दोस्त के साथ मिल कर हाईफाई औरत की चूत गांड की चुदाई की-1

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नमस्कार दोस्तो, आपके दोस्त रवि का आपको तहे दिल से नमस्कार!
जो दोस्त मेरी कहानियाँ पढ़कर मुझे ईमेल करते हैं उन सभी का भी धन्यवाद और अन्तर्वासना का भी धन्यवाद, जिसकी वजह से मेरी कहानियाँ आप लोगों तक पहुँच रही हैं।

मेरी इस कहानी में मैं अंकुर का स्पेशल धन्यवाद दूंगा, जिसने बिना किसी अवरोध के अपना नाम छपने की अनुमति दी और सारिका और हमारी चुदाई की पूरी कहानी आप तक पहुँच पाई।

दोस्तो, यह कहानी है मेरी दोस्त सारिका की, सारिका जो दूधिया जिस्म की मालकिन है, उसकी एकदम सुडौल छातियां हैं और वो कसरत करके अपने आपको एकदम फिट रखने वाली पूरी हाईफाई मॉडल औरत है।
वो है तो शादीशुदा, परन्तु उसका पति विदेश में रहता है और इस वजह से वो साल में एक दो बार ही आ पाता है।

सारिका आजकल के नए विचारों वाली औरत है, मेरी अन्तर्वासना कहानियों की दीवानी है, वो अक्सर मुझसे हर तरह की बातें करती रहती है।

मेरी वाइफ ने पंद्रह दिनों के लिए मायके जाना था क्योंकि उसके भाई की शादी थी, मैंने तो शादी वाले दिन ही जाना था।
तो उसने मेरे पास आने का प्रोग्राम बना लिया, मैंने अपनी बीवी को सारिका के आने के बारे में बता दिया था।

वो बताए समय के अनुसार आई और मैंने उसे स्टेशन से पिक किया और अपने पास ले आया।

उस वक्त उसने सिंपल सलवार कमीज़ पहना था, पंजाबी सूट में भी वो खूब जंच रही थी।
स्टेशन से घर तक के पूरे रास्ते हम दोनों घर की घरेलू बातें करते हुए ही आए।

घर आकर मैंने उसे चाय बना कर दी।
फिर उसने कहा- सबसे पहले मैं नहाना चाहती हूँ।
मैंने उसे टॉवल दिया और वाशरूम दिखाया, तब तक मैंने कप वगैरह रख दिए, बाहर मेन गेट को अन्दर से लॉक कर दिया।

अब जैसे ही वो नहा कर बाहर आई.. तो मेरी आँखें चुंधिया गईं.. क्या गजब ढा रही थी। उसने अपना सूट बदल लिया था और वो मस्त पटाखा माल लग रही थी।

मैंने उसे जैसे ही देखा तो सीधा उसके पास जाकर कमेन्ट मारा- डियर, बड़ी मस्त लग रही हो..
तो उसने कहा- थैंक्स डियर..

साथ ही उसने मुस्कुराते हुए अपने होंठों को मेरी तरफ करते हुए भींचा। मैंने भी बिना मौका गंवाए उसके होंठों को अपने होंठों में ले लिया, उसने भी बहुत उत्साहित होकर मेरे होंठों का चुम्बन ले लिया।

तभी मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरा, फिर उसकी गांड थपथपा कर बोला- वाओ जान, बहुत मस्त सम्भाल कर रखी है ये!
उसने भी गांड मटका कर कहा- क्यों रखनी नहीं चाहिए क्या, साले इसी गांड को देखकर एक से एक हरामी लौंडों का सड़क पर चलते देखकर ही पानी छूट जाता है।

मैंने देखा वो थोड़ा उत्तेजित होने लगी थी, मैंने भी अपना हाथ उसके जिस्म पर फिराना चालू रखा।
तभी मैंने कहा- साली.. पता तो तभी चलेगा.. जब आज मेरे लौड़े का पानी इस पर छूटेगा।
इसी के साथ ही मैंने एक सिसकारी ली तो उसने फिर गांड मटका कर कहा- डार्लिंग, ये तो रेडी है, अब ये तो तुम्हारी हिम्मत है मेरे राजा कि कितना मजा लेते और देते हो?

