दोस्त के साथ मिल कर हाईफाई औरत की चूत गांड की चुदाई की-3

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अब तक आपने पढ़ा..
सारिका के संग चूत चुदाई का खेल जारी था और हम दोनों एक-एक बार ‘मुँह चोदन’ से स्खलित हो चुके थे। इसके बाद मैंने सारिका की गांड के छेद में उंगली कर दी थी।
अब आगे..

सारिक अपनी गांड के छेद में उंगली पाकर एक प्रश्नवाचक अंदाज़ से मेरी आँखों में देखने लगी।
मैंने कहा- बहन की लौड़ी, अभी तो मैं इसको चैक कर रहा हूँ, इस फूल के लिए तो मैंने ख़ास इंतजाम किया है।
वो खिलखिला कर हंसती हुई बोली- हहह्हा ख़ास इंतजाम.. वो क्या मेरे चोदू राजा?

मैंने उसे छोड़ा और थोड़ी दूर पड़े अपने बैग को उठा कर बिस्तर पर रख लिया। वो एकटक मेरी तरफ देख रही थी, तो मैंने अपना बैग खोला और उसमें से एक स्पेशल सेक्स के लिए बना हुआ तेल निकाल कर पास रख लिया और साथ ही एक बैटरी पर चलने वाला वाईब्रेटर निकाल कर पास रख लिया और फिर एक बिजली पर चलने वाली सेक्स मशीन भी निकाल ली।

इतना सब देख कर सारिका का मुँह खुला रह गया और वो ये सब देखती हुई बोली- आज तो मेरी जान लेने का इरादा है क्या?
मैंने सेक्स मशीन को बिस्तर पर फिट करते हुए कहा- जान तो नहीं.. परन्तु जान की गांड जरूर लूँगा।

अब तक सारिका भी मेरे पास आकर मेरे इन औजारों को देखने लगी थी, फिर सारिका ने कहा- ऐसी मशीनों और लंडों के बारे में मैंने पहले सुना बहुत था, परन्तु देखा आज पहली बार है।
मैंने उससे कहा- फिर तो तू बहुत भाग्यशाली है, जिसने पहली बार ही देखा है। वो भी आज तुम खुद अपने अन्दर लेकर और महसूस करके देखने वाली हो। बहुत सी औरतें और लड़कियां ऐसी हैं, जिन्होंने देखा तो बहुत है.. परन्तु अन्दर लेने का उन्हें कभी सौभाग्य नहीं मिला

हम ऐसे ही बातें कर रहे थे कि बातों-बातों में मैंने मशीन को फिट कर दिया। अब मैंने उसके होंठों पर एक चुम्बन लिया और फिर उसको कुतिया की पोजिशन लेने को कहा।

वो तुरंत कुतिया बन गई और मैंने पीछे आकर पहले उसकी चूत पर एक चुम्बन लिया और उसकी गीली हो चुकी चूत के अन्दर पहले अपनी जीभ डाल कर चैक किया.. चूत काफी गर्म थी।

इसके बाद मैंने अपनी एक उंगली को उसकी चूत के अन्दर डाल कर अन्दर-बाहर किया। फिर मैंने पास पड़ी तेल की शीशी से थोड़ा सा तेल लिया और कुछ उसकी चूत और बाकी काफी सारा उसकी गांड के छेद पर लगा दिया। फिर अपनी उंगलियों को उसकी गांड के अन्दर करके अच्छी तरह से उसकी गांड तेल से तर कर दी। इस प्रकार मैंने उसकी गांड के अन्दर हर हिस्से तक तेल पहुंचा दिया।

फिर मैंने उससे कहा- अब बोल मेरी कुतिया, कहाँ तक झेल सकती है साली रांड..!
वो बोली- साले तुम्हारी इस घड़ी का इंतज़ार तो मैं कितने महीनों से कर रही हूँ। तुम तो बस करते जाओ.. जहाँ मुझे लगेगा, मैं इशारा कर दूंगी तब तुम खेल रोक देना। आज तो तू मेरी माँ चोद दे साले, मेरा हर अंग तेरी चुदाई का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है।
मैंने कहा- तो ले फिर सम्भाल साली कुतिया.. ले मेरा पहला वार झेल भैन की लौड़ी।

