दोस्त की बहन के साथ बितायी एक रात- 1

सेक्सी लड़की के घर जाने का मौक़ा मुझे मिला. वो मेरे दोस्त की चचेरी बहन थी जिसे मैंने बहुत पहले से चाहता था पर अपनी इच्छा को उसके सामने जाहिर नहीं कर पाया था.

मेरे प्यारे दोस्तो और प्यारी-प्यारी, सोनी-सोनी, गर्मागर्म भाभियो,

मैं फिर आया हूँ अपनी एक और चुदाई स्टोरी लेकर जिसे लिखने की इजाजत मुझे मेरी दोस्त पायल ने आखिरकार दे ही दी।
बहुत समय से मैं पायल से उसके और मेरे बीच बने सम्बन्ध को लिखने की अनुमति मांग रहा था पर वो सेक्सी लड़की इसको लेकर बिल्कुल भी सहज नहीं थी।

जैसा कि मैंने पहले भी बताया है कि मैं अपनी किसी भी कहानी को तभी लिखता हूँ जब मैं अपने पार्टनर से उसके और मेरे बीच बने सम्बन्ध के बारे में लिखने की अनुमति ले लेता हूँ।
पार्टनर से अनुमति मिलने के बाद ही मैं उसके और मेरे बीच हुए हर क्रिया-कलाप को विस्तार में लिखता हूँ क्यूंकि मैं नहीं चाहता कि कहानी लिखने के कारण मेरे और मेरे पार्टनर के सम्बन्ध भंग हों।

मेरी पिछली कहानी थी: बुआ की चुत गांड चोदकर मजा लिया

चलिए, कहानी पर आते हैं।
मैं आपको बता दूँ कि यह घटना मेरे साथ दो साल पहले ही घटी है और पायल मेरे एक घनिष्ठ मित्र तरुण की चचेरी बहन है।

आशा है कि सभी दोस्तों ने अपने अपने लण्ड को तैयार होने का इशारा कर दिया होगा.
और सभी भाभियाँ भी अपनी मुनिया को एक दो बार तो मुट्ठी में लेकर मसोड़ ही चुकी होंगी क्यूंकि आज आपका ढेर सारा पानी निकलने वाला है।

तो दोस्तो और भाभियो, यह है मेरी तरफ से आप सबके लिए लॉक-डाउन का नायाब तोहफा!

पायल को मैं कई सालों से जानता था पर उससे कभी बात करने का मौका नहीं लगा था। तरुण और मेरी दोस्ती बहुत पुरानी है.

तरुण जयपुर का रहने वाला है। जब भी मैं जयपुर जाता तो तरुण के घर ही रुकता और तभी उसकी चचेरी बहन पायल से आँखें लड़ जाती।

आँखें तो लड़ जाती पर मैं हर बार बस तिलमिला कर रह जाता कि इतने सही माल को जाने कैसे भोग सकूंगा।

फिर एक दिन बातों के दौरान तरुण से पता चला कि पायल की शादी एक आर्मी वाले से तय हो गयी है और अगले महीने उसकी शादी है।
यह सुनकर मैं बहुत उदास हुआ और जैसे मन मार कर रह गया।

पर कर भी क्या सकते थे.
किसी ने बहुत खूब कहा है कि ‘मुँह मांगी तो मौत भी नहीं मिलती इस दुनिया में!’

कुछ महीनों बाद मुझे राजस्थान के बिज़नेस टूर पर जाना था और हमेशा की तरह मैं तरुण से मिलता हुआ ही जाने वाला था।

तरुण ने मेरा प्रोग्राम जान कर पूछा कि अगर मुझे दिक्कत ना हो तो जोधपुर में पायल के लिए कुछ सामान लेता जाऊँ।
आज तो जैसे भगवान् ने मेरी सुन ही ली थी।

तरुण को नहीं पता था कि मेरे मन में पायल को लेकर क्या भावनाएं हैं।

खैर मैंने अगले दिन सुबह उठकर तरुण से पायल का सामान लिया और अपने टूर पर आगे बढ़ गया।

मैं अपना काम निपटाता हुआ दो दिन बाद जोधपुर पंहुचा और मैंने सबसे पहले पायल को फ़ोन करके मेरे जोधपुर पहुंचने की खबर दी.
जिसे सुनकर वो बहुत खुश हुई और उसने मुझे अपने घर की गूगल लोकेशन भी भेज दी जिससे मुझे वहां पहुंचने में ज्यादा दिक्कत ना हो।