तो मैंने उसको पकड़ा और एक साथ काफी चुम्बन उसके गालों और होंठों पर कर दिए और साथ ही मम्मों को दबा दिया।

फिर तो हम अपने अन्दर से उठ रही वासना की तरंगों में बहते चले गए, हम दोनों वासना के सागर में गोते लगा रहे थे।
मैंने उसे चूमते हुए कहा- साली चिकनी.. बोल, आज कितना बेशर्म कर दूँ अपनी रानी को!
सारिका अपनी सलवार को खोलती हुई बोली- जितना कर सको राजा.. मैं रेडी हूँ।
मैंने उसका एक चूचा दबोचते हुए कहा- सोच ले बहन की लौड़ी.. कहीं ‘बस..’ न हो जाए!

अब तक वो अपनी सलवार उतार चुकी थी। वो सिर्फ अपनी पेंटी और ब्रा में ही, मेरे होंठों को होंठ मिलाते हुए बोली- मेरी ‘बस..’ तो नहीं होती, तुम अपना सोचो राजा!

मैंने सारिका के एक मम्मे को ब्रा के ऊपर से दबाते हुए उसके होंठ को चूमते हुए कहा- मादरचोद, आज तुम्हारी जवानी की माँ चुदेगी, आज की तुम्हारी बेहतर परफार्मेंस बताएगी कि तुम मेरे साथ कितनी देर तक चल सकती हो जानेमन!

यह कहते हुए मैंने एक-साथ दो-तीन चुम्बन उसके होंठों के ले लिए। उसके बाद तो हम दोनों की वासना की आग धधक चुकी थी।
मैंने सारिका के बदन के ऊपर हाथ फिराया और फिर उसकी गांड पर जाकर मेरा हाथ अटक गया।

मैंने सारिका की गांड को पेंटी के ऊपर से ही थोड़ा सहलाया और फिर उसकी गांड को थपथपा कर बोला- साली.. रांड की गांड तो बहुत मस्त लगती है.. बाकी खेल शुरू होने पर पता चलेगा कि मेरी जान कहाँ तक खेल पाती है।

इसके साथ ही मैंने सारिका के होंठों को फिर अपने होंठों में ले लिया और इस बार मैंने सारिका के होंठों को करीब दो तीन मिनट तक लगातार चूसा, जिससे सारिका मस्त हो उठी।

चुदासी और गर्म तो सारिका मेरी बातों से ही हो गई थी, क्योंकि मैं जानता था कि सारिका को मेरे साथ ऐसी अश्लील भाषा में बातें करना ज्यादा मस्त लगता है।

वो अक्सर जब भी मुझसे फोन पर बात करती थी, तो मुझे ज्यादा से ज्यादा अश्लील बातें और गालियाँ भरे अंदाज़ से बातें करने को कहती थी।

वैसे सारिका ने मुझे आने से पहले भी बोला था- मैं आ तो रही हूँ, लेकिन मुझे कहीं नार्मल चुदाई.. जैसे आम लोग करते हैं, करके ही वापिस मत भेज देना, मैं आपसे कुछ ख़ास चाहती हूँ।

मैंने भी अपनी तरफ से उसकी हर यौन इच्छा पूरी करने का वचन दिया था। अब वो वक्त आ चुका था कि मैं सारिका को दिया हुआ वचन निभा दूँ। मुझे मालूम था कि ये वादा निभाना इतना आसान नहीं है.. जितना सोचा जा सकता है। परन्तु फिर भी मैंने उस वायदे को निभाने के लिए हर इंतजाम सारिका के आने से पहले ही कर दिया था।
क्योंकि सारिका मेरे पास एक सप्ताह के लिए थी, इसलिए ये वायदा मैं आसानी से निभा सकता था।

आज तो सिर्फ उसकी जवानी को परखने का दिन था, उसको असली सुख तो मुझे उसको अगले दिन देना था।

रसभरे होंठों की चुसाई के बाद सारिका ने खुद ही मचलते हुए कह दिया- उफ्फ… रवि.. अपनी सारिका को तो नंगी कर दिया, परन्तु मेरी जान खुद भी थोड़ा हल्के हो जाओ न?