यह कहते हुए मैंने बन्द वाईब्रेटर उसकी चूत में डाल दिया। वो पहले तो थोड़ा कसमसाई और उसने एक सिसकी ली।

तभी मैंने वाईब्रेटर के स्विच से उसको आन कर दिया और वो थोड़ा स्पीड से उसकी चूत के अन्दर वाइब्रेशन देने लगा।
अब तो सारिका एकदम से उचक गई और जोर-जोर से सिसकारने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह…
मैंने वाईब्रेटर की एक नम्बर स्पीड और बढ़ा दी। सारिका जोर-जोर से सिसकने लगी और वो मस्त होकर वाईब्रेटर से चूत चुदवाने लगी।

तभी मैंने उसके पीछे जाकर सेक्स मशीन को उसकी गांड पर फिट कर दिया और उसकी गांड पकड़ कर सारिका को सेक्स मशीन पर धीरे से बिठा दिया।

अब मैंने सेक्स मशीन के लंड को उसकी गांड के हल्का सा अन्दर डाला और फिर उसे चालू कर दिया।

सारिका के शरीर पर मैंने सेक्स मशीन की बैल्ट बांध दी थी, इसलिए वो अगर हिलती भी तो सेक्स मशीन का लंड उसकी गांड से बाहर नहीं निकल सकता था।

सारिका की चूत और गांड दोनों मशीनी लंडों से चुद रही थीं। वो अब मजा लेकर जोर जोर से अपनी चूत और गांड को चुदवाते हुए सिसक रही थी।

मैंने उसके चूचे मसलते हुए कहा- क्यों साली.. कैसा लग रहा है?
सारिका बोलने लगी- उई आह साले.. तूने तो माँ चोद दी मेरी.. आह उई.. चुद गई रे, साले अपना लौड़ा मेरे मुँह में डाल.. कुतिया बना मुझे अपनी.. आह.. चुद गई मेरी गांड.. साली गांड भी इलेक्ट्रोनिक हो गई.. आह सी सी.. उई उई.. हां आह्ह.. हां अह..

तभी मैंने उसके आगे खड़ा होकर अपना लंड उसके मुँह में दे दिया। सारिका अब एक साथ तीन लंडों का मज़ा ले रही थी। मैं भी उसे गालियाँ दिए जा रहा था।

सारिका के तो जैसे होश गुम हो गए थे और वो मस्त होकर बहुत तेज-तेज मेरा लंड चूस रही थी।
मैं उससे कह रहा था- ले साली.. चुद कुतिया मादरचोद.. ले मेरा लौड़ा खा.. ले चुद आज तीन-तीन लौड़ों से रांड.. बहन की लौड़ी.. अहह सी सी उफ़.. ले ले.. आज अपनी जवानी का मज़ा.. साली बहन की लौड़ी… ले निकाल अपनी जवानी का रस आज बहनचोदी… उई मादरचोदी… आज तो तेरी गांड फाड़ दूँगा।

उसने झट से मेरा लंड अपने मुँह से बाहर निकाला और बोली- अह्ह्ह फट गई कुत्ते मेरी गांड.. बज गई मेरी.. आह्ह आह्ह्ह सी सी.. बस बस.. रोक दो आह्ह आह उई उई..

मैंने तुरंत आगे से वाईब्रेटर निकाल कर अपना खड़ा लौड़ा उसकी चूत में डाल दिया। ऐसा करने से उसे और मुझे दोनों को और मजा आने लगा। वो सेक्स मशीन से अपनी गांड भी मरवा रही थी।

सारिका को कुछ देर तक ऐसे ही चोदने के बाद मैंने उसे घुमा कर, उसकी बैल्ट खोली और उसकी चूत में मशीनी लंड डलवा दिया और मैं पीछे से उसकी गांड मारने लगा।

अब हम दोनों बहुत तेज-तेज ताबड़तोड़ चुदाई करने लगे। कुछ ही देर बाद उसने जोर-जोर से सिसकते हुए जोर से चीख मारी- आह अह्ह उईईई चुद गई रे..

