दोबारा दोस्त की बहन को चोदा

दोस्तो, कैसे हो आप सब!
मैं संजय एक बार फिर आप सबके लिए एक और मजेदार कहानी लेकर आया हूं. उम्मीद करता हूं कि आप सब को पसंद आएगी.

यह कहानी आज से पांच साल पहले की है जब मैं अपने दोस्त के घर पर रहता था. मेरा दोस्त जमींदार था और प्रॉपर्टी का कम करता था तो तो वह ज्यादातर घर से बाहर ही रहता था. मेरे दोस्त की शादी अभी नहीं हुई थी तो हम साथ साथ ही रहते थे.

मेरे दोस्त का नाम राज है. राज के माता पिता भाई सब गुजर गए. एक ऐसी विपत्ति आई जिसमें सब ख़त्म हो गए. बचे तो सिर्फ तीन लोग राज, उसकी भाभी जो अपने मायके ही रहती है, और तीसरी उसकी बहन उषा!

उषा की शादी हो गई थी पर उसका पति उसे छोड़ कर कहीं चला गया. वो अपने ससुराल ही रहती है. कभी कभी अपने भाई राज के घर आ जाती है जब उसे पैसे चाहिए होते हैं.
दिखने में उषा कोई खास नहीं है लेकिन फिगर मस्त है. मैं उसे पहले भी चोद चुका हूं. मस्त पटाखा है; मजे से चुदवाती है, भरपूर साथ देती है. वो कहानी यहाँ पढ़ें: दोस्त की बहन को चोदा

लेकिन अभी दो ढाई महीने से हमारी मुलाकात नहीं हुई थी. हमारे घर के बगल में कई और परिवार रहते हैं. हमारे घर के सामने वाले घर में एक परिवार है, उसमें तीन लोग रहते हैं, अंकल आंटी और उनकी 19 साल की एक बेटी जिसको मैं चोदना चाहता था.

उसका नाम प्रीति है. प्रीति का फिगर बहुत मस्त है 34-32-34 का … कभी कभी मैं उसे देखता ही रह जाता था और वो अपने घर में चली जाती.

राज की बहन जब आती थी तो उससे बहुत बात करती थी, दोनों साथ ही टाईम बिताती थी.
लेकिन मैं ऑफिस 8 बजे ही निकल जाता था और 8 बजे रात में आता था. ऑफिस आते जाते कभी कभी प्रीति और मेरा आँख मटक्का हो जाता था लेकिन ये मालूम नहीं पड़ पा रहा था कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है.

एक दिन मैं ऑफिस नहीं गया. राज सुबह सुबह कहीं वसूली में निकल गया.

मैं सो रहा था, तभी दरवाजे पर ठक ठक की आवाज आई. जब दरवाजा खोला तो उषा खड़ी थी.

दरवाजा खुलते ही वो अंदर आ गई और सोफ़े पर बैठ गई. मैं उसे अचानक देख कर हैरान सा रह गया और दरवाजा बंद कर दिया.
मैंने कहा- लगता है पैसा ख़त्म हो गया है.

तो उसने मेरे से चिपक कर कहा- पैसे के लिए तो आई ही हूँ … लेकिन कुछ और भी चाहिए. आज एक राउंड हो जाए?
मैंने सोचा कि पहले एक बार राज से बात कर लेता हूं कि कहां है. नहीं तो चोदते समय आ गया तो मुश्किल हो जाएगी.

मैंने तुरंत राज को फोन करके पूछा- राज, तू कहाँ है?
राज बोला- वसूली में 2 घंटे तक लग जाएंगे.
मैंने कहा- उषा आई है.

तो राज समझ गया कि पैसे के लिए आई है, राज ने कहा- उषा को बोलो जो कपड़े पड़े हैं उसे धो दे, तब तक मैं आता हूं.
मैंने कहा- ठीक है.
मैं राज को सुनाने के लिए जोर से बोला- उषा कपड़ों को धो दो, राज 2 घंटे में आएगा.

