दोस्त की बीवी की चुत की कामवासना

मैं अन्दर गया लेकिन अब मेरा भी मन स्वाति को चोदने का करने लगा था.. इसलिए मैं भी जल्दी से अन्दर घुस गया.
मैंने पूछा- रवि की मम्मी भी नहीं हैं क्या?
उसने कहा- मम्मी जी बाहर गई हैं.
मतलब घर पर कोई नहीं था.

फिर स्वाति ने मुझे पानी पिलाया और कहा- उस रात के लिए सॉरी.
तो मैंने कहा- अपने उस दिन गलत किया था.
उसने कहा- पता नहीं मेरे मन को क्या हो गया था.
मैंने कहा- ये सब रवि के साथ किया करिये.
उसने कुछ नहीं कहा.

लेकिन मेरा मन तो स्वाति को चोदने लिए कर रहा था तो मैं उसके पास चला गया और उससे बोला कि तुमको कोई प्रॉब्लम है.. मुझे बताओ.. मैं शायद तुम्हारी मदद कर सकूँ.
तब भी वह चुप रही और एकदम से उसने मुझे किस करने चालू कर दिए.
मैंने मना भी किया.
उसने कहा- आपको तो मेरी मदद करनी है ना.
मैं बोला कि ये कैसी मदद हुई?
उसने कहा- आपको मेरी कसम.. मुझे मत रोको.. अभी सिर्फ जैसा मैं कहती हूं वैसा करो.
मैंने कहा कि नहीं.. ये रवि का साथ धोखा होगा.

फिर भी वह नहीं मानी और मुझे किस करने लगी. बस दोस्तो अब तो सारी हदें पार हो चुकी थीं, सो मैंने भी उसका साथा देना शुरू कर दिया.

मैं उसके होंठों पर किस करने लगा. इस वक्त जोश इतना ज्यादा चढ़ गया था कि क्या बताऊं. मैं उसके दूध इतने जम के दबाने लगा कि वो आवाज करने लगी- आह.. दर्द हो रहा है.. आराम से करो..
मैंने कहा- तुझे चुदने का बहुत शौक है ना तो अब सहन कर साली..

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हम दोनों ने एक-दूसरे को बांहों में भरकर देर तक चूमाचाटी की, माहौल गरमाने लगा. मैंने भाभी के कपड़े खींचते हुए उतारने शुरू किए, जिस कारण उसकी ब्रा फट गई लेकिन मैं रुका नहीं.. मैं पूरे जोश में था.

फिर स्वाति भाभी बोली- जल्दी से मेरी चुत में अपना लंड डाल कर चोद दो.. नहीं तो रवि आ जाएगा.
मैंने भी देर न करते हुए स्वाति को लेटा दिया और अपना लंड उसकी चुत पर रगड़ कर डालने लगा. लंड उसकी चूत में जा ही नहीं रहा था.

मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने कहा कि मेरी बहुत टाइम से चुदाई नहीं हुई है. उसकी इस बात से मैं चौंका कि क्या रवि भी इसको नहीं चोदता है. फिर मैंने सोचा कि फिलहाल तो भाभी की नंगी चुत की खाज मिटाने में ही भलाई है.. इसलिए मैंने सोचना बंद किया और उसकी चूत में लंड पेलने की सोचने लगा.

जब लंड नहीं घुसा तो मैंने अपने लंड पर क्रीम लगाई और फिर अपना लंड उसकी चुत में पेल दिया. जैसे ही मेरा लंड अन्दर गया, स्वाति ने इतनी जोर से आवाज की कि मुझे अपना हाथ उसके मुँह पर रखना पड़ा.

थोड़ी देर बाद जब वो शांत हुई तो मैंने जोर जोर से उसकी चुत में लंड पेलना चालू किया. स्वाति को बहुत मजा आ रहा था और वो भी अपनी गांड उठा कर मेरा पूरा साथ दे रही थी.

कुछ देर के बाद मैंने अपने दोस्त की बीवी को अपने ऊपर ले लिया और लंड पर बिठा कर उछलने को कहा. अब मेरा पूरा लंड स्वाति की चुत में जा रहा था और स्वाति भाभी मस्ती से अपनी चूचियों को उछालते हुए अपनी चुदास शांत करवा रही थी.

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इसी बीच वह दो बार झड़ गई और अब ऊपर चढ़ने का मेरा नम्बर था. कुछ देर धकापेल चुदाई हुई. मैं भी झड़ने को हुआ तो मैंने पूछा कि मेरा आने वाला है.. किधर लोगी?
उसने कहा- मेरे अन्दर ही गिरा दो.
मैं दोस्त की बीवी की चुत में ही झड़ गया और हम दोनों कुछ देर बाद अलग हो कर तैयार हो गए.

भाभी की चुदाई के मजे लूटने के बाद मैं अपने घर आ गया.

उसके बाद से मैंने अपने दोस्त की बीवी को कई बार चोदा है. लेकिन मुझे अब तक ये नहीं मालूम चल सका कि रवि के अलावा वो मुझसे क्यों चुदती है. अब तो मैंने भी उसकी चूत चोदने के अलावा कुछ भी सोचना और पूछना बंद कर दिया. जो भी हो, मुझे भाभी को चोदने में खूब मजा आता है.

कैसी लगी आपको मेरी चुदाई की कहानी.. मुझे आप ईमेल जरूर करें.

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