मैं शाम में ही तैयार होकर, अच्छा सा परफ्यूम लगा कर पायल के घर पहुंच गया और उसके घर की घंटी बजा दी।
शाम के कोई 7 बजे होंगे और मैं अपने तेज़ धड़कते दिल के साथ पायल के दरवाज़ा खोलने का इंतज़ार कर रहा था।

क्यूंकि पायल की शादी एक आर्मी वाले से हुई थी तो मैं उसके पति के लिए एक इम्पोर्टेड स्कॉच की बोतल भी ले गया था।

कुछ देर बाद जैसे एक हुस्न की परी ने दरवाज़ा खोला।
वो सेक्सी लड़की पायल ही थी।

दूध जैसा गोरा बदन, काली साड़ी में लिपटा ऐसे लग रहा था जैसे कोई अप्सरा धरती पर उतर आयी हो।

पायल ने अपनी साड़ी नाभि से नीचे बाँधी थी और उसकी अंडाकार नाभि मुझे आकर्षित कर रही थी।
उसके बदन से आती मदमस्त करने वाली सुगंध मेरे नथुनों से टकरा रही थी और मुझे पागल कर रही थी।

मैं उसको देखते ही मन्त्र-मुग्ध हो गया और जाने कहाँ खो गया.
कि पायल ने मुझे हिलाते हुए पूछा- यहीं खड़े रहोगे या अंदर भी आओगे?

मैं जैसे किसी निंद्रा से लौटा था और पायल के पीछे पीछे घर के अंदर चल दिया।
पायल के मटकते चूतड़ जैसे मुझसे कह रहे थे कि आओ और हमे भींच दो, रगड़ दो, चोद दो।
पर मेरे पास सिवाए आँखें गर्म करने के और कोई चारा बाकी नहीं था।

पायल मुझे ड्राइंग रूम में ले गयी और मुझे बैठने को कह कर पानी लेने रसोई की तरफ बढ़ गयी।

मैं एकटक उसको जाते हुए देखता रहा।

पायल एक ऐसे जिस्म की मालकिन थी कि एक मुर्दे को भी ज़िंदा कर दे।
अब तक मेरा छोटू भी बगावत करने लगा था पर मैंने उसको हलके से सहला कर आश्वासन दिया कि ये माल तेरी मलाई जरूर चखेगा।

थोड़ी ही देर में पायल वापस आ गयी और मुझे पानी देने लगी।
मेरी नज़र तो सिर्फ उसका हुस्न-पान करने में लगी थी।

उसका झुकना था कि मेरी नज़र उसके ब्लाउज के गहरे गले से अंदर होती हुई उसके चूचों के बीच की कोमल और गहरी नाली पर जा टिकी।

मैं पायल के जिस्म का पूरा लुत्फ़ ले रहा था।
मैंने पायल से उसके पति के बारे में पूछा तो पता चला कि अमित (पायल के पति का नाम) की पोस्टिंग राजस्थान से बाहर है और वो शादी के कुछ दिनों बाद ही वहां शिफ्ट हो गया था।

मुझे समझ आया कि ये एक प्यासी, तड़कती-फड़कती जवानी है और कुछ हो ना हो, लण्ड पाने को बेताब भी जरूर होगी।

मैंने बात आगे बढ़ाई- नयी जगह पर पूरा दिन अकेले बिताना तो बहुत मुश्किल होता होगा?
पायल- अब तो आदत पड़ गयी है। किसी भी तरह से आर्मी का हिस्सा होना बहुत गौरव की बात है पर पति-पत्नी का वियोग बहुत परेशान करता है।

राहुल- समझ सकता हूँ पर शादी के बाद कुछ समय तो नए जोड़े को साथ रहना ही चाहिए। आखिर तुम्हारे भी कुछ अरमान होंगे।

पायल मेरी बात काटते हुए- आप डिनर तो नहीं कर आए? जब आपका फ़ोन आया था तो मैं खुश हो गयी थी कि बहुत दिनों बाद आज अकेले डिनर नहीं करना पड़ेगा।
राहुल- तुम्हारे साथ डिनर जरूर करूँगा। अगर करके आया भी होता तो तुम्हारे साथ दोबारा कर लेता।