उसके इतना कहने की ही देर थी कि मैंने अपनी लोअर और टी-शर्ट उतार दी और सिर्फ अंडरवियर और बनियान में आ गया।
हम दोनों के जिस्म पर बस हमारे अंदरुनी वस्त्रों के अलावा कुछ नहीं बचा था।

मैंने अपना लंड सहलाते हुए कहा- ले साली, लगता है आज तो मुकाबला बराबर का है मेरी रानी!

हम दोनों ऐसे एक-दूसरे के सामने खड़े थे, जैसे दो पहलवान कुश्ती लड़ने से पहले एक-दूसरे के सामने रैफरी के इशारे के इंतज़ार में खड़े होते हैं।

मैंने भी अपने मन में ठान लिया था कि जो मर्जी हो जाए.. आज साली रांड जहाँ तक जाती है जाने दूंगा और इसकी हद कहाँ तक है, ये पता करके रहूँगा। फिर आने वाले दिनों के लिए मुझे इसका पता लगाना भी बहुत जरूरी था।

मैंने ब्रा पेंटी में खड़ी सारिका के शरीर का मुआयना किया.. साली का बदन भी का पूरा सुडौल था। एकदम गदरायी जवानी, दूधिया जिस्म, कसे हुए मम्मे और गोल उठी हुई गांड, पीछे से बाहर को निकले हुए चूतड़… पट्ठी की जवानी पूरी कयामत ढा रही थी।

मैंने धीरे धीरे अपने जिस्म को सारिका के जिस्म से भिड़ा दिया.. और सारिका के मम्मों को अपनी छाती से मिला दिया। अब मैंने अपने दोनों हाथ उसके आजू-बाजू से ले जाकर पीछे से सारिका की ब्रा की हुक को खोल दिया। फिर वैसे ही धीरे-धीरे ही अपने जिस्म को सारिका की छाती से पीछे हटा लिया।

जैसे मैंने सारिका की छाती से अपनी छाती को अलग किया.. तो सारिका के मम्मों पर बंधी हुई ब्रा.. चीने कबूतर की तरह नीचे गिर गई और सामने रह गए सारिका के दो नंगे दूधिया मम्मे!

वाओ.. क्या मम्मे थे.. एकदम शेप्ड और कसे हुए मम्मे और उसकी उन्नत छातियों के बीच की गहरी खाई.. मानो दो पर्वतों के बीच की घाटी हो। उसके मम्मों के ऊपर की मोटे-मोटे कड़क निप्पल बिल्कुल लाल रंग के थे। उसके इन मदमस्त निप्पलों को देख कर तो कोई नामर्द ही चूसने से रुक सकता था।

अब सारिका मेरे सामने सिर्फ पेंटी में खड़ी अपने निचले होंठ को अपने दांतों से काट रही थी।
मैंने उसका ये सीन देखकर कहा- ले मेरी रानी.. अगर होंठ ही काटना है तो ये ले.. काट न..

ये कह कर अपना निचला होंठ उसके होंठों में दे दिया। उसने भी वैसा ही किया.. साली ने मेरे होंठ में अपने दांत गड़ा दिए। उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे थोड़ा दर्द तो हुआ परन्तु आज तो मैंने अभी बहुत कुछ करना था इसलिए मैंने उसे सब करने दिया।

मैं अब साथ साथ उसके मम्मों पर हाथ फिराने लगा और उसके मम्मों और चूचियों को सहलाने लगा था। मेरे सहलाने से उसके मम्मों का आकार थोड़ा और बढ़ गया था।

अब मैं उसके होंठ चूस रहा था और वो मेरे होंठों से और मम्मों के सहलाने से कुछ अधिक उत्तेजित और हो गई थी।

साथियो, इस घटना को लिखते हुए मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया है, मैं बस अभी मुठ मारके आता हूँ, तब तक आप मुझे मेल लिखिए।

सारिका की जवानी का जलजला हिंदी सेक्स स्टोरी के अगले भाग में लिखता हूँ।
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