इसी के साथ ही सारिका ने अपनी चूत से काफी सारा पानी छोड़ दिया.. जो मशीनी लंड से होता हुआ नीचे गिरने लगा।

तभी मैंने भी अपना माल उसकी गांड में ही छोड़ दिया। ऐसे हम दोनों का स्खलन हो गया। उसके बाद ऐसे ही दो बार और चुदाई हुई और फिर हम दोनों एक साथ सो गए।

दूसरे दिन मैंने अपने दोस्त अंकुर को सारिका के बारे में बताया और उससे बोला- मैं आज रात को डिनर पर आप दोनों को मिलवाना चाहता हूँ।

अंकुर ने आने के लिए तुरन्त ‘हाँ’ बोल दी। मैं आपको थोड़ा अंकुर के बारे में बता दूँ। अंकुर मेरा दोस्त है, काफी ऊँचा लम्बा मेरे जैसा है। उसका स्टेमिना भी काफी है। बढ़िया फिगर का मालिक है, हम अपने सभी राज़ एक-दूसरे से शेयर कर लेते हैं।

मैंने डिनर पार्टी एक होटल में रखी, वहां पर मैंने हम तीनों के लिए एक सुइट भी बुक किया हुआ था।

दूसरे दिन रात को ठीक नौ बजे मैं और सारिका उस होटल में पहुँच गए और कुछ ही देर बाद वहां पर अंकुर भी आ गया।

मैंने सारिका और अंकुर को मिलवाया, वो दोनों हाथ मिला कर आपस में मिले। हम सभी बाहर लॉन में बैठ गए। होटल की तरफ से वहां हमारे लिए स्पेशल इंतजाम किए गए थे। हम बैठ कर आपस में नार्मल बातें करने लगे।

कुछ ही देर बाद मैंने कहा- यार अंकुर, रात तो मजा आ गया, अगर तुम साथ होते तो यार और मजा आता।
अंकुर बोला- क्यों ऐसी क्या बात हो गई, क्यों सारिका जी, क्या हो गया रात में?
सारिका मुस्कुराते हुए बोली- इनसे ही पूछ लो आप!

तो मैंने कहा- क्यों साली, अब इनसे पूछ लो.. बता दे न अब। अंकुर यार रात मैंने और सारिका ने बहुत मस्ती की।
अंकुर बोला- अरे बताओ भी न.. कैसे मस्ती की.. ऐसे ही ‘मस्ती.. मस्ती..’ किए जा रहे हो।
तभी बीच में सारिका बोल पड़ी- आज रात को आप भी हमारे साथ आ जाना, पता चल जाएगा।
मैंने और सारिका ने हाथ से हाथ ‘हाई फाईव’ करके उसे आने का निमंत्रण दे दिया।

खैर रुकना तो हमने वहीं उसी होटल में था तो हमने वहां काफी देर तक मस्ती की और डिनर किया। उसके बाद हम अपने रूम में जाने लगे।
मैंने अंकुर से कहा- हमने तुम्हारे लिए भी यहीं रुकने का इंतजाम किया है.. इसलिए घर फ़ोन कर देना कि तुम आज घर नहीं आ रहे हो।

अंकुर ने अपने घर फोन कर दिया और वो भी हमारे साथ ही रुक गया।

रूम में पहुँच कर हम सभी ने ऊपर के कपड़े लगभग उतार ही दिए थे, बस सब अन्दर पहनने वाले कपड़ों में ही रहे गए थे।
सारिका नहाने के लिए वाशरूम में जाने लगी.. तो मैंने उसकी कलाई को पकड़ लिया और बोला- साली आज की रात सभी एक साथ नहायेंगे।
वो हँसते हुए बोली- हाँ जरूर.. आ जाओ न फिर.. ऐसे क्यों पकड़ रहे हो राजा..!

मैंने अंकुर को आँख मारी और फिर हम सभी एक साथ ही वाशरूम में घुस गए। सुइट का वाशरूम काफी बड़ा और खुला सा था।

जैसे कि मैंने बताया सभी ने ऊपर के कपड़े तो बाहर ही उतार दिए थे। अब अन्दर घुसते ही मैंने सारिका की समीज़ को उतार दिया।

अब वाशरूम से ग्रुप सेक्स वाली चुदाई समारोह का आगाज होने वाला है।

आप सभी को कहानी कैसी लग रही है.. प्लीज़ मुझे मेल कीजिएगा.. धन्यवाद।
[email protected]
कहानी जारी है।

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