पायल मुस्कुराते हुए- ऐसी भी कोई ज़बरदस्ती नहीं है राहुल! मैं आपको राहुल बुलाऊँ तो आपको कोई दिक्कत तो नहीं?
राहुल- जो चाहो, कहकर बुला सकती हो। मैं इतना भी फॉर्मल नहीं। पहले अपना सामान तो देख लो।

पायल जैसे खुश हो गयी।
उसने उठ कर अपना सामान देखा और मेरी नज़र फिर से उसके पूरे शरीर का जैसे x-ray करने में लग गयी।

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उसकी नज़र स्कॉच की बोतल पर पड़ी तो उसने कहा- इसकी क्या जरुरत थी?
राहुल- मैंने सोचा आर्मी वाले के लिए इससे अच्छा तोहफा कुछ नहीं हो सकता तो साथ ले आया। सोचा था दो-दो पैग भी लगा लेंगे पर …
पायल- तो अब भी कोई दिक्कत नहीं, आप अपने पैग लगाओ। आपको कोई नहीं रोकेगा।

राहुल- अकेले पीने में वो मज़ा कहाँ पायल! अमित होते तो बात ही कुछ और होती। वैसे भी आर्मी वालों के साथ शराब पीने की बात ही कुछ अलग होती है।
पायल- ऐसी बात है तो आज आर्मी वाले की पत्नी के साथ एक जाम लगा लो। उतना मज़ा ना सही, कुछ कम में ही गुजारा कर लो।
राहुल- नेकी और पूछ पूछ! चलो फिर, इसी से शुरू करते हैं।

इतना कह कर मैं खड़ा होकर पायल की तरफ बढ़ा और उसको ग्लास, बर्फ, सोडा और नमकीन लाने को कहा।
पायल ने भी बिना देर किये, थोड़े ही समय में सब चीज़ों को टेबल पर लगा दिया।

मैंने सब चीज़ों को ठीक से लगाया और अपने मोबाइल पर हलके गाने चला कर थोड़ा समां बाँधने की कोशिश की।
पायल ने भी कमरे की लाइट थोड़ी कम की और एक परफेक्ट समां बना दिया।

कुछ ही देर में मेरे सपनों की परी मेरे सामने (टेबल की दूसरी तरफ), मेरे साथ शराब पीने के लिए तैयार थी।
मन में जाने कैसे कैसे ख्याल आ रहे थे।

पर यह ख्याल बहुत ज़ोर मार रहा था कि आज पायल के साथ रास जरूर रचेगा।
मन में यह ख्याल भी आ रहा था कि पायल ने शराब कब से पीनी शुरू की क्योंकि इनके खान-दान में सिवाय तरुण के कोई दारु पीना तो दूर, छूता तक नहीं।
पर जो भी हो, अभी बहुत सी बातें बाकी थी और पूरी रात भी बाकी थी।

मैंने छोटे छोटे से पैग बनाने शुरू किये और चोर निगाहों से पायल को देखता रहा।
पायल की हर सांस के साथ मैं उसके चूचों को ऊपर नीचे झूलते साफ़ देख सकता था। पायल के चूचों में शायद अचानक से वृद्धि हुई थी क्यूंकि शादी से पहले पायल के चूचे कोई 32″ के रहे होंगे जबकि अब वो 36″ या उससे भी कुछ बड़े महसूस हो रहे थे।

होने को तो ये काम अमित का भी हो सकता है पर कुछ ही महीनों में इतने बड़े होना, मेरे लिए अचम्भे की बात थी।

मैंने पैग पायल की तरफ बढ़ाते हुए उसको एक बार फिर आँखें भर कर निहारा और उसको सोडा-पानी खुद डालने को बोला।

पायल- स्कॉच पीने का मज़ा सिर्फ ‘ऑन दी रॉक्स’ आता है मुझे! आप पानी से लेंगे या सोडे से?
राहुल- मैं भी कंपनी पूरी देता हूँ पायल। आप ‘ऑन दी रॉक्स’ हैं तो हम भी आग से कम नहीं।
पायल सवालिया निगाहों से देखते हुए- तो हो जाए ‘बॉटम्स अप’?

