दूध वाले को दुद्दू दिखा कर चुदवाया

उसे घूरता देख मैंने उसे यूं ही हल्का सा डांट कर पूछा- क्यों बे बैठा क्यों है?
वो बोला- मैडम जी क्या बताऊँ, सुबह सुबह इतना काम करना पड़ता है, मैं थक गया, इस लिए बैठ गया।
मगर उसका ध्यान पूरा मेरी चूत की तरफ ही था। मुझे पता था कि वो देख रहा था और मैं भी बेशर्मों की तरह खड़ी उसे दिखा रही थी।

मैंने उसे पूछा- पढ़ता है? स्कूल कॉलेज जाता है?
वो बोला- जी प्लस टू की है, अब तो पिताजी के साथ ही काम करूंगा।

उसके बाद उसने बड़ी हसरत से एक और नज़र मेरी टी शर्ट के नीचे मेरी चूत पर मारी और अपना केन उठा कर चल पड़ा। मैं दरवाजे में खड़ी उसे जाते देखती रही, फिर वापिस अंदर को मुड़ी। बड़े शीशे के सामने पहुँच कर मैंने पाँव के बल बैठ कर देखा।
‘हे भगवान!’ मैं चौंक पड़ी, अगर मैं ऐसे बैठ जाती तो वो मेरी पूरी चूत के खुले दर्शन, दीदार कर लेता। फिर मन में विचार आया, क्या हो अगर मैं उसे अपने खुले दीदार करवा दूँ!
फिर सोचा ‘नहीं यार, अभी छोटा है, नई नई जवानी आई है, पता नहीं हुस्न की यह बाढ़ वो संभाल भी पाएगा या नहीं!’

मगर इतना ज़रूर था कि मेरा मन उस लड़के पर पूरी तरह से बेईमान हो चुका था। कुछ कुछ था, जो मेरे मन की हांडी में पक रहा था। मैं अभी तक यह फैसला नहीं कर पाई थी कि मैं उस लड़के से आगे बात बढ़ाऊँ, या नहीं। अगर बात आगे बढ़ी तो पक्का है मुझे उससे सेक्स तो करना ही पड़ेगा, अब जब उसे अपने जवान और गदराए हुये जिस्म के जलवे दिखा रही हूँ, तो चाहेगा तो वो भी के मैं उसके नीचे लेटूँ। और वैसे भी वो कोई बहुत सुंदर या आकर्षक नहीं था, फिर भी न जाने क्यों उसे गंवार पर मेरा मन मेहरबान हुआ जा रहा था।

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अगली रात हम दोनों मियां बीवी ने सेक्स किया, तो रात को तो हम दोनों बिल्कुल नंगे ही सो गए।

सुबह बेल बजी तो मैं उठी, पहले एक बार सोचा कि ऐसे ही चली जाऊँ, मगर अगर वो भी आगे बढ़ा और मुझे सेक्स के लिए मजबूर किया, तो?
अभी तो मेरे पति भी घर पर हैं, अभी तो कुछ भी करना खतरे से खाली नहीं है तो मैंने वार्डरोब से अपना एक सटिन का पीले रंग का गाउन निकाला जो मेरे घुटनों से थोड़ा ऊपर तक था और सामने से खुलता था, उसे सटिन की ही एक बेल्ट से गांठ बांध कर बंद करना पड़ता था।

मैंने बेल्ट की गांठ तो बांधी मगर बहुत ही ढीली सी… जिससे मेरा गला तो पूरा खुला हुआ दिख रहा था, बेल्ट के लगे होने की वजह से मेरी चूत ज़रूर ढकी हुई थी। मैं बर्तन लेकर आई, तो उसने पहले मेरे पूरे जिस्म को घूरा फिर बोला- नमस्ते मैडम जी।
मैंने भी उसे नमस्ते का जवाब दिया।

फिर वो बोला- मैडम जी, आज रात को हमारे पड़ोस में जगराता है, तो कल दूध थोड़ा लेट देने आऊँ तो चलेगा?
मैंने पूछा- कितना लेट?
वो बोला- जी सुबह 9 बजे तक।
मैंने कहा- ठीक है, 9 बजे दे जाना।

कह कर मैं दूध लेकर अंदर आ गई। फिर किचन में जा कर मुझे खयाल आया- अरे नौ बजे तो ये भी काम पे चले जाते हैं, क्या कल को मैं कुछ करने वाली हूँ। पहले तो यह सोचने लगी कि अगर मैंने उसे लिफ्ट दी, तो वो क्या करेगा। फिर सोचा, देखते हैं, अगर कोई बात बनी तो ठीक, नहीं तो रहने दूँगी। मतलब पक्का मैंने कुछ भी नहीं किया, बस सब कल पर ही छोड़ दिया।

अगले दिन सुबह उसने आना नहीं था तो मैं देर तक सोती रही। उस दिन जॉगिंग भी मिस कर दी। सुबह सात बजे उठी और उठ कर अपने पति को नाश्ता और लंच देकर काम पे भेजा।

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उनके जाने के बाद सोचा के चलो मैं भी नहा लूँ। मैंने अपने लिए वार्डरोब से काले रंग की प्रिंटेड माइक्रो पेंटी और ब्रा निकाली। पेंटी क्या थी, सिर्फ आगे थोड़ा सा कपड़ा था, बाकी तो एक उंगली जितनी बारीक बेल्ट सी थी, जो पूरी कमर पर घूमती थी और वही बारीक से बेल्ट नीचे चूतड़ों में घुस जाती थी और ब्रा जो वो जालीदार थी, उसमें से तो मेरे मम्मे बिल्कुल साफ दिख रहे थे।

मैं अभी नहा ही रही थी कि डोर बेल बजी। मुझे लगा ‘अरे लो, अभी तो मैं नहाई भी नहीं और ये आ भी गया।’
मैंने जल्दी से बदन पर पड़ा पानी पौंछा और अंदर से ही पूछा- कौन?
वो बाहर से बोला- मैडम जी मैं हूँ, दूध लाया हूँ।

रिमोट से मैंने अपना इलैक्ट्रिकल लॉक वाला दरवाजा खोला तो वो दूध का केन लेकर अंदर आ गया। मैंने बाथरूम से ही उसे कह दिया कि दूध किचन में फ्रिज में रख दे। मैं अभी अपनी ब्रा पेंटी पहन रही थी कि मुझे पहले फ्रिज का दरवाजा बंद होने और फिर बाहर का मेन गेट बंद होने की आवाज़ सुनाई दी।

मैंने सोचा- लो, वो तो गया, और मैं खामख्वाह सेक्सी लौंजरी पहन रही थी।

बाथरूम से बाहर आकर मैंने अपने बाल सँवारे और फिर ब्रा पेंटी में ही किचन में गई। मैंने फ्रिज खोल कर देखा, दूध का बर्तन फ्रिज में पड़ा था। मैंने अपने लिए नाश्ता बनाने के लिए फ्रिज से जूस निकाला और ब्रैड के स्लाइस पॉप अप टोस्टर में डाले।
अभी मैं ये काम कर ही रही थी कि पीछे से आवाज़ आई- मैडम जी?
मैं तो एकदम से चौंक पड़ी।

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