इइइइइ आई ओओओओ चोदो.

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मेरा लंड दीदी की चूत की गहराइयों में खो गया था. दीदी के गर्भाशय से जब भी मेरा लंड टकराता, तो दीदी मुझे कस के अपनी बांहों में जकड़ लेतीं. ऐसा लगता कि दीदी की बांहों में मेरा दम निकल जाएगा.
दीदी अभी तक दो बार झड़ चुकी थीं. लेकिन अभी मेरा झड़ने वाला नहीं था. दीदी को मैं बहुत जोर जोर से चोदे जा रहा था. दीदी मजे से अपनी चूत चुदवा रही थीं. दीदी ने कहा- आह.. जिन्दगी में ऐसी चुदाई कभी नहीं हुई.

मैं अनीता दीदी को जोर जोर से चोदे जा रहा था. अब मैं भी झड़ने वाला था. अनीता दीदी की चूत ने फिर पानी छोड़ दिया. उतने में मैंने अनीता दीदी को बोला- मैं भी झड़ने वाला हूं.
अनीता दीदी ने कहा- मेरी चूत में अपना माल छोड़ दो.
मैंने कहा- कहीं बच्चा ठहर गया तो?
दीदी बोलीं- तो क्या हुआ मेरे बच्चे के बाप बन जाओगे.

मैंने कहा- फिर मैं बाहर निकाल देता हूं.
अनीता दीदी ने कहा- मैं मजाक कर रही हूं.. मेरा ऑपरेशन हुआ है. मैं मां नहीं बन सकती.

फिर दस पन्द्रह धक्के मारने के बाद मेरे वीर्य की पिचकारी अनीता दीदी की चूत में भर गई. तभी दरवाजे की डोर बेल बजी. हम दोनों को तो जैसे सांप सूंघ गया.

मैं जल्दी से अनीता दीदी से अलग हुआ और अनीता दीदी को बोला- अपने सारे कपड़े लेकर बाथरूम में जल्दी जाओ.

अनीता दीदी अपने सारे कपड़े लेकर बाथरूम में भाग गईं, लेकिन अनीता दीदी की चूत से मेरा वीर्य बिस्तर से लेकर बाथरूम तक फर्श पर टपकता गया. मेरे वीर्य के निशान फर्श पर साफ दिख रहे थे. मैंने ध्यान नहीं दिया, मैंने भी जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहन के दरवाजा खोला तो मालूम हुआ कि कोई शरारत से या गलती से डोरबेल को बजा गया था.

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