हम दोनों ने तक़रीबन एक साथ ही पैग ख़त्म किया पर पायल ने जितना इसको एन्जॉय किया, मैं उतना नहीं कर सका।
मेरा दिमाग तो कहीं और ही चल रहा था।

इससे पहले मैं अगला पैग बनाता, पायल ने बोतल उठा ली और अगला पैग खुद बनाने लगी।
पायल जैसे इस काम में माहिर हो चुकी थी।

उसने पैग भी पूरा बनाया, मेरी तरह छोटा नहीं।
मुझे समझते देर नहीं लगी कि पायल कुछ ही महीनों में पूरी खिलाड़ी हो चुकी थी।

पर अभी मैंने बहुत कुछ जानना था और वैसे भी, किसी के साथ ज्यादा समय बिताना हो तो बातें जरूरी हो जाती हैं।
और मुझे तो पूरी रात इसके साथ ही बितानी थी दोस्तो।

मैंने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पायल से कहा- बुरा ना मानो तो कुछ जान सकता हूँ?
पायल- कहीं ये तो नहीं जानना चाहते कि मैं शराब कब से पी रही हूँ?

राहुल- ये तो बिल्कुल नहीं … पर तुमने जिक्र किया है तो अब बता भी दो।
पायल- आर्मी वालों के यहाँ जो ये सब नहीं करता उसको पिछड़ा हुआ मानते हैं। और अमित इन सब बातों को ज्यादा महत्व नहीं देते। जब भी पीते हैं तो एक पैग मेरा भी साथ ही बनाते हैं। फिर उनके जाने के बाद, समय काटने को एक-एक से शुरू हुआ और आज सब आपके सामने है। पर मेरे घर वालों को ये सब नहीं पता।

राहुल- तुम बेफिक्र रहो, मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा।
पायल- धन्यवाद।

राहुल- तुमने मेरे साथ दारु पी कर मुझे मान ही दिया है और मैं इसका पूरा सम्मान करूँगा।
पायल- आप दारु के साथ खाने में कुछ और लेंगे क्या?
राहुल- जो भी आपने डिनर में बनाया है, वही सब्ज़ी ले आइये। दारु का मज़ा और बढ़ जाएगा।

पायल ने दूसरा पैग भी झट से खींचा और उठ कर रसोई की तरफ बढ़ गयी।
मैं अपने पैग को आराम से पीता हुआ आगे की तैयारी में था कि कैसे बात बढ़ाई जाए।

बंदी तो तक़रीबन तैयार सी ही थी पर अगर मैं गलत सोच रहा हूँ तो … मेरे तो लग जाने थे।

वैसे भी अकेली बंदी के साथ … उसके घर में … और वो भी आर्मी कैंटोनमेंट में … गुरु, अगर कुछ भी उन्नीस इक्कीस हुआ तो बे-भाव की पड़ेगी।
मैं ये सब सोच ही रहा था कि पायल हाथ में सामान लिए कमरे में वापस आ गयी।

उसकी चाल में थोड़ी लहक थी और ये पक्का था कि उसको दारु चढ़ने लगी है।
तब मैंने सोचा, अगर ये एक दो पैग और लगा ले तो मेरी रात तो रंगीन हो जानी है।

मैंने थोड़ी थोड़ी सब्ज़ी कटोरी में करते हुए अगले पैग के लिए बोतल उठायी ही थी कि पायल ने अपना ग्लास खींच लिया और अगले पैग को मना करने लगी।

राहुल- ये क्या बात हुई? साथ निभाने का कह कर, बीच में ही साथ छोड़ रही हो?
पायल- मेरा हो गया। मैं इतना ही लेती हूँ।
राहुल- वो तो जब अकेली होती हो, तब ना … अमित के साथ भी बस इतनी ही लेती हो क्या?

पायल- अमित के साथ कुछ सोचना नहीं पड़ता। वो होता है तो मैं बेफिक्र होती हूँ।
राहुल- मेरे साथ भी बेफिक्र हो सकती हो। मेरे से क्या डर?

पायल- डरने की कोई बात नहीं। आप कह रहे हो तो एक-एक और हो जाए पर उसके बाद नहीं। फिर बस डिनर करेंगे।
राहुल- जैसे तुम कहो। कहोगी तो यहीं बंद करते हैं।

पायल- ठीक है … बस एक-एक और पर ये मेरा आखिरी होगा। उसके बाद नहीं। तुम पैग बनाओ, मैं अभी आती हूँ। जाने क्यूँ … गर्मी बहुत लग रही है आज!