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उषा बोली- मैं प्रीति से मिल कर आती हूं.
मैंने रोक दिया और बांहों में भर लिया उसके चूचों को दबाने लगा. उषा मदहोश होने लगी. मैंने उषा के होंटों पे अपने होंट रख दिए. उषा की सलवार में हाथ डाल दिया मैंने और चुत में उंगली करने लगा.

एक हाथ से मैं उसकी चूची को दबाने लगा. उषा की मादक सिसकारियाँ निकलने लगी. मैं उषा को बांहों में उठा कर अंदर के कमरे में ले गया और पलंग पर लिटा दिया.

उसकी शर्ट ऊपर करके मैंने उसकी चूची को अपने मुंह में भर लिया.
“आह उनन आह हूंऊऊऊ संज अ अ य … तड़पाओ मत … डाल दो मेरी चूत में! अब बर्दाश्त नहीं होता! चोद दो मुझे!” उषा बोली.

मैंने झट से उषा के कपड़े निकाले और सलवार भी निकाल दी. उषा ने लाल रंग की ब्रा और काले रंग की चड्डी पहन रखी थी. उषा ने मेरे शर्ट को जल्दी से उतारने लगी और मैंने अपनी पैंट उतारी. उषा ने झट से मेरे लंड को अपने मुख में ले लिया और चूसने लगी.

Dost Ki Behan ko Choda
Dost Ki Behan ko Choda

दोस्तो, जब एक औरत एक मर्द का लंड अपने मुख में लेती है तो आदमी सातवें आसमान पे होता है. यह वही आदमी जानता है जिसको यह परमसुख मिलता है.

मैंने झट से उषा की पेंटी और ब्रा उतार दिया और हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए. मैं उसकी चूत को चूमने, चूसने लगा.

तभी उषा ने कहा- संजय अब तड़पाओ मत … चोद दो मुझे!

उसके इतना कहते ही मैंने उसकी चूत में लंड ठूँस दिया और उसके होठों को अपने होंटों से दबा दिया ताकि आवाज बाहर ना निकल सके.
उषा की आँखों से आंसू बहने लगे, उषा छटपटाने लगी. उसकी चुदाई कभी कभी ही होती है तो उसकी चूत कसी ही रहती है और हर बार उसे चुदाई करवाते हुए दर्द होता है.

मेरा 7 इंच का लंड उषा की चूत में घुस चुका था. जब मैंने उसके मुँह से अपना मुँह हटाया तो वो चिल्लाई- ओह्ह माँ … हाय रे … मार डाला! अं अं ओह … मेरी चूत को फाड़ दिया रे ने … तेरा लंड है या सरिया?
मैंने अपना लंड अब धीरे धीरे उसकी चूत में हिलाना चालू रखा. धीरे धीरे उषा को भी मजा आने लगा.

मैं उषा को चोदे जा रहा था.
अब उषा ने कहा- संजय, जोर जोर से चोद … फाड़ कर रख दे मेरी कमीनी चूत को!

मैंने अपनी रफ्तार इतनी तेज कर दी कि आठ दस झटकों में मेरा सारा माल पानी उषा की चूत के अंदर गिर गया.
नंगी उषा बेसुध होकर मेरी नीचे पड़ी थी.

तभी दरवाजे पर ठक ठक की आवाज आई. मैंने उषा को बोला- उषा तुम जल्दी से बाथरूम में जाओ, नहीं तो फंस जाएंगे.
जल्दी से उषा बाथरूम में भागी. उससे चला नहीं जा रहा था.

मैंने भी जल्दी से अपने कपड़े पहने और दरवाजे की तरफ गया.
दरवाजा खोला तो देखा कि प्रीति खड़ी थी.
तभी प्रीति ने कहा- दीदी आई है क्या?
मैंने कहा- हाँ!
तो प्रीति ने कहा- दीदी की चप्पल बाहर देखी तो मैंने सोचा कि मैं दीदी से मिल लेती हूं.

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प्रीति झट से अंदर आ गई. मैं बाहर ही था और प्रीति पे नजर बनाए था.

तभी प्रीति का पैर किसी चिपचिपे चीज़ पे पड़ा. प्रीति ने जब देखा तो वो कुछ गाढ़ा गाढ़ा था.

प्रीति इतनी नासमझ तो नहीं थी … प्रीति को समझ आ गया था कि उषा दीदी को संजय ने चोद दिया है. उसकी चूत से सारा वीर्य गिरता हुआ गया है.
तभी प्रीति ने आवाज दी- दीदी कहां हो?

उषा ने तब तक अपने कपड़े पहन लिए थे. उषा बोली- प्रीति, मैं कपड़े धो रही हूं, अभी आती हूं.

जब मैं अंदर आया तो देखा कि उषा की चूत से सारा वीर्य टपकते हुए गिरा था. जिधर से उषा गई थी, उधर उधर वीर्य नीचे गिरा था.
प्रीति ने पूछा- ये क्या है?

मैं डर गया कि क्या करूं … क्या बोलूं.

तब तक उषा बाहर आ गई. मेरी सांस में सांस आई.

उषा को देख कर प्रीति ने उषा से कहा- मुझे मालूम है कि यहाँ क्या हुआ है.
यह बात सुन कर उषा घबरा गई और बोली- प्रीति तू मेरी अच्छी सहेली है.

मैं बाहर आ गया और बाहर से सारी बातें सुन रहा था.

उषा बोली- प्रीति, जीवन में औरत को जब पूरा प्यार नहीं मिलता तो किसी ना किसी से प्यार पाने की इक्षा मन में जाग जाती है.
प्रीति बोली- ये तो है दीदी!

उषा बोली- मुझे मालूम है कि तेरा भी मन करता है चुदवाने का!
प्रीति उषा का मुंह देखती रह गई कि उषा क्या बोल रही है.

“प्रीति, तूने कभी चूदवाया है या नहीं?”
“नहीं उषा दीदी, मैंने कभी ऐसा काम नहीं किया है; मुझे डर लगता है!”
उषा बोली- डर किस बात का?
“दीदी, कहीं बच्चा ठहर गया तो क्या होगा?”
“ध्यान से करो तो कुछ नहीं होगा. और फिर आजकल तो करने के बाद भी गोली खा लो ठीक रहता है.”
“हाँ दीदी, सुना तो मैंने भी है … मन तो मेरा भी करता है लेकिन …”

तभी मैं भी अंदर आ गया और उन दोनों के साथ बैठ गया.
मैंने प्रीति को कहा- प्रीति, बहुत दिनों से तुमको पाने की लालसा थी. अब मेरी इच्छा पूरी हो जाएगी.

प्रीति शर्म के मारे भाग गई.
मैंने रोका भी लेकिन वो नहीं रुकी!

मैंने उषा को कहा- तुम्हारी चूत से मेरा वीर्य गिरता हुआ गया था. प्रीति के पैर में लग गया तो प्रीति सब समझ गई कि मैंने तुम्हें चोद दिया.

उषा ने हंस कर कहा- तो एक राउंड और हो जाए?
मैंने कहा- राज बस आता होगा, तुम कपड़े जल्दी से धो लो.

उषा सारा वीर्य साफ कर के कपड़े धोने चली गई और मैं दरवाजा बंद कर के सो गया.
कुछ देर बाद राज आ गया.

तो दोस्तो, यह थी मेरी कहानी! आगे की स्टोरी में जल्दी लेके आप लोगों के पास हाजिर होऊँगा कि प्रीति की चुदाई मैंने कैसे की. और प्रीति उसके बाद मेरे लंड की गुलाम बन गई.

तब तक के लिए धन्यवाद
आपका सेवादार संजय
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