इतना कह कर पायल अपना ग्लास मेरे तरफ बढ़ा कर उठी और चली गयी.
शायद अपने बेड रूम की तरफ।

मैंने उसके ग्लास को पहले चूमा फिर जहाँ पायल के लिपस्टिक के निशान थे, वहां चाटा और उसके बाद उसका ‘सो-कॉल्ड’ आखिरी पैग बनाने लगा।

मैंने जानबूझ कर इस बार पैग को थोड़ा और दमदार बनाया जिससे पायल को अच्छा नशा हो जाए और मैं मौके का फायदा उठा सकूँ।

कुछ ही देर में पायल के वापस आने की आहट सुन मैंने उसका पैग उसकी तरफ बढ़ाते हुए जो उसकी तरफ देखा तो जैसे मैं सपनों की दुनिया में चला गया।

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पायल अपनी साड़ी बदल कर एक भीनी और तंग नाईटी पहने मेरे सामने खड़ी थी।
रंग इसका भी काला ही था पर ये नाईटी पायल के संगेमरमर दूधिया बदन को मेरी प्यासी निगाहों से छुपाने को नाकाफी थी।

पायल की नाईटी उसके घुटनों से जरा ज्यादा ऊँची थी और उसका गला भी अच्छा बड़ा पर थोड़ा टाइट था।
इस वजह से पायल के चूचे उसकी नाईटी से बाहर को झाँक रहे थे और मुझ पर उसके हुस्न के बाण चला रहे थे।

पायल के चूचों के बीच की घाटी अब पहले जितनी खुली नहीं दिख रही थी पर मेरे को अब पहले से ज्यादा लुभा रही थी।

और नाईटी का कपड़ा कुछ ज्यादा महीन था जिसके कारण मैं थोड़ा गौर से देखने पर पायल के बदन को उस कपड़े के पार भी देख सकता था।
मेरे अंदर जैसे कई काले कुत्ते जागने लगे थे।

मैंने पायल को ‘बॉटम अप’ कहते हुए अपने पैग को झट से गटक लिया और पायल ने भी अपना पैग ख़त्म करने में कोई देर ना करते हुए खाली ग्लास को मेज पर जैसे पटक सा दिया था।

मैंने देर ना करते हुए बात आगे बढ़ाई- चलो बताओ, अमित को मिस करती हो ना बहुत?
पायल- दिन तो जैसे तैसे कट जाता है पर रात नहीं काटी जाती।

राहुल- मैं तो जब टूर पर होता हूँ, तब एक दो दिन को ही घर से निकलता हूँ। फिर भी मन नहीं लगता। कल भी रात भर बस करवटें बदलता रह।
पायल- तो आप आज यहीं रुक जाओ ना! वैसे भी हमें इतना बड़ा घर मिला हुआ है। सारे कमरे तो खाली ही हैं। मुझे तो बैडरूम और ड्राइंग के अलावा किसी कमरे में गए भी हफ़्तों हो जाते हैं।

राहुल- मुझे रुकने में कोई दिक्कत नहीं पायल … पर मुझे अकेले नींद नहीं आती। तो मैं चाहे यहाँ रुकूँ या अपने होटल में, मेरे लिए तो एक ही बात हुई ना।
पायल- ऐसा करते हैं, जब तक हो सकेगी बातें करेंगे और फिर मैं सोने अपने कमरे में चली जाउंगी। बाकी जैसा आपको ठीक लगे।

राहुल- क्यूँ ना हम दोनों आज रात इस ड्राइंग रूम में ही बिताएं। तुम दीवान पर सो जाना और मैं सोफे पर सो जाऊँगा। इसी बहाने बातें भी हो जाएंगी … मैं भी एक दो पैग और लगा लूंगा।

पायल उठ कर रसोई से रोटियां भी ले आयी और अपनी प्लेट लगाने लगी।
मैंने भी देर ना करते हुए अपनी प्लेट उठायी और भोजन परोस कर पायल के साथ की कुर्सी पर ही बैठ गया।

पायल के बदन से मदहोश करने वाली खुशबू आ रही थी पर पायल मुझसे ज्यादा मदहोश थी।
शायद शराब अपना काम बखूबी कर रही थी और नसीब भी मेरा दरवाज़ा खटखटा रहा था।

मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने अपनी जांघ को पायल की जांघ से छुआ दिया और निरंतर भोजन करने में व्यस्त रहा जिससे यह पता चले कि इसमें पायल को कोई आपत्ति तो नहीं पर पायल ने कोई आपत्ति नहीं दिखाई।

पायल को खाते खाते थोड़ी धसक सी हुई तो मैंने सीधा पायल की पीठ सहलानी शुरू की।
मैं पायल की ब्रा स्ट्रैप को महसूस कर सकता था।

एकदम पतली सी स्ट्रैप, जैसे कोई डिज़ाइनर ब्रा पहनी हो।
मेरा लण्ड तो इतना महसूस करके ही ऐसे तन गया जैसे फटने को तैयार हो।

पर मंज़िल इतनी भी आसान नहीं थी।
पायल की तरफ बढ़ता मेरा हर कदम मुझे जैसे एक विजेता सा महसूस करा रहा था।

पर इस बार मेरा खड़ा लण्ड पायल की नज़र से बच नहीं सका।

पायल ने मुझे अपनी मदहोश निगाहों से देखा और धन्यवाद देती हुई फिर भोजन करने लगी।

कुछ ही देर में हम दोनों भोजन करके टीवी के सामने बैठ गए बस फ़र्क़ इतना था कि अब हम एक दूसरे के साथ नहीं पर साइड में थे।

मैं अलग सोफे पर और वो अलग सोफे पर लेकिन बिल्कुल बराबर बराबर!
हमारे बैठने का तरीका कुछ यूँ था कि अगर मैं थोड़ा प्रयास करूँ तो आसानी से पायल की टांगों, घुटनों या जांघ को अपने हाथ या पैरों से रगड़ और छू सकता था।

अभी पायल में चेतना बाकी थी और ये मेरे लिए बिल्कुल अच्छा नहीं था।

टीवी चल रहा था और मौसम भी मदहोशी से भरा था।

मैंने एक और पैग बनाया और पायल की तरफ बढ़ा दिया।
पायल पैग को साइड टेबल पर रखती हुई- मैं इतनी भी शराबी नहीं कि एक के बाद एक पैग लगाती जाऊँ।
राहुल- तो कितनी शराबी हो, वही बता दो पायल जान … ओह! मेरा मतलब …

पायल मेरी बात काटते हुए- मैं सारे मतलब समझती हूँ राहुल।
राहुल- नहीं नहीं वो तो बस शराब के नशे में मुँह से निकल गया।
पायल- थोड़ी ही तो पी है आपने और इल्जाम सब शराब पर?

राहुल- तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे तुम्हें शराब का नशा नहीं चढ़ता.
पायल- शराब का नशा चढ़ता तो है पर मुझे तो कंपनी का नशा सुहाता है।

पायल का इतना कहना था कि मेरे पैर खुद-ब-खुद पायल की तरफ हो लिए और कुछ ही पलों में मेरे घुटने पायल के घुटनों और जाँघों को छू रहे थे।
वह भी इस बात से अनजान नहीं थी और उसकी बॉडी लैंग्वेज से पता चलता था कि उसको भी इस सब का भरपूर आनंद आ रहा है।

मैंने सिलसिला आगे बढ़ाया- तो मेरी कंपनी का नशा कैसा लगा तुम्हें?
पायल- अगर अच्छा नहीं लगा होता तो मैं आपको डिनर के बाद यहाँ रुकने नहीं देती।

अब मैंने कोई देर ना करते हुए पायल के घुटने पर हाथ रख दिया और उसको सहलाने लगा।
पायल निर्विरोध थी और मैं धीरे धीरे अपने भाव को जाहिर कर रहा था।

मैं अब सिर्फ उसके घुटनों को ही नहीं पर हल्की जाँघों को भी छूने लगा था और पायल की सांसें तेज़ होती जा रही थी।
पायल की नाईटी तो पहले ही तंग थी और जैसा आप सब जानते हैं कि बैठने पर नाईटी थोड़ी ऊँची सी हो जाती है।

नाईटी भी उसकी जाँघों को मुश्किल से ही ढक पा रही थी और फिर मैं तो आज मतवाला था ही!
अगर ढक भी रही होती तो मुझ पर क्या असर पड़ना था.

मैं पायल की अंदरूनी जाँघों तक पहुंच चुका था और पायल अपनी आँखें बंद किये गहरी सांसें ले रही थी।
पायल की छाती ऊँची – नीची होती देख मुझमें जोश बढ़ता जा रहा था।
वह शराब के नशे में मदहोश थी या मेरे नशे में … यह कहना तो मुश्किल था पर मैं पायल के नशे में पूरा मदहोश था और इसका पता हम दोनों को ही था।

अगले भाग में आप पढ़ेंगे कि पायल ने मुझे उसके पास आने की कितनी छूट दी.
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कहानी का अगला भाग: दोस्त की बहन के साथ बितायी एक रात